लेख साहित्य स्वास्थ्य-योग योग सिंधू में संघ की जलधारा June 21, 2025 / June 22, 2025 by राकेश सैन | Leave a Comment राकेश सैन भारत की सनातन संस्कृति की तरह योग भी सनातन है, अविरल है। यह तो संभव है कि आकाश के तारे गिन लिए जाएं या धरती के कणों की सही-सही संख्या का पता लगा लिया जाए परन्तु योग के सिंधू में कितनी जलधाराएं मिलीं, कितने नद समाहित हुए इसका अनुमान लगाना भी असंभव है। […] Read more » Stream of Sangha in Yoga Sindhu योग सिंधू
कविता योग साधना June 21, 2025 / June 22, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment योग भगाए रोग सब, करता हमें निरोग।तन-मन में हो ताजगी, सुखद बने संयोग।। योग साधना जो करे, भागे उसके भूत।आलस रहते दूर सब, तन रहता मजबूत।। खुश रहते हर पल सदा, जीवन में वो लोग।आत्म और परमात्म का, सदा कराते योग।। योग करें तो रोग सब, भागे कोसों दूर।जीवन सुखदाई बने, चमके खुशियां नूर।। योगासन […] Read more » योग साधना
पुस्तक समीक्षा फैसला: लघुकथा नहीं, संवेदना का साहसी दस्तावेज़ June 21, 2025 / June 22, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment — डॉ. अमित तिवारी, समीक्षक एवं साहित्यकार “मैंने जो देखा, महसूस किया, और भीतर जिया — उसे ही इन पन्नों पर उतार दिया।” डॉ. सत्यवान सौरभ की यही पंक्ति उनके लघुकथा संग्रह “फैसला” की आत्मा बनकर उभरती है। जब समकालीन हिंदी साहित्य में लघुकथा को महज़ लघुता का पर्याय मान लिया गया है, ऐसे समय […] Read more » फैसला
लेख स्वास्थ्य-योग योग-क्रांति से नये मानव एवं नये विश्व की संरचना संभव June 20, 2025 / June 23, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस, 21 जून, 2025 पर विशेष– ललित गर्ग –हिंसा, युद्ध, आतंकवाद, आर्थिक प्रतिस्पर्धा के दौर में दुनिया शांति एवं अमन चाहती है और इसका सशक्त माध्यम है योग। इंसान से इंसान को जोड़ने, शांति का जीवन जीने एवं स्वस्थ जीवन के लिये भारतीय योग के महत्व को दुनिया ने स्वीकारा है। योग भारत […] Read more » Creation of new human and new world is possible through yoga revolution अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस
लेख वृद्ध आश्रमों की कारागार में पड़े ‘उग्रसेन’ और आज के कंस June 20, 2025 / June 25, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment पश्चिमी संस्कृति के घातक हमला ने भारत पर परमाणु बम से भी भयंकर प्रभाव डाला है। इस हमला के चलते भारत का सांस्कृतिक गौरव हमारे सामने भंग हो रहा है । मर्यादाएं टूट रही हैं । समाज में अब से पूर्व के प्रत्येक काल की अपेक्षा कहीं अधिक बेचैनी अनुभव की जा रही है। नारी […] Read more » वृद्ध आश्रम
लेख साहित्य एकात्म मानववाद का संदेशवाहक है योग June 20, 2025 / June 23, 2025 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ. शंकर सुवन सिंह मानव का प्रकृति से अटूट सम्बन्ध होता है। समाज प्रकृति की व्यवस्था पर टिका हुआ है। प्रकृति व मानव एक दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति के बिना मानव की परिकल्पना नहीं की जा सकती। प्रकृति दो शब्दों से मिलकर बनी है – प्र और कृति। प्र अर्थात प्रकृष्टि (श्रेष्ठ) और कृति […] Read more » एकात्म मानववाद योग
लेख स्वास्थ्य-योग आत्मा का परमात्मा से मिलन ही योग है June 20, 2025 / June 23, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यानी कि 21 जून 2025 को हम 11 वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने जा रहें हैं। पाठकों को बताता चलूं कि योग शब्द का अर्थ ‘एक्य’ या ‘एकत्व’ होता है, जो संस्कृत धातु ‘युज’ से निर्मित है। युज का अर्थ होता है ‘जोड़ना’। यानी योग का सीधा सा […] Read more » Yoga is the union of the soul with the divine आत्मा का परमात्मा से मिलन ही योग है
कविता कर्म June 18, 2025 / August 25, 2025 by डॉ राजपाल शर्मा 'राज' | Leave a Comment सौ वर्षों की बातें सोचें,तब तो व्यर्थ आज की बारिश।आज धरा का रूप अलग है,कल सूरज सब जल हर लेगा।मिट्टी तो कल सूख जाएगी,मेघ आज का क्या कर लेगा। ये किसलय जो नव रंगों के,कल को पीले हो जाएंगे।अगले वर्ष तक ये घन गर्जन,हर स्मृति से खो जाएंगे।नव मेघों का जिक्र रहेगा,सब जोहेंगे उनकी राहें […] Read more » कर्म
कविता लोरी June 16, 2025 / August 25, 2025 by डॉ राजपाल शर्मा 'राज' | Leave a Comment आ जा ओ निंदिया रानी, तुझको बुलाऊं।काहे को रूठी मुझ से, लोरी सुनाऊं। माता अब बुढ़ी मेरी, गा नहीं पायेगी।अपने आंचल में मुझको, कैसे सुलाएगी।तन्हा-तन्हा-सा मैं, सोया घबराऊं।काहे को रूठी मुझ से, लोरी सुनाऊं। पहले तो निंदिया कितनी, अच्छी होती थी तू।मेरे नन्हें नैनों में, अच्छे से सोती थी तू।बचपन के प्यारे सपने ला मैं […] Read more » लोरी
लेख वे स्त्रियां June 12, 2025 / June 12, 2025 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल वे सिर्फ स्त्रियां हैंनहीं वे जीवन की चकबेनियांवे जब चलती हैं तो गढ़ती हैंएक परिवार, एक समाज और एक परिवेशवे समर्पित और संघर्षशील हैंघर, परिवार, बच्चे और पति के लिएवे नींद में जागती हैं और बुनती हैं सपनेवे गतिशील हैं कुम्भार की चाक जैसीउठ खड़ी होती हैं भोर के साथऔर चलती हैं चाँद […] Read more » वे स्त्रियां
लेख समाज पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है June 12, 2025 / June 12, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस- 15 जून, 2025– ललित गर्ग- भारतीय संस्कृति में पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा माना गया है, पिता की धर्म है, पिता ही संबल है, पिता ही ताकत है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता […] Read more » अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस
लेख समाज मुद्दा: वैवाहिक रिश्तों की डोर, क्यों हो रही कमजोर? June 12, 2025 / June 12, 2025 by प्रदीप कुमार वर्मा | Leave a Comment महिलाओं ने अपने पतियों को उतारा मौत के घाट, बदले हुए सामाजिक परिवेश में अब पुरुष हो रहे प्रताड़ित प्रदीप कुमार वर्मा नीला ड्रम और सीमेंट। फ्रिज में डेड बॉडी। कांटेक्ट किलिंग। जानलेवा जहर का कहर। और शादी के नाम पर साजिश और धोखा। बीते दिनों में प्यार, दोस्ती और शादी का यही स्याह सच समाज में सामने आया है। सात वचनों के जरिए सात जन्म तक साथ निभाने के वादे अब टूट रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बीते जमाने में जहां महिला को सामाजिक तिरस्कार का शिकार होना पड़ता था। वहीं, इसके उलट अब महिलाओं के हाथों पुरुष प्रताड़ित हो रहे हैं और उनकी जान तक जा रही है। मुस्कान से लेकर सोनम की बेवफाई अब शादी के सपने देखने वाले लोगों को डरा रही है। यही वजह है कि अब समाज में इंसानी और सामाजिक रिश्तों को लेकर एक नई बहस छिढ़ गई है और यह बहस इस तौर पर भी प्रासंगिक है कि आखिर हम किस तरफ जा रहे हैं? मनोविज्ञान के जानकारों का कहना है कि सामाजिक ताने-बाने को बचाने की खातिर हमें इस समस्या का कारण और समाधान निकालना ही होगा। साल 2025 में अपराध की दुनिया में एक अजीब सा बदलाव देखने को मिला है। अब तक की कहानी में यही बात सामने आई थी कि किसी पति ने पत्नी को मौत के घाट उतार दिया या प्रेम संबंधों के चलते पति ने अपनी पत्नी को घर से निकाल दिया लेकिन इस बार कातिल का किरदार महिलाएं निभा रही हैं, वो भी अपने पतियों के खिलाफ। प्रेम, लालच, धोखा और साजिश की जाल में फंसकर पत्नियां वो हदें पार कर रही हैं जिनके बारे में सोचकर भी रूह कांप जाती है। ऐसे मामलों में ताजा उदाहरण राजा रघुवंशी हत्याकांड का है। मप्र के इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी की लाश 2 जून को मेघालय के मशहूर वेईसावडॉन्ग झरने के पास एक गहरी खाई में मिली थी। वह अपनी नई नवेली पत्नी सोनम के साथ हनीमून पर गए थे लेकिन इस सफर का अंत बेहद खौफनाक रहा। अब मेघालय पुलिस ने खुलासा किया है कि राजा की हत्या उसी की पत्नी सोनम ने अपने प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर करवाई थी। फिलहाल सोनम सहित चार कांटेक्ट किलर सलाखों के पीछे हैं। इसी साल ऐसे ही एक अन्य मामले में 3 मार्च को मेरठ की मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत की हत्या कर दी। सौरभ राजपूत अपनी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और 5 साल की बेटी के साथ मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना के इंदिरा नगर में रहता था। अपनी नौकरी के सिलसिले में लंदन में पोस्टिंग पर सौरभ कुछ दिन पहले ही सौरभ लंदन से मेरठ अपने घर आया था। इस दौरान मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सौरभ की हत्या कर उसके शव को कई टुकड़ों में काटा और अपना गुनाह छिपाने के लिए सौरभ के शव के टुकड़ों को नीले ड्रम में सीमेंट के साथ बंद कर दिया। मुस्कान की साजिश और सनकीपन यहीं समाप्त नहीं हुआ और इस गुनाह के बाद मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल छुट्टियों पर घूमने चले गए। पति के हत्या करने वाली मुस्कान जब अपने प्रेमी साहिल के साथ वापस लौटी, तब यह मामला खुला। यह अलग बात है कि आज दोनों आरोपी जेल में बंद हैं। उप्र के मेरठ में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया जिसमे रविता ने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर अपने पति अमित कुमार की गला घोंटकर हत्या कर दी और शव के पास सांप रख दिया ताकि यह हादसा लगे लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सच्चाई सामने ला दी। ऐसे ही एक मामले में रेलवे में काम करने वाले दीपक कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। उसकी पत्नी शिवानी ने दावा किया कि उसे हार्ट अटैक आया था लेकिन दीपक के परिवार ने पोस्टमार्टम की मांग की। जब जांच हुई तो पता चला कि दीपक की हत्या की गई थी और उसकी पत्नी ही आरोपी निकली। महिलाओं के अपराध की दुनिया में कदम रखने तथा अपने ही पति को अपने रास्ते का कांटा समझ उनकी हत्या करने का यह कोई अकेला मामला नहीं है। ऐसे कई और भी मामले हैं जिनमें महिलाओं ने अपने मर्यादा की सारी हद पर कर अपने पति को मौत की नींद सुला दिया। बदलते परिवेश में अपराध के इस बदले हुए चलन से समाज में वह व्याप्त है और अब लोग शादी के नाम पर डरने लगे हैं। एक जमाना था जब शादी को एक सुखद एवं समर्पित सामाजिक संस्कार माना जाता था। शादी के दौरान पति-पत्नी द्वारा सात वचनों की कसमें खाई जाती थी और यह संबंध मात्र एक जन्म का न होकर सात जन्म तक निभाए जाने का एक वादा होता था लेकिन बीते दिनों में यह वचन कहीं पीछे छूट रहे हैं और संबंध कहीं टूट रहे हैं। इस संबंध में मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि भौतिक संसाधनों की दौड़ तथा अपनी “ईगो” के चलते महिलाओं ने अपने जीवन साथी को ही मौत के घाट उतारने को इस सामाजिक बंधन से मुक्ति का जरिया बना लिया है। यही नहीं, कई बार ऐसा भी देखने में आया है कि अपने घर परिवार की “मान मर्यादा”, दहेज नहीं दे पाने के हालात तथा अन्य मामलों के चलते महिलाओं ने जबरन शादी तो कर ली और इसके बाद जब उन्हें जीवन की कड़वी सच्चाई का पता चला, तब उन्होंने ऐसे कदम उठाना ही ठीक समझा। इसके अलावा धन, संपदा और वैभव, सोशल स्टेटस तथा शिक्षा समेत अन्य मामलों में असमानता होने के चलते भी महिलाओं को अपना वैवाहिक जीवन रास नहीं आ रहा और वह इससे छुटकारा पाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है। महिलाओं के इस अपराधिक कृत्य में जादू टोना और तंत्र-मंत्र के भी कुछ संकेत सामने आए हैं। नतीजतन हिंदू धर्म में परमेश्वर कहे जाने वाले पति को ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान और समझ कर महिलाएं इन वारदातों को बेहिचक अंजाम दे रही है और इन्हें अपने इस कृत्य का कोई पछतावा भी नहीं है। उनके इस गुनाह में समाज के ही कुछ अन्य पुरुष जैसे प्रेमी, देवर, पिता तथा अन्य लोग भी उनकी मदद कर रहे हैं। इस नए चलन में सामाजिक तानेबाने को चूर-चूर करने के पीछे कहीं ना कहीं फिल्म टीवी सीरियल और सोशल मीडिया का भी हाथ माना जा रहा है। वर्तमान में समाज के इस नए चलन से समाजशास्त्री भी हैरान और परेशान है कि आखिर हम कहां जा रहे हैं? समाजशास्त्रियों और घर परिवार के लोगों को इस बात की चिंता है कि यह क्रम कब तक जारी रहेगा और इसका उपाय क्या है? इस साल के शुरुआत से सामने आई इस सामाजिक एवं अपराधिक समस्या के समाधान पर गौर करें तो पता चलता है कि दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा पर प्रभावी रोक और कानून की कड़ाई से पालना, विवाह से पूर्व वर एवं वधू का मनोवैज्ञानिक परीक्षण, दोनों की काउंसलिंग और आपसी रजामंदी तथा समाज में बराबरी का दर्जा और बेपनाह प्यार से इस प्रकार के कृत्य पर कुछ रोक लगाई जा सकती है। इसके साथ ही महिलाओं को घर-परिवार और समाज में अपेक्षित आजादी तथा सामाजिक कार्यों में बराबर की सहभागिता दी जानी चाहिए जिससे वे खुद को घर-परिवार का एक अनिवार्य हिस्सा मानें। इसके अलावा जादू-टोना तथा तंत्र-मंत्र के कथित प्रचलन पर भी जागरूकता के जरिए प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता है। कुल मिलाकर महिलाओं द्वारा अपने पति को रास्ते से हटाने के इस दौर में सबसे ज्यादा परेशानी इस बात को लेकर है कि परिवार और घर का आधार स्तंभ कहे जाने वाला पुरुष साथी ही जब मौत के साये के चलते भय से जब पीड़ित है तो मजबूत परिवार के साथ-साथ एक बेहतर समाज की कल्पना कैसे की जा सकती है? प्रदीप कुमार वर्मा Read more » Issue: Why is the bond of marital relationship becoming weak? Why is the bond of marital relationship becoming weak? महिलाओं ने अपने पतियों को उतारा मौत के घाट