कविता

दुनिया भर के बच्चे, मां और भाषाएं

—–विनय कुमार विनायकएक जैसे होते दुनिया भर के बच्चे!एक ही बाल-सुलभ हंसी-रुदन-कौतुकबच्चे चाहे हों अमेरिकी/अफगानी/तालिबानी/ब्रितानी/ईरानी/पाकिस्तानीभारतीय…