व्यंग्य पुस्तक लोकार्पण संस्कार July 25, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव किताब से जिसका इतना-सा भी संबंध हो जितना कि एक बच्चे का चूसनी से तो वह समझदार व्यक्ति पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम से जरूर ही परिचित होगा। भले ही वह इस कार्यक्रम की बारीकियां न जानता हो। यह कार्यक्रम लेखक क्यों करता है और कैसे –कैसे करता है इसकी केमिस्ट्री का उसे […] Read more » Book - release function पुस्तक लोकार्पण संस्कार पुस्तक-लोकार्पण समारोह
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/ मेट्रों में आत्मा का सफर July 24, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य/ मेट्रों में आत्मा का सफर पंडित सुरेश नीरव सब शरीर धरे के दंड हैं। इसलिए जब भी किसी स्वर्गीय का भेजे में खयाल आता है तब-तब मैं हाइली इन्फलेमेबल ईर्ष्या से भर जाता हूं। सोचता हूं कितनी मस्ती में घूमती हैं ये आत्माएं। जिंदगी का असली मजा तो दुनिया में ये आत्माएं ही उठाती हैं। न गर्मी की चिपचिप न […] Read more » vyangya हास्य-व्यंग्य
व्यंग्य मकान मालिक तो भगवान होता है July 23, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on मकान मालिक तो भगवान होता है पंडित सुरेश नीरव एक दौर वह भी था जब स्वर्ग में रहनेवाले देवता फालतू समय में फटाफट भारत में अवतार ले लिया करते थे। उनके लिए स्वर्ग से भारत आना एक फन-लविंग पिकनिक हुआ करती थी। क्योंकि उस वक्त आज की तरह मकान और खासकर किराये के मकान की समस्या नहीं हुआ करती थी। भगवान […] Read more » God भगवान मकान मालिक
व्यंग्य व्यंग्य : इस देश का यारों क्या कहना.. July 20, 2011 / December 8, 2011 by विजय कुमार | 1 Comment on व्यंग्य : इस देश का यारों क्या कहना.. विजय कुमार छात्र जीवन से ही मेरी आदत अति प्रातः आठ बजे उठने की है; पर आज सुबह जब कुछ शोर-शराबे के बीच मेरी आंख खुली, तो घड़ी में सात बज रहे थे। आंख मलते हुए मैंने देखा कि मोहल्ले में बड़ी भीड़ थी। कुछ पुलिस वाले भी वहां दिखाई दे रहे थे। मोहल्ले की […] Read more » vyangya व्यंग्य
व्यंग्य हमें पता है कि ये आतंकवादी कौन हैं July 19, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on हमें पता है कि ये आतंकवादी कौन हैं पंडित सुरेश नीरव हादसे हमारे देश की लाइफ लाइन हैं। हादसों के बिना मुर्दा है हमारा देश। हादसे नहीं होते तो ज़िंदगी नीरस हो जाती है। वो तो भला हो भगवान का कि जब-तब बाढ़ और अकाल लाकर थोड़ी चहल-पहल देश में ला देते हैं। वरना इन आतंकवादियों के भरोसे तो कुछ भी नहीं होने […] Read more » terrorism आतंकवाद
व्यंग्य जूते के बूते July 17, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on जूते के बूते पंडित सुरेश नीरव जूते भी बड़ी अजीब चीज़ हैं। ये पैदा तो पैरों के लिए होते हैं मगर जुगाड़ लगाकर पहुंच पगड़ी के देश में जाते हैं। ठीक उन भारतीयों की तरह जो पैदा तो इंडिया में होते हैं मगर नागरिकता अमेरिका की पाने को हमेशा ललचाते रहते हैं। और कुछ हथिया भी लेते हैं। […] Read more » जूते जूते के बूते
व्यंग्य बंधक प्रधानमंत्री “बंधन” तोड़ो !! July 16, 2011 / December 8, 2011 by कुशल सचेती | 4 Comments on बंधक प्रधानमंत्री “बंधन” तोड़ो !! क्या इस मुल्क की किस्मत में बंधक प्रधानमंत्री लिखा हुआ है जिसे अपने मंत्रियो से लेकर उनके विभागों तक का फैसला करने का अधिकार ना हो ! क्या यह मुल्क ऐसे गृहमंत्री की रहनुमाई में खुद को महफूज़ रख सकता है जो सीना तान कर यह कहे कि मुम्बई में हुआ आतंकवादी हमला खुफिया तंत्र […] Read more » Manmohan Singh बंधक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
व्यंग्य कसम भगवान की अब कसम नहीं खाऊंगा July 16, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on कसम भगवान की अब कसम नहीं खाऊंगा पंडित सुरेश नीरव नेता तो हमारे देश में आजादी से पहले भी हुआ करते थे और आजादी के बाद भी हो रहे हैं। फर्क इतना है कि पहले होते थे, अब हो रहे हैं। हैं। मगर लोगों का मानना है कि आजादी से पहले के नेता बड़ी हाई क्वालिटी के हुआ करते थे। उंचे विचारोंवाले […] Read more »
व्यंग्य व्यंग्य: तिहाड़ मंत्रिमंडल July 16, 2011 / December 8, 2011 by विजय कुमार | 2 Comments on व्यंग्य: तिहाड़ मंत्रिमंडल विजय कुमार लिखने-पढ़ने का स्वभाव होने से कई लाभ हैं, तो कई नुकसान भी हैं। मोहल्ले-पड़ोस में किसी बच्चे को कोई निबन्ध लिखना हो या किसी वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना हो, तो उसके अभिभावक अपना सिर खपाने की बजाय उसे मेरे पास भेज देते हैं। कल भी ऐसा ही हुआ। बाल की खाल निकालने […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
व्यंग्य बात की बात में से बात July 14, 2011 / December 8, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on बात की बात में से बात पंडित सुरेश नीरव बातों की महिमा न्यारी है। बात की बात में से बात निकल आती है। असली बात पर कोई पते की बात नहीं करता मगर बात निकलती है तो बिना बात ही बहुत दूर तक चली जाती है। और बिना रुके चलती ही चली जाती है। कश्मीर के मुद्दे पर पिछले साठ साल […] Read more »
व्यंग्य हादसों के उत्सव July 12, 2011 / December 9, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव कौन चाहता है कि वो कभी-कभी हादसे की चपेट में आए। मगर हादसे भी आदमी के मन की परवाह कब करते हैं। उनका जब मन होता है,जहां मन होता है,जिस पदार्थ,वस्तु या शख्स पर मन होता है उसे अपनी चपेट में लेकर उसे अनुग्रहीत कर देते हैं। वैसे भी हादसों के लिए […] Read more » Accidents उत्सव हादसों
व्यंग्य LIFE MISERABLE हुई, INCREASING है RATE। July 12, 2011 / December 9, 2011 by श्यामल सुमन | 2 Comments on LIFE MISERABLE हुई, INCREASING है RATE। श्यामल सुमन LIFE MISERABLE हुई, INCREASING है RATE। GODOWN में GRAIN है, PEOPLE EMPTY पेट।। JOURNEY हो जब TRAIN से, FEAR होता साथ। होगा ACCIDENT कब, मिले DEATH से हाथ।। इक LEADER SPEECH का, दूजा करे OPPOSE। दिखती UNITY जहाँ, PAY से अधिक PRAPOSE।। आज CORRUPTION के प्रति, कही न दिखती HATE। […] Read more »