व्यंग्य साहित्य काले धंधों की सफेदी…!! February 15, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा बचपन में सुस्वादु भोजन की लालच में ऐसे कई आयोजनों में चले जाना होता था, जहां पेट भरने के बजाय उलटे जलालत झेलनी पड़ती थी। हालांकि इसके विपरीत अनुभव भी जीवन में होते रहे।मनमाफिक मेनू की क्षीण संभावना वाले अनेक आयोजनों में यह सोच कर गया कि बस लिफाफा थमा कर निकल […] Read more » काले धंधों की सफेदी...!!
व्यंग्य साहित्य अबके नहीं आ पाऊंगा यार February 13, 2016 by अशोक गौतम | 2 Comments on अबके नहीं आ पाऊंगा यार बाजार द्वारा हर मौसम की कमी पूरी किए जाने के बाद भी पता नहीं वसंत का कई दिनों से वैसे ही इंतजार क्यों कर रहा था जैसे कोई पागल कवि कई दिनों से अपनी भेजी रचना की स्वीकृति आने का इंतजार करता है। दरवाजे पर जरा सी भी आहट होती है तो कवि को लगता […] Read more » Featured
व्यंग्य हर हाइनिसेस बर्थडे February 9, 2016 by अशोक गौतम | 1 Comment on हर हाइनिसेस बर्थडे अचानक दोपहर बाद आफिस में नोटिस सर्कुलेट हुआ कि दो दिन बाद यानि रविवार को मैडम के कुत्ते का बर्थडे है और इस अवसर पर स्टाफ के सारे सदस्य सादर आमंत्रित हैं । यह नोटिस सर्कुलेट होते ही पूरे आफिस में खलबली मच गई। किसीको पता ही नहीं था मैडम कुत्ता प्रेमी भी हैं ,वे […] Read more » Featured हर हाइनिसेस बर्थडे
व्यंग्य साहित्य साहित्य में ‘ मीट ‘…!! February 7, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा साहित्य समारोह- उत्सव या सम्मेलन की बात होने पर मुझे लगता था इस बहाने शब्दकर्मियों व साहित्य साधकों को उचित मंच मिलता होगा। एक ऐसा स्थान जहां बड़ी संख्या में साहित्य साधक इकट्ठे होकर साहित्य साधना पर वार्तालाप करते होंगे। छात्र जीवन में एक बड़े पुस्तक मेले में जाने का अवसर मिलने […] Read more » Featured साहित्य में ' मीट '...!!
व्यंग्य पुत्तन चाचा का पश्चाताप…!! February 1, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा जीवन संध्या पर पुत्तन चाचा पश्चाताप की आग में झुलस रहे हैं। कुनबे का मुखिया होने से घर – परिवार में उनकी मर्जी के बगैर कभी कोई पत्ता न हिलता था , न अब हिलता है। चचा को गम है कि उन्होंने कुछ गलत फेसले किए। परिवार का होनहार पप्पू इंजीनियरिंग की […] Read more » पुत्तन चाचा का पश्चाताप...!!
व्यंग्य साहित्य पता नहीं साहब…. January 26, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on पता नहीं साहब…. बचपन में एक कहानी पढ़ी थी। शायद आपने भी पढ़ी या सुनी होगी। कहानी इस प्रकार है। एक विदेशी पर्यटक भारत घूमने के लिए आया। दिल्ली में उसने लालकिला देखकर तांगे वाले से पूछा, ‘‘इसे किसने बनाया ?’’ तांगे वाले ने कहा, ‘‘पता नहीं साहब।’’ इसके बाद वह कुतुबमीनार और बिड़ला मंदिर देखने गया। […] Read more » पता नहीं साहब....
व्यंग्य साहित्य ‘सर ‘ का डर …!! January 26, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | 1 Comment on ‘सर ‘ का डर …!! जल्दी -जल्दी खाना खा… डर लगे तो गाना गा…। तब हनुमान चालिसा के बाद डर दूर करने का यही सबसे आसान तरीका माना जाता था।क्योंकि गांव – देहात की कौन कहे, शहरों में भी बिजली की सुविधा खुशनसीबों को ही हासिल थी। लिहाजा शाम ढलने के बाद शहर के शहर अंधेरे के आगोश में चले […] Read more » 'सर ' का डर ...!!
राजनीति व्यंग्य खोई ताकत की तलाश में January 18, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment आप इस शीर्षक से भ्रमित न हों। मैं किसी खानदानी शफाखाने का एजेंट नहीं हूं, जो खोई ताकत की कुछ दिन या कुछ महीनों में वापसी का दावा करूं। हुआ यों कि कल शर्मा जी पार्क में आये और सबको मिठाई बांटने लगे। पूछने पर बोले कि राहुल बाबा नये वर्ष की छुट्टी विदेश में […] Read more » Featured satire on rahul gandhi's foreign trip खोई ताकत की तलाश में
व्यंग्य दुनिया के रिश्वतखोरों! एक हो January 12, 2016 by अशोक मिश्र | Leave a Comment अशोक मिश्र काफी दिनों बाद उस्ताद गुनाहगार से भेट नहीं हुई थी। सोचा कि उनसे मुलाकात कर लिया जाए। सो, एक दिन उनके दौलतखाने पर पहुंच गया। हां, दौलतखाना शब्द पर याद आया। लखनऊ की नजाकत-नफासत के किस्से तो सभी जानते हैं, लेकिन दौलतखाना और गरीब खाना शब्द का एक अजीब घालमेल है। लखनउवा जब […] Read more » रिश्वतखोरों
राजनीति व्यंग्य साहित्य किस्सा-ए-बुलेट ट्रेन January 7, 2016 by शिवेन्दु राय | 2 Comments on किस्सा-ए-बुलेट ट्रेन शिवेन्दु राय मोदी सरकार के आने से अच्छी बात देश में यह हुई है कि विश्व के सभी देश मान गए हैं कि व्यापार के अनन्त अवसर यहां है | इसी बात को लेकर उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव में चर्चा हो रही थी | आखिर क्या बात है कि जापान का प्रधानमंत्री […] Read more » satire on bullet train किस्सा-ए-बुलेट ट्रेन
व्यंग्य साहित्य ‘प्रभु जी! यात्रियों की आदत मत बिगाडि़ए… January 4, 2016 by अशोक मिश्र | Leave a Comment अशोक मिश्र हद हो गई यार! हमारे रेलमंत्री को लोगों ने क्या पैंट्री कार का इंचार्ज, गब्बर सिंह या सखी हातिमताई समझ रखा है? जिसे देखो, वही ट्वीट कर रहा है, ‘प्रभु जी! मैं फलां गाड़ी से सफर कर रही हूं। गाड़ी में मेरे बच्चे ने गंदगी फैला दी है। जरा अपने किसी सफाई कर्मचारी […] Read more » 'प्रभु जी! यात्रियों की आदत मत बिगाडि़ए... prabhu ji dont spoil the habits of indians प्रभु यात्रियों की आदत
राजनीति व्यंग्य मुखर – मुखिया, मजबूर मार्गदर्शक …!! January 1, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तेज – तर्रार उदीयमान नेताजी का परिवार वैसे था तो हर तरफ से खुशहाल, लेकिन गांव के पट्टीदार की नापाक हरकतें समूचे कुनबे को सांसत में डाले था। कभी गाय – बैल के खेत में घुस जाने को लेकर तो कभी सिंचाई का पानी रोक लेने आदि मुद्दे पर पटीदार तनाव पैदा करते रहते। इन […] Read more » Featured मजबूर मार्गदर्शक ...!! मुखर - मुखिया