लेख पानी कितना जरूरी! इसकी बचत भी उतनी जरूरी September 25, 2025 / September 25, 2025 by चंद्र मोहन | Leave a Comment चंद्र मोहन सावन अभी अभी ख़तम हुआ. कहीं बादल फटा तो कहीं बाढ़. चारों और पानी ही पानी. धरती पर 70 प्रतिशत पानी है तो हमारे शरीर में भी पानी लगभग 70 प्रतिशत है. इतना सारा पानी है, फिर भी उसकी बचत भी बहुत जरूरी है. बचपन में खेलते हुए कई बार दोहराया है कि… […] Read more » पानी की बचत
लेख जितना स्वस्थ होगा पर्यावरण, उतना बेहतर होगा स्वास्थ्य September 25, 2025 / September 25, 2025 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस (26 सितम्बर पर विशेष)– योगेश कुमार गोयलहमारा पर्यावरण जितना स्वस्थ होगा, हमारा स्वास्थ्य भी उतना ही अच्छा होगा। इसका सीधा सा अर्थ है कि हम अपने स्वास्थ्य के लिए काफी हद तक पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी हैं और इसलिए पर्यावरणीय स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्रमुख जिम्मेदारी है। दरअसल पर्यावरणीय […] Read more »
लेख लाइब्रेरी तक लड़कियों की पहुंच अब भी दूर है September 25, 2025 / September 25, 2025 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment आराधनालूणकरणसर, राजस्थान रात का सन्नाटा था और मिट्टी के आँगन में टिमटिमाती लालटेन की रोशनी में सरिता अपनी किताब खोलकर बैठी थी। वह परेशान है क्योंकि उसके पास न तो इससे जुड़ी कोई संदर्भ पुस्तकें हैं और न ही कोई अतिरिक्त सामग्री, न कोई ऐसा स्थान जहाँ वह चैन से पढ़ सके। हालांकि पढ़ाई की […] Read more » Girls still have no access to libraries. लाइब्रेरी तक लड़कियों की पहुंच
लेख शख्सियत एकात्मता के जीवंत पर्याय: पंडित दीनदयाल उपाध्याय September 24, 2025 / September 24, 2025 by संदीप सृजन | Leave a Comment -संदीप सृजन भारतीय चिंतन परंपरा में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो न केवल एक विचारधारा के प्रणेता होते हैं, बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा प्रदान करते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऐसे ही एक महान दार्शनिक, समाजसेवी और राजनीतिज्ञ थे, जिन्हें ‘एकात्मता’ का जीवंत पर्याय कहा जा सकता है। एक साधारण परिवार में जन्मे प. दीनदयाल उपाध्याय ने […] Read more » पंडित दीनदयाल उपाध्याय
राजनीति लेख एकात्म मानववाद के प्रणेता पं दीनदयाल उपाध्याय September 24, 2025 / September 24, 2025 by डा. विनोद बब्बर | Leave a Comment 25 सितंबर, दीनदयाल जयंती डा. विनोद बब्बर एक संगोष्ठी में एक शोधार्थी ने मुझसे पूछा कि ‘क्या दीनदयाल जी भाजपा के गांधी हैं?’ तो मेरा उत्तर था कि दीनदयाल जी भारतीय जनता के दीनदयाल हैं। उनके मन-मस्तिष्क में केवल और केवल भारत के उत्थान की चिंता थी। वे विकास के नाम पर पश्चिमी विचारधारा के अंधानुसरण के विरोधी थे। भारतीय संस्कृति […] Read more » Pt. Deendayal Upadhyay the pioneer of Integral Humanism pt deendayal पं दीनदयाल उपाध्याय
लेख भारतीय शोधार्थियों को प्रोत्साहन की जरूरत September 23, 2025 / September 23, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः शोध विकास संस्थानों के बजट में कमीप्रमोद भार्गवपक्षियों के पंख अपने आप में संपूर्ण रूप में विकसित होते हैं, लेकिन हवा के बिना कोई भी पक्षी उड़ान नहीं भर सकता। यही स्थिति भारत में नवाचारी प्रयोगधर्मियों के साथ रही है। उनमें कल्पनाशील असीम क्षमताएं हैं, लेकिन कल्पनाओं को आकार देने के लिए प्रोत्साहन एवं वातावरण नहीं […] Read more » Indian researchers need encouragement भारतीय शोधार्थियों को प्रोत्साहन की जरूरत
लेख भारत के इतिहास के गौरव : छावा संभाजी अध्याय – १ September 23, 2025 / September 23, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment संभाजी के पिता छत्रपति शिवाजी मैथिलीशरण गुप्त जी भारत के स्वर्णिम अतीत को रेखांकित करते हुए लिखते हैं :- उनके चतुर्दिक-कीर्ति-पट को है असम्भव नापना,की दूर देशों में उन्होंने उपनिवेश-स्थापना ।पहुँचे जहाँ वे अज्ञता का द्वार जानो रुक गया,वे झुक गये जिस ओर को संसार मानो झुक गया॥” भारत के जिन वीर इतिहास नायकों के […] Read more » Pride of Indian History: Chhava Sambhaji छावा संभाजी
राजनीति लेख एकात्म मानववाद की दृष्टि से अंत्योदय और नारी उत्थान: पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संदेश September 23, 2025 / September 23, 2025 by डा. शिवानी कटारा | Leave a Comment डा. शिवानी कटारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी भारतीय राजनीति और चिंतन के उन युगदृष्टा विचारकों में गिने जाते हैं जिन्होंने समाज और राष्ट्र को केवल आर्थिक नज़रिए से नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा, सांस्कृतिक आत्मा और सामाजिक समरसता की दृष्टि से देखा। उनका दर्शन—एकात्म मानववाद—हमें यह सिखाता है कि जीवन को खंडों में बाँटकर नहीं, बल्कि […] Read more » Antyodaya and women's upliftment from the perspective of Integral Humanism: The message of Pandit Deendayal Upadhyaya एकात्म मानववाद की दृष्टि से अंत्योदय और नारी उत्थान
लेख चरमपंथी अपने हितों के लिए पवित्र धार्मिक ग्रंथों की तोड़-मरोड़ कर करते हैं व्याख्या September 23, 2025 / September 23, 2025 by गौतम चौधरी | Leave a Comment गौतम चौधरी किसी भी आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा सकता है। यह आसान है और इसे करना कठिन नहीं है। धर्म मानवता को संमृद्ध करने और समाज को आगे बढ़ाने के लिए काम करने वाला चिंतन है लेकिन इसी चिंतन को कभी-कभी चरमपंथी अपने हितों के लिए उपयोग करने लगते हैं। यह किसी भी […] Read more » Extremists distort sacred religious texts to suit their own interests. चरमपंथी
लेख झूठे दुष्कर्म के मामलों में पिसता पुरुष समाज September 22, 2025 / September 22, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment राजेश कुमार पासी जब दिल्ली में निर्भया कांड हुआ था तो पूरे देश में महिलाओं से होने वाले दुष्कर्म के प्रति गुस्सा भर गया था और जनता सड़कों पर आ गई थी । इस कांड के बाद ही संसद ने ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया था लेकिन ऐसे मामले रुक नहीं […] Read more » Male society suffers in false rape cases झूठे दुष्कर्म के मामलों में पिसता पुरुष समाज झूठे दुष्कर्म में पिसता पुरुष समाज
लेख समाज संवादहीनता: परिवार और समाज की चुनौती September 22, 2025 / September 22, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment आज के व्यस्त और डिजिटल जीवन में संवादहीनता परिवार और समाज की बड़ी चुनौती बन गई है। बातचीत की कमी भावनात्मक दूरी, गलतफहमियाँ और मानसिक तनाव बढ़ाती है। परिवार में बच्चे और बड़े एक-दूसरे की भावनाओं को साझा नहीं कर पाते, जबकि समाज में सहयोग और सामूहिक प्रयास कमजोर पड़ते हैं। इसका समाधान नियमित संवाद, […] Read more » Lack of communication: A challenge for family and society संवादहीनता
लेख गाँव और शहर का रिश्ता कैसा हो September 19, 2025 / September 20, 2025 by शम्भू शरण सत्यार्थी | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी मनुष्य का जीवन केवल उसके व्यक्तिगत अस्तित्व तक सीमित नहीं है. वह अपने आसपास के समाज, संस्कृति और वातावरण से गहराई से जुड़ा हुआ है। मानव सभ्यता की यात्रा आरम्भ से लेकर आज तक एक लम्बा और संघर्षपूर्ण इतिहास समेटे हुए है। इस यात्रा में गाँव और शहर दोनों की अपनी-अपनी भूमिका […] Read more »