आर्थिकी लेख समाज सार्थक पहल मध्यमवर्गीय परिवार नहीं फंसे ऋण के जाल में July 1, 2025 / July 1, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 50 आधार बिंदुओं की कमी की है। इसके साथ ही, निजी क्षेत्र के बैंकों, सरकारी क्षेत्र के बैंकों एवं क्रेडिट कार्ड कम्पनियों सहित अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी अपने ग्राहकों को प्रदान की जा रही ऋणराशि पर लागू ब्याज दरों में कमी की घोषणा करना प्रारम्भ कर दिया है ताकि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में की गई कमी का लाभ शीघ्र ही भारत में ऋणदाताओं तक पहुंच सके एवं इससे अंततः देश की अर्थव्यवस्था को बल मिल सके। भारत में चूंकि अब मुद्रा स्फीति की दर नियंत्रण में आ गई है, अतः आगे आने वाले समय में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में और अधिक कमी की जा सकती है। इस प्रकार, बहुत सम्भव है ऋणराशि पर लागू ब्याज दरों में कमी के बाद कई नागरिक जिन्होंने पूर्व में कभी बैंकों से ऋण नहीं लिया है, वे भी ऋण लेने का प्रयास करें। बैंक से ऋण लेने से पूर्व इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि इस ऋण को चुकता करने की क्षमता भी ऋणदाता में होनी चाहिए अर्थात ऋणदाता की पर्याप्त मासिक आय होनी चाहिए ताकि बैकों द्वारा प्रदत्त ऋण की किश्त एवं ब्याज का भुगतान पूर्व निर्धारित समय सीमा के अंदर किया जा सके। इस संदर्भ में विशेष रूप से युवा ऋणदाताओं द्वारा क्रेडिट कार्ड के उपयोग पश्चात संबंधित राशि का भुगतान समय सीमा के अंदर अवश्य करना चाहिए क्योंकि अन्यथा क्रेडिट कार्ड एजेंसी द्वारा चूक की गई राशि पर भारी मात्रा में ब्याज वसूला जाता है, जिससे युवा ऋणदाता ऋण के जाल में फंस जाते हैं। बैकों से लिए गए ऋण की मासिक किश्त एवं इस ऋणराशि पर ब्याज का भुगतान यदि निर्धारित समय सीमा के अंदर नहीं किया जाता है तो चूककर्ता ऋणदाता से बैकों द्वारा दंडात्मक ब्याज की वसूली की जाती है। इसी प्रकार, कई नागरिक जो क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं एवं इस क्रेडिट कार्ड के विरुद्ध उपयोग की गई राशि का भुगतान यदि वे निर्धारित समय सीमा के अंदर नहीं कर पाते हैं तो इस राशि पर चूक किए गए क्रेडिट कार्ड धारकों से भारी भरकम ब्याज की दर से दंड वसूला जाता है। कभी कभी तो दंड की यह दर 18 प्रतिशत से 24 प्रतिशत के बीच रहती है। क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने वाले नागरिक कई बार इस उच्च ब्याज दर पर वसूली जाने वाली दंड की राशि से अनभिज्ञ रहते हैं। अतः बैंकों से ली जाने वाली ऋणराशि एवं क्रेडिट कार्ड के विरुद्ध उपयोग की जाने वाली राशि का समय पर भुगतान करने के प्रति ऋणदाताओं को सजग रहने की आवश्यकता है। कुल मिलाकर यह ऋणदाताओं के हित में है कि वे बैंक से लिए जाने वाले ऋण की राशि तथा ब्याज की राशि एवं क्रेडिट कार्ड के विरुद्ध उपयोग की जाने वाली राशि का पूर्व निर्धारित एवं उचित समय सीमा के अंदर भुगतान करें क्योंकि अन्यथा की स्थिति में उस चूककर्ता नागरिक की क्रेडिट रेटिंग पर विपरीत प्रभाव पड़ता है एवं आगे आने वाले समय में उसे किसी भी वित्तीय संस्थान से ऋण प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है एवं बहुत सम्भव है कि भविष्य में उसे किसी भी वित्तीय संस्थान से ऋण प्राप्त ही न हो सके। ऋणदाता यदि किसी प्रामाणिक कारणवश अपनी किश्त एवं ब्याज का बैंकों अथवा क्रेडिट कार्ड कम्पनी को समय पर भुगतान नहीं कर पाता है और उसका ऋण खाता यदि गैर निष्पादनकारी आस्ति में परिवर्तित हो जाता है तो इस संदर्भ में चूककर्ता ऋणदाता द्वारा बैकों को समझौता प्रस्ताव दिए जाने का प्रावधान भी है। इस समझौता प्रस्ताव के माध्यम से चूककर्ता ऋणदाता द्वारा सम्बंधित बैंक अथवा क्रेडिट कार्ड कम्पनी को मासिक किश्त एवं ब्याज की राशि को पुनर्निर्धारित किए जाने के सम्बंध में निवेदन किया जा सकता है। परंतु, यदि ऋणदाता ऋण की पूरी राशि, ब्याज सहित, अदा करने में सक्षम नहीं है तो चूक की गई राशि में से कुछ राशि की छूट प्राप्त करने एवं शेष राशि को एकमुश्त अथवा किश्तों में अदा करने के सम्बंध में भी समझौता प्रस्ताव दे सकता है। ऋण की राशि अथवा ब्याज की राशि के सम्बंध के प्राप्त की गई छूट की राशि का रिकार्ड बनता है एवं समझौता प्रस्ताव के अंतर्गत प्राप्त छूट के चलते भविष्य में उस ऋणदाता को बैकों से ऋण प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, इस बात का ध्यान चूककर्ता ऋणदाता को रखना चाहिए। अतः जहां तक सम्भव को ऋणदाता द्वारा समझौता प्रस्ताव से भी बचा जाना चाहिए एवं अपनी ऋण की निर्धारित किश्तों एवं ब्याज का निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत भुगतान करना ही सबसे अच्छा रास्ता अथवा विकल्प है। भारत में तेज गति से हो रही आर्थिक प्रगति के चलते मध्यमवर्गीय नागरिकों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है, जिनके द्वारा चार पहिया वाहनों, स्कूटर, फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन एवं मकान आदि आस्तियों को खरीदने हेतु बैकों अथवा अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण लिया जा रहा है। कई बार मध्यमवर्गीय परिवार एक दूसरे की देखा देखी आपस में होड़ करते हुए भी कई उत्पादों को खरीदने का प्रयास करते हुए दिखाई देते हैं, चाहे उस उत्पाद विशेष की आवश्यकता हो अथवा नहीं। उदाहरण के लिए एक पड़ौसी ने यदि अपने चार पहिया वाहन का एकदम नया मॉडल खरीदा है तो जिस पड़ौसी के पास पूर्व में ही चार पहिया वाहन उपलब्ध है वह पुराने मॉडल के वाहन को बेचकर पड़ौसी द्वारा खरीदे गए नए मॉडल के चार पहिया वाहन को खरीदने का प्रयास करता है और बैंक के ऋण के जाल में फंस जाता है। यह नव धनाडय वर्ग यदि बैक से लिए गए ऋण की किश्त एवं ब्याज की राशि का निर्धारित समय सीमा के अंदर भुगतान नहीं कर पाता है तो उस नागरिक विशेष के वित्तीय रिकार्ड पर धब्बा लग सकता है जिससे उसके लिए उसके शेष जीवन में बैकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से पुनः ऋण लेने में कठिनाई आ सकती है। अतः बैकों से ऋण प्राप्त करने वाले नागरिकों को ऋण की किश्त का समय पर भुगतना करना स्वयं उनके हित में हैं, ताकि भारत में तेज हो रही आर्थिक प्रगति का लाभ आगे आने वाले समय में भी समस्त नागरिक ले सकें। भारत में तो यह कहा भी जाता है कि जिसके पास जितनी चादर हो, उतने ही पैर पसारने चाहिए। अर्थात, नागरिकों को बैंकों से ऋण लेते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ऋण की किश्त एवं ब्याज की राशि का भुगतान करने लायक उनकी अतिरिक्त आय होनी चाहिए, ताकि ऋण की किश्तों एवं ब्याज की राशि का भुगतान निर्धारित समय सीमा के अंदर किया जा सके एवं उनका ऋण खाता गैर निष्पादनकारी आस्ति में परिवर्तित नहीं हो। प्रहलाद सबनानी Read more » Middle class families are not trapped in the debt trap नहीं फंसे ऋण के जाल में
लेख हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें July 1, 2025 / July 1, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में हिन्दी विरोध की राजनीति अब महाराष्ट्र में भी उग्र से उग्रत्तर हो गयी, इसी के कारण त्रिभाषा नीति को महाराष्ट्र में लगा झटका दुखद और अफसोसजनक है। आखिरकार राजनीतिक दबाव, लंबी रस्साकशी और कशमकश के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने स्कूलों में हिंदी की […] Read more » हिन्दी को संघर्ष का नहीं
पर्यावरण लेख जल की बूंद-बूंद पर संकट: नीतियों के बावजूद क्यों प्यासी है भारत की धरती? June 30, 2025 / June 30, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment भारत दुनिया की 18% आबादी और मात्र 4% ताजे जल संसाधनों के साथ गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भूजल का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, असंतुलित खेती, और जलवायु परिवर्तन इसके प्रमुख कारण हैं। सरकारी योजनाओं और नीतियों के बावजूद कार्यान्वयन और जनभागीदारी की कमी से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जल संरक्षण […] Read more » जल की बूंद-बूंद पर संकट
टेक्नोलॉजी लेख विज्ञान अंतरिक्ष की नई उड़ान: एक्सिओम-4 और भारत की वैश्विक पहचान June 30, 2025 / June 30, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment एक्सिओम-4 मिशन भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण है। वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल की सहभागिता से यह मिशन सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की उपस्थिति का प्रतीक बन गया है। अमेरिका की एक्सिओम-4 स्पेस और नासा के सहयोग से हुआ यह अभियान भारत को मानव अंतरिक्ष यात्रा […] Read more » एक्सिओम-4
लेख स्वास्थ्य-योग रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स June 30, 2025 / June 30, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025 ललित गर्ग स्वस्थ जीवन हर किसी की सर्वोच्च जीवन प्राथमिकता होता है। कहा भी गया है कि, ‘सेहत सबसे बड़ी पूंजी’ है। स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन को सही तरह से एन्जॉय करते हुए उसे सफल एवं सार्थक बना सकता है और इसमें डॉक्टर्स की भूमिका बहुत अहम […] Read more » राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई
लेख हिन्दी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है June 27, 2025 / June 27, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment भारत विश्व का एक ऐसा देश है, जहां भाषाओं की विविधता पाई जाती है। यहां अलग-अलग समूहों द्वारा अनेक भाषाएं बोली,पढ़ी,लिखी व समझी जाती हैं, लेकिन भारत के संविधान में हिंदी को भारत की राजभाषा ( यानी कि आफिशियल लैंग्वेज) का दर्जा प्राप्त है। गौरतलब है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के […] Read more » हिन्दी
लेख समाज बेटियों के लिये मोह बढ़ना संतुलित समाज का आधार June 27, 2025 / June 27, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – दुनियाभर में माता-पिता आमतौर पर अब तक बेटियों की तुलना में बेटों को ज्यादा पसंद करते आ रहे हैं, लेकिन प्राथमिकताओं को लेकर वैश्विक दृष्टिकोण में एक सूक्ष्म, महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि अब लड़के की तुलना में लड़कियों […] Read more » बेटियों के लिये मोह
लेख स्वास्थ्य-योग स्वस्थ रखें अपना लिवर June 27, 2025 / June 27, 2025 by डॉ रुप कुमार बनर्जी | Leave a Comment डॉ रुप कुमार बनर्जीहोमियोपैथिक चिकित्सक लिवर हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है जो पेट के दाहिनी ओर नीचे की तरफ होता है। यह शरीर की कई क्रियाओं को नियंत्रित रखता है। अगर इसी में ही किसी तरह की कोई कमी आ जाए तो शरीर ही ठीक ढंग से काम करना बंद […] Read more » लिवर
लेख बंद हो असहमति को अपराध बनाना June 27, 2025 / June 27, 2025 by कुमार कृष्णन | Leave a Comment कुमार कृष्णन संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। असहमति और लोकतंत्र का सह अस्तित्व है और दोनों साथ-साथ चलते हैं। इसी तरह के सवाल उठाते हुए वकीलों, कानून के छात्रों और कानूनी पेशेवरों के समूह नेशनल अलायंस फॉर जस्टिस, अकाउंटेबिलिटी एंड राइट्स (एनएजेएआर) के छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या एफ-4-101/होम-सी/2024 दिनांक 30 अक्टूबर, […] Read more » मूलवासी बचाओ मंच
लेख नशा मुक्त भारत बनाने की बड़ी चुनौती June 25, 2025 / June 25, 2025 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय नशा एवं मादक पदार्थ निषेध दिवस (26 जून) पर विशेषचिंता का सबब बनता युवा सोच पर नशे का ग्रहण– योगेश कुमार गोयलविश्व के अनेक देशों में लोगों में और खासकर युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने […] Read more » A big challenge to make India drug free अंतर्राष्ट्रीय नशा एवं मादक पदार्थ निषेध दिवस अंतर्राष्ट्रीय नशा एवं मादक पदार्थ निषेध दिवस (26 जून)
पर्यावरण लेख प्रकृति एवं जीवन रक्षा के लिये नदियों का संरक्षण जरूरी June 25, 2025 / June 25, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – भारत में कई नदियां सूखने या प्रदूषित होने के कारण मरने के कगार पर हैं। इन नदियों की हालत इतनी खराब हो गई है कि कुछ तो नालों में बदल गई हैं और उनका नदी होना भी मुश्किल है। नदियों के सूखने और प्रदूषित होने के कारणों में मुख्य हैं, अत्यधिक […] Read more »
पर्यावरण लेख चिंताजनक है पर्यावरणीय असंतुलन June 24, 2025 / June 24, 2025 by डॉ.वेदप्रकाश | Leave a Comment डॉ. वेदप्रकाश विगत दिनों परमार्थ निकेतन ऋषिकेश जाना हुआ। वहां मां गंगा आरती के समय परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने प्रतिदिन की भांति अपने उद्बोधन में कहा कि- आज नदियां और विभिन्न जल स्रोत प्रदूषण के शिकार हैं। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और इनके साथ-साथ मानसिक प्रदूषण […] Read more » Environmental imbalance is a cause for concern पर्यावरणीय असंतुलन