मनोरंजन मीडिया लेख समाज हिन्दी पत्रकारिता की दशा और दिशा May 29, 2026 / May 29, 2026 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment हालांकि हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्षों के इतिहास में समय के साथ पत्रकारिता के मायने और उद्देश्य बदलते रहे हैं किन्तु उसके बावजूद सुखद स्थिति यह है कि हिन्दी पत्रकारिता के पाठकों या दर्शकों की रूचि में कोई कमी नहीं आई। यह अलग बात है कि अंग्रेजी मीडिया और उससे जुड़े कुछ पत्रकारों Read more » हिन्दी पत्रकारिता
व्यंग्य हाँ, मैं छोटे दुकानदार के रूप में कॉकरोच हूँ May 29, 2026 / May 29, 2026 by डॉ. शैलेश शुक्ला | Leave a Comment री दुकान कोई व्यापारिक साम्राज्य नहीं, रोजमर्रा की साँस लेने की मशीन है। यहाँ साबुन भी बिकता है, बिस्कुट भी, बच्चों की टॉफी भी और मेरी नींद भी। ग्राहक आते हैं, सामान लेते हैं, मुस्कुराते हैं, चले जाते हैं। लेकिन उनके जाने के बाद जो बचता है, वह है बिजली का बिल, जीएसटी का डर, बाजार का दबाव और ऑनलाइन बिक्री का भूत Read more » छोटे दुकानदार के रूप में कॉकरोच
महिला-जगत मीडिया लेख हिंदी पत्रकारिता में महिलाएं : 200 साल बाद भी अधूरी यात्रा May 29, 2026 / May 29, 2026 by डॉ. शैलेश शुक्ला | Leave a Comment आज जब हम हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों का उत्सव मनाते हैं, तो यह पूछना जरूरी है: क्या महिलाओं के लिए यह उत्सव मनाने का समय है या फिर यह आत्ममंथन का क्षण है? Read more » Women in Hindi journalism: A journey incomplete even after 200 years हिंदी पत्रकारिता में महिलाएं
लेख शख्सियत अब न दिखेगा, होना किसी ‘बशीर’ बद्र का May 29, 2026 / May 29, 2026 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment बशीर बद्र Read more » बशीर बद्र
लेख शख्सियत शब्दों को इंसानी रूह की धड़कन बना दिया बशीर साहब ने May 29, 2026 / May 29, 2026 by संदीप सृजन | Leave a Comment शब्दों को इंसानी रूह की धड़कन बना दिया बशीर साहब ने Read more » डॉ. बशीर बद्र
कविता अधूरे वाक्य May 29, 2026 / May 29, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अधूरे वाक्य Read more » अधूरे वाक्य
कविता कोशिश कर हर बार May 27, 2026 / May 27, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment कोशिश कर हर बार Read more » कोशिश कर हर बार
पर्यावरण लेख सूरज के तीखे होते तेवर और अल-नीनो May 26, 2026 / May 26, 2026 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment इस बार गर्मी का मिजाज इसलिए भी अलग है, क्योंकि कई तटीय इलाकों और मैदानी क्षेत्रों में नमी वाली गर्मी यानी उमस का असर भी देखने में आ रहा है। इससे लू लगने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। Read more » अल-नीनो
पर्यावरण लेख तपती धरती, तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा : बिगड़ता पर्यावरण संतुलन और अस्तित्व का संकट May 25, 2026 / May 25, 2026 by डॉ. शैलेश शुक्ला | Leave a Comment आज भारत का सामान्य नागरिक यह महसूस करने लगा है कि मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। बचपन की गर्मियां और आज की गर्मियों में जमीन-आसमान का अंतर है। कभी मई-जून की दोपहरें भी इतनी भयावह नहीं लगती थीं। गांवों में पेड़ों की छांव, मिट्टी की नमी Read more » Scorching earth Suffering Lives the System's Sleepiness: Deteriorating Environmental Balance and an Existential Crisis तड़पता जीवन तड़पता जीवन और तंत्र की तंद्रा तपती धरती बिगड़ता पर्यावरण संतुलन
लेख अलनीनो से प्रभावित होने के बाद भारत के पास क्या इंतजाम ? May 25, 2026 / May 25, 2026 by सौरभ वार्ष्णेय | Leave a Comment सौरभ वार्ष्णेयदुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच अलनीनो एक बार फिर भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि से उत्पन्न होने वाली यह मौसमी घटना भारतीय मानसून को सीधे प्रभावित करती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून की थोड़ी-सी […] Read more » अलनीनो
लेख मूक जीवों के लिए करुणा का संकल्प: यह हमारी सनातन भारतीय संस्कृति का अहम् हिस्सा ! May 23, 2026 / May 23, 2026 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment मूक जीवों के लिए करुणा का संकल्प Read more » मूक जीवों के लिए करुणा का संकल्प
व्यंग्य हाँ, मैं सरकारी बाबू के रूप में कॉकरोच हूँ May 22, 2026 / May 22, 2026 by डॉ. शैलेश शुक्ला | Leave a Comment कॉकरोच अँधेरे में पनपता है। सरकारी बाबू अस्पष्टता में। जितना कम स्पष्ट नियम होगा, उतनी अधिक हमारी शक्ति होगी। यदि नियम सरल हो जाएँ तो जनता सीधे काम करवा लेगी। फिर हमारा महत्व कहाँ रहेगा? इसलिए व्यवस्था को इतना जटिल बना दो कि आदमी जन्म प्रमाणपत्र बनवाते-बनवाते दर्शनशास्त्री हो जाए। Read more » सरकारी बाबू के रूप में कॉकरोच