कविता राम हारे के हरिनाम जगत के त्राणकर्ता December 8, 2021 / December 8, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकराम बनो परशुराम क्यों बनते हो?वर्णवादी जाति वर्चस्व के नाम परक्यों किसी भी जाति को हनते हो?जाति वर्ण नहीं मानव से प्रेम कर! कोई भी नस्ल-वंश-गोत्र-जाति-प्रजाति,बुरे नहीं होते, बल्कि विशेष व्यक्ति,किसी की नजर में बुरे भले बंदे होते,मनुज जाति नहीं व्यक्तित्व से होते! जिससे तुम असहमत हो जाते हो,उनसे बहुत लोग सहमत हो […] Read more » राम हारे के हरिनाम जगत के त्राणकर्ता
कविता मैं किताब हूं हां मैं किताब हूं December 8, 2021 / December 8, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on मैं किताब हूं हां मैं किताब हूं —विनय कुमार विनायकमैं किताब हूं मुझे पढ़ लो,मैं वेद उपनिषद पुराण हूं,मैं अतीत हूं मैं वर्तमान हूं,मैं भविष्य का सद्ज्ञान हूं,मैं किताब हूं मुझे पढ़ लो! किताब में कुछ लिखी होती,किताब में कुछ खाली होती,खाली में विवेक से काम लो,लिखे को पढ़ो खाली भर दो,मनुष्य हो और मनुष्य बनो! मैं किताब हूं, सब को पढ़ा […] Read more » मैं किताब हूं हां मैं किताब हूं
कविता प्रश्नोत्तर की परंपरा से बनी हमारी संस्कृति December 7, 2021 / December 7, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकप्रश्नोत्तर की परंपरा से बनी हमारी संस्कृति,प्रश्न करे उत्तर दे उपनिषद ऐसी ज्ञान विधि!उपनिषद यानि गुरु समीप बैठ ज्ञान प्राप्ति,यह वेदान्त बौद्ध जैन दर्शन की मूल निधि! समस्याओं का हल वाद-विवाद-संवाद में ही,भारत में गुरु-शिष्य पठन विधा थी बलवती!कठोपनिषद यम नचिकेता संवाद मृत्यु-गुत्थी,मुण्डकोपनिषद में सत्यमेवजयते की प्रतीति! वृहदारण्यकोपनिषद;याज्ञवल्क्य मैत्रेयी वार्ता,असतोमा सदगमय! तमसो मा […] Read more » प्रश्नोत्तर की परंपरा से बनी हमारी संस्कृति
कविता चुनाव व नेता December 7, 2021 / December 7, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment नेता आज सत्ता के खातिर,अपना उल्लू सीधा कर रहे।वोटो के खातिर वे सब अब,मुफ्त चीजे खूब है बांट रहे।। कोई लैपटॉप फ्री में बांट रहा,कोई फ्री में राशन है बांट रहा।बिजली पानी की बात न करो,वह तो धर्म जाति में बांट रहा।। अपनी जेबों से देते नही कुछ,टैक्स कर्ता का धन है बांट रहे।वोट बटोरने […] Read more » election and leader चुनाव व नेता
कविता नारी तुम सबसे प्रेम करती मगर अपने रुप से हार जाती हो December 6, 2021 / December 6, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकनारी तुम किस रुप में होतुम मां बहन बेटी अर्धांगिनीईश्वर की नायाब कृति हो! तुम प्रेम करुणा दया ममतामातृत्व की प्रति मूर्ति होतुम मां बनकर जनती संततिदूध पिलाकर पालती हो! पर दो जून रोटी के खातिरसंतति मुख निहारती होक्या मां रुप में तुम हारती हो? बहन बनके भाई कलाई कोतुम बड़े प्रेम से […] Read more »
कविता रावण कौरव कंश कीचक जयद्रथ क्यों बनते हो? December 3, 2021 / December 3, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहर कोई अपनी वजह से परेशान होते,सब अपने ही कर्म का अंजाम भोगते,कोई पूज्य या घृणित होते स्वभाव से,सुख-दुख का कारण मानव स्वयं होते! धनकुबेर तो धन के स्वामी थे तब भी,जब सोने की लंका उनसे छिन गई थी,स्वर्ण नगरी का स्वामित्व बदला किन्तुनए-पुराने मालिक की हस्ती कहां बदली? रावण लेकर लंका धनकुबेर […] Read more » Why do you become Ravana Kaurava Kansh Keechak Jayadratha?
कविता शादी में शामिल होने वालो को सुझाव November 29, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment उतना ही लो तुम थाली में।व्यर्थ न जाए कुछ नाली में।। झूठन जो छोड़ता है थाली में।अगला जन्म लेता है नाली में।। कम व्यजन बनावाओ शादी में।झांकी न लगाओ उनकी शादी में।। दान दहेज न देओ तुम शादी में।दान देहेज न लेओ तुम शादी में।। जितना कर सको करो शादी में।अपनी औकात में रहो शादी […] Read more »
कविता हिन्दुत्व से नाता जोड़ो कुछ और मानव हो जाओ November 26, 2021 / November 26, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअगर हिन्दू धर्म में समग्र एकता चाहिएतो जाति एकता के नामअपनी डफली अपना राग बंद होना चाहिए! एक जाति में एकता से क्या होगास्वजाति छोड़ अन्य जातियों से दूरी बढ़ेगीहिन्दुओं में एकता कभी नहीं आ पाएगी! एक जाति तो हमेशा एक ही जाति रहेगी,फिर किस बात की जाति एकता बताइए? एक जाति कभी […] Read more » Join Hindutva become some more human हिन्दुत्व से नाता जोड़ो कुछ और मानव हो जाओ
कविता दिल की धड़कन सुनो November 26, 2021 / November 26, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment किसी ने किसी को दिल की धड़कन है माना,किसी ने किसी को पैरो की अचकन है माना।जिसकी जैसी होती है भावना अपने मन में,प्रभु की मूरत को उसने उसे वैसा ही है माना।। किसी ने पत्थर की मूरत को ईश्वर है माना,किसी ने ईश्वर की मूरत को पत्थर है माना।ये केवल अपनी अपनी समझ का […] Read more » listen to the heartbeat दिल की धड़कन सुनो
कविता हिन्दुत्व महान सनातन धर्म का वरदान है November 22, 2021 / November 22, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहिन्दुत्व महान सनातन धर्म का वरदान है,हिन्दुत्व सत्य अहिंसा दया धर्म का अभियान है,हिन्दुत्व वेद पुराण आगम निगम त्रिपिटक ज्ञान है,हिन्दुत्व ॐकार मंत्र,त्रिदेवों का नाम, भगवान राम है,हिन्दुत्व सिर्फ गुणधर्म नहीं धर्मक्षेत्र का अनुसंधान है! हिन्दुत्व में शस्त्र-शास्त्र की शक्ति बसती,हिन्दुत्व है ईश्वर की स्तुति और है देशभक्ति,हिन्दुत्व में शरणागत को अभयदान देने […] Read more » Hindutva is a boon of great Sanatan Dharma हिन्दुत्व महान सनातन धर्म का वरदान है
कविता जीव ही जीव के जन्म मृत्यु का कारण होता November 18, 2021 / November 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम जिसे देखते होजरुरी नहीं कि वह वही होजिसे तुमने अभी-अभी देखाएक नन्हे शिशु के रूप मेंहो सकता है पिछली बारजब तुमने उसे देखा होगातब वह कुछ और रहा होगाअभी-अभी तुम देखते होकिसी सांप बिच्छू के बच्चे कोहो सकता है कुछ दिन पूर्ववे तुम्हें दिखे हों कहीं मरते हुएबूढ़े जवान पुरुष स्त्री रूप […] Read more » Jiva is the cause of birth and death of a living being जीव ही जीव के जन्म मृत्यु का कारण होता
कविता हिन्दुत्व को समझो जिसमें सत्य अहिंसा दया है November 17, 2021 / November 17, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकवो हिन्दुत्व को क्या जाने व समझेंगे,जो पूर्वाग्रह में जीते और दुराग्रही होते,जो आक्रांताओं की हमेशा तारीफ करते,यह जानकर भी कि उन आक्रांताओं नेउनके हिन्दू पूर्वजों को घोर यातना देकरउनकी मां-बहन-बेटियों को बलात्कृत करतलवार की जोर पे उन्हें गुलाम किए थे! वे अब भी विदेशी धार्मिक गुलाम बने हैं,अनबूझ विदेशी धर्म मजहब के […] Read more » Understand Hindutva in which truth is non-violence mercy हिन्दुत्व को समझो जिसमें सत्य अहिंसा दया है