महत्वपूर्ण लेख

क्या कश्मीर में  बकरा पार्टी की लडाई अपने अंतिम दौर में पहुँच गई है ?

कश्मीर घाटी के मुसलमानों की जनसंख्या भी ,मौलाना के शब्दों का ही सहारा लेना हो तो , 95 प्रतिशत हिन्दुओं की औलाद है और पाँच प्रतिशत उन मुसलमानों की ,जिनके पूर्वज कश्मीर को जीतने आए थे और उसे जीत कर यहीं बस गए । जीत कर यहीं बसने वाले अपनी पहचान छिपाते भी नहीं । वे गौरव से उसका प्रदर्शन करते हैं ।

साम्यवादी गढ़ों में योग का उत्सव

इस बार पूंजीवादी देश अमेरिका के नेशनल माॅल में हजारों लोग योग दिवस मनाएंगे। अमेरिका में ही नहीं दुनिया योग आंदोलन, तमाम राजनीतिक और आर्थिक आंदोलनों को पीछे छोड़ता जा रहा है।  योग शब्द अपने भावार्थ में आज अपनी सार्थकता पूरी दुनिया में सिद्ध कर रहा है। योग का अर्थ है जोड़ना। वह चाहे किसी भी धर्म जाति अथवा संप्रदाय के लोग हों, योग का प्रयोग सभी को शारीरिक रूप से स्वास्थ्य और मानसिक रूप से सकारात्मक सोच विकसित करता है।

सावरकर

कांग्रेस के नेतृत्व की इन भूलों पर सावरकर बहुत खिन्न थे। वह ये नही समझा पा रहे थे कि जब चीन जैसे देश अणुबम बनाने की बात कर रहे हैं, तो उस समय भारत ‘अणुबम नही बनाएंगे’ की रट क्यों लगा रहा है? क्या इस विशाल देश को अपनी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नही है? वह नही चाहते थे कि इतने बड़े देश की सीमाओं को और इसके महान नागरिकों को रामभरोसे छोड़कर चला जाए। इसलिए उन्होंने ऐसे नेताओं को और उनकी नीतियों को लताड़ा जो देश के भविष्य की चिंता छोड़ ख्याली पुलाव पका रहे थे।

कितना असाधारण अब सौ फीसदी कुदरती हो जाना

परिस्थिति के हिसाब से किसानों के तर्क व्यावहारिक हैं। उनकी बातों से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे केचुंआ खाद, कचरा कम्पोस्ट आदि से परिचित नहीं है। गोबर गैस प्लांट उनकी पकड़ में नहीं है। हरी खाद पैदा करने के लिए हर साल जो अतिरिक्त खेत चाहिए, उनके पास उतनी ज़मीन नहीं है। ज़िला कृषि कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी गांव में आते-जाते नहीं। सच यही है कि जैविक खेती के सफल प्रयोगों की भनक देश के ज्यादातर किसानों को अभी भी नहीं है।