व्यंग्य व्यंग्य: गधों ने घास खाना बन्द कर दिया है August 3, 2012 / August 3, 2012 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे शिक्षा ही अवसरवादी हो गर्इ है । मैं अपने घर में बैठा था कि हमारे घर के तथा कथित नीति निर्धारक चाचा चतरू ने दरवाजे पर आकर नोकिगं की । मै उठता उससे पहले ही मेरी बेगम ने उठ कर दरवाजा खोला और आदब की पाजिषन में आते हुए उनका स्वागत सत्कार कर […] Read more »
व्यंग्य उन्होंने तय कर लिया है July 23, 2012 by विजय कुमार | 2 Comments on उन्होंने तय कर लिया है विजय कुमार अभी सुबह ठीक से हुई भी नहीं थी। प्रातःकालीन चाय का तीसरा कप मेरे हाथ में था कि शर्मा जी टपक पड़े। उनके एक हाथ में मिठाई का डिब्बा और दूसरे में बहुत भारी माला थी। कलफदार धुले हुए कपड़े पहने शर्मा जी के चेहरे से प्रसन्नता ऐसे फूट रही थी, मानो बिना […] Read more »
व्यंग्य आह रे आखर मार! July 21, 2012 by अशोक गौतम | Leave a Comment अशोक गौतम अब भार्इ साहब! आप से छुपाना क्या! जबसे सोचने समझने लायक हुए हैं , हर काम नंबर दो का शान से कालर खड़े कर करते आ रहे हैं। खुल कर करते आ रहे हैं । ये छुपन छुपार्इ का खेल हमें शुरू से ही कतर्इ पसंद नहीं! आप तो जानते ही हैं कि […] Read more »
व्यंग्य एलियंस से भरा है अपना आकाश July 20, 2012 / July 20, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य हाजिर हैं हर किस्म के नायाब एलियंस पूरी दुनिया एलियंस आने अन्तरिक्ष, दूर ग्रहों से आने वाले यात्रियों की खोज-पड़ताल में लगी हुई है। विभिन्न ग्रहों-उपग्रहों से धरती के किसी भी कोने में सायास, अनायास या दुर्घटनास्वरूप आ धमकने वाले एलियंस वैज्ञानिकों के साथ ही आम धरतीवासियों के लिए जिज्ञासाओं के महानतम […] Read more »
व्यंग्य हाय हाय ये मज़बूरी … July 20, 2012 / July 20, 2012 by टी के मारवाह | Leave a Comment टी.के.मरवाह यूँ तो तकरीबन सवा अरब की आबादी वाले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र जिसे हिन्दोस्थान कहा जाता हे यहाँ हर दिन किसी न किसी बात पर कहीं न कहीं बुधिजीविओं के रूप मैं रोजाना चीखना चिल्लाना हम ये कर देंगे ,हम वो कर देंगे हम अपना अधिकार ले कर रहेंगे ,तानाशाही नहीं चलेगी वगेरह […] Read more » राहुल गांधी
मीडिया व्यंग्य फेसबुक ……दुनिया की सबसे बड़ी मंडी July 17, 2012 / July 17, 2012 by टी के मारवाह | Leave a Comment टी के मारवाह यूँ तो ये पूरी दुनिया ही मंडियों से अटी पड़ी हे सब कुछ बिकाऊ ,पर आज कल एक मंडी पुरी दुनिया मैं आज सबसे ज्यादा चल रही हे और बहुत जोरों और शोरों मैं हे |इस मंडी ने आज हमारा सामाजिक ढांचा ही बदल के रख दिया हे ,दिन बाद मैं शुरू […] Read more » face book
व्यंग्य फंस गए चोर वर्ना वंस-मोर July 15, 2012 / July 15, 2012 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment एल.आर.गाँधी सत्ता के भद्रलोक से दो भद्र पुरुषों की आज एक साथ विदाई ,कारण लगभग एक ही …. बस एक का तीर निशाने पर रहा और दूसरा चूक गया…..लिहाज़ा एक अर्श पर तो दूसरा फर्श पर. … जी हाँ ये हैं कांग्रेस भद्रलोक के दो खिलाडी लगभग एक ही आयु के . एक बंगाल से […] Read more » sattire on pranav mukherjee
व्यंग्य करामाती होते हैं कुत्ते July 12, 2012 / July 12, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य दुमहिलाऊ हों, चाहें भौंकने वाले पूरी दुनिया में कुत्तों का अपना अलग ही संसार है। जात-जात के कुत्ते संसार भर में हर कहीं पाए जाते हैं। ये कुत्ते ही हैं जो महाभारत काल से युधिष्ठिर के साथ जाने का दम-खम पा गए हैं और आज भी हर कहीं बड़े-बड़े लोगों के साथ […] Read more » dogs are wonderful करामाती होते हैं कुत्ते
व्यंग्य वर्तमान व्यवस्था में हनुमान जी को भी रिश्वत देना पड़ेगी July 9, 2012 / July 13, 2012 by श्रीराम तिवारी | 4 Comments on वर्तमान व्यवस्था में हनुमान जी को भी रिश्वत देना पड़ेगी श्रीराम तिवारी हमारे अधिकारी मित्र को हनुमानजी ने सपने में दर्शन दिए। उसने हनुमानजी से यह इच्छा व्यक्त की त्रेता में आपने जो कारनामे किये थे उनमें से एक आध ’अब’’ करके दिखाए। हनुमानजी ने सपने में संजीविनी बूटी लाकर दिखा दी। अब भक्त ने इच्छा जाहिर की कि हनुमानजी आप कलयुग वाला कोई काम […] Read more » Corruption in India
व्यंग्य अब सब हो चुके हैं चार्जेबल July 8, 2012 / July 8, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment जितनी भरी चाभी, उतना चले खिलौना डॉ. दीपक आचार्य अब जमाना सेल्फ चार्ज या सेल्फ लर्निंग का नहीं है बल्कि अब जो कुछ होता है सब चार्जेबल है। चार्ज नहीं तो कुछ नहीं। चार्ज हुआ तो चलेगा और नहीं हुआ तो मरा या अधमरा बेदम पड़ा रहेगा। जमाने की हवाओं को देख लगता है […] Read more » psycophant
व्यंग्य व्यंग्य बाण : इतनी सुरक्षा और कहां ? June 18, 2012 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार शर्मा जी के मौहल्ले में जब एक ही महीने में तीसरी बार चोरी हो गयी, तो लोगों के धैर्य का बांध टूट गया। कोई इसे हाइटैक चोरों की चालाकी बता रहा था, तो कोई पुलिस से मिलीभगत। कुछ इसे मोहल्ले वालों की लापरवाही बताकर मामला रफादफा करना चाहते थे; पर काफी सिरखपाई के […] Read more »
व्यंग्य मजे मूर्ख बने रहने के May 31, 2012 / May 31, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment मूर्ख होना हमारा ज्न्म सिद्ध अधिकार है और जो लोग इस अधिकार से वाकिफ हैं वे जन्म से ही मूर्ख होते हैं|खुदा की मार से मैं पैदाइशी मूर्ख नहीं हुआ|मैं बुद्धीमान हूं यह बात मुझे तब मालूम पड़ी जब मेरे स्कूल टीचर ने मेरे पिताजी एवं माताजी को बताया कि लड़का इंटेलीजेंट है|क्या बताऊं आपको […] Read more » sattire by prabhudayal srivastav मजे मूर्ख बने रहने के