राजनीति जातिवाद पर प्रतिबंध योगी सरकार का ऐतिहासिक कदम September 23, 2025 / September 23, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया है। उन्होंने समाज में जाति आधारित विद्वेष को ही नहीं बल्कि विभेद को भी समाप्त करने की आवश्यकता को महसूस करते हुए सद्भाव के साथ सबके विकास को बल देने का सूझबूझभरा फैसला लिया है। इस फैसले के […] Read more » Ban on casteism by the Yogi government Ban on casteism is a historic step by the Yogi government जातिवाद पर प्रतिबंध
राजनीति राहुल के निशाने पर सरकार या विपक्ष? September 22, 2025 / September 22, 2025 by अनिल धर्मदेश | Leave a Comment अनिल धर्मदेश 2024 के आम चुनाव से पहले खुद इंडिया ब्लॉक ने राहुल गांधी को गठबंधन का नेता मानने से इनकार कर दिया था। ममता और केजरीवाल का विरोध देख कांग्रेस बैकफुट पर थी। ऐन चुनाव के वक्त किसी फजीहत से बचने के लिए पार्टी ने किसी प्रकार मल्लिकार्जुन खड़गे को गठबंधन का अध्यक्ष बनवा […] Read more » Is Rahul targeting the government or the opposition? राहुल के निशाने पर सरकार या विपक्ष
राजनीति विधि-कानून जब डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़ हैं तो फिर मोदी की नीतियां अमेरिकी हितों पर चोट क्यों न दें? September 22, 2025 / September 22, 2025 by कमलेश पांडेय | Leave a Comment कमलेश पांडेय जब भारत के गांवों में किसी से विवाद बढ़ने पर और घात-प्रतिघात की परिस्थितियों के पैदा होने पर पारस्परिक हुक्का-पानी या उठक-बैठक, खान-पान बन्द करने के रिवाज सदियों से चलते आए हैं तो फिर वैश्विक दुनियादारी में हम लोग इसे लागू क्यों नहीं कर सकते ताकि हमारे मुकाबिल खड़े होने वाले देशों को […] Read more » then why should Modi's policies not harm American interests When Donald Trump's policies are against India डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़
राजनीति आजाद भारत के महानायक डॉ0 अम्बेडकर का संकल्प September 22, 2025 / September 22, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ0 अम्बेडकर संकल्प दिवस – 23 सितंबर 1917 ओ पी सोनिक भारत में स्कूली जीवन से ही पढ़ाया-सिखाया जाता है कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी कि पूरी दुनिया ही एक कुटुम्ब है। दुनिया में मानवता को जिन्दा रखने के लिए इससे बेहतर कोई विचार नहीं हो सकता। फिर क्या कारण हैं कि समुद्र पार की यात्राएं धर्म विरूद्ध घोषित कर दी जाती हैं। जिन विद्यालयों में कुटुम्बकम का पाठ पढ़ाया जाता है, उन्हीं विद्यालयों में अम्बेडकर को सामाजिक अस्पृश्यताओं से जूझना पड़ता है। अम्बेडकर से समय की समस्याएं आजादी के बाद भी समाज में देखी जा सकती हैं। स्कूलों में किसी दलित बच्चे द्वारा मटके से पानी पीने के प्रयासों में शिक्षक द्वारा जातिगत रूप से प्रताड़ित किया जाता है। दलित दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ते हुए देखना गंवारा नहीं होता। भारत में दलितों के नरसंहारों का भी अपना इतिहास रहा है। ऐसी तमाम घटनाएं बताती हैं कि भारत में सामाजिक रूप से समता, स्वतंत्रता एवं बंधुत्व के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं हो पा रहे हैं पर यह सच है कि भारतीय समाज में सामाजिक विषमताओं की जड़ें जितनी गहरी हैं, सामाजिक परिवर्तन का इतिहास भी उतना ही पुराना है। बुद्ध से लेकर ज्योतिबा फूले और अम्बेडकर से लेकर कांशीराम ने वंचित वर्गों को सामाजिक विषमताओं से मुक्ति दिलाने के लिए सामाजिक परिवर्तन के संघर्ष को जारी रखा। किसी भी समाज में सामाजिक परिवर्तन की परंपरा को जारी रखने के लिए संकल्पों एवं प्रतिज्ञाओं का अपना महत्व होता है। संकल्प की महत्ता को 23 सितंबर 1917 को वडोदरा में डॉ0 अम्बेडकर द्वारा लिए गए संकल्प से समझा जा सकता है। भारतीय इतिहास में यह दर्ज है कि बचपन से ही उन्हें सामाजिक विषमताओं का सामना करना पड़ा। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद समाज की संकीर्ण मानसिकता ने उन्हें अपमानित करने का काम किया। जब वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर भारत लौटे और बड़ौदा नरेश के साथ हुए समझौते के अनुसार बड़ौदा राज्य में सैनिक सचिव की नौकरी स्वीकार की। बड़ौदा नरेश के फरमान के बावजूद उन्हें न तो शासकीय सम्मान मिला और न ही सामाजिक सम्मान। इतना ही नहीं, जातिवादी व्यवस्था के कारण बड़ौदा में किराए पर मकान नहीं मिल पाया. उस समय अस्पृश्यता की जड़ें लगभग सभी धर्मों से जुड़़ी थीं। पारसी के यहॉं उन्हें किराए पर रहने का अवसर तो मिला पर वहॉं भी उन्हें जातीय उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा। डॉ0 अम्बेडकर को यह अनुभव हुआ कि उनकी शिक्षा और योग्यता के बावजूद उन्हें केवल अछूत होने के कारण सामाजिक सम्मान नहीं मिलता। इन्हीं कटु अनुभवों ने उनके भीतर यह दृढ़ निश्चय पैदा किया कि जब तक समाज की संरचना नहीं बदलेगी, तब तक वंचितों के जीवन में परिवर्तन संभव नहीं होगा । उन्होंने सामाजिक परिवर्तन के संकल्प को भारतीय संविधान की रचना करके पूरा किया है । डा0 अम्बेडकर ने जहॉ सामाजिक परिवर्तन का संकल्प लिया था, उस संकल्प भूमि पर उनके अनुयायी प्रतिवर्ष संकल्प दिवस मनाते हैं। हजारों लोग बगैर किसी आह्वान के इकट्ठा होते हैं और सामाजिक परितर्वन के संकल्प को दोहराते हैं। इस संकल्प भूमि को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक बनाने के सरकारी प्रयास भी जारी है। संकल्प दिवस के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 23 सितंबर 2017 को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने संकल्प भूमि स्मारक का शिलान्यास किया था। 8 जुलाई 2022 राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण ने भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक डॉ0 अम्बेडकर से जुड़े दो स्थलों को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने की सिफारिश की थी। वडोदरा स्थित संकल्प भूमि बरगद के पेड़ परिसर जहॉं डॉ0 अम्बेडकर ने 23 सितम्बर 1917 को अस्पृश्यता उन्मूलन का संकल्प लिया था, यह स्थान सौ साल से भी अधिक पुराना है और डॉ0 अम्बेडकर द्वारा सामाजिक परिवर्तन के लिए शुरू किए गए संघर्ष का गवाह रहा है। राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण ने सतारा स्थित प्रताप राव भोसले हाई स्कूल को भी राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किए जाने की सिफारिश की है। इसी स्कूल में डॉ0 अम्बेडकर ने प्राथमिक शिक्षा पूरी की थी। भारत में समय समय पर बाबा साहब डॉ0 अम्बेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं की चर्चा विभिन्न मंचों से होती रहती है। सभी उपस्थितों को शपथ दिलायी जाती है कि सभी जीवन में उक्त प्रतिज्ञाओं का पालन करेंगे। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की केजरीवाल सरकार में दलित वर्ग से मंत्री बने एक नेता 22 प्रतिज्ञाओं को लेकर इतने चर्चित हुए कि उन्हें पहले मंत्री पद और बाद में पार्टी को भी छोड़ना पड़ा। फिर उन्होंने एक ऐसी पार्टी ज्वाइन कर ली, बाबा साहब डा0 अम्बेडकर ने दलितों को जिससे दूर रहने को कहा था, यानी कि 22 प्रतिज्ञाओं के चक्कर में एक बड़ी राजनीतिक प्रतिज्ञा को तिलांजलि दे दी गयी। अक्सर भारतीय राजनीति गिरगिट से भी ज्यादा रंग बदलती है। दलित वर्ग में ऐसे कई नेताओं के उदाहरण यहॉं दिए जा सकते हैं जिन्होंने अम्बेडकरवाद की हुंकार भरते भरते गॉंधीवादी राजनीति के सामने समर्पण कर दिया। थोड़ी देर के लिए मान लें कि अगर डॉ0 अम्बेडकर भी गॉंधीवादी राजनीति के सामने समर्पण कर देते तो क्या वो आज के अम्बेडकर बन पाते। दलित नेताओं को बस इतनी सी बात समझने की जरूरत है। डॉ0 अम्बेडकर के उक्त संकल्प के कई गहरे संदेश निकलते हैं। उनका मानना था कि किसी भी व्यक्ति का मूल्य जन्म से नहीं बल्कि उसके कर्म और आचरण से तय होना चाहिए। आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के लिए आवश्यकता पड़ने पर परंपराओं को तोड़ देना चाहिए। राजनीतिक आजादी तभी तक सार्थक है, जब समाज के सभी वर्गों को समान अधिकार और अवसर मिलें। 21वीं सदी का भारत तकनीक और अर्थव्यवस्था में भले ही आगे बढ़ रहा हो, पर जातीय भेदभाव, सामाजिक असमानता और धार्मिक कट्टरता आज भी भारत के लिए चुनौतियॉं बनी हुई हैं। ऐसे में डॉ0 अम्बेडकर का बड़ौदा संकल्प हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल राजनीतिक आजादी नहीं बल्कि सामाजिक और मानसिक गुलामी से मुक्ति भी है। भारत के इतिहास में डॉ0 अम्बेडकर एक ऐसे महामानव के रूप में स्मरण किए जाते हैं, जिन्होंने केवल अपने व्यक्तिगत उत्थान का मार्ग नहीं चुना बल्कि पूरे समाज के लिए समानता और न्याय का पथ प्रशस्त किया। उनकी सोच और संघर्ष ने शोषित एवं वंचित वर्गों को आत्मसम्मान और अधिकारों की चेतना दी। डॉ0 अम्बेडकर का जीवन कई निर्णायक पड़ावों से गुजरा परन्तु 23 सितम्बर 1917 का दिन विशेष महत्व रखता है। भारतीय पटल से दुनिया को वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश देने के लिए जरूरी है कि डॉ0 अम्बेडकर के उक्त संकल्प को पूरा किया जाए। ओ पी सोनिक Read more » Resolution of Dr. Ambedkar the great leader of independent India डॉ0 अम्बेडकर संकल्प दिवस
राजनीति सामाजिक समरसता : राष्ट्र निर्माण का आधार September 22, 2025 / September 23, 2025 by पवन शुक्ला | Leave a Comment महात्मा गांधी ने कहा था—“हमारी एकता हमारी विविधता में ही है; जब तक हम मिलकर नहीं रहेंगे, तब तक भारत सशक्त नहीं हो सकता।” यह वाक्य केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि भविष्य का संकल्प भी है। भारत की असली ताक़त उसकी गंगा-यमुनी संस्कृति में है, जहाँ विभिन्न आस्थाएँ, भाषाएँ और परंपराएँ मिलकर जीवन की धारा […] Read more » Social harmony: the foundation of nation building सामाजिक समरसता
राजनीति अमेरिका का संरक्षणवाद क्या अमेरिकी एकाधिकार को ख़त्म कर देगा ? September 22, 2025 / September 22, 2025 by पंकज जायसवाल | Leave a Comment पंकज जायसवाल हाल के वर्षों में अमेरिका ने वैश्विक व्यापार और प्रवासन नीतियों में कड़ा रुख अपनाया है। दरअसल, अमेरिकी प्रशासन ने अपने “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे के तहत बाहरी दुनिया से आने वाले सामान और टैलेंट पर कई तरह की बाधाएं लगाई हैं। एक ओर अमेरिका ने अपने इनलैंड में आयातित सामानों को महंगा करने के लिए […] Read more » Will American protectionism end American monopolies? अमेरिका का संरक्षणवाद
राजनीति विश्ववार्ता अमेरिकी आत्मघाती वीजा बंदिशें, भारत के नये अवसर September 22, 2025 / September 22, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग –अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के पेशेवरों, खासकर भारतीयों के सपनों पर एक नई काली छाया डाल दी है, उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया है एवं एक बड़ा संकट खड़ा दिया है। 21 सितंबर की रात 12 बजे के बाद अमेरिका में प्रवेश करने वालों को एच1बी वीज़ा प्राप्त […] Read more » H1B visa अमेरिकी आत्मघाती वीजा बंदिशें एच1बी वीज़ा
राजनीति अनुत्तरित सवाल है सीमावर्ती राज्यों में घुसपैठ September 20, 2025 / September 20, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः- असम में घुसपैठ और बदलती जनसांख्यिकी पर प्रधानमंत्री मोदी का बयान-प्रमोद भार्गवअनुत्तरित सवालों को नए ढंग से राजनीतिक मुद्दों में बदलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विलक्षण षैली रही है। इस परिप्रेक्ष्य में जम्मू-कश्मीर को विशेश दर्जा देने वाली धारा-370, 35-ए, तीन तलाक और राम मंदिर जैसे आजादी के बाद से अनुत्तरित चले आ रहे प्रश्नों […] Read more » bangladeshi infiltration in assam सीमावर्ती राज्यों में घुसपैठ
राजनीति आधुनिक तकनीक के साथ कदम – ताल करता भारत September 20, 2025 / September 20, 2025 by सुरेश गोयल धूप वाला | Leave a Comment हाल ही में केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव का आलेख तकनीक बनी शासन की भाषा समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ हैं।आज के दौर में यदि किसी राष्ट्र की असली ताकत को परखा जाए तो उसमें सेना, अर्थव्यवस्था और संसाधनों के साथ-साथ तकनीकी विकास को भी सबसे अहम माना जाता है। आधुनिक युग में तकनीक केवल जीवन […] Read more » आधुनिक तकनीक के साथ कदम - ताल करता भारत आधुनिक तकनीक के साथ भारत
राजनीति विधि-कानून न्याय की रीढ़ पर वार: क्यों जरूरी है अधिवक्ता संरक्षण कानून September 20, 2025 / September 20, 2025 by पवन शुक्ला | Leave a Comment पवन शुक्ला _अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम की माँग उत्तर प्रदेश में लगातार तेज़ हो रही है। हापुड़ से वाराणसी तक हुई घटनाओं ने वकीलों की असुरक्षा को उजागर किया है। विधि आयोग और बार काउंसिल अपनी सिफ़ारिशें सरकार को दे चुके हैं। अब ज़रूरत है कि विधानमंडल तुरंत अधिनियम लागू कर न्यायपालिका की रीढ़ को मज़बूती […] Read more » अधिवक्ता संरक्षण कानून
राजनीति बोडोलैंड की समस्या, मोदी और हिमंता September 20, 2025 / September 20, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment असम में बोडो समुदाय के द्वारा किया गया बोडोलैंड आंदोलन पिछले कई दशकों से सुर्खियों में रहा है। वास्तव में बोडो लोगों ने अपने अस्तित्व की पहचान के लिए इस आंदोलन को प्रारंभ किया था। ध्यान रहे कि इन बोडो लोगों की पहचान को बाहरी प्रवासियों ने आकर धुंधला कर दिया था। उनकी पैतृक भूमि […] Read more » Bodoland problem Modi and Himanta बोडोलैंड की समस्या
राजनीति विश्ववार्ता अमेरिका – भारत संबंध : एक समीक्षा September 20, 2025 / September 20, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्म दिवस पर फोन करना वैसे तो राजनीतिक शिष्टाचार में आता है और यह कोई बड़ी बात भी नहीं है, परंतु जिन परिस्थितियों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री से बातचीत करने का बहाना खोजा है, उनके मध्य दोनों राष्ट्र – अध्यक्षों के मध्य इस प्रकार […] Read more » US-India Relations अमेरिका - भारत संबंध