व्यंग्य गणेश जी गाँधीवादी हैं ……………… January 30, 2012 / January 30, 2012 by अनुराग अनंत | 2 Comments on गणेश जी गाँधीवादी हैं ……………… चुनावी कम्प्यूटर में चुनाव आयोग का कड़ाई वायरस क्या आया सारा आपरेटिंग सिस्टम ही करप्ट हो गया कोई विंडो खुली नज़र नहीं आ रही की जिससे अन्दर बाहर किया जा सके | बेचारी चुनावी इंजीनियरिंग की वाट ! लगी पड़ी है | शराब,गांजा,भांग,रूपए,पैसे,का सॉफ्टवेयर,और लाठी-डंडे-बन्दूकी बाहुबल का हार्डवेयर ठीक वैसे ही बेकार पड़ा है […] Read more » Ganesh ji is gandhian गणेश जी गाँधीवादी हैं
खेल जगत व्यंग्य साहित्य व्यंग्य ; क्रिकेट के नायक और खलनायक – राजकुमार साहू January 30, 2012 / January 29, 2012 by राजकुमार साहू | Leave a Comment इतना तो है, जब हम अच्छा करते हैं तो नायक होते हैं। नायक का पात्र ही लोगों को रिझाने वाला होता है। जब नायक के दिन फिरे रहते हैं तो उन पर ऊंगली नहीं उठती और जो लोग ऊंगली उठाते हैं, उनकी ऊंगली, उनके चाहने वाले तोड़ देते हैं। नायक की दास्तान अभी की नहीं […] Read more » Cricket vyangya क्रिकेट के नायक और खलनायक व्यंग्य
कविता व्यंग्य साहित्य व्यंग्य कविता ; काम वालियां – प्रभुदयाल श्रीवास्तव January 30, 2012 / January 29, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment काम वालियां नहीं कामपर बर्तन वाली दो दिन से आई इसी बात पर पति देव पर पत्नि चिल्लाई काम वालियां कभी समय पर अब न आ पातीं न ही ना आने का कारण खुलकर बतलातीं बिना बाइयों के घर तो कूड़ाघर हो जाता बड़ी देर से कठिनाई से सूर्य निकल पाता छोटी बच्ची गिरी फिसल […] Read more » poem vyangya काम वालियां व्यंग्य कविता
चुनाव व्यंग्य वादा तेरा वादा (चुनावी व्यंग-एक सच्ची घटना पर आधारित) January 30, 2012 / January 29, 2012 by संदीप ठाकुर | Leave a Comment संदीप ठाकुर चुनावी मुद्दों के बाद अब लोक-लुभावन वादों से, पूरे प्रदेश में सियासी हलचल मची हुई है. किस पार्टी के मेनीफेस्टो कौन सा चुनावी आफर निकल कर आ जाय किसी कुछ पता नही. कोई साईकिल बाँट रहा है तो कोई टेबलेट व लैपटॉप देने की बात कर रहा है. कहीं शिक्षा मुफ्त की जा […] Read more » election vyangya चुनावी व्यंग वादा तेरा वादा
व्यंग्य व्यंग्य – घोषणा ही तो है… January 29, 2012 / January 29, 2012 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू मैं बचपन से ही ‘घोषणा’ के बारे में सुनते आ रहा हूं, परंतु यह पूरे होते हैं, पता नहीं। इतना समझ में आता है कि ‘घोषणा’ इसलिए किए जाते हैं कि उसे पूरे करने का झंझट ही नहीं रहता। चुनावी घोषणा की बिसात ही अलग है। चुनाव के समय जो मन में आए, […] Read more »
व्यंग्य साहित्य अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!! January 28, 2012 / January 30, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | 1 Comment on अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!! कुछ दिन पहले तक मेरी हालत बहुत खराब थी। मुझे कहीं से कोई भी अटेंशन नहीं मिल रही थी। हर कोई मुझे बस टेंशन देकर चला जाता था, जैसे मैं रास्ते का भिखारी हूँ और मुझे कोई भी भीख में टेंशन दे देता था। मैं बहुत दुखी था। कोई रास्ता नहीं दिखाई देता था। मुझे […] Read more » vyangya अटेंशन व्यंग्य कथा
व्यंग्य रामभरोसे नगर की रामलीला ………एक व्यंग ………… January 23, 2012 / January 23, 2012 by अनुराग अनंत | Leave a Comment रामभरोसे बड़े ही भरोसे के आदमी है इसलिए नहीं कि उनका नाम रामभरोसे है बल्कि इसलिए कि वो रामभरोसे नगर के निवासी है,राम भरोसे नगर की खास बात ये है कि वहां के सभी निवासियों का नाम रामभरोसे है और नेताओं का नाम राम है,रामभरोसे नगर के सभी निवासियों का नाम रामभरोसे इसलिए है क्योंकि […] Read more »
व्यंग्य यत्र तत्र हाथी सर्वत्र! January 13, 2012 / January 13, 2012 by अशोक गौतम | Leave a Comment अशोक गौतम विपक्ष के आरोप पर चुनाव आयोग ने हर चौक पर विराजमान को ढकने के आदेश किए तो हाथियों के संगठन के प्रधान ने देश के तमाम हाथियों को संबोधित करते कहा,‘ हे मेरे देश के तमाम हाथियो! जरा चुनाव आयोग से पूछो कि हमारा चुनाव से क्या लेना देना! हम तो बस हाथी […] Read more » Elephant satire by Ashok Gautam हाथी
व्यंग्य चुनाव आयोग का हास्यास्पद फैसला January 12, 2012 / January 12, 2012 by पवन कुमार अरविन्द | 1 Comment on चुनाव आयोग का हास्यास्पद फैसला पवन कुमार अरविंद बसपा सुप्रीमो कुमारी मायावती और हाथी की मूर्तियों को ढंकवाने के बाद चुनाव आयोग समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल का क्या करेगा? साइकिल आमजन की सवारी है, जो हर नगर, ग्राम, डगर-डगर दिख जायेगी। तो क्या चुनाव सम्पन्न होने तक लोग साइकिल की सवारी करना छोड़ दें? साइकिल के दुकानदारों को […] Read more » Election Commission of India mayawati and elephant चुनाव आयोग का हास्यास्पद फैसला मायावती और हाथी की मूर्तियों
व्यंग्य लोकपाल या लोक पा(ग)ल January 11, 2012 / January 12, 2012 by अविनाश वाचस्पति | 1 Comment on लोकपाल या लोक पा(ग)ल अविनाश वाचस्पति लोकपाल मतलब नेता। चौंकिए मत जो लोक को पाले वह नेता ही हो सकता है। अरे भाई इसमें इतनी हैरानी की क्या बात है, क्योंकि लोक हुआ आम आदमी और आम आदमी को पालता है नेता। चाहे यह नेताओं की गलतफहमी ही क्यों न हो, परंतु किसी हद तक तो ठीक बैठ रही […] Read more » Lokpal Bill reservation in lokpal bill लोकपाल
व्यंग्य आधार से निराधार तक January 10, 2012 / January 10, 2012 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार हर व्यक्ति के जीवन में छात्र जीवन का बड़ा महत्व है। इस समय एक दौर ऐसा भी आता है, जब लोग प्रायः कविहृदय हो जाते हैं। डायरी में गुलाब का फूल रखने से लेकर रोमांटिक शेर लिखना तक उन दिनों आम बात होती है। कविता और शेरो शायरी का रोग बढ़ जाए, तो […] Read more » aadhar card आधार
व्यंग्य सदाखुश बाबू January 10, 2012 / January 10, 2012 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार शर्मा जी में यों तो कई विशेषताएं हैं; पर सबसे बड़ी विशेषता है कि वे स्वयं भी खुश रहते हैं और बाकी लोगों को भी खुश रखते हैं। अतः लोग उन्हें सदाखुश बाबू भी कहते हैं। जिस दिन विश्व की जनसंख्या सात अरब हुई, उससे अगले दिन मिले, तो खुशी मानो गिलास से […] Read more » sadakhush babu story by vijay kumar सदाखुश बाबू