राजनीति इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: नवाचार से राष्ट्र निर्माण तक February 17, 2026 / February 17, 2026 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment -सुनील कुमार महला आज का समय तकनीक का समय है, या यूँ कहें कि हम तकनीक के युग में सांस ले रहे हैं। यह तकनीक ही है, जो मनुष्य के जीवन को अधिक सुविधाजनक बना रही है, लेकिन इसके साथ-साथ हमारी सोच, कार्यशैली और आदतें भी आज बदल रही है। कहना ग़लत नहीं होगा कि […] Read more » India AI Impact Summit 2026 इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026
राजनीति चुनाव के बाद चुप्पी: क्या राइट टू रिकॉल समय की मांग है? February 16, 2026 / February 16, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment डॉo सत्यवान सौरभ लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यह है कि सत्ता जनता के हाथों में निहित होती है और निर्वाचित प्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं। चुनाव इसी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं, जिनके द्वारा जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है। किंतु व्यवहार में यह आदर्श अक्सर कमजोर पड़ता दिखाई देता है। चुनाव […] Read more » राइट टू रिकॉल
राजनीति सार्थक पहल आसमान में भारत का एयर डिफेंस सिस्टम ‘स्वदेशी सुदर्शन चक्र’ February 16, 2026 / February 16, 2026 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे भारत अपनी सीमाओं को केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि आसमान में भी सुरक्षित करने के लिए एक ऐसा एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है, जिसे पार करना किसी भी दुश्मन के लिए नामुमकिन होगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत ने अपनी रक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है और अब पूरा फोकस ‘प्रोजेक्ट […] Read more » स्वदेशी सुदर्शन चक्र
राजनीति ‘विशिष्ट’ को ‘अपशिष्ट’ प्रमाणित करती एपस्टीन फ़ाइल्स February 16, 2026 / February 16, 2026 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री इनदिनों जेफरी एपस्टीन फ़ाइल्स के रहस्योद्घाटनों ने पूरी दुनिया में हलचल मचाकर रख दी है। पिछले दिनों अमेरिकी न्याय विभाग […] Read more » एपस्टीन फ़ाइल्स
राजनीति बंगाल का भविष्यः धर्म की लहर या प्रगति की राह? February 16, 2026 / February 16, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ः ललित गर्ग:- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, पर राजनीतिक रणभेरी बज चुकी है। इस बार संकेत साफ हैं-चुनाव विकास बनाम विकास के दावे पर नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और धर्म की ध्वजा के इर्द-गिर्द घूम सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर […] Read more » पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव
राजनीति बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की वैचारिक क्रांति February 16, 2026 / February 16, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ः ललित गर्ग:- बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर इतिहास के मोड़ पर खड़ी है। लगभग दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद यदि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में लौटती है और तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की दावेदारी तक पहुंचते हैं, तो यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा […] Read more » The ideological revolution of regime change in Bangladesh
राजनीति संसदीय हंगामा-सबके लिए आत्मचिंतन का विषय February 16, 2026 / February 16, 2026 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment राजेश कुमार पासी 4 और 5 फरवरी को संसद में जो कुछ हुआ है, वो बहुत शर्मनाक है । ऐसा लगता है कि लगातार तीन लोकसभा चुनावों में हार के बाद विपक्ष बौखला गया है, इसलिए संसद में अराजकता पैदा करके सरकार को परेशान करना चाहता है । संसदीय लोकतंत्र में संसद चलाना सरकार की जिम्मेदारी मानी जाती है, लेकिन विपक्ष के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है। विपक्ष पूरी जिम्मेदारी सरकार पर डालकर, संसद में अराजकता फैला रहा है। विपक्ष के हंगामे के कारण प्रधानमंत्री मोदी दूसरे दिन भी राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब नहीं दे सके, जिसके कारण यह प्रस्ताव उनके जवाब के बिना ही पास कर दिया गया । 2004 के बाद भारत के संसदीय इतिहास में यह दूसरी बार हुआ है कि भारत के प्रधानमंत्री को संसद में बोलने ही नहीं दिया गया । यह संसदीय परंपरा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री के जवाब के बाद ही यह प्रस्ताव पारित किया जाता है । परंपरा का टूटना संसदीय गरिमा का गिरना है और इसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष में कटुता पैदा होने वाली है । इस घटना के बाद विपक्ष पर इसका कोई असर होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है । राज्यसभा में जब प्रधानमंत्री मोदी धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब दे रहे थे, तो विपक्षी दलों द्वारा हंगामा किया गया और इसके बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री के भाषण का बहिष्कार करते हुए संसद छोड़ दी । सवाल यह है कि इससे विपक्ष को क्या हासिल हुआ । जो बात प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहनी थी, वो बात उन्होंने राज्यसभा में कह दी । प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोकसभा में जवाब न देने पर विपक्ष ने कहा कि मोदी डरकर भाग गए हैं, लेकिन राज्यसभा में उनके भाषण के दौरान विपक्ष ही सदन छोड़कर भाग गया । विपक्ष को सदन में बैठकर प्रधानमंत्री के जवाब को सुनना चाहिए । इसके बाद ही विपक्ष का हक बनता है कि वो कहे कि मोदी ने उनके सवालों का जवाब नहीं दिया । इस बार सत्र की शुरूआत से ही संसद में जैसे दृश्य देखने को मिले हैं, उससे संसद की गरिमा के गिरते स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है । संसदीय इतिहास में पहली बार है कि लोकसभा स्पीकर द्वारा संसद में प्रधानमंत्री पर विपक्षी सांसदों के हमले की आशंका जताई गई है । स्पीकर ओम बिरला का यह कहना कि उन्हें सूचना मिली थी कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ कोई अप्रत्याशित घटना घट सकती है, बहुत गंभीर बात है। विपक्ष की महिलाओं का प्रधानमंत्री मोदी की सीट को घेर लेना बता रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष की आशंका पूरी तरह गलत नहीं थी। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि उनकी बात से पीएम मोदी सहमत हो गए और संसद में नहीं आये। सवाल यह है कि ये प्रत्याशित घटना क्या हो सकती थी और इससे भारतीय संसद पर कितना बड़ा कलंक लग सकता था। जो हो नहीं हो पाया, लेकिन करने की कोशिश की गई, उसे ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता। अगर किसी दुर्घटना को होने से रोक दिया जाए तो भी अपराधी को ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता। लोकसभा में सबसे बड़ा नेता स्पीकर होता है और लोकसभा का पूरा प्रशासन उसके अधीन आता है । सवाल यह है कि स्पीकर महोदय ने प्रधानमंत्री को संसद में आने से क्यों रोक दिया । क्या वो इस हमले को रोकने का इंतजाम नहीं कर सकते थे । इस काम के लिए उनके पास कर्मचारी हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात किया जा सकता था । दूसरी बात यह है कि जिन सांसदों द्वारा पीएम मोदी पर हमले की आशंका थी, उनके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की गई । कुछ सांसदों के हमले की आशंका के कारण प्रधानमंत्री का सदन में नहीं आना, बेहर गंभीर घटना है । पीएम मोदी को रोककर लोकसभा अध्यक्ष ने अपनी कमजोरी जाहिर की है, उन्हें पीएम को रोकने की जगह, आक्रमणकारी सांसदों का इंतजाम करना चाहिए था । संसद में इतनी बड़ी साजिश करने वाले सांसद खुलेआम घूम रहे हैं, ये लोकतंत्र और संविधान के लिए सही नहीं है । प्रधानमंत्री पर हमले के लिए महिला सांसदों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझ कर किया गया है । विशेष रूप से दलित और पिछड़े वर्ग की महिलाओं का इस्तेमाल करने की कोशिश बताती है कि साजिश बहुत गहरी थी । यह साजिश देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के खिलाफ है । ऐसा लगता है कि विपक्ष इस देश की संवैधानिक व्यवस्था से तंग आ गया है, क्योंकि वो अब अपने लिए बेहद सीमित अवसर देख रहा है । लगातार हार के बाद कांग्रेस केन्द्र की सत्ता में आने की उम्मीद खो चुकी है । राहुल गांधी के नेतृत्व में तो वो कभी पूर्ण बहुमत के साथ केन्द्र की सत्ता में आ भी नहीं सकती, इसलिए बौखलाहट में वो कुछ भी करने को तैयार दिखाई दे रही है । ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी पर हमले के बाद भाजपा सांसदों की प्रतिक्रिया को देखते हुए साजिश रची गई है । साजिशकर्ता जानते थे कि अगर विपक्षी सांसदों ने मोदी पर हमला किया तो भाजपा सांसद चुपचाप तमाशा नहीं देखेंगे, बल्कि बिना देर किए जवाबी हमला कर देंगे । इस हमले के बाद दोनों पक्षों के सांसदों में भंयकर हाथापाई हो सकती थी । सदन में भाजपा सांसदों की संख्या और प्रधानमंत्री की सीट से नजदीकी होने के कारण जवाबी हमला बहुत जल्दी और बड़ा हो सकता था । साजिशकर्ताओं द्वारा इस हमले के लिए दलित और पिछड़े वर्ग की महिला सांसदों का इस्तेमाल करने के पीछे की मंशा विक्टिम कार्ड खेलना हो सकता है । अगर महिला सांसदों को चोट लगती तो विपक्ष यह विमर्श चलाता कि भाजपा दलित और पिछड़ा विरोधी है, जो सांसदों तक को पीट देती है, आम लोगों का क्या होगा । कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री महिलाओं से डर गए और संसद में नहीं आए । उनके पास जेड प्लस सुरक्षा है, लेकिन वो महिला सांसदों से डर गए । ऐसा लगता है कि विपक्ष इस घटना की गंभीरता को समझ नहीं रहा है, लेकिन परेशानी यह है कि एनडीए सरकार भी इसे हल्के में ले रही है । यह बहुत गंभीर घटना है, लेकिन मीडिया ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया है । जिस साजिश के कारण प्रधानमंत्री मोदी सदन में नहीं आए, उस साजिश की गंभीरता कम कैसे हो सकती है । स्पीकर साजिश को जानते हुए भी साजिश को रोक नहीं पाए, बल्कि प्रधानमंत्री को ही रोक दिया, ये प्रशासन की नाकामी है । प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में उनकी सीट को घेरने वाली महिला सांसदों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई, जबकि वो साजिश का अहम हिस्सा थीं । सवाल यह है कि क्या इन्हीं महिला सांसदों का इस्तेमाल मोदी पर हमले के लिए किया जाना था । संसद में दोनों पक्षों के बैठने की अलग-अलग व्यवस्था है, अपनी जगह से उठकर सत्ताधारी दल के हिस्से में पहुंचकर प्रधानमंत्री की सीट को घेरना क्या सामान्य घटना है । सवाल यह है कि अगर प्रधानमंत्री के आने के बाद यह घेराव किया जाता तो क्या होता । दूसरा सवाल यह है कि उनकी अनुपस्थिति में सीट घेरने की क्या जरूरत थी, ऐसा लगता है कि यह एक रिहर्सल थी । प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर महिला सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गई तो क्या हो गया, इसमें डरने वाली क्या बात है । इसका मतलब है कि वो साजिश को जानती थी । इसके अलावा कौन-कौन जानता था कि ऐसी घटना होने वाली है। ये देश विधानसभाओं में ऐसे दृश्य देख चुका है, जिसमें विधायकों ने एक दूसरे पर हमले किये थे। इन घटनाओं में विधायकों की आपसी हाथापाई देखी गई है, इसके अलावा एक दूसरे पर कुर्सी, माइक, जूता-चप्पल और दूसरे सामान फेंकने की भी घटनाएं सामने आई हैं। हमने लहूलुहान विधायकों की तस्वीरें देखी हैं । प्रधानमंत्री पर विपक्षी सांसदों के हमले के बाद संसद से भी ऐसी शर्मनाक तस्वीरें सामने आ सकती थी। दुनिया की तीसरी आर्थिक और सैन्य शक्ति बनने की ओर अग्रसर लोकतांत्रिक भारत की ऐसी तस्वीरों की पूरी दुनिया में चर्चा होती । लोकतांत्रिक व्यवस्था का बड़ा सच यह है कि कोई भी दल हमेशा सत्ता में नहीं रहता, देर-सवेर विपक्ष को भी सरकार में आने का मौका मिल जाता है। जब कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई तो भाजपा भी एक दिन सत्ता से बाहर हो जाएगी। पीएम ने सदन में न आकर संभावित झगड़े से सदन को बचा लिया और देश शर्मिंदा होने से बच गया । अगर पीएम सदन में सुरक्षित नहीं है तो बेहद गंभीर बात है । सदन की सुरक्षा व्यवस्था स्पीकर के अधीन है, वो ही इसके लिए जिम्मेदार हैं । सांसद बेहद सम्मानित पद होता है, जो लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। किसी भी सांसद को दलगत हित के साथ-साथ देशहित भी देखना चाहिए। संसद में हंगामा करना ही सांसदों का काम नहीं है, बल्कि अपने लोगों की समस्याओं को देश के सामने रखना है, ताकि सरकार उनका समाधान कर सके । संसद को युद्ध का मैदान नहीं बनाया जाना चाहिए । सांसद एक दूसरे के विरोधी हो सकते हैं, लेकिन एक दूसरे के दुश्मन नहीं हैं। आज जिस घटना को रोक दिया गया है, उसके दोबारा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हो सकता है कि अगली बार ऐसी साजिश नाकाम न की जा सके और ये महान देश पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदा हो जाये। इस घटना को गंभीरता से लेने की जरूरत है, क्योंकि साजिश दोबारा हो सकती है। इस साजिश को रोकने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इस घटना में शामिल सांसदों के खिलाफ कार्यवाही की जाए। पिछले कुछ सालों से हमारी संसद हंगामा करने की जगह बन गई है, जिसे सिर्फ स्थगित करने की खबर आती है। अब संसद में बिना चर्चा के कानून बन रहे हैं, क्योंकि सांसदों को चर्चा करने की जगह हंगामा करने में मजा आता है। विपक्ष को यह अहसास ही नहीं है कि संसद का चलना सरकार से ज्यादा उसके लिए जरूरी है। यही वो जगह है, जहां सरकार उसको जवाब देने के लिए मजबूर है। वर्तमान राजनीति की हकीकत यह है कि विपक्ष मीडिया में सरकार से सवाल करता है और सरकार मीडिया में ही उसको जवाब दे देती है। दोनों पक्षों को आत्मचिंतन की जरूरत है कि ऐसा कब तक चलता रहेगा, क्योंकि ये देश के लिए अच्छा नहीं है। संविधान और लोकतंत्र का शोर मचाने की जगह दिल से उसे मजबूत करने की कोशिश करनी चाहिए । राजेश कुमार पासी Read more » संसदीय हंगामा
राजनीति हिन्दुओं को विभाजित करके अपनी राजनीति साधने के प्रयास में विपक्ष February 6, 2026 / February 6, 2026 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment मृत्युंजय दीक्षितइन दिनों विपक्ष उत्तर प्रदेश में दो घटनाओं के माध्यम से अपनी राजनीति साधने के प्रयास में है।पहली घटना वाराणसी के मर्णिकर्णिका घाट के नवीनीकरण के लिए पुरानी प्रतिमाओं तथा कुछ छोटे मंदिरो पर बुलडोजर चलाने की थी जो बाद में फर्जी निकली । इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के उपरान्त […] Read more » योगी आदित्यनाथ
राजनीति राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करते राहुल गांधी February 6, 2026 / February 6, 2026 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भ- पूर्व सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब पर राहुल गांधी की गलतबयानी-भारतीय आक्रामकता के चलते चीन ने घुटने टेक दिए थेप्रमोद भार्गवगलतबयानी के आदी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर संसद में गलतबयानी करके राष्ट्र की सीमाई सुरक्षा से खिलवाड़ किया है। राहुल को तो यह तक सही ज्ञान नहीं है कि […] Read more » राहुल गांधी
राजनीति ट्रेड डील-जीत को हार बताने की कोशिश February 5, 2026 / February 5, 2026 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता Read more » भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता
राजनीति भारत-अमेरिका व्यापार समझौताः मोदी नेतृत्व की वैश्विक दृढ़ता February 4, 2026 / February 4, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार के परिदृश्य में कोई भी समझौता केवल आंकड़ों या कर-प्रतिशतों तक सीमित नहीं होता, वह राष्ट्र की संप्रभुता, नेतृत्व की दृढ़ता Read more » भारत-अमेरिका व्यापार समझौता मोदी नेतृत्व की वैश्विक दृढ़ता
राजनीति मद्रास हाई कोर्ट ने ’’दीपम’’ पर डीएमके सरकार की नीति को राजनीति से प्रेरित बताया February 3, 2026 / February 3, 2026 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment ’’दीपम’’ पर डीएमके सरकार की नीति Read more » Madras High Court terms DMK government's policy on "Deepam" Madras High Court terms DMK government's policy on "Deepam" as politically motivated