चुनाव व्यंग्य लोक सभा चुनाव की अनूठी उपलब्धि May 23, 2014 by बी एन गोयल | 1 Comment on लोक सभा चुनाव की अनूठी उपलब्धि -बी एन गोयल- हाल ही में संपन्न लोकसभा के चुनाव के बारें में चर्चा हो रही थी। इन चुनाव ने भारत के सामाजिक और आर्थिक पटल पर कुछ नयी उपलब्धियों दर्ज की हैं। कितने प्रत्याशी जीते, कितने हारे- इस पर चर्चा हर नुक्कड़ पर हो रही है लेकिन यह कोई विशेष बात नहीं है। कौन-कौन […] Read more » अमृता राय एनडी तिवारी चुनाव उपलब्धि दिग्विजय सिंह नारायण दत्त तिवारी लोकसभा चुनाव
कविता क्रोध May 23, 2014 by बीनू भटनागर | Leave a Comment -बीनू भटनागर- क्रोध क्या है? फट जाये तो ज्वालामुखी, दब जाये तो भूकंप! गल जाये वो बर्तन, जिसमें उसे रख दो, तेज़ाब की तरह! क्रोध इतना हो कि, वो जोश दिलादे! क्रोध इतना हो कि, न होश उड़ा दे! जो प्रेरणा बन जाये, उतना क्रोध ही भला। इसलिये, क्रोध की जड़ों को, पकड़ के, थोड़ा […] Read more » क्रोध क्रोध कविता क्रोध पर कविता
कविता हम नदी के दो किनारे May 22, 2014 by बीनू भटनागर | Leave a Comment -बीनू भटनागर- नदी के दो किनारों की तरह, मै और तुम साथ साथ हैं। हमारे बीच ये नदी तो, प्रवाह है, जीवन और विश्वास है। हमारे बीच इसका होना, हमें साथ रखता है, जोड़ता है, न कि दूर रखता है। मानो कि ये नदी हो ही नहीं, तो क्या किनारे होंगे! नदी पहाड़ पर हो […] Read more » कविता जीवन कविता
कविता कमल May 21, 2014 by बीनू भटनागर | Leave a Comment -बीनू भटनागर- कमल कुंज सरोवर में जब, ज्योतिपुंज रवि ने लहराया, शीतल समीर ने जल को छूकर, लहरों का इक जाल बिछाया। प्रातः की नौका विहार का, दृष्य ये अनुपम देखके हमने, नौका को कुछ तेज़ चलाया, दूर कमल के फूल खिले थे, उन तक हम न पहुंच सकते थे, दूर से देख कमलों पुष्पों […] Read more » lotus कमल कमल पर कविता
गजल मुझे समझ नहीं आता May 21, 2014 / May 22, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -आजाद दीपक- तुझसे क्या बातें करूं मुझे समझ नहीं आता, इश्क करूं या सवाल! मुझे समझ नहीं आता; मेरी कहानी जब लिखेगा वो ऊपर वाला, मिलन लिखेगा या जुदाई, मुझे समझ नहीं आता; सभी आशिकों के दिल पर इक नाम लिखा होता है, मेरे दिल पर क्या लिखा है, मुझे समझ नहीं आता; परिंदा होता […] Read more » गजल जीवन पर गजल
व्यंग्य वासना, संयम और गांधीजी May 19, 2014 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment -एलआर गांधी- बापू की अस्मत फिरंगियों के बाजार में नीलाम होने जा रही है। बापू यूं तो कई बार नीलाम हुए मगर इस बार की बात कुछ ‘निजी’ सी है… राज परिवार के गान्धियों की निज़ता का विशेष ख्याल रखने वाली गांधीवादी सरकार उदासीन सी है। नीलामी में बापू के तीन खत बिकेंगे… एक खत […] Read more » गांधीजी बापू बापू के आरोप महात्मा गांधी महात्मा गांधी के आरोप हरी लाल पर आरोप
कविता धर्म क्या है? May 15, 2014 / May 15, 2014 by बीनू भटनागर | Leave a Comment -बीनू भटनागर- धर्म क्या है? केवल संस्कृति! या फिर एक नज़रिया! या फिर जीने की कला! जो है जन्म से मिला। धर्म जो बांट दे, धर्म जो असहिष्णु हो, तो क्या होगा किसी का भला! व्रत उपवास ना करूं, मंदिरों में ना फिरूं, या पूजा पाठ ना करूं, तो क्या मैं हिंदू नहीं? रोज़ा नमाज़ […] Read more » धर्म धर्म कहता है धर्म पर कविता
कविता हरिद्वार और ऋषिकेश May 14, 2014 by बीनू भटनागर | Leave a Comment -बीनू भटनागर- उत्तराखण्ड का द्वार हरिद्वार, यहां आई गंगा पहाड़ों के पार। पहाड़ों के पार शहर ये सुन्दर। सुन्दर शहर उत्तराखण्ड का मान। मंसादेवी, चंडीदेवी के मन्दिर सुन्दर, मंदिर का रास्ता बन गया है सुगम, केबल कार की यात्रा अति मनोरम। हर की पौड़ी शहर का मान, गंगा की आरती, गंगा की भक्ति, ऊपरी गंगा […] Read more » ऋषिकेश हरिद्वार हरिद्वार ऋषिकेश हरिद्वार कविता
कविता गुलमोहर मुझे अच्छा लगने लगा है! May 12, 2014 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment -प्रवीण गुगनानी- गुलमोहर मुझे अच्छा लगने लगा है! उस दिन जो संगीत था, बड़ा ही मुखर-मुखर सा। उसमें लिखा था वो सन्देश, जिसे मैं पढ़ नहीं पाया था। तब जब वह समुद्री रेत पर लिखा हुआ था, कुछ ऊंगलिया थी थरथराती-कपकपातीं। जो चली थी उस रेत पर, चली थी, कई मीलों। लिखते हुए ऐसा कुछ, […] Read more » कविता कविता जीवन पर जीवन पर कविता
कविता ऊसर कटोरी, बंज़र थाली May 12, 2014 by जावेद उस्मानी | Leave a Comment -जावेद उस्मानी- ऊसर कटोरी, बंज़र थाली, बदतर बोली, जैसे गाली। सोचो मत बस बोले जाओ, जैसे भी हो, सत्ता कुंजी पाओ! दिवास्वप्न देखो और दिखलाओ, सच्चाई को सौ सौ पर्दो में छुपाओ। पहले उनसे सुनो स्वप्न साकार के, मखमल लिपटे सुन्दर भाषण। फिर देखो समझौतों के हज़ारों, नए पुराने आधे अधूरे आसन! सुनो फिर मज़बूरी […] Read more » कविता गरीबी पर कविता जीवन पर कविता
चुनाव व्यंग्य नमोनियां May 9, 2014 by बीनू भटनागर | 11 Comments on नमोनियां -बीनू भटनागर- बाज़ार में एक नई दवा आई है ‘Modicin’, यह B.J Pharma का उत्पाद है। कंपनी के CEO का दावा है कि इसे खाने से कोई भी रोग ठीक हो जाता है। विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि यह एक प्रकार का Steroid है, इससे तुरन्त कुछ लाभ दिख सकता है, पर नुकसान […] Read more » अरविंद केजरीवाल कांग्रेस नरेंद्र मोदी राजनीतिक व्यंग्य
कविता चूहे की सजा May 9, 2014 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment -प्रभुदयाल श्रीवास्तव- हाथीजी के न्यायालय में, एक मुकदमा आया। डाल हथकड़ी इक चूहे को, कोतवाल ले आया। बोला साहब इस चूहे ने, दस का नोट चुराया। किंतु रखा है कहां छुपाकर, अब तक नहीं बताया। सुबह शाम डंडे से मारा, पंखे से लटकाया। दिए बहुत झटके बिजली के, मुंह ना खुलवा पाया। चूहा बोला दया […] Read more » चूहा चूहे पर कविता