व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/भ्रष्टाचार से लड़ने में कमजोरी बहुत आ जाती है August 28, 2011 / December 7, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य/भ्रष्टाचार से लड़ने में कमजोरी बहुत आ जाती है पंडित सुरेश नीरव भ्रष्टाचार से लड़ने में कमजोरी बहुत आ जाती है। इसीलिए तो हमारे राजनेता भ्रष्टाचार से बच निकलने में ही भलाई समझते हैं और पिछले 64 साल से इससे बचते ही नहीं चले आ रहे हैं बल्कि उससे दोस्ती का रिश्ता बनाकर उसे फलने और खुद के फूलने का मौका निकालते रहे हैं। […] Read more » भ्रष्टाचार
व्यंग्य व्यंग्य/ प्रॉडक्शन ऑन प्रोग्रेस! August 26, 2011 / December 7, 2011 by अशोक गौतम | Leave a Comment अशोक गौतम ब्रह्मलोक में सदियों से मानव बनाने का काम लार्ज स्केल पर चला हुआ था, चौबीसों घंटे, शिफ्टों पर शिफ्टों में! पर फिर भी ब्रह्मा अपने इकलौते मांगी को मानवों की डिमांड को पूरी नहीं कर पा रहे थे। देश में मानवों की मांग आपूर्ति से अधिक देखते हुए बीच बीच में ब्रह्मा चोरी […] Read more »
विविधा व्यंग्य व्यंग / आवाज दो, हम एक हैं August 24, 2011 / December 7, 2011 by विजय कुमार | 1 Comment on व्यंग / आवाज दो, हम एक हैं विजय कुमार यों तो भारत की राजधानी दिल्ली में नार्थ और साउथ ब्लाक मानी जाती हैं; पर अन्ना हजारे के आंदोलन के कारण पिछले कुछ दिनों से वह रामलीला मैदान में पहुंच गयी है। नार्थ और साउथ ब्लाक में बड़े अधिकारी और मंत्री बैठते हैं। आम आदमी का प्रवेश वहां वर्जित है; पर रामलीला मैदान […] Read more » Anna Hazare अन्ना हजारे भ्रष्टाचार
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/ भ्रष्टाचार की खैर नहीं August 22, 2011 / December 7, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव अगर अन्नाजी का जादू चल गया तो देख लेना भारत में एक दिन ऐसा भी आएगा कि भ्रष्टाचार की बातें सिर्फ कहानी-किस्सों में पढ़ने को ही रह जाएंगी। बच्चे परी कथाओं की तरह पढ़ा करेंगे कि बहुत समय पहले भारत में भ्रष्टाचार नाम का एक दैत्य हुआ करता था। जिसने बड़ा उत्पात […] Read more » Anna Hazare अन्ना हजारे भ्रष्टाचार
व्यंग्य देशवासियों के नाम पैगाम! August 10, 2011 / December 7, 2011 by अशोक गौतम | Leave a Comment हे मेरे देश के बेगाने देशवासियो! लो आज फिर कम्बख्त स्वतंत्रता दिवस आ गया। सभी किसी न किसी ऐब के गुलाम और वाह रे स्वतंत्रता दिवस! कहीं कोई स्वतंत्र नहीं। सभी एक दूसरे के तलवे चाटते हुए। जी हजूरी कर अपनी अपनी जिंदगी की खाई पाटते हुए। विवशता है कि इस अवसर पर मुझे कुछ […] Read more » Indians देशवासियों के नाम पैगाम
व्यंग्य भ्रष्टाचार है कि मुरब्बा August 5, 2011 / December 7, 2011 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू देखो भाई, यदि आपने भ्रष्टाचार नहीं किया हो तो लगे हाथ यह सौभाग्य पा लो और बहती गंगा में हाथ धो लो। फिर कहीं समय निकल गया तो फिर लौटकर नहीं आने वाला है। भ्रष्टाचार की अभी खुली छूट है, जब जैसा चाहो, कर सकते हो। बाद में न जाने मौका मिलेगा कि नहीं, […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
व्यंग्य व्यंग्य – अनजाने चेहरों की दोस्ती August 4, 2011 / December 7, 2011 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू यह बात अधिकतर कही जाती है कि एक सच्चा दोस्त, सैकड़ों-हजारों राह चलते दोस्तों के बराबर होता है। यह उक्ति, न जाने कितने बरसों से हम सब के दिलो-दिमाग में छाई हुई है। दोस्ती की मिसाल के कई किस्से वैसे प्रचलित हैं, चाहे वह फिल्म ‘शोले’ के जय-वीरू हों या फिर धरम-वीर। साथ […] Read more » vyangya दोस्ती
व्यंग्य कृषि व औद्योगिक नीति, बढेगा टकराव August 1, 2011 / December 7, 2011 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और व्यापक धान पैदावार के लिए अभी हाल ही में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने ॔छत्तीसगढ़ सरकार’ को सम्मानित किया है। निचत ही यह कृषि क्षेत्र में दो में एक अलग पहचान बनाने वाले राज्य के लिए गौरव की बात है, मगर प्रदो के कई […] Read more » Agricultural and Industrial Policy कृषि व औद्योगिक नीति बढेगा टकराव
व्यंग्य मिस हिडंबा और हिंदी July 30, 2011 / December 7, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव पता नहीं किस एंग्रीमैन दुर्वासा के शाप से सौभाग्यभक्षिणी कर्कशा कुमारी हिडंबा को कविता लिखने का दंड मिला था। यह पता तो नहीं चला मगर उनके इस गोपनीय दंड के कारण सार्वजनिकरूप से शहर का संपूर्ण साहित्य-जगत दंडकारण्य जरूर बन गया था। कविता के आर्यजनों ने इस कवयित्री के कोप से भयभीत […] Read more » Durvasa दुर्वासा मिस हिडंबा और हिंदी
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/ मदर भैंसलो पब्लिक स्कूल July 27, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य/ मदर भैंसलो पब्लिक स्कूल पंडित सुरेश नीरव शिक्षा और भैंस का संबंध पुराणकाल से ही फसल और खाद तथा सूप और सलाद की तरह घनिष्ठ रहा है। ये बात और है कि हमारा अपना व्यक्तिगत संबंध शिक्षा के साथ वैसा ही है जैसा कि भट्टा-पारसौल के किसानों का संबंध बिल्डरों के साथ। अगर ज़मीन किसान की जायदाद है तो […] Read more » vyangya व्यंग्य
व्यंग्य व्यंग्य : नेता जी का डी.एन.ए July 27, 2011 / July 27, 2011 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार कम उम्र में ही घरेलू झंझटों में उलझ जाने के कारण मैं अधिक पढ़ नहीं सका, इसलिए मैं डी.एन.ए का अर्थ दीनानाथ अग्रवाल या दयानंद ‘अलबेला’ ही समझता था; पर पिछले दिनों अखबार में पढ़ा कि वैज्ञानिकों ने आलू के डी.एन.ए की खोज कर ली है। मुझे बहुत गुस्सा आया। क्या जरूरत थी […] Read more »
व्यंग्य पुस्तक लोकार्पण संस्कार July 25, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव किताब से जिसका इतना-सा भी संबंध हो जितना कि एक बच्चे का चूसनी से तो वह समझदार व्यक्ति पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम से जरूर ही परिचित होगा। भले ही वह इस कार्यक्रम की बारीकियां न जानता हो। यह कार्यक्रम लेखक क्यों करता है और कैसे –कैसे करता है इसकी केमिस्ट्री का उसे […] Read more » Book - release function पुस्तक लोकार्पण संस्कार पुस्तक-लोकार्पण समारोह