राजनीति बोडोलैंड की समस्या, मोदी और हिमंता September 20, 2025 / September 20, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment असम में बोडो समुदाय के द्वारा किया गया बोडोलैंड आंदोलन पिछले कई दशकों से सुर्खियों में रहा है। वास्तव में बोडो लोगों ने अपने अस्तित्व की पहचान के लिए इस आंदोलन को प्रारंभ किया था। ध्यान रहे कि इन बोडो लोगों की पहचान को बाहरी प्रवासियों ने आकर धुंधला कर दिया था। उनकी पैतृक भूमि […] Read more » Bodoland problem Modi and Himanta बोडोलैंड की समस्या
राजनीति विश्ववार्ता अमेरिका – भारत संबंध : एक समीक्षा September 20, 2025 / September 20, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्म दिवस पर फोन करना वैसे तो राजनीतिक शिष्टाचार में आता है और यह कोई बड़ी बात भी नहीं है, परंतु जिन परिस्थितियों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री से बातचीत करने का बहाना खोजा है, उनके मध्य दोनों राष्ट्र – अध्यक्षों के मध्य इस प्रकार […] Read more » US-India Relations अमेरिका - भारत संबंध
राजनीति वर्तमान नेपाल के समक्ष चुनौतियां एवं समाधान September 19, 2025 / September 20, 2025 by डॉ.बालमुकुंद पांडेय | Leave a Comment डॉ.बालमुकुंद पांडे सन् 1997 से सन् 2012 के मध्य पैदा हुए लोगों को ‘ जेन जी’ या ‘ जेनरेशन ज़ूमर ‘ कहा जाता है। यह पीढ़ी उस दौर में पैदा हुई जब इंटरनेट का प्रभाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था। ये युवा बड़े होकर सामाजिक प्लेटफार्मों पर अत्यधिक सक्रिय होकर अपने करियर, पेशा , अन्य […] Read more » Challenges and solutions facing present-day Nepal नेपाल के समक्ष चुनौतियां
राजनीति नेपाल-बांग्लादेश जैसी अराजकता की दुआ क्यों September 19, 2025 / September 19, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment राजेश कुमार पासी पहले श्रीलंका, फिर बांग्लादेश और अब नेपाल में छात्रों ने आंदोलन करके एक ही दिन में सत्ता पलट दी। इससे हमारे देश के कुछ नेताओं और उनके समर्थकों के मन में लड्डू फूटने लगे कि ऐसे ही भारत में आंदोलन करके सत्ता पलट देंगे । ये लोग सोशल मीडिया पर चिल्ला रहे […] Read more » Why pray for anarchy like Nepal Why pray for anarchy like Nepal-Bangladesh नेपाल-बांग्लादेश जैसी अराजकता
राजनीति विश्ववार्ता युद्ध-आतंक के दौर में शांति के लिये भारत की पुकार September 19, 2025 / September 19, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment अन्तर्राष्ट्रीय शांति दिवस- 21 सितम्बर, 2025 Read more » India's call for peace in the era of war and terror अन्तर्राष्ट्रीय शांति दिवस- 21 सितम्बर
राजनीति मोदी-ट्रंप के सार्थक संवाद से क्या राह बदलेगी? September 18, 2025 / September 18, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग नई दिल्ली में भारत-अमेरिकी व्यापार वार्ता की बाधाओं को दूर करने पर दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक बातचीत के दौरान करीब तीन महीने बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फोन करके जन्मदिन की बधाई देते हुए रूस-यूक्रेन युद्धविराम का समर्थन करने के लिए आभार जताना, दोनों देशों के बीच […] Read more » Will meaningful dialogue between Modi and Trump change the course? मोदी-ट्रंप के सार्थक संवाद
राजनीति विश्ववार्ता नेपाल-क्रांति, पहली महिला पीएम के समक्ष बड़ी चुनौतियाँ September 18, 2025 / September 18, 2025 by विजय सहगल | Leave a Comment विजय सहगल नेपाल की ओली सरकार द्वारा अपने देश में सोशल मीडिया पर लगाए प्रतिबंध के फलस्वरूप, 8 सितंबर 2025 को नेपाल के युवाओं मे उपजी क्रोधाग्नि से नेपाल की संसद, सुप्रीम कोर्ट और अन्य अनेक सरकारी कार्यालयों और सरकार के प्रधान मंत्री सहित अन्य मंत्रियों के निजी निवास, व्यापारिक प्रतिष्ठान और अन्य अनेक संस्थान जल उठे। उनकी राह में आने वाली हर […] Read more » big challenges before the first woman PM Nepal-Revolution नेपाल-क्रांति
राजनीति मोदी शासनकाल में नारी सशक्तिकरण का नव अध्याय September 18, 2025 / September 18, 2025 by डा. शिवानी कटारा | Leave a Comment भारत की आधी आबादी, जिसे लंबे समय तक घर की चौखट और सामाजिक परंपराओं में सीमित माना जाता था, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। बीते दशक में तस्वीर पूरी तरह बदली है—ऐसे कानून बने जिन्होंने महिलाओं को बराबरी और गरिमा का अधिकार दिया, और ऐसी […] Read more » A new chapter in women empowerment under Modi's rule मोदी शासनकाल में नारी सशक्तिकरण
राजनीति शख्सियत डिजिटल इंडिया: मोदी संग बदलता भारत September 18, 2025 / September 18, 2025 by पवन शुक्ला | Leave a Comment पवन शुक्ला भारत का चेहरा बदल रहा है। जहाँ कभी नागरिकों के जीवन में सरकारी दफ्तरों की लंबी कतारें और जटिल प्रक्रियाएँ सबसे बड़ी बाधा थीं, आज वहीं मोबाइल ऐप, QR कोड, स्मार्ट सिटी की रफ़्तार और ऑनलाइन सेवाओं की सहज उपलब्धता आम बात हो गई है। यह परिवर्तन किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि […] Read more » digital india Digital India: India changing with Modi India changing with Modi डिजिटल इंडिया
राजनीति विभाजनकारी और अलगाववादी दिशा में…. September 18, 2025 / September 18, 2025 by वीरेंदर परिहार | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार शायद देश के बहुत लोगों को यूपीए सरकार का वह बिल अब भी याद में हो जब उसके द्वारा साम्प्रदायिक एवं लांछित हिंसा रोकथाम विधयेक 2011 बिल का ड्राफ्ट किया गया था। यह बताना भी उल्लेखनीय है कि यह बिल सोनिया गांधी की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा तैयार किया गया था। इस […] Read more » 2011 The Communal and Scheduled Caste Violence Prevention Bill विभाजनकारी विभाजनकारी और अलगाववादी दिशा में.... साम्प्रदायिक एवं लांछित हिंसा रोकथाम विधयेक 2011
राजनीति विश्ववार्ता नेपाल में राजनीतिक भूचाल: वैश्विक शक्तियों की बढ़ी दिलचस्पी September 17, 2025 / September 17, 2025 by डॉ ब्रजेश कुमार मिश्र | Leave a Comment डॉ ब्रजेश कुमार मिश्र दक्षिण एशिया विगत दो दशकों से आग्नेय क्षेत्र बना हुआ है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अत्यन्त घातक है। पहले पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल में जो स्थिति बनी है, वह इस खित्ते के लिए अत्यन्त घातक है। दबी जुबान से ही सही विपक्ष भारत में भी ऐसा ही होगा, भविष्यवाणी कर रहा […] Read more » Political earthquake in Nepal नेपाल में राजनीतिक भूचाल:
राजनीति विधि-कानून वक्फ के सुप्रीम फैसले पर पक्ष-विपक्ष दोनों खुश September 17, 2025 / September 17, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment राजेश कुमार पासी वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करने वाले वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन कानून केन्द्र सरकार ने बनाया था । लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के पश्चात 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षरों के बाद यह कानून देश में लागू हो गया था । 5 अप्रैल को ही आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान व अन्य ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी थी । असदुद्दीन ओवैसी,मोहम्मद जावेद, एआईएमपीएलबी और अन्य भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए । 17 अप्रैल को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि मामले की सुनवाई तक ‘वक्फ वाई यूजर’ या ‘वक्फ वाई डीड’ सम्पत्तियों को गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा । 22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं की सुनवाई पूरी कर ली और फैसला सुरक्षित कर लिया था । 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना अंतरिम फैसला दे दिया है । वक्फ कानून के खिलाफ अदालत गए याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है । याचिकाकर्ता चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट पूरे कानून पर रोक लगा दे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी कानून पर अंतरिम रोक लगाने को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए और दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में ही पूरे कानून पर रोक लगानी चाहिए । इस फैसले से सरकार और कानून के पक्षधर बहुत खुश हैं लेकिन कानून के खिलाफ गए याचिकाकर्ता भी खुश हैं क्योंकि अदालत ने इस कानून के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी है । देखा जाए तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से दोनों पक्षों को कुछ खुशी दी है और कुछ गम भी दिए हैं । याचिकार्ताओं का कहना था कि वक्फ संपत्ति देने के लिए 5 साल इस्लाम पालन की शर्त लगाई गई है जो कि भेदभावपूर्ण प्रावधान है । सरकार का कहना था कि जमीनों का अतिक्रमण किया जा रहा है, इसलिए यह प्रावधान किया गया है । अदालत ने फैसला सुनाया है कि जब तक राज्य सरकारें यह तय करने के लिए नियम नहीं बनाती कि कोई व्यक्ति मुस्लिम है या नहीं, तब तक तत्काल प्रभाव से इस प्रावधान पर रोक रहेगी । इससे याचिकाकर्ता खुश हैं लेकिन सरकार को भी परेशानी नहीं है क्योंकि यह अस्थायी रोक है । राज्य सरकारें कानून बनाकर इसे लागू कर सकती हैं । कानून में प्रावधान था कि कलेक्टर वक्फ संपत्ति का फैसला कर सकता है लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इससे वक्फ संपत्ति की जमीन सरकारी दर्ज हो जाएगी । सरकार का कहना था कि कलेक्टर केवल प्रारंभिक जांच करता है, अंतिम फैसला ट्रिब्यूनल या कोर्ट का होगा । अदालत ने इस प्रावधान पर रोक लगा दी है और कहा है कि कलेक्टर को नागरिकों के संपत्ति अधिकारों पर फैसला लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती । जब तक ट्रिब्यूनल या अदालत फैसला नहीं दे देते, तब तक वक्फ की संपत्ति का स्वरूप नहीं बदलेगा । याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग यह थी कि जिन वक्फ संपत्तियों का लंबे समय से धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें वक्फ संपत्ति घोषित करने का प्रावधान बना रहे बेशक उस संपत्ति के दस्तावेज न हों । इस कानून को ‘वक्फ वाई यूजर’ कहा जाता है । सरकार ने संशोधित कानून में यह प्रावधान खत्म कर दिया है । अदालत ने भी सरकार की बात मान ली है और ‘वक्फ वाई यूजर’ लागू करने से मना कर दिया है । इस मामले में अदालत ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए आदेश दिया है कि बिना दस्तावेज वाली ऐसी संपत्तियों को, जहां लंबे समय से धार्मिक कार्य चल रहे हैं और उन्हें वक्फों द्वारा काबिज कर लिया गया है, उन संपत्तियों को ट्रिब्यूनल या अदालत द्वारा अंतिम फैसला आने तक न तो वक्फों को संपत्ति से बेदखल किया जाएगा और न ही राजस्व रिकॉर्ड में एंट्री प्रभावित होगी । सरकार के लिए परेशानी यह है कि बिना दस्तावेज वाली जिन संपत्तियों को पहले ही ‘वक्फ वाई यूजर’ घोषित करके वक्फों द्वारा कब्जा कर लिया गया है, उन्हें कैसे वापिस लिया जाएगा । सरकार को इस मामले में अदालत से दोबारा विचार करने के लिए कहना होगा । यह ठीक है कि ‘वक्फ वाई यूजर’ बोलकर अब किसी की संपत्ति पर वक्फ बोर्ड नाजायज कब्जा नहीं कर सकता लेकिन जिन संपत्तियों पर कब्जा कर लिया गया है, उनके बारे में भी विचार करने की जरूरत है । हमें याद रखना होगा कि वक्फों द्वारा लाखों एकड़ सरकारी और गैर-सरकारी भूमि इस तरीके से कब्जा कर ली गई हैं । नए कानून में प्रावधान किया गया था कि केन्द्रीय वक्फ बोर्ड परिषद और राज्य वक्फ बोर्डो में गैर-मुस्लिम भी सदस्य बन सकते हैं । याचिकाकर्ताओं का कहना था कि गैर-मुस्लिम बहुमत बनाकर हमारे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकते हैं । केन्द्र सरकार का कहना था कि ऐसा नहीं होगा क्योंकि गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या 2-4 तक ही होगी । अदालत ने भी यह बात मान ली है और कहा है कि केन्द्रीय वक्फ परिषद में 22 में से अधिकतम 4 और राज्य वक्फ बोर्डो में 11 में से अधिकतम 3 सदस्य गैर-मुस्लिम हो सकते हैं । नए कानून में वक्फ बोर्ड के सीईओ का मुस्लिम होना अनिवार्य नहीं है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सीईओ का मुस्लिम होना अनिवार्य होना चाहिए । अदालत ने याचिकाकर्ताओं की मांग को ठुकरा दिया है लेकिन कहा है कि जहां तक संभव हो सीईओ मुस्लिम ही होना चाहिए। नए कानून में प्रावधान किया गया है कि वक्फ संपत्ति की लिखित रजिस्ट्री व पंजीकरण होना चाहिए जबकि पहले मौखिक रूप से भी किसी संपत्ति को वक्फ घोषित किया जा सकता था । याचिकाकर्ता चाहते थे कि पुराना प्रावधान लागू होना चाहिए और मौखिक वक्फ भी मान्य होना चाहिए । केन्द्र सरकार का कहना था कि इस प्रावधान से वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनेगी और फर्जी वक्फ के मामले रुक जाएंगे । अदालत ने इस मामले में सरकार की बात मान ली है और इस प्रावधान पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है । अदालत का कहना है कि यह प्रावधान 1995 और 2013 के कानून में था और सरकार ने इसे दोबारा लागू किया है । विपक्षी दलों के कुछ नेता अदालत के फैसले से खुश हैं । कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का कहना है कि सरकार ने यह कानून जल्दबाजी में बनाया था, इस पर बहस होती तो यह कानून नहीं बनता । अजीब बात यह है कि इस कानून को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था, जिसके सामने सबको अपनी बात रखने का मौका दिया गया था। देखा जाए तो इस कानून पर लंबी बहस हुई थी। पवन खेड़ा और कितनी बहस चाहते हैं। वक्फ बोर्ड बहुत से मुस्लिम देशों में हैं लेकिन ऐसा कानून किसी भी देश में नहीं है । वास्तव में वक्फ बोर्ड सिर्फ वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन का काम करता है, उसका यह काम नहीं है कि वो लोगों की जमीनों पर कब्जा करे । मुस्लिम देशों में वक्फ के पास जमीन दान देने से आती है जबकि भारत में वक्फ बोर्ड के पास जमीन कब्जे से आ रही है । 1995 में कांग्रेस सरकार ने वक्फ कानून में संशोधन करके वक्फ बोर्डों को लैंड माफिया में बदल दिया था । वक्फ बोर्ड सरकारी और गैर-सरकारी जमीनों पर कब्जा करने लगे थे क्योंकि उन्हें वक्फ वाई यूजर का हथियार मिल गया था । उन्हें किसी की जमीन पर कब्जा करने के लिए किसी कागज की जरूरत नहीं थी । उनका यह मानना ही काफी था कि वो जमीन वक्फ की है । अदालत में भी इस कब्जे को चुनौती नहीं दी जा सकती थी । बेशक नए कानून से ये नाजायज कब्जे बंद हो जाएंगे लेकिन सवाल यह है कि लाखों एकड़ जमीनों पर किए गए कब्जों का क्या होगा । ऐसा लग रहा है कि यह कानून अभी भी अधूरा है क्योंकि वक्फ बोर्ड का काम केवल प्रबंधन का है, जो कि मुस्लिम देशों में भी होता है लेकिन हमारे देश के वक्फ बोर्डों के पास कब्जा की गई जमीनें हैं । यह कानून तभी पूरा माना जाएगा, जब कब्जा की गई जमीनें वापिस मिल जाएँगी । कितनी अजीब बात है कि एक आदमी पूरे जीवन मेहनत करके कमाई गई पूंजी से जमीन खरीदे और अचानक वक्फ बोर्ड आए और उसकी जमीन वक्फ बताकर छीन ले । वो बेचारा रोता रहे और उसकी सुनवाई कहीं न हो । कमाल की बात है कि संविधान होते हुए भी ऐसे पीड़ितों के लिए अदालत का दरवाजा भी बंद कर दिया गया था । मोदी सरकार ने कानून बनाकर यह अन्याय बंद कर दिया है लेकिन जो अन्याय हो चुका है, उसका भी हिसाब होना चाहिए । दूसरी बात यह है कि वक्फ की जमीन का इस्तेमाल कब्रिस्तान, मस्जिद, शैक्षणिक संस्थान और गरीबों के फायदे के लिए किया जा सकता है लेकिन वक्फ बोर्ड के पास लाखों एकड़ भूमि होने के बावजूद गरीब मुस्लिम जमीन के लिए सरकार के सामने खड़े रहते हैं । इसका कारण यह है कि वक्फ की संपत्तियों का गलत इस्तेमाल हो रहा है । अदालत को इस कानून पर फिर विचार करने की जरूरत है । यह देखना जरूरी है कि भविष्य में इस कानून का गलत इस्तेमाल न हो लेकिन यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो गलत इस्तेमाल हो चुका है, उसे भी ठीक किया जाए । राजेश कुमार पासी Read more » वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन