कविता नए दौर का धृतराष्ट्र August 28, 2021 / August 28, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुमघृणा के पात्र हो,क्योंकि तुम धृतराष्ट्रहो!तुमने समग्र मानवता ही नहींसमग्रसृष्टि जगत के हिस्सों केस्नेह, प्यार, सहकार को समेटकरअपने लाड़ले दुर्योधन की झोली में देडाला! तुम्हारी कृपा का मोहताज वहचींटा भी थाजिसे तुमने लाड़ले की एक मुस्कान के लिएअंगूठे से दाबकरपिचक डाला था! उस चिड़े को भी जोअपनीचिड़ीकेसाथतुम्हारे आंगन मेंफुदक रहा थाजिसे तुमने लाडले […] Read more » Dhritarashtra of the new era नए दौर का धृतराष्ट्र
कविता जैनतीर्थंकर ऋषभदेव से महावीर तक August 26, 2021 / August 26, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक ऋषभदेव हैं आदि जैन तीर्थंकर कहलाते आदिनाथ जिनके दाएं पैर के अंगूठे में पवित्र चिन्ह ‘लांछन’ है वृषभ का! ऋषभदेव ही वृषभनाथ हैं विष्णु के अंशावतार प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव से महावीर तक चौबीस हुए तीर्थंकर ऋषभदेव को निर्वाण मिला कैलाश पर्वत शिखर पर! फिर अजितनाथ,संभवनाथ,अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ,पद्मप्रभ, सुपार्श्वनाथ, चंद्रप्रभ, पुष्पदंत सुविधिनाथ,शीतलनाथ,श्रेयांसनाथ का निर्वाण […] Read more » From Jaintirthankara Rishabhdev to Mahavira ऋषभदेव से महावीर
कविता आ गये परदेश में ।। August 24, 2021 / August 24, 2021 by अजय एहसास | Leave a Comment इक नई दुनिया बसाने आ गए परदेश मेंअपना घर परिवार सब कुछ था हमारे देश मेंबस चंद सिक्के थे नहीं मां की दवाई के लिएअब वही दौलत कमाने आ गये परदेश में ।। साथ में रहकर खड़े सुख दुख सभी का बांटनाखेतों की मेड़े काटना और दूसरों को डांटनालड़ते झगड़ते थे भले फिर साथ में […] Read more » Came abroad. आ गये परदेश में
कविता कमजोर पिछड़े जन को August 23, 2021 / August 24, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक अगर कमजोर पिछड़े जन को कुछ देने की स्थिति में नहीं हो तो मत दो, कुछ भी नहीं चाहिए संरक्षण या गाली दोनों ही नहीं! तुम अग्रज हो अगुवा हो जब इच्छा होगी तो देना पूर्ण आशीर्वचन के साथ ही ऐसे भी चौवालीस साल तक तुमने देने की बात दबाए रखा अब […] Read more » कमजोर पिछड़े जन को
कविता कभीतुम भारतीय आर्य वैदिक सनातनी थे August 23, 2021 / August 23, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककभीतुमभारतीय आर्य;वैदिकसनातनी थे,आजतुम जानेक्या से क्या हो गए! कभी तुमगांधार केहिन्दूप्रजा,राजा-रानी थे,आज तुमआतंकवादीअफगानी हो गए! कभी तुमतक्षशिला में पढ़े लिखेमहाज्ञानी थे,आज तुमकूड़मगजीतालिबानी हो गए! कभी तुमराम-कृष्णके वंशजस्वाभिमानीथे,आज विदेशी धार्मिक गुलामी में खो गए! कभीतुमभगवानबुद्ध,जिनके अनुगामी थे,आज क्योंतुमकरुणा हीन प्राणी हो गए? कभीबुद्ध मूर्तिउपासक बौद्धमहायानी थे,आज पूर्वजों के मूर्तिभंजकअज्ञानीहो गए! तुम ईसा पूर्व के […] Read more » Sometimes you were Indian
कविता तालिबान August 22, 2021 / August 22, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल बारूद की गंधे अभीफिज़ाओं में घूली हैंऔर भीड़ शोर में गुम हैसंवाद पर संगिनों का पहरा हैविरान शहर की खंडहर इमारतेंकुछ कहती हैं…दिवालों पर पड़ेखून के धब्बेचिथड़ों में विखरी इंसानी लाशेंबताती हैं कि यह तालिबान है ?खिलौनों की तरहकई टुकड़ों में फैले मासूमों के जिस्ममाँ के सीने से लिपटा दुधमुंहाटूटे हुए खिलौने औरबारूद […] Read more » तालिबान
कविता दुर्योधन-दुशासन तक की नहीं कलाई सूनी थी August 22, 2021 / August 22, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआज देश मेंएक बहन के नहीं होने पर,लाखों भाईयों की कलाई सूनी रह जातीआजगर्व नहींहमको अपनी परम्परा परजिसमें बहन की बहुतहोतीरहीख्याति! भगवानरामको एक बहन शांता थीआठ भाईयों के बाद भगवान कृष्ण कीएक प्यारी छोटीबहन सुभद्रा आई थीद्रोपदी को भीकृष्णने बहन बनाई थी! द्रोपदी ने कृष्ण की जख्मी कलाई मेंअपनीदुपट्टा चीर कर एक परम्परारक्षाबंधन […] Read more » दुर्योधन-दुशासन तक की नहीं कलाई सूनी थी
कविता मेरी बहना August 22, 2021 / August 22, 2021 by अजय एहसास | Leave a Comment कभी वो दोस्त जैसी है, वो दादी मां भी बनती हैबचाने की मुझे खातिर, वो डांटे मां की सुनती हैअभी सर्दी नहीं आई, वो रखती ख्याल है मेरावो मेरी बहना है मेरे लिए स्वेटर जो बुनती है। कभी लड़ती झगड़ती प्यार भी करती वो कितनी हैजो रखती हाथ सिर पे मां के आशीर्वाद जितनी हैवो […] Read more » मेरी बहना
कविता बहनों की शुभकामना ——————– August 22, 2021 / August 22, 2021 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment रक्षा बंधन प्रेम का,हृदय का त्योहार !●●●●●इसमें बसती द्रौपदी,है कान्हा का प्यार !!●●●●●कहती हमसे राखियाँ,तुच्छ है सभी स्वार्थ !बहनों की शुभकामना,तुमको करे सिद्धार्थ !!●●●●●भाई-बहना नेह के,रिश्तों के आधार !इस धागे के सामने,हीरे हैं बेकार !!●●●●●बहना मूरत प्यार की,मांगे ये वरदान !भाई को यश-बल मिले,लोग करे गुणगान !!●●●●●चिठ्ठी लाई गाँव से,जब राखी उपहार !आँसूं छलके आँख […] Read more » बहनों की शुभकामना राखी का त्यौहार
कविता मां तुम कितना कुछ सहती हो August 19, 2021 / August 19, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमां तुम कितना कुछसहती हो,फिरभी तुमकुछनाकहती हो,खाना हम सबको खिलाने तक,तुम मांदिनभर भूखी रहती हो! इस जहां में कहांकोईरचना,जो तेरे जैसेभूख-प्यास, नींदऔर ढेर सारी पीड़ा सहती हो,फिर भी कुछ नहीं कहती हो! मां तुम कितनीभोलीसी हो,दुनिया मेंअमृतरस घोली हो,अपनेबच्चों की आपदाओंकोअपने हीसरपर ले लेती हो! मां नहीं तो जग कैसाहोता?जीव जंतुओं सेयेसूना होता,हर […] Read more » मां तुम कितना कुछ सहती हो
कविता मेरे दिल का दर्द August 19, 2021 / August 19, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तेरी आंखों में मुझे अपना हाल दिखता है।लगता है मुझे भी तू भी बेहाल दिखता है।। बहाना ढूंढती रहती हूं,मैं बात करूं तुझसे।वो बात क्या है जो बात नही करते मुझसे।। हर कीमत पर तुझे मै अपना बनाना चाहती हूं।जो कीमत मांगोगे मुझसे उसे चुकाना चाहती हूं।। अपनी जिंदगी की तुझे मै,कहानी बना लूंगी।जवानी तो […] Read more » मेरे दिल का दर्द
कविता जीवन की कुछ सच्चाईयां August 17, 2021 / August 17, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रुक जाता है,नदी का प्रवाह समुंद्र में आकर।चैन मिलता है,मुसाफिर को अपने घर आकर।। पेट नही भरता लोगो का दौलत कमाकर।पेट तो भर जाता है,चार निवाले ही खाकर।। मौत ले जायेगी सभी को,एक दिन आकर।लौटा नहीं है बंदा,मौत के घर वह जाकर।। दर्शन करते हैं प्रभु के लोग मंदिर में जाकर।सच्चे भक्त को प्रभु देते […] Read more » जीवन की कुछ सच्चाईयां\