कविता रोटी मिली पसीने की June 14, 2014 / June 16, 2014 by श्यामल सुमन | Leave a Comment -श्यामल सुमन- इक हिसाब है मेरी जिन्दगी सालों साल महीने की लेकिन वे दिन याद सभी जब रोटी मिली पसीने की लोग हजारों आसपास में कुछ अच्छे और बुरे अधिक इन लोगों में ही तलाश है नित नित नए नगीने की नेकी करने वाले अक्सर बैठे गुमशुम कोने में समाचार में तस्वीरों संग चर्चा आज […] Read more » कविता जीवन पर कविता हिन्दी कविता
कविता ईंधन का बवाल June 14, 2014 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment -प्रभुदयाल श्रीवास्तव- मुझको मिले मुसद्दीलाल, लगे सुनाने अपने हाल| बोले कल लखनऊ में था, अभी-अभी आया भोपाल| करते-करते बात तभी, आया उनमें तेज उबाल| इस उबाल की गरमी में , हमने तुरत गला ली दाल| हाय क्रोध की गरमी की, करते नहीं लोग पड़ताल| अगर पके इसमें भोजन, ईंधन का ना रहे बवाल| ————————————————————————– सबसे […] Read more » ईंधन का बवाल कविता सबसे अच्छा हिन्दी कविता
व्यंग्य पप्पू को अब भी समझ में नहीं आ रहा है… June 14, 2014 by वीरेंदर परिहार | 2 Comments on पप्पू को अब भी समझ में नहीं आ रहा है… -वीरेन्द्र सिंह परिहार- गत 12 जून को राहुल गांधी लोक सभा में तृणमूल कांग्रेस के दो सांसदों से यह पूछते देखे गये कि सोलहवीं लोकसभा में बीजेपी को इतनी भारी जीत क्यों मिली। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि भाजपा के उभार की वजह क्या है? साम्प्रदायिक माहौल के बावजूद उत्तर प्रदेश से एक भी […] Read more » पप्पू भारतीय राजनीति राहुल गांधी
व्यंग्य दान वही जो दाता बनाए …! June 13, 2014 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment -तारकेश कुमार ओझा- भारतीय संस्कृति में दान का चाहे जितना ही महत्व हो, लेकिन यह विडंबना ही है कि दान समर्थ की ही शोभा पाती है। मैं जिस जिले में रहता हूं, वहां एक शिक्षक महोदय एेसे थे, जिन्होंने अपने सेवा काल में एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली, औऱ रिटायर होने पर जीवनभर […] Read more » दान वही जो दाता बनाए बाबा रामदेव भारतीय संस्कृति व्यंग्य शिल्पा शेट्टी
कविता उदासी June 12, 2014 by बीनू भटनागर | Leave a Comment -बीनू भटनागर- मन उदास हो तो, चारों दिशायें भी, उदास नज़र आती है। बाहर चिलचिलाती धूप है, पर काले बादल, बारिश के नहीं, उदासी के, छा जाते है, चकाचौंध रौशनी भी, अंधेरों को पार, नहीं कर पाती है। ऐसे में, मन की ऊर्जा को, जगाने का कोई उपाय करूं, या वक्त पर छोड़ दूं कि […] Read more » उदासी उदासी कविता कविता हिन्दी कविता
व्यंग्य टीवी का लड्डू June 10, 2014 / June 11, 2014 by बीनू भटनागर | 4 Comments on टीवी का लड्डू -बीनू भटनागर- एक पुरानी कहावत है कि ‘शादी का लड्डू जो खाये वो भी पछताये और जो न खाये वो भी पछताये।‘ ये कहावत टी.वी. के साथ भी सही साबित होती है, ‘टी. वी. जो देखे वो भी पछताये जो न देखे वो भी पछताये।‘ बहुत से बुद्धिजीवी किस्म के लोग कहते हैं,वो टी.वी. बिलकुल […] Read more » टीवी का लड्डू टीवी व्यंग्य व्यंग्य
व्यंग्य पार्क की महफिल में June 9, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -विजय कुमार- बचपन में रामलीला देखने का चाव किसे नहीं होता ? हमारे गांव में भी जब रामलीला होती थी, तो हम शाम को ही मंच के आगे अपनी बोरी बिछा आते थे। एक बड़े से कागज पर अपने बाबाजी का नाम लिखकर उसे बोरी पर रखकर एक ईंट से दबा देते थे। फिर क्या […] Read more » पार्क की महफिल में रामलीला
कविता जगत मिलन June 7, 2014 by मिलन सिन्हा | Leave a Comment -मिलन सिन्हा- 1.जगत मिलन सख्त चेहरा था उसका पत्थर जैसा झांक कर देखा अंदर बच्चों सा दिल मोम सा पिघलने लगा संकल्प था उसके मन में सपना सबका पूरा करूँगा मिलन का वातावरण होगा हर होंठ पर स्मिति ला दूंगा शालीन बनकर साथ रहूँगा। 2.सार्थक कोशिश सागर तट पर अकेले बैठे दूर तक लहरों को […] Read more » अंतः मन जगत मिलन सार्थक कोशिश हिन्दी कविता
व्यंग्य दुखराम बाबा June 7, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -विजय कुमार- शर्मा जी के मोहल्ले में संकटमोचन हनुमान जी का एक प्राचीन सिद्ध मंदिर है। वहां प्रायः कथा, कीर्तन और सत्संग होते रहते हैं। पिछले दिनों भी वहां अयोध्या से एक प्रख्यात संत आये हुए थे। शर्मा जी के बहुत आग्रह पर मैं भी एक-दो बार वहां गया। एक दिन संत जी ने सत्संग […] Read more » दुखराम बाबा. हिन्दी व्यंग्य
लेख हिंदी साहित्य में बाजारवाद: चुनौतियां और समाधान June 7, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on हिंदी साहित्य में बाजारवाद: चुनौतियां और समाधान -डॉ. भगवान गव्हाडे- हिंदी साहित्येतिहास के हर काल में बाजार का वर्णन किसी न किसी रूप में होता रहा है । कबीर, सूर, तुलसी, मीरा आदि अनेक संत कवियों के काव्य में भी बाजार की उपस्थिति दर्ज की गई है । बाजार हमारी आवश्यकताओं की परिपूर्ति करता था क्योंकि बाजार और मेलों के साथ आनंद […] Read more » हिंदी साहित्य हिन्दी हिन्दी चुनौती
कविता मौत जीवन की सहेली June 7, 2014 by श्यामल सुमन | Leave a Comment -श्यामल सुमन- दूसरों की शर्त पे, जीने की आदत है नहीं टूट जाए दिल किसी का ऐसी फितरत है नहीं जाने अनजाने सभी को प्यार होना लाजिमी प्यार मिलते ही सिसकते ये हकीकत है नहीं आते ही घर, पूछ ले बस, हाल कैसा आपका क्यों बुजुर्गों ने कहा अब ऐसी किस्मत है नहीं आज बच्चों […] Read more » मौत मौत पर कविता हिन्दी कविता
कविता विलासिता की चाह ने किया प्रकृति से दूर June 5, 2014 by हिमकर श्याम | Leave a Comment -हिमकर श्याम- -पर्यावरणीय दोहे- वायु, जल और यह धरा, प्रदूषण से ग्रस्त। जीना दूभर हो गया, हर प्राणी है त्रस्त।। नष्ट हो रही संपदा, दोहन है भरपूर। विलासिता की चाह ने, किया प्रकृति से दूर।। जहर उगलती मोटरें, कोलाहल चहुंओर। हरपल पीछा कर रहे, हल्ला गुल्ला शोर।। आंगन की तुलसी कहां, दिखे नहीं अब नीम। […] Read more » पर्यावरण दोहे प्रकृति विलासिता की चाह ने किया प्रकृति से दूर