लेख जनसंख्या असंतुलन : खतरनाक स्थिति September 8, 2025 / September 8, 2025 by डॉ.बालमुकुंद पांडेय | Leave a Comment डॉ. बालमुकुंद पांडे जनसंख्या देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं क्योंकि यही राज्य का तत्व श्रम शक्ति, प्रतिभा एवं विकास की नींव होती है। जब जनसंख्या असंतुलन की स्थिति में पहुंच जाती है तो यह जनशक्ति देश के लिए अभिशाप एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष संकट का आकार धारण कर लेती है। समकालीन में वैश्विक […] Read more » Population imbalance जनसंख्या असंतुलन
लेख स्वास्थ्य-योग प्लास्टिक किसी को न भाये – उसका कचरा सबका दर्द भगाये September 8, 2025 / September 8, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment चंद्र मोहन बाजार से खरीदारी करके घर लौटते सभी के हाथों मे छोटे बड़े प्लास्टिक के थैलों को हर कोई आसानी से देखता है. प्यास लगी हो तो पानी की बोतल भी प्लास्टिक की ही बाजार मे उपलब्ध है. रेलगाड़ी मे सफर करो तो स्टेशन पर भी पानी की प्लास्टिक बोतल भी सभी पहचानते हैँ. […] Read more » प्लास्टिक से पैरासिटामोल
पर्यावरण लेख पंजाब जल प्रलय : दुनिया के मददगारों को आज मदद की दरकार September 8, 2025 / September 8, 2025 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री भारत का “अन्न भंडार” कहा जाने वाला देश की खाद्य आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य पंजाब इन दिनों जल प्रलय जैसे अति गंभीर संकट […] Read more » पंजाब जल प्रलय
लेख वो कच्ची सड़क गाँव की September 8, 2025 / September 8, 2025 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment नवदीप कौरलूणकरणसर, राजस्थान भारत के गाँवों की तस्वीर अक्सर हरे-भरे खेतों, बैलों की गाड़ियों और मिट्टी की खुशबू से सजाई जाती है, लेकिन असली तस्वीर इससे कहीं अलग है। असली संघर्ष उन कच्ची सड़कों से झलकता है, जो गांव वालों की ज़िंदगी को हर दिन कीचड़ और धूल में उलझाए रखती हैं। सड़क किसी भी […] Read more » वो कच्ची सड़क गाँव की
लेख विधि-कानून नागरिक कर्त्तव्यों का प्रचार-प्रसार आवश्यक September 6, 2025 / September 6, 2025 by डॉ.वेदप्रकाश | Leave a Comment डा.वेदप्रकाश नागरिकों द्वारा कर्त्तव्यों के ज्ञान और निर्वाह के बिना संकल्प से सिद्धि का मार्ग बाधित होता है। इसलिए आज व्यापक स्तर पर यह आवश्यक है कि संविधान सम्मत नागरिक कर्त्तव्यों का प्रचार-प्रसार हो। विकसित भारत के संकल्प में सभी को अधिकार मिलें इसके लिए यह भी आवश्यक है कि सभी नागरिक कर्तव्यों का पालन […] Read more » Publicity of civic duties is essential नागरिक कर्त्तव्यों का प्रचार-प्रसार आवश्यक
लेख एक चेतावनी है अफगानिस्तान का भूकंप September 5, 2025 / September 6, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव 31 अगस्त 2025 की मध्य रात्रि के बाद पूर्वी अफगानिस्तान में 6.0 तीव्रता के आए भूकंप ने बड़ी त्रासदी रच दी। करीब 1400 लोग काल के गाल में समा गए और 3000 से ज्यादा लोग घायल हो गए। भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर जलालाबाद नगर से 27 किमी पूर्व में था। इसकी […] Read more » Afghanistan earthquake Afghanistan earthquake is a warning अफगानिस्तान का भूकंप
लेख भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य की परंपरा अति प्राचीन September 4, 2025 / September 4, 2025 by डॉ.नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी | Leave a Comment डा. नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी हमारे देश भारत में गुरु और शिष्य की परंपरा बहुत ही पुरानी है जो सदियों से चली आ रही है। आज भी हमे यह देखने को मिलती है। भारतीय प्राचीन इतिहास में जब हम वेद,पुराण,गीता- भागवत,महाभारत ,रामायण के पन्ने पलटते है तो यह भान होता है कि उस युग में चाहे वह […] Read more » The tradition of Guru and disciple is very ancient in Indian culture. भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य की परंपरा
लेख डिजिटल युग में शिक्षक की भूमिका हुई और अधिक महत्वपूर्ण September 4, 2025 / September 4, 2025 by संदीप सृजन | Leave a Comment -संदीप सृजन डिजिटल युग ने शिक्षा के परिदृश्य को पूर्णतः परिवर्तित कर दिया है। पहले शिक्षक कक्षा में ब्लैकबोर्ड और पुस्तकों के माध्यम से ज्ञान प्रदान करते थे किन्तु आज वे डिजिटल उपकरणों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑनलाइन मंचों के साथ मिलकर छात्रों को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। आज जब हम डिजिटल परिवर्तन के शिखर […] Read more » डिजिटल युग में शिक्षक की भूमिका
लेख कुदरत का संदेश September 4, 2025 / September 4, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment कुदरत का रूठना भी ज़रूरी था,इंसान का घमंड टूटना भी ज़रूरी था।हर कोई खुद को खुदा समझ बैठा,उस वहम का छूटना भी ज़रूरी था। पेड़ कटे, नदियाँ रोईं, पर्वत भी कांपे,धरती माँ की कराहें कौन था आँके।लोभ में अंधा हुआ इंसान इतना,उसको आईना दिखाना भी ज़रूरी था। आंधियाँ, तूफ़ान, बारिश का प्रहार,दे गए चेतावनी – […] Read more » कुदरत का संदेश
लेख शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाजारीकरण देश के समक्ष बड़ी चुनौती September 4, 2025 / September 4, 2025 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment 05 सितंबर 2025 शिक्षक दिवस पर विशेष शिक्षक समाज में उच्च आदर्श स्थापित करने वाला व्यक्तित्व होता है। किसी भी देश या समाज के निर्माण में शिक्षा की अहम भूमिका होती है, कहा जाए तो शिक्षक समाज का आईना होता है। हिन्दू धर्म में शिक्षक के लिए कहा गया है कि आचार्य देवो भवः यानी कि शिक्षक या आचार्य ईश्वर के समान होता है। यह दर्जा एक शिक्षक को उसके द्वारा समाज में दिए गए योगदानों के बदले स्वरूप दिया जाता है। शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूजनीय रहा है। कोई उसे गुरु कहता है, कोई शिक्षक कहता है, कोई आचार्य कहता है, तो कोई अध्यापक या टीचर कहता है ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को चित्रित करते हैं, जो सभी को ज्ञान देता है, सिखाता है और जिसका योगदान किसी भी देश या राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करना है। सही मायने में कहा जाये तो एक शिक्षक ही अपने विद्यार्थी का जीवन गढता है। और शिक्षक ही समाज की आधारशिला है। एक शिक्षक अपने जीवन के अन्त तक मार्गदर्शक की भूमिका अदा करता है और समाज को राह दिखाता रहता है, तभी शिक्षक को समाज में उच्च दर्जा दिया जाता है। माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं। उनका स्थान कोई नहीं ले सकता, उनका कर्ज हम किसी भी रूप में नहीं उतार सकते, लेकिन एक शिक्षक ही है जिसे हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता के बराबर दर्जा दिया जाता है। क्योंकि शिक्षक ही हमें समाज में रहने योग्य बनाता है। इसलिये ही शिक्षक को समाज का शिल्पकार कहा जाता है। गुरु या शिक्षक का संबंध केवल विद्यार्थी को शिक्षा देने से ही नहीं होता बल्कि वह अपने विद्यार्थी को हर मोड़ पर उसको राह दिखाता है और उसका हाथ थामने के लिए हमेशा तैयार रहता है। विद्यार्थी के मन में उमडे हर सवाल का जवाब देता है और विद्यार्थी को सही सुझाव देता है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सदा प्रेरित करता है। एक शिक्षक या गुरु द्वारा अपने विद्यार्थी को स्कूल में जो सिखाया जाता हैं या जैसा वो सीखता है वे वैसा ही व्यवहार करते हैं। उनकी मानसिकता भी कुछ वैसी ही बन जाती है जैसा वह अपने आसपास होता देखते हैं। इसलिए एक शिक्षक या गुरु ही अपने विद्यार्थी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। सफल जीवन के लिए शिक्षा बहुत उपयोगी है जो हमें गुरु द्वारा प्रदान की जाती है। विश्व में केवल भारत ही ऐसा देश है यहाँ पर शिक्षक अपने शिक्षार्थी को ज्ञान देने के साथ-साथ गुणवत्ता युक्त शिक्षा भी देते हैं, जो कि एक विद्यार्थी में उच्च मूल्य स्थापित करने में बहुत उपयोगी है। जब अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति आता है तो वो भारत की गुणवत्ता युक्त शिक्षा की तारीफ करता है। किसी भी राष्ट्र का आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास उस देश की शिक्षा पर निर्भर करता है। अगर राष्ट्र की शिक्षा नीति अच्छी है तो उस देश को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता अगर राष्ट्र की शिक्षा नीति अच्छी नहीं होगी तो वहाँ की प्रतिभा दब कर रह जायेगी बेशक किसी भी राष्ट्र की शिक्षा नीति बेकार हो, लेकिन एक शिक्षक बेकार शिक्षा नीति को भी अच्छी शिक्षा नीति में तब्दील कर देता है। शिक्षा के अनेक आयाम हैं, जो किसी भी देश के विकास में शिक्षा के महत्व को अधोरेखांकित करते हैं। वास्तविक रूप में ज्ञान ही शिक्षा का आशय है, ज्ञान का आकांक्षी है- विद्यार्थी और इसे उपलब्ध कराता है शिक्षक। एक शिक्षक द्वारा दी गयी शिक्षा ही शिक्षार्थी के सर्वांगीण विकास का मूल आधार है। प्राचीन काल से आज पर्यन्त शिक्षा की प्रासंगिकता एवं महत्ता का मानव जीवन में विशेष महत्व है। शिक्षकों द्वारा प्रारंभ से ही पाठ्यक्रम के साथ ही साथ जीवन मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है। शिक्षा हमें ज्ञान, विनम्रता, व्यवहार कुशलता और योग्यता प्रदान करती है। शिक्षक को ईश्वर तुल्य माना जाता है। आज भी बहुत से शिक्षक शिक्षकीय आदर्शों पर चलकर एक आदर्श मानव समाज की स्थापना में अपनी महती भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ-साथ ऐसे भी शिक्षक हैं जो शिक्षक और शिक्षा के नाम को कलंकित कर रहे हैं, और ऐसे शिक्षकों ने शिक्षा को व्यवसाय बना दिया है, जिससे एक निर्धन शिक्षार्थी को शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है और धन के अभाव से अपनी पढाई छोडनी पडती है। आधुनिक युग में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक वह पथ प्रदर्शक होता है जो हमें किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है। आज के समय में शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाजारीकरण हो गया है। शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाजारीकरण देश के समक्ष बड़ी चुनौती हैं। पुराने समय में भारत में शिक्षा कभी व्यवसाय या धंधा नहीं थी। इससे छात्रों को बडी कठिनाई का सामना करना पड रहा है। शिक्षक ही भारत देश को शिक्षा के व्यवसायीकरण और बाजारीकरण से स्वतंत्र कर सकते हैं। देश के शिक्षक ही पथ प्रदर्शक बनकर भारत में शिक्षा जगत को नई बुलंदियों पर ले जा सकते हैं। गुरु एवं शिक्षक ही वो हैं जो एक शिक्षार्थी में उचित आदर्शों की स्थापना करते हैं और सही मार्ग दिखाते हैं। एक शिक्षार्थी को अपने शिक्षक या गुरु प्रति सदा आदर और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए। किसी भी राष्ट्र का भविष्य निर्माता कहे जाने वाले शिक्षक का महत्व यहीं समाप्त नहीं होता क्योंकि वह ना सिर्फ हमको सही आदर्श मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं बल्कि प्रत्येक शिक्षार्थी के सफल जीवन की नींव भी उन्हीं के हाथों द्वारा रखी जाती है। किसी भी देश या राष्ट्र के विकास में एक शिक्षक द्वारा अपने शिक्षार्थी को दी गयी शिक्षा और शैक्षिक विकास की भूमिका का अत्यंत महत्व है। आज शिक्षक दिवस है, आज का दिन गुरुओं और शिक्षकों को अपने जीवन में उच्च आदर्श जीवन मूल्यों को स्थापित कर आदर्श शिक्षक और एक आदर्श गुरु बनने की प्रेरणा देता है। – ब्रह्मानंद राजपूत Read more » शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाजारीकरण
लेख अपने दीपक स्वयं बनो की प्रेरणा है ‘शिक्षक’ September 4, 2025 / September 4, 2025 by डॉ. पवन सिंह मलिक | Leave a Comment डॉ. पवन सिंह “दुनिया सुनना नहीं, देखना पसंद करती है कि आप क्या कर सकते हैं”…. ओर अपने अंदर छिपी इसी असीम शक्ति की पहचान करवाना, मैं कौन हूँ ओर क्या कुछ कर सकता हूँ इस भाव को परिणाम में बदलने के लिए प्रेरित करने की प्रेरणा है शिक्षक। आज शिक्षक दिवस है और हममें से […] Read more » शिक्षक
लेख किताबों से स्क्रीन तक: बदलते समय में गुरु का असली अर्थ September 4, 2025 / September 4, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment शिक्षक दिवस विशेष (ज्ञान के साथ संस्कार और संवेदनशीलता ही शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान है) डिजिटल युग में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किताब से लेकर स्क्रीन तक की यह यात्रा ज्ञान तो दे रही है, लेकिन संस्कार और मानवीय मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं। ऐसे समय में शिक्षक का […] Read more » From books to screens: The true meaning of Guru in changing times किताबों से स्क्रीन तक