विधि-कानून राष्ट्रीय एकीकरण की राह में रोड़ा है अनुच्छेद 370 December 3, 2013 by आशुतोष | 2 Comments on राष्ट्रीय एकीकरण की राह में रोड़ा है अनुच्छेद 370 आशुतोष भटनागर जम्मू-कश्मीर भारतीय संघ का वैसे ही अभिन्न अंग है जैसे कोई भी अन्य राज्य। जम्मू-कश्मीर का प्रत्येक निवासी भारतीय नागरिक है और उसे वे सभी अधिकार हासिल हैं जो भारत के किसी भी नागरिक को हैं। संविधान का कोई भी प्रावधान उसे मौलिक अधिकार प्राप्त करने से रोक नहीं सकता। अगर अनुच्छेद 370 […] Read more » अनुच्छेद 370
विधि-कानून मानवाधिकार आयोग के साथ एक दिन November 29, 2013 / November 29, 2013 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment दिनांक २६-११-२०१३, मंगलवार को वाराणसी में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की फुल बेंच की बैठक हुई। वाराणसी के कमिश्नर के सभागार में आयोजित खुली सुनवाई का उद्घाटन भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और वर्तमान अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, न्यायमूर्ति श्री बाककृष्णन ने किया। इस खुली सुनवाई (Open Hearing) में उत्तर […] Read more » मानवाधिकार आयोग के साथ एक दिन
विधि-कानून सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला कानून October 29, 2013 / October 29, 2013 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला कानून संदर्भ-सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा रोकथाम (न्याय एवं क्षतिपूर्ति) विधेयक 2011 प्रमोद भार्गव केंद्र की यूपीए सरकार विशुद्ध रूप से वोट बैंक मजबूत करने की कुटिल राजनीति पर उतर आई है। सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्र की रिपोर्टें इसी सबब का पर्याय थीं। अब ठंडे बस्ते में पडे़ सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक 2011 को […] Read more » सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा निरोधक (न्याय और क्षतिपूर्ति मिलने) विधेयक
महिला-जगत विधि-कानून दूसरी बीवी को गुजारा भत्ता, सुप्रीम कोर्ट का बहुपत्नीवादी निर्णय October 26, 2013 / October 28, 2013 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 4 Comments on दूसरी बीवी को गुजारा भत्ता, सुप्रीम कोर्ट का बहुपत्नीवादी निर्णय अधिकतर स्त्रियों को वास्तव में इस बात का ज्ञान होता है कि वे जिस पुरुष से विवाह रचाने जा रही हैं, वह पहले से ही विवाहित है और उसकी पत्नी जिन्दा है। फिर भी वे एक निर्दोष स्त्री के वैवाहिक अधिकारों का बलात्कार करते हुए एक विवाहित पुरुष को अपना पति मान लेती हैं या […] Read more » Featured
राजनीति विधि-कानून विविधा चुनाव सुधार की छाया में विधानसभा निर्वाचन October 12, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ चुनावी शंखनाद हो गया। ये निर्वाचन दो चुनाव सुधारों की छाया में संपन्न होंगे, इसलिए पिछले चुनावों की तुलना में अनूठे होंगे। ये दोनों ही सुधार सर्वोच्च न्यायालय की दृढ़ता के चलते निर्वाचन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हैं। अदालत द्वारा जनप्रतिनिधित्व कानून की […] Read more » विधानसभा निर्वाचन
विधि-कानून अभिजनवादी न्याय पद्दति October 12, 2013 / October 12, 2013 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment -शैलेन्द्र चौहान अगर सहज रूप में स्वाभाविक तरीके से स-विवेक सोचा जाये तो न्याय की आधारशिला इस विश्वास पर टिकी होती है कि मनुष्यों में अच्छे भी हैं और बुरे भी. सभी समाज में साथ-साथ रहते हैं. यह बात भी हम अच्छी तरह जानते हैं कि अच्छाई और बुराई सापेक्षिक स्थितियां हैं. एक के लिए […] Read more » अभिजनवादी न्याय पद्दति
राजनीति विधि-कानून दागियों के अरमानों पर कुठाराघात October 10, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव राहुल गांघी की बुलंदी ने आखिरकार दागियों के अरमानों पर पानी फेर दिया। लालू प्रसाद यादव ऐसे पहले कद्रदावर नेता होंगे,जिनके राजनीतिक जीवन पर भ्रष्टाचार के कारण लगाम लग रही है। बिहार के पूर्व मूख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र और कांग्रेस नेता रशोद मसूद सजा की जद में आ जाने के कारण भविष्य में […] Read more » दागियों के अरमानों पर कुठाराघात
विधि-कानून सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के पेंच October 7, 2013 by हिमांशु शेखर | Leave a Comment हिमांशु शेखर न्याय व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने के मकसद से न्यायिक सुधार की बात चल रही है. न्यायधीशों की जवाबदेही तय करने के लिए न्यायिक जवाबदेही विधेयक लाने की बात भी हो रही है. लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत की स्थितियों को देखते हुए यह लगता है कि सुधार की जरूरत सिर्फ जजों के […] Read more » सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के पेंच
राजनीति विधि-कानून न्याय की धीमी गति पर सवालिया निशान October 4, 2013 by सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” | Leave a Comment सिद्धार्थ मिश्र ”स्वतंत्र” बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में लालू समेत ३७ दोषियों को सजा मिलने के साथ लोकतंत्र का एक बहुचर्चित काला अध्याय आज अपने पटाक्षेप के नजदीक पहुंच गया है । हांलाकि ये मामला अभी भी न्या्यिक तंत्र के गलियारों में घूमेगा क्योंकि इस मामले पर उच्च और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय आने […] Read more » न्याय की धीमी गति पर सवालिया निशान
राजनीति विधि-कानून खारिज का हक October 3, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव सर्वोच्च न्यायालय के ताजा आदेश के अनुसार फिलहाल तो मतदाता को नकारात्मक मतदान का अधिकार मिल गया है। न्यायाधीश पी सतशिवम की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ ने उम्मीदवारो को खारिज करने का अधिकार दे दिया है। अदालत ने चुनाव निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए है कि वह र्इबीएम मशीनों में विकल्प के रुप में […] Read more » right to reject खारिज का हक
राजनीति विधि-कानून सांसदों का वेतन छ: लाख रुपये प्रतिमाह करने की साजिश October 2, 2013 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | 1 Comment on सांसदों का वेतन छ: लाख रुपये प्रतिमाह करने की साजिश देश के सांसदों का प्रतिमाह वेतन, वर्ष जो 2005 तक 4000 रूपये था, को दिनांक 12.09.2006 से 16000 और शीघ्र ही दिनांक 18.05.09 से बढाकर 50000 रूपये कर दिया गया है! दूसरी ओर न्यूनतम मजदूरी की ओर देखें तो यह वर्ष 2005 में रुपये 2500 रूपये थी जो 2009 में बढ़कर मात्र 4000 रूपये ही […] Read more » सांसदों का वेतन छ: लाख रुपये प्रतिमाह करने की साजिश
विधि-कानून सुस्त सरकार पर कोर्ट का चाबूक September 28, 2013 by पंकज कुमार नैथानी | 1 Comment on सुस्त सरकार पर कोर्ट का चाबूक पंकज कुमार नैथानी सफल गणतंत्र वही है जहां “तंत्र’’ पर ‘’गण’’ का पूरा भरोसा हो… इसी भरोसे को कायम रखने और लोकतंत्र की मजबूती के लिए तीन आधारभूत स्तंभ बनाए गए…कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका…इन तीनों मे श्रेष्ठ कौन यह तय करना मुश्किल है…लेकिन इतना जरूर है तीनों में से कोई भी कड़ी कमजोर हुई […] Read more » सुस्त सरकार पर कोर्ट का चाबूक