कभीतुम भारतीय आर्य वैदिक सनातनी थे

—विनय कुमार विनायक
कभीतुमभारतीय आर्य;वैदिकसनातनी थे,
आजतुम जानेक्या से क्या हो गए!

कभी तुमगांधार केहिन्दूप्रजा,राजा-रानी थे,
आज तुमआतंकवादीअफगानी हो गए!

कभी तुमतक्षशिला में पढ़े लिखेमहाज्ञानी थे,
आज तुमकूड़मगजीतालिबानी हो गए!

कभी तुमराम-कृष्णके वंशजस्वाभिमानीथे,
आज विदेशी धार्मिक गुलामी में खो गए!

कभीतुमभगवानबुद्ध,जिनके अनुगामी थे,
आज क्योंतुमकरुणा हीन प्राणी हो गए?

कभीबुद्ध मूर्तिउपासक बौद्धमहायानी थे,
आज पूर्वजों के मूर्तिभंजकअज्ञानीहो गए!

तुम ईसा पूर्व के अपने इतिहास भूल गए,
ईसा के बाद कीभीअपनीकहानी भूल गए!

आजतुम्हारे जेहन मेंजहरभरदिएगए,
अपनेहंता-आक्रांताओंकी गुलामीकरने लग गए!

तुमविदेशी मजहब की वाकयातसमझते नहीं,
अपने ही आत्मा और परमात्मा सेअंजाने हो गए!

अब तुम मानवता की बातेंकरते क्यों नहीं हो?
अबदया, धर्म केमानवीयमूल्यपरमरतेनहीं हो!

अब तुम विधर्मी मानवों के लिए अताताई हो गए,
अब तुमगीत-संगीतकला की रियाजकरते नहीं हो!

अबक्षमा, दया,तप, त्याग की भावना रहीनहीं,
अब तुम मानव जाति के लिएक्रूरकसाई हो गए!

अब तुमसातवें आसमान के खुदा की बातें करते,
अपनेमजहब के सिवा सारे धर्म सेघृणा करते हो!

अब तुम तार्किकऔ विज्ञान सम्मत होते नहीं हो,
परकुतर्की वदकियानूसी में किसी से कम नहीं हो!

जो दिखता नहीं, वह होता नहीं, ऐसा मान लो,
ईश्वर, अल्लाह, खुदा के अस्तित्व से अनजान हो!

तुममानव रुप में अवतारी ईश्वरको पहचानो,
वे पूर्वज हैं, महामानवहै, रहबर हैं यह जान लो!

अवतारी महा मानवों ने इंसानियत के खातिर
बहुत कुछ किया, इंसानियत के लिए जिया मरा!

कल्पना में जल्पना छोड़ दो,जन्नत, हूर, परी,
सुरा की दरियाकब किसने देखा,बताओ तोजरा!

वर्तमानमजहब की बुराइयों को त्याग करो,
और अपनेपूर्व धर्म की अच्छाइयों को ग्रहण करो!

अपनी मां बहन बेटियों की चिकित्सा के लिए
गर चाहिए नारीचिकित्सकतोनारी को शिक्षा दो!

दबे-कुचले मानव को शिक्षा और रोजगार दो,
नारियोंको वैज्ञानिक शिक्षा देकरसुयोग्य बनाओ!

मानव हो मानव को मत मारो, पीटो, डराओ,
मिल जुल कर रहनासीखो, जिओ और जीने दो!

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