कविता जीवन December 24, 2021 / December 24, 2021 by प्रभात पाण्डेय | Leave a Comment जीवन छेत्र है कर्म युद्ध कानयन के सैन को उच्चार देता हैजीवन सुगन्ध है पुष्प हजारों कीउम्र के आवेग को पहल देता हैजीवन भजन है ,जीवन है पूजाउठ रहे उच्छ्वास को तरह देता हैप्रतिपल सुनहरे स्वप्न बुनता है येकुलमुलाती कल्पना को छन्द देता हैचलता सतत न थकता रुकताअव्यक्त भावना को शब्द देता है।।इतफाकों का अजीब […] Read more » जीवन
कविता भले ही तुम कड़वे नीम प्रिय December 23, 2021 / December 23, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment भले ही तुम कड़वे नीम प्रिय,गर्मी में देते हो ठंडी छांव प्रिय।मै भोली भाली ऐसी अबला हूं,मीठी निबोली खाती हूं प्राण प्रिए। मैं तेरी छांव में जीवन बिता दूंगी,अपना सब कुछ तुम पे लुटा दूंगी।एक बार तुम मुझको अपना लो,सातों जन्म तेरे साथ निभा दूंगी।। तुम मीठे फल देने वाले तरु मेरे,जीवन भर आश्रय देने […] Read more » even if you love bitter neem भले ही तुम कड़वे नीम प्रिय
कविता सच में ये मिट्टी का तन December 20, 2021 / December 20, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकसच में ये मिट्टी का तन,जिसमें समाहित है समीर,क्षिति,जल,पावक व गगन! सचमुच ये माटी का तन,धरातल का है ये सम्बन्ध,धरा का आकर्षण-विकर्षण! मिट्टी का ये अद्भुत तन,जिसमें जल अग्नि मिश्रण,वायु व आकाश का संगम! रात्रि में जब सूर्यातप कम,क्षैतिज हो सो जाता वदन,अग्नि लौ से उदग्र जीवन! सच में ये मिट्टी का तन,चाहे […] Read more » सच में ये मिट्टी का तन
कविता यह कथा है सावित्री सत्यवान व यम की December 19, 2021 / December 19, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकयह कथा है सावित्री सत्यवान व यम की,प्रकृति, पुरुष और संयम, नियम ब्रह्म की,आयु क्षमता निर्भर प्रकृति ऊपर पुरुष की,प्रकृति चाहे तो बदल देती नियम यम की! यह कथा है भारतीय नारी की आस्था की,नारी है प्रकृति छाया औ माया परब्रह्म की,नारी होती उमा रमा ब्रह्माणी की प्रतिमूर्ति,नारी को शक्ति है यम नियम […] Read more » This is the story of Savitri Satyavan and Yama. कथा सावित्री सत्यवान व यम की
कविता चलो अब गांवो की ओर December 19, 2021 / December 19, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चलो अब गांवो की ओर,बढ़ रहा है शहरों में शोर।प्रदूषण भी यहां बढ़ रहा,जीना दूभर यहां हो रहा।। चिमनियां धुआं उगल रही है,मानवता को वे निगल रही है।सांसों का कर रही है वे संहार,मानव पर कर रही है वे प्रहार।बचेगा नही यहां अब कुछ और,चलो अब गांवो की ओर……. आबादी शहरो में खूब बढ़ रही […] Read more » let's go to the villages now चलो अब गांवो की ओर
कविता यक्ष युधिष्ठिर प्रश्नोत्तर एक पिता का अपने पुत्र के ज्ञान की परीक्षा है December 17, 2021 / December 17, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकधर्माचरण किए बिना धरती पर कोई नहीं जीता,धर्म विरुद्ध आचरण से इंसा जीवित नहीं रहता,धर्माचरण बिना प्रकृति से एक तृण नहीं हिलता,धर्मवत जिए बिना अंजलिभर जल नहीं मिलता! अर्जुन भीम सा बलशाली योद्धा मृतवत हो गए,मनुज धर्म नहीं धमकाने का स्वधर्म को समझो,समस्त सृष्टि को गर्भ में जो धारण कर चलती,उस मां से […] Read more » Yaksha Yudhishthira
कविता यम नचिकेता संवाद से सुलझी मृत्यु गुत्थी आत्मा की स्थिति December 13, 2021 / December 13, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकयम और नचिकेता वाजश्रवष् संवाद है तबकी,जब तैत्तिरीय आरण्यक कथा कृष्ण यजुर्वेद केकठोपनिषद में आकर हुई थी संपूर्ण विकसित! यह कथा है तबकी जब ब्राह्मण यजमान होतेस्वयं हेतु यज्ञ करते थे, क्षत्रिय सा दान देते थे,ब्राह्मण वैश्य सा धनिक वणिक हुआ करते थे! तब ‘एक गरीब ब्राह्मण’ लोकोक्ति नहीं बनी थी,सभी ब्रह्मा के […] Read more » Death mystery solved by Yama Nachiketa dialogue यम नचिकेता संवाद सुलझी मृत्यु गुत्थी आत्मा की स्थिति
कविता ज़िन्दगी की कुछ सच्चाईयां December 12, 2021 / December 12, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मुश्किल नही कुछ इस दुनिया में,तू जरा सी हिम्मत तो कर।तेरे ख़्वाब बदलेगे हकीकत में,तू जरा सी कोशिश तो कर।। अगर कर नही सकता भलाई,बुराई तो तू किसी की न कर।देख रहा है सब ऊपर वाला,कम से कम उससे तो तू डर।। कोशिश करने से मुश्किल काम,बेहद आसान हो जाते है।अरमान है जो तेरे दिल […] Read more » some facts of life
कविता सृष्टि के आरंभ में न सत था न असत था December 11, 2021 / December 11, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकऋग्वेद का कथन है सृष्टि के आरंभ मेंन सत था, न ही असत था,न वायु थान आकाश था, ना मृत्यु ना अमरता थीन रात थी, न दिन,न सांझ ना प्रभात! उस आरंभिक समय में केवल वही थाजो वायुरहित स्थिति में निज शक्ति सेश्वास ले जीवन की क्षमता रखता था,उसके सिवा कुछ भी जीवित […] Read more » In the beginning of creation there was neither true nor false सृष्टि के आरंभ में न सत था न असत था
कविता ॐ शान्ति शान्ति शान्ति: महासेनापति विपिन! December 9, 2021 / December 9, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआठ दिसंबर इक्कीसबुधवार को कैसा था दुर्दिनभारत का वीर सपूतमहा सेनापति रावत विपिनहेलिकॉप्टर क्रैश मेंहम देशवासियों से गए छिनहम सब हैं अति दीन मलिनजिन्हें युद्ध भूमि मेंहरा सका नहीं था कोई संगीनभूलेगा नहीं देश हमाराइस महान वीर सपूत का ऋणहमारी पलकें नम है गम मेंऔर हमारे चेहरे दुखी उदासीनआखिरी विदाई हम देतेहे विपिन! […] Read more » Om Shanti Shanti Shanti: Mahasenapati Vipin! महासेनापति विपिन
कविता राम हारे के हरिनाम जगत के त्राणकर्ता December 8, 2021 / December 8, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकराम बनो परशुराम क्यों बनते हो?वर्णवादी जाति वर्चस्व के नाम परक्यों किसी भी जाति को हनते हो?जाति वर्ण नहीं मानव से प्रेम कर! कोई भी नस्ल-वंश-गोत्र-जाति-प्रजाति,बुरे नहीं होते, बल्कि विशेष व्यक्ति,किसी की नजर में बुरे भले बंदे होते,मनुज जाति नहीं व्यक्तित्व से होते! जिससे तुम असहमत हो जाते हो,उनसे बहुत लोग सहमत हो […] Read more » राम हारे के हरिनाम जगत के त्राणकर्ता
कविता मैं किताब हूं हां मैं किताब हूं December 8, 2021 / December 8, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on मैं किताब हूं हां मैं किताब हूं —विनय कुमार विनायकमैं किताब हूं मुझे पढ़ लो,मैं वेद उपनिषद पुराण हूं,मैं अतीत हूं मैं वर्तमान हूं,मैं भविष्य का सद्ज्ञान हूं,मैं किताब हूं मुझे पढ़ लो! किताब में कुछ लिखी होती,किताब में कुछ खाली होती,खाली में विवेक से काम लो,लिखे को पढ़ो खाली भर दो,मनुष्य हो और मनुष्य बनो! मैं किताब हूं, सब को पढ़ा […] Read more » मैं किताब हूं हां मैं किताब हूं