लेख समाज फेसबुक या फूहड़बुक?: डिजिटल अश्लीलता का बढ़ता आतंक और समाज की गिरती संवेदनशीलता May 27, 2025 / May 27, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment लेखिका: प्रियंका सौरभ जब सोशल मीडिया हमारे जीवन में आया, तो उम्मीद थी कि यह विचारों को जोड़ने, संवाद को मज़बूत करने और जन-जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। लेकिन आज, 2025 में, विशेषकर फेसबुक जैसे मंच पर जिस तरह से अश्लीलता और फूहड़ता का आतंक फैलता जा रहा है, वह न केवल चिंताजनक […] Read more » Facebook or Fuchbook? The growing terror of digital pornography and the falling sensitivity of society फेसबुक या फूहड़बुक
लेख प्रतिस्पर्धी युग में अंक जीवन नहीं हैं May 26, 2025 / May 26, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment देश में सीबीएसई और विभिन्न राज्यों की अन्य बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट(परिणाम) लगभग-लगभग मई माह में घोषित हो चुके हैं। जिन बच्चों ने इन बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक हासिल किए हैं, वे बच्चे और उनके अभिभावक बहुत ही खुश हैं। लेकिन जो बच्चे किसी कारणवश बोर्ड(दसवीं और बारहवीं) की परीक्षाओं में अच्छे अंक हासिल […] Read more » Marks are not life in this competitive era प्रतिस्पर्धी युग में अंक जीवन नहीं हैं
लेख किशोरों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति गंभीर चुनौती May 26, 2025 / May 26, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – भारतीय बच्चों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति एवं क्रूर मानसिकता चिन्ताजनक है, नये भारत एवं विकसित भारत के भाल पर यह बदनुमा दाग है। पिछले कुछ समय से स्कूली बच्चों में बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति निश्चित रूप से डरावनी, मर्मांतक एवं खौफनाक है। चिंता का बड़ा कारण इसलिए भी है क्योंकि […] Read more » Increasing violent tendencies among teenagers are a serious challenge किशोरों में बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति
लेख “आई एस आई” आतंकवाद का पोषक May 26, 2025 / May 26, 2025 by विनोद कुमार सर्वोदय | Leave a Comment अधिक पीछे न जाते हुए केवल पिछले 2-3 वर्ष की गुप्तचर विभाग की सूचनाओँ में आई.एस.आई द्वारा हमारे देश में आतंकवादियों को उकसाने व भड़काने के महत्वपूर्ण समाचार आये थे । जिससे राष्ट्रीय पत्रकारिता के सकारात्मक संकेत मिलने से मीडिया जगत की अनेक भ्रांतियाँ दूर हुई। साथ ही केंद्रीय सत्ता में परिवर्तन से भी समाज […] Read more » ISI is the sponsor of terrorism आई एस आई
महिला-जगत लेख बदलते युग का नया तमाशा: संस्कारों की सिसकियाँ May 26, 2025 / May 26, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment (समाज में बदलती नैतिकता, रिश्तों की उलझन और तकनीक के नए असर पर) समाज में अब बेटी की निगरानी नहीं, दादी और सास की होती है। तकनीक और आज़ादी के इस युग में रिश्तों की परिभाषा बदल गई है। जहाँ पहले लड़कियों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता थी, अब वही महिलाएं अपनी आज़ादी के साथ […] Read more » संस्कारों की सिसकियाँ
लेख नरपुंगव छत्रसाल May 26, 2025 / June 25, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भारत के महान क्रांति नायक छत्रसाल महाराज का जन्म गहरवार अर्थात गहड़वाल वंश की बुंदेला शाखा के राजपूतों में हुआ था। इनके पूर्वज काशी के गैरवार राजा वीरभद्र के पुत्र हेमकरण थे। जिनका एक नाम पंचम सिंह गहरवार भी था। बताया जाता है कि हेमकरण विंध्यवासिनी देवी के अनन्य भक्त थे। इसलिए उन्हें विंध्यवाला भी […] Read more » Narpungav Chhatrasal छत्रसाल
लेख शख्सियत समाज साक्षात्कार अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर उच्छृंखलता मंजूर नहीं May 26, 2025 / May 26, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment आज का युग सोशल नेटवर्किंग साइट्स का युग है। या यूं कहें कि आज विज्ञान और तकनीक का युग है।सच तो यह है कि हम एआइ चैटबाट के युग में सांस ले रहे हैं। हमारे देश में अभिव्यक्ति की आजादी सबको प्रदान की गई है, लेकिन पिछले कुछ समय से देश और समाज के कुछेक […] Read more » anarchy is not acceptable in the name of freedom of expression In the name of freedom of expression
लेख महाराजा चंपतराय और रानी सारंधा May 25, 2025 / June 25, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भारत की वीरांगनाओं में रानी सारंधा का नाम बड़े ही सम्मान से लिया जाता है। सारंधा बुंदेला राजा चंपतराय की सहधर्मिणी थी। उन्होंने मुगलों के विरुद्ध विद्रोह का झंडा उठाया और भारतीय स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर अपना अप्रतिम बलिदान दिया। उनके भीतर स्वाभिमान की भावना कूट-कूट कर भरी थी। भारतीय धर्म और वीर परंपरा […] Read more » Maharaja Champatrai and Queen Sarandha महाराजा चंपतराय और रानी सारंधा
पर्यावरण लेख विलुप्त होती प्रजातियां: जीवन के अस्तित्व पर संकट की दस्तक May 22, 2025 / May 22, 2025 by अतुल गोयल | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (22 मई) पर विशेष Read more » A threat to the existence of life Extinct species:
लेख समाज भारत में अल्टरनेट एसओजीआई समुदाय और मानसिक स्वास्थ्य May 22, 2025 / May 22, 2025 by अमरपाल सिंह वर्मा | Leave a Comment अमरपाल सिंह वर्मा भारत में मानसिक स्वास्थ्य आज भी एक उपेक्षित और कलंकित विषय बना हुआ है। आम समाज में भी इसके बारे में खुलकर बात करना दुर्लभ है, लेकिन यह चुप्पी तब और भयावह रूप ले लेती है जब हम उन व्यक्तियों की बात करते हैं जो पारंपरिक यौन और लैंगिक पहचान से अलग हैं जैसे कि ट्रांसजेंडर, गे, लेस्बियन, बाइसेक्शुअल, क्वीर और नॉन-बाइनरी लोग। इन सभी को मिलाकर अल्टरनेट एसओजीआई (सेक्सुअल ओरिएंटेशन एंड जेंडर आइडेंटिटी) समुदाय कहा जाता है। यह समुदाय न केवल सामाजिक अस्वीकार्यता का शिकार है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित भी है। एसओजीआई समुदाय के सदस्य अक्सर बचपन से ही भेदभाव, तिरस्कार और हिंसा का सामना करते हैं. कभी स्कूलों में मजाक बनकर, कभी घर से निकाले जाने पर, तो कभी कार्यस्थलों पर अस्वीकार किए जाने के रूप में। यह बहिष्कार धीरे-धीरे मानसिक पीड़ा, अकेलेपन और आत्म-संदेह को जन्म देता है। कई अध्ययन बताते हैं कि एलजीबीटीआईक्यू+ समुदाय के लोग डिप्रेशन, एंग्जायटी और आत्महत्या की प्रवृत्ति के शिकार आम लोगों की तुलना में कई गुना अधिक होते हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय के भीतर आत्महत्या का जोखिम बेहद चिंताजनक है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 31 प्रतिशत ट्रांसजेंडर लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया है। इसके पीछे सामाजिक तिरस्कार, रोजगार का अभाव, हिंसा, और हेल्थकेयर सिस्टम द्वारा उपेक्षा प्रमुख कारण हैं। भारत का स्वास्थ्य ढांचा वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद कमज़ोर है। 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्रति एक लाख की जनसंख्या पर औसतन 0.3 मनोचिकित्सक हैं। जब सामान्य नागरिकों तक ही सेवाएं नहीं पहुँच रही हैं, तो एसओजीआई समुदाय की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। बहुत से डॉक्टर, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में एलजीबीटीआईक्यू+ पहचान को ‘बीमारी’ मानते हैं या इसे ‘सुधारने’ की कोशिश करते हैं। इससे व्यक्ति इलाज के बजाय और अधिक मानसिक उत्पीड़न का शिकार होता है। इसके अलावा, एसओजीआई समुदाय को स्वास्थ्य संस्थानों में भेदभाव, उपहास और असंवेदनशील व्यवहार का सामना करना पड़ता है। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग टॉयलेट या वार्ड की व्यवस्था तक नहीं है, जिससे वे स्वास्थ्य सेवाओं से दूर भागने को मजबूर होते हैं। भारत के शहरी इलाकों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु में जहां कुछ गैर सरकारी संगठन और काउंसलिंग सेवाएं एलजीबीटीआईक्यू+ फ्रेंडली बन रही हैं, वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा जैसे राज्यों में स्थिति काफी चिंताजनक है। यहाँ न तो संवेदनशील डॉक्टर हैं और न ही एलजीबीटीआईक्यू+ समुदाय के लिए कोई विशेष मानसिक स्वास्थ्य नीति या योजना। हाल के वर्षों में भारत में कुछ महत्वपूर्ण कानूनी धारा 377 की समाप्ति, ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम आदि जैसे कदम उठाए हैं लेकिन एसओजीआई समुदाय के अधिकारों की पैरवी करने वाले संगठनों का कहना है कि ज़मीनी स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सुधारों का अभाव है। एसओजीआई समुदाय के अधिकारों की पैरवी करने वाले संगठनों का कहना है कि डॉक्टरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को एलजीबीटीआईक्यू+ समुदाय के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए ट्रेनिंग अनिवार्य होनी चाहिए। क्षेत्रीय भाषाओं में काम करने वाले काउंसलिंग केंद्रों और टोल-फ्री हेल्पलाइनों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।स्कूल स्तर से ही यौन विविधता और मानसिक स्वास्थ्य को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना होगा ताकि अगली पीढ़ी में समावेशी दृष्टिकोण विकसित हो।एलजीबीटीआईक्यू+ संगठनों और राज्य सरकारों के बीच साझेदारी हो, जिससे स्थानीय स्तर पर सहायता और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। सरकार को एलजीबीटीआईक्यू+ समुदाय की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति पर राज्यवार आंकड़े एकत्र करने चाहिए ताकि नीतियाँ ज़मीनी जरूरतों पर आधारित बन सकें। भारत में एसओजीआई समुदाय का मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर, मगर अदृश्य संकट बना हुआ है। संगठनों का कहना है कि जब तक समाज इस चुप्पी को नहीं तोड़ेगा और सरकार अपने नीतिगत ढांचे में सुधार नहीं लाएगी, तब तक यह समुदाय अपनी पहचान और अस्तित्व की लड़ाई में अकेला पड़ता रहेगा। मानसिक स्वास्थ्य केवल इलाज की नहीं, बल्कि गरिमा, स्वीकृति और आत्मसम्मान की भी लड़ाई है। Read more » The Alternate SOGI Community and Mental Health in India अल्टरनेट एसओजीआई समुदाय
लेख आखिर क्यों घट रही है गंगा डॉल्फिन की आबादी ? May 22, 2025 / May 22, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment पर्यावरण प्रदूषण की समस्या आज भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व की एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। मनुष्य तो मनुष्य पशु-पक्षियों और जलीय जीवों को पर्यावरण प्रदूषण से बहुत नुक्सान पहुंच रहा है, लेकिन इनका कोई धणी-धोरी नजर नहीं आता। यह बहुत ही दुखद है कि आज हमारे देश में पर्यावरण प्रदूषण से जीव-जंतुओं […] Read more » गंगा डॉल्फिन की आबादी
लेख भीषण गर्मी में स्वयं के साथ बेजुबानों का भी रखें ध्यान ! May 20, 2025 / May 20, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment हाल ही में मौसम विभाग ने 21 मई तक 24 मई तक पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में कुछ जगहों पर लू चलने की संभावना जताई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 21 मई तक हरियाणा और राजस्थान में कुछ इलाकों में रात में भी लू चलने की संभावना है। इन दिनों राजस्थान और हरियाणा ही नहीं […] Read more » भीषण गर्मी में स्वयं के साथ बेजुबानों का भी रखें ध्यान