राजनीति

संजय दत्त की ’अमर’ सियासत – सरिता अरगरे

बाज़ारवाद और भ्रष्टाचार के कारण अब नेता और अभिनेता के बीच का फ़र्क धीरे – धीरे खत्म होता जा रहा है। रुपहले पर्दे पर ग्लैमर का जलवा बिखेरने वाले अभिनेताओं को अब सियासी गलियारों…

भाजपा का धोषणा पत्र जारी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहा है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को हर महीने दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 35 किलो अनाज दिए जाएंगे।

वरुण को लेकर राजनीति गरमाई, एटा जेल स्थानांतरित

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार व मेनका गांधी के पुत्र वरुण गांधी को मंगलवार देर रात सुरक्षा कारणों की वजह से पीलीभीत से एटा जेल स्थानांतरित…

राष्ट्रीय पुनर्निर्माण सम्मेलन से उपजे चुनावी मुद्दे- ब्रजेश झा

पंद्रहवीं लोकसभा चुनाव की बयार देशभर में है। लेकिन, सप्ताह भर पहले तक राजनीतिक पार्टियों के बीच मुद्दा का टोटा छाया हुआ है। ऐसे समय में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक…

शोषितों के लिए प्रेरणा है लक्ष्मी – जयराम ‘विप्लव’

लगभग डेढ़ साल पहले गुवाहाटी में आदिवासियों की एक रैली के दौरान मीडिया की सुर्खियों में रहने वाली लक्ष्मी ओरांव आजकल फ़िर चर्चा में है। इस बार वजह है कि वो तेजपुर संसदीय…

वरुण गांधी पर रासुका लगा

उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि पीलीभीत से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वरुण गांधी पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (रासुका ) लगाया जा रहा है। वे मेनका गांधी के पुत्र हैं।

काँग्रेस ही बनायेगी वरुण गाँधी को बड़ा नेता – सरिता अरगरे

देश में आजकल मुद्दों पर राजनीति नहीं गर्माती । अब तो सियासत होती है खेलों , पुरस्कारों और बयानों पर । मालूम होता है भारत में चारों तरफ़ खुशहाली है । मुद्दे कोई शेष नहीं…

नकारात्‍मक मताधिकार:कितना सही, कितना गलत

वर्तमान में एक बहस चुनाव आयोग व केंद्र सरकार के बीच चर्चा का केंद्र बनी है, और वह है नकारात्मक मताधिकार। इस समय सर्वोच्च न्यायालय में इसके समर्थन व विरोध में बहस चल रही है।

उमा के बदले रुख से कमल खिला – सरिता अरगरे

चुनाव की तारीख की ओर बढ़ते हुए सियासत भी रफ़्तार पकड़ रही है। नाराज़ प्रहलाद पटेल ‘घर’ लौटने के लिए बेताब हैं। मित्तल मामले में कोप भवन में जा बैठे जेटली भी ज़िद छोड़ने..।

व्यवस्था परिवर्तन बनाम गोविंदाचार्य – ब्रजेश झा

पंद्रहवीं लोकसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, कई गुम्फित चेहरे चुनावी उत्सव में भाग लेने सामने आते दिखलाई पड़ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से राजनीति की…

तीसरे मोर्चे के चाणक्य : करात

परमाणु करार पर मनमोहन सरकार को जिस समय प्रकाश करात आर-पार की चुनौती दे रहे थे ठीक उसी समय हमारे बड़े पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक प्रकाश करात को इतिहास…

प्रजातांत्रिक भारत का राजवंश

लोकतंत्र मूर्खों का शासन होता है पर, यहाँ तो मूर्खों ने लोकतंत्र को हीं राजशाही की ओर ठेल दिया है। राजतन्त्र नहीं तो और क्या है? गाँधी, सिंधिया, पायलट, ओबेदुल्लाह जैसे खानदान ही शासन में बचे हैं।