लेख अर्धनग्न मुजरे के दौर में गुम होती साहित्यिक स्त्रियाँ August 27, 2025 / August 28, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment “सोशल मीडिया की चमक-दमक के शोर में किताबों का स्वर कहीं खो गया है।” इंस्टाग्राम और डिजिटल मीडिया का दौर है। यहाँ आकर्षण और तमाशा सबसे ज्यादा बिकते हैं। लेकिन समाज की आत्मा को बचाए रखने के लिए जरूरी है कि स्त्रियाँ फिर से साहित्य की ओर लौटें। इंस्टाग्राम का शोर कुछ समय बाद थम […] Read more » सोशल मीडिया की चमक-दमक के शोर में किताबों का स्वर
लेख समस्याएं अनेक, हल एक August 27, 2025 / August 27, 2025 by अशोक गुप्त | Leave a Comment अशोक गुप्त हमारे देश में बहुत ही समस्याएं हैं जिनकी संख्या और आकार बढ़ता ही जा रहा है. अधिकतर बढ़ती समस्याओं का कारण हमारी बढ़ती जनसंख्या और गरीबी है. गरीबी और कार्य के साधन सीमित होने के कारण गाँवों से महानगरों की ओर पलायन जारी है जिसके कारण शहरों में बिजली और पानी की कमी और बढ़ते प्रदूषण के साथ सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और बढ़ती झुग्गियों की समस्याएं हो रही है. एक अनुमान के अनुसार दिल्ली में 1000 से अधिक झुग्गी कालोनियां हैं जिनमें कई लाख लोग अमानवीय परिस्थितियों में रहते हैं. ये कालोनियां कहीं-कहीं तो नालों के किनारे या नालों के अंदर भी बसी हुई है. कई स्थानों पर तो नालों को पाट दिया गया है जिससे बरसाती पानी का भाव रुक जाता है और बारिश होने पर बाढ़ की समस्या पैदा हो जाती है और पानी का निकास नहीं हो पाता . इन समस्याओं को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बहुत सी सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे वाली झुग्गियां हटाई हैं पर इससे ये समस्याएं हल होने वाली नहीं हैं. ये समस्याएं तभी हल हो सकती हैं यदि ये लोग दिल्ली या ऐसे महानगरों में न रहकर अपने मूल स्थान पर रहें. पलायन रोकने हेतु जनसंख्या वृद्धि पर रोक बहुत आवश्यक है क्योंकि परिवार में बच्चों की अधिक संख्या गरीबी बढ़ाती है पर यह गरीब लोग यह समझ नहीं पाते और उनके प्राय तीन-चार बच्चे होते हैं. इसके लिए आवश्यक है कि सरकारी योजनाओं जैसे फ्री राशन आदि का लाभ उन्हीं गरीबों को मिले जिनका एक ही बच्चा हो और जो अपने मूल स्थान पर रहते हों. दूसरा बच्चा होते ही यह सुविधा वापस ले ली जानी चाहिए. यदि हम अपने आसपास देखें तो पाएंगे कि हमारे संपर्क में आने वाले अधिकतर निम्नवर्गीय लोगों के प्राय तीन-चार बच्चे होते हैं. यह वर्ग परिवार नियोजन हेतु गंभीर नहीं होता जबकि अधिकतर पढ़े लिखे मध्यवर्गीय परिवारों में एक से अधिक बच्चा नहीं होता क्योंकि एक बच्चे को ही अच्छे स्कूल में पढ़ाना बहुत महंगा हो चुका है. ऐसे परिवार मजबूरी में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर अमानवीय परिस्थितियों में रहते हैं पर कम बच्चे पैदा कर अपना जीवन स्तर ऊपर उठाने को तैयार नहीं हैं. केवल लालच ही इन्हें के लिए प्रेरित कर सकता है इन्हें परिवार नियोजन हेतु प्रेरित करने के लिए सरकार यह नियम बना सकती है कि फ्री राशन जैसी सुविधा केवल उन्हीं गरीब परिवारों को मिले जिन परिवारों में केवल एक बच्चा हो. सरकार उन्हें प्रोत्साहन राशि के रूप में ₹1000 प्रति मास से ₹12000 प्रति वर्ष की राशि दे सकती है यदि यह अपने मूल स्थान पर रहते हैं. दूसरा बच्चा पैदा होने पर उनकी यह सुविधा छीन ली जानी चाहिए. इसके अतिरिक्त फ्री राशन जैसी सुविधा भी केवल उन्हें परिवारों को दी जानी चाहिए जो अपने मूल स्थान पर रहते हैं और जिनका एक ही बच्चा हो . यदि यह योजना ठीक से लागू हो पाए तो अगले कुछ वर्षों में जहां गांव से महानगरों में पलायन की समस्या पर लगाम लगेगी, वहीं गरीब जनता के जीवन स्तर में सुधार होगा, उनके बच्चे अच्छा पोषण और अच्छी शिक्षा पा सकेंगे और देश के संसाधनों पर दबाव कम होगा. इसके अतिरिक्त दिल्ली जैसे महानगरों की तेजी से बढ़ती जनसंख्या पर भी लगाम लगेगी और बिजली पानी की समस्याओं व अवैध कब्जे की समस्याओं से धीरे-धीरे मुक्ति मिल पाएगी . इसके अतिरिक्त अवैध कब्ज़ों पर सरकार को नो टॉलरेंस नीति अपनानी चाहिए। हटाई गई झुग्गियों के स्थान पर पुनः झुग्गियां बनने या नई झुग्गी बनने पर पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि अवैध बसने वालों को प्रोत्साहन न मिले. Read more » Problems many solution one समस्याएं अनेक हल एक
पर्यावरण लेख पर्यावरण कानून और उत्तर प्रदेश राज्य: एक समग्र दृष्टिकोण August 27, 2025 / August 27, 2025 by पवन शुक्ला | Leave a Comment “प्रकृति स्वयं धर्म है, उसका संरक्षण ही हमारा कर्तव्य है।” यह कथन आधुनिक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, जहाँ विकास की परिभाषा केवल आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और संसाधनों के सतत उपयोग के साथ जुड़ गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत की लगभग 77% जनसंख्या […] Read more » Environmental Law and the State of Uttar Pradesh: A Holistic Approach पर्यावरण कानून पर्यावरण कानून और उत्तर प्रदेश राज्य
महिला-जगत लेख लड़की की मौत और हमारी घातक धारणाएँ August 27, 2025 / August 27, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment “हर लापता बेटी के साथ हमारी सोच की परीक्षा होती है — अफ़वाह नहीं, संवेदनशीलता ज़रूरी है” हर लापता लड़की के साथ हमारी संवेदनशीलता और सिस्टम की परीक्षा होती है। अफ़वाहें, ताने और लापरवाह पुलिस जाँच अपराधियों के लिए सबसे बड़ी मददगार बन जाती हैं। जब तक पुलिस हर गुमशुदगी को गंभीर अपराध मानकर तुरंत […] Read more » लड़की की मौत और हमारी घातक धारणाएँ
लेख पंख और उड़ान – भारत की स्वतंत्रता और आत्मविकास August 25, 2025 / August 25, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment बोधार्थी रौनक़ भारत की आज़ादी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक चेतना है — वह चेतना जिसने सदियों की पराधीनता के अंधेरे को चीरकर इस राष्ट्र को अपने पैरों पर खड़ा होने का साहस दिया। 15 अगस्त 1947 का वह प्रभात केवल एक राजनीतिक घटना नहीं था, बल्कि स्वतंत्र आत्मा का जागरण था। यह दिन […] Read more »
लेख शख्सियत एक महान क्रांतिकारी के साथ कर रही है कोलकाता नगर निगम अत्याचार August 25, 2025 / August 25, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment कृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि 30 अगस्त 1888 को कलकत्ता के समीप चंद्रनगर में एक बालक का जन्म हुआ। बालक का जन्म चूंकि कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुआ था, इसलिए माता-पिता ने इस नवजात शिशु का नाम ” कन्हाई लाल “नाम रखा था । पिता का स्थानांतरण बॉम्बे में होने के कारण 5 वर्ष की आयु […] Read more » कन्हाई लाल दत्त
कविता दक्षिणा रहस्य August 25, 2025 / August 25, 2025 by डॉ राजपाल शर्मा 'राज' | Leave a Comment अम्बर रक्तिम वर्ण हो चला रथ रवि का अस्ताचल कोलौट रहा हलधर का टोला, पुष्ट स्कंध पर धरि हल कोगोखुर से उड़ती रज रम्या, खग-मृग सब चले नीड़ कोगुरु माता बैठी आंगन में, अभ्यन्तर लिए पीड़ को तभी द्रोण आये कुटिया में दिखी निस्तब्धता छाईगुरु माता इतनी तन्मय थी, आहट तक ना सुन पाईनिज नारी […] Read more » दक्षिणा रहस्य
कविता तुम कब रोए August 25, 2025 / August 25, 2025 by डॉ राजपाल शर्मा 'राज' | Leave a Comment पहला पर्ण जो निकला तन सेजीर्ण-शीर्ण हो गया समय सेकिसी पवन के झोंके ने तबअलग कर दिया तेरे तन सेउस विलगित पर्ण के जाने कादर्द क्या मन में कुछ नहीं होतापर देखा तो नहीं किसी नेकभी भी तुम को आँख भिगोएपेड़! तुम कब रोए? शाख पर जन्मीं नन्हीं चिड़िया जब उसी शाख पर, किसी झंझा मेंमर […] Read more » तुम कब रोए
लेख छात्र किस दिशा में जा रहे हैं? August 25, 2025 / August 25, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment “शिक्षा, संस्कार और समाज की जिम्मेदारी : बदलते छात्र-शिक्षक संबंध और सही दिशा की तलाश” आज शिक्षा केवल अंक और नौकरी तक सीमित हो गई है। नैतिक मूल्य और संस्कार बच्चों की प्राथमिकता से गायब होते जा रहे हैं। परिणामस्वरूप शिक्षक-छात्र संबंधों में खटास बढ़ रही है और अनुशासनहीनता सामने आ रही है। यदि परिवार, […] Read more » बदलते छात्र-शिक्षक संबंध
व्यंग्य कुत्ता प्रसंग और युधिष्ठिर August 25, 2025 / August 25, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गवआजकल न्यायालय से सड़क तक कुत्ता प्रसंग चल रहा है। यह गोवंश को बचाने से कहीं ज्यादा अहम् हो गया है। अब अह्म तो दोनों ही हैं, गाय दूध के लिए माता कही जाती है और कुत्ता आदमी का वफादार मित्र है। उसकी यही कृतज्ञता के फलतः महाभारत युग में धर्मराज युधिष्ठिर अपने अनुजों […] Read more » कुत्ता प्रसंग और युधिष्ठिर
लेख विधि-कानून जब न्याय के प्रहरी ही अपराधी बन जाएँ, तो कानून की आस्था कैसे बचे? August 23, 2025 / August 23, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment झूठे मुकदमे केवल निर्दोषों को पीड़ा नहीं देते, बल्कि न्याय तंत्र की नींव को भी हिला देते हैं। जब वकील ही इस व्यापार में शामिल होते हैं तो वकालत की गरिमा और न्यायपालिका की विश्वसनीयता दोनों पर गहरा आघात होता है। ऐसे वकीलों पर आपराधिक मुकदमे चलना अनिवार्य है ताकि कानून का दुरुपयोग रोका जा […] Read more » झूठे मुकदमे
लेख आर्यभट्ट से गगनयानः प्राचीन ज्ञान से अनंत संभावनाएँ August 23, 2025 / August 23, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment 23 अगस्त को दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस- 2025 विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि यह चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता की दूसरी वर्षगांठ है। पाठकों को बताता चलूं कि इस दिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अगस्त के दिन 2023 में इसरो की चंद्रयान-3 लैंडर की चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग की […] Read more » 23 अगस्त राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस