लेख विधि-कानून भारत के निवासियों का संबोधन ‘आर्य ‘ हो February 23, 2026 / March 3, 2026 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भारतीय संविधान की उद्देशिका संविधान की उद्देशिका में स्पष्ट किया गया है कि भारत का संविधान किन आदर्शों को लेकर निर्मित किया गया है ? देश के संविधान की उद्देशिका में ‘ हम भारत के लोग’ का अर्थ क्या है ? उद्देशिका में प्रस्तुत किए गए शब्द प्रभुत्वसंपन्न, लोकतंत्रात्मक गणराज्य , समाजवादी लोकतंत्र और समाजवाद, […] Read more » भारत के निवासियों का संबोधन 'आर्य ' हो
राजनीति विधि-कानून भारतीय संविधान की विषय वस्तु February 23, 2026 / February 23, 2026 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भारत का संविधान भारत को एक संघ के रूप में देखता है। इसको लेकर कई विद्वानों ने भारतीय संविधान की आलोचना भी की है। आलोचना का आधार यह है कि भारत किन्हीं विभिन्न राज्यों की लिखित सहमति के आधार पर बना हुआ देश नहीं है, यह एक सनातन राष्ट्र है। जिसे संघीय देश नहीं कहा […] Read more » Subject Matter of the Indian Constitution भारतीय संविधान की विषय वस्तु
विधि-कानून समाज कचरे पर कड़ा रुख: न्यायपालिका के निर्देश और ज़मीनी सच्चाई February 23, 2026 / February 23, 2026 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment -सुनील कुमार महला ठोस कचरे का प्रबंधन आज के समय की एक बहुत बड़ी आवश्यकता बन चुका है। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज लगातार बढ़ती जनसंख्या, बढ़ते शहरीकरण, औधोगिकीकरण और उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण धरती पर ठोस कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जिससे हमारे पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र, मानव व जीवों […] Read more » कचरे पर कड़ा रुख: न्यायपालिका के निर्देश और ज़मीनी सच्चाई
राजनीति विधि-कानून मुफ्त रेवड़ी संस्कृति जीवंत लोकतंत्र के लिये घातक February 23, 2026 / February 23, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग-भारतीय लोकतंत्र की विडंबना यह है कि चुनाव आते ही जनसेवा का स्वरूप बदलकर जनलुभावन राजनीति में परिवर्तित हो जाता है। राजनीतिक दलों ने मुफ्त की योजनाओं को चुनावी सफलता का शॉर्टकट बना लिया है। मतदाताओं को तात्कालिक आर्थिक लाभ देकर वोट हासिल करने की प्रवृत्ति लगातार मजबूत हो रही है। आगामी तीन-चार […] Read more » The culture of freebies is dangerous for a vibrant democracy. मुफ्त रेवड़ी संस्कृति
राजनीति विज्ञान विधि-कानून भारत का एआई नेतृत्व तकनीक एवं मानवीय मूल्यों का संगम बने February 22, 2026 / February 22, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग-दिल्ली इन दिनों केवल भारत की राजनीतिक राजधानी भर नहीं, बल्कि उभरती तकनीकी चेतना का वैश्विक केंद्र बनी हुई है। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब प्रयोगशालाओं या कॉरपोरेट दफ्तरों तक सीमित तकनीक नहीं रही, बल्कि वह विकास की नई परिभाषा गढ़ने की दिशा […] Read more » भारत का एआई नेतृत्व
लेख विधि-कानून सामाजिक न्याय दिवस : न्याय बने विकास की कसौटी February 19, 2026 / February 19, 2026 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment सामाजिक न्याय का विश्व दिवस (20 फरवरी) पर विशेषजब तक अंतिम व्यक्ति सुरक्षित नहीं, अधूरा है विकास– योगेश कुमार गोयलकिसी भी समाज की सच्ची प्रगति उसकी ऊंची इमारतों या तेज आर्थिक वृद्धि से नहीं बल्कि इस बात से मापी जानी चाहिए कि वह अपने सबसे कमजोर, वंचित और हाशिए पर खड़े नागरिकों को कितना न्यायपूर्ण, […] Read more » सामाजिक न्याय का विश्व दिवस 20 फरवरी सामाजिक न्याय दिवस
राजनीति विधि-कानून सनातन विरोधी भारतीय संविधान में संशोधन की अपेक्षाएं January 30, 2026 / January 30, 2026 by कमलेश पांडेय | Leave a Comment कमलेश पांडेय भारतीय संविधान के कुछ प्रावधानों को यदि सनातन विरोधी षडयंत्र समझा जाता है तो यह अनायास नहीं है क्योंकि इसके कई निर्माताओं का सार्वजनिक चरित्र संदिग्ध और हिंदुत्व विरोधी माना जाता रहा है। तत्कालीन नौकरशाहों, न्यायविदों, व उद्योगपतियों में भी ऐसे ही तत्वों की बहुतायत थी जिससे आजादी के मौलिक उद्देश्य बता आजतक […] Read more » सनातन विरोधी भारतीय संविधान
राजनीति विधि-कानून समता के बहाने असमानता का कानूनी जंजाल January 28, 2026 / January 28, 2026 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम तो उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव दूर करने की दृष्टि से बनाए थे, लेकिन इनके अधिसूचित होते ही असमानता Read more » यूजीसी के नए नियम
लेख विधि-कानून न्याय का अर्थ-समानता और निष्पक्षता January 28, 2026 / January 28, 2026 by पवन शुक्ला | Leave a Comment समानता का अर्थ यह कतई नहीं है कि सबको एक ही तराजू में तौल दिया जाए। वास्तविक समानता वह है जहाँ अवसर की उपलब्धता में कोई अवरोध न हो। Read more » समानता और निष्पक्षता
राजनीति विधि-कानून उन्नाव रेप केसः न्याय, सत्ता और कानून की कसौटी पर सुप्रीम कोर्ट की दखल January 2, 2026 / January 2, 2026 by बाबूलाल नागा | Leave a Comment उन्नाव की पीड़िता की कहानी केवल एक अपराध की दास्तान नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां सत्ता, भय और दबाव के बीच न्याय की राह अत्यंत कठिन हो जाती है। एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार, उसके परिवार पर लगातार हमले, पीड़िता के पिता की हिरासत में संदिग्ध मौत और गवाहों को डराने की घटनाओं ने इस केस को Read more » power and law Unnao Rape Case: Supreme Court's intervention on the touchstone of justice उन्नाव रेप केसः
पर्यावरण राजनीति विधि-कानून अरावली पर सरकार की मंशा आखिर क्या थी? December 30, 2025 / December 30, 2025 by निरंजन परिहार | Leave a Comment विशेषज्ञों का कहना था कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली महत्वपूर्ण पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हो सकती थीं, जिससे खनन और पर्यावरणीय क्षरण बढ़ सकता था। पर्यावरण प्रेमियों और आन्दोलनकारियों ने इसे आरंभ से ही अरावली के अस्तित्व के लिए खतरा बताया Read more » government's intention regarding Aravali What was the government's intention regarding Aravali
विधि-कानून समाज आतंक पर निर्णायक सख़्ती ज़रूरी December 18, 2025 / December 18, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment यह स्वीकार करना होगा कि आतंकवाद अब पुरानी सीमाओं से निकलकर नई तकनीकी दुनिया में प्रवेश कर चुका है। पहले जहाँ उसका संबंध बंदूक, प्रशिक्षण शिविर और सीमा पार से आने वाले गुरिल्ला नेटवर्क से होता था, वहीं अब उसका संचालन सोशल मीडिया, डार्क वेब, एन्क्रिप्टेड चैट, क्रिप्टो करेंसी और फर्जी पहचान के माध्यम से हो रहा है। Read more » Decisive action against terrorism is necessary आतंक पर निर्णायक सख़्ती