अस्पताल में भ्रष्टाचार एक बदनुमा दाग 

Posted On by & filed under विविधा

– ललित गर्ग – आजकल देश में भ्रष्टाचार सर्वत्र व्याप्त है। एक तरह से भ्रष्टाचार शिष्टाचार हो गया है। ऐसे-ऐसे घोटाले, काण्ड एवं भ्रष्टाचार के किस्से उद्घाटित हो रहे हैं जिन्हें सुनकर एवं देखकर शर्मसार हो जाते हैं। समानांतर काली अर्थव्यवस्था इतनी प्रभावी है कि वह कुछ भी बदल सकती है, बना सकती है और… Read more »

भ्रष्टाचार, हमारा मूलभूत अधिकार

Posted On by & filed under व्यंग्य

बुजुर्गों का कहना है कि बेटे कब बड़े और बेटियां कब जवान हो जाती हैं, इसका पता ही नहीं लगता। यही हाल हमारे महान भारत देश का है। कब, किस दिशा में हम कितना आगे बढ़ जाएंगे, कहना कठिन है। भारत में आजादी के बाद से ही उच्च शिक्षा पर बहुत जोर दिया गया है।… Read more »

अन्यथा सारी प्रगति को भ्रष्टाचार खा जाएगा

Posted On by & filed under राजनीति

ललित गर्ग देश में भ्रष्टाचार पर जब भी चर्चा होती है तो राजनीति को निशाना बनाया जाता है। आजादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी हम यह तय नहीं कर पाये कि भ्रष्टाचार को शक्तिशाली बनाने में राजनेताओं का बड़ा हाथ है या प्रशासनिक अधिकारियों का? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भ्रष्टाचार को समाप्त करने… Read more »

भ्रष्टाचार मिटाने को संकल्पित नरेन्द्र मोदी

Posted On by & filed under राजनीति

सुरेश हिन्दुस्थानी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार के बारे में एक बार फिर से कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा है कि भ्रष्टाचार करने वाले को छोड़ा नहीं जाएगा, मेरी कोई रिश्तेदार नहीं है। प्रधानमंत्री इस बात को भली भांति जानते हैं कि भ्रष्टाचार करने वाले रिश्तेदारों को राजनेताओं द्वारा हमेशा बचाने… Read more »

जिम्मेदार चेहरों पर कालिख का लगना

Posted On by & filed under राजनीति

केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टाचार के और भी गंभीर आरोप हैं। उनपर निजी घूसखोरी का चश्मदीद गवाह भले ही पहली बार सामने आया हो, लेकिन दिल्ली में उनकी सरकार के भ्रष्टाचारों की लिस्ट तैयार की जाय तो वह बहुत ही लंबी हो सकती है। जैसे दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री और उनके साले सुरेंद्र कुमार बंसल पर जाली कागजातों के आधार पर पीडब्ल्यूडी विभाग के ठेके लेने और फर्जी बिल बनाने के आरोप हैं।

क्यों नहीं रुक रहा भ्रष्टाचार

Posted On by & filed under विविधा

शैलेन्द्र चौहान राजनीति भारत जैसे देश में कामयाबी और रातोंरात अमीर बनने की कुंजी बन गई है। यही वजह है कि हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा की तर्ज पर राजनीतिज्ञों की जमात लगातार लंबी होती जा रही है। राजनीतिक पार्टियों का मूल उद्देश्य सत्ता पर काबिज रहना है। जाहिरा तौर पर राजनैतिक क्षेत्र में… Read more »

अफसरों की भ्रष्ट प्रवृत्ति रोकना जरुरी

Posted On by & filed under आलोचना, जरूर पढ़ें, टॉप स्टोरी, परिचर्चा

रमेश पाण्डेय देश और दुनिया में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाए जाने को लेकर कशमकश जारी है। सामाजिक संगठन से लेकर राजनैतिक संगठनों द्वारा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जा रहा है। समाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे आए दिन भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर आन्दोलन करते रहते हैं। योग गुरु बाबा रामदेव भी भ्रष्टाचार के मुद्दे… Read more »

कहां से कहां आ गए हम!

Posted On by & filed under चुनाव, राजनीति

-फखरे आलम- 7 अप्रैल से पूर्व और 16 मई के मध्य! हम कहां से चले थे और आज कहां पहुंच गए। हमने प्रण लिया था कि हम चुनाव लड़ेंगे। एक बेहतर भविष्य के लिए! साफ सुथरी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लिए! एक मजबूत और सशक्त भारत के लिए! वर्तमान शिक्षा और स्वास्थ्य का व्यवस्था… Read more »

कस्तूरी और विकास दोनो भ्रम

Posted On by & filed under राजनीति

अब्दुल रशीद जादुई आँकड़े से न ही हकीक़त बदल सकता है,और न ही समाज का विकास हो सकता है। क्योंकि भ्रम चाहे हिरण को कस्तूरी का हो और आम जनता को विकास का लेकिन सच तो यह है की अंत दोनों का दुःखद ही होता है। न जाने कितनी ही योजनाएं बनी और उन योजनाओं… Read more »

भ्रष्टतंत्र सुधरे तो कुछ काम बने

Posted On by & filed under राजनीति

डॉ. आशीष वशिष्ठ गुडगांव की माही बोरवेल के गडढे में गिरकर मर जाती है और एहतियाती कदम उठाने की बजाए प्रशासन लीक पीटने का काम करता है। ऐसा भी नहीं है कि माही पहली ऐसी बदकिस्मत बच्ची थी जो बोरवेल में गिरकर अपनी अनमोल जिंदगी गंवा बैठी। इससे पूर्व भी कई नौनिहाल अव्यवस्था के चलते… Read more »