राजनीति विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की केन्द्रीकृत नियुक्ति पर विवाद January 27, 2025 / January 27, 2025 by कुमार कृष्णन | Leave a Comment कुमार कृष्णन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों में कुलपतियों (वीसी) की नियुक्ति के लिए नए नियम प्रस्तावित किए हैं जिससे राज्यों और केंद्र के बीच विवाद छिड़ गया है। इसे लेकर एनडीए के प्रमुख सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए मसौदे का विनियमों पर आपत्ति जताई है। राज्य विश्वविद्यालयों […] Read more » Controversy over centralized appointment of vice-chancellors in universities कुलपतियों की केन्द्रीकृत नियुक्ति पर विवाद
राजनीति विधि-कानून संविधान सभा की बहस से संबंधित तथ्य January 27, 2025 / January 27, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment आज देश अपना ७६ वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। २६ जनवरी १९५० भारतीय संविधान के लागू होने की तिथि है। उस दिन हमारे सनातन राष्ट्र भारतवर्ष ने अपने गणतंत्र का दिशा पथ निर्धारित किया था। सदियों तक लाखों करोड़ों बलिदान देने के पश्चात जिस गणतंत्र के राष्ट्रपथ पर देश ने चलने का निर्णय लिया […] Read more » संविधान सभा की बहस
राजनीति ट्रंप की वापसी, भारत और विश्व शांति January 27, 2025 / January 27, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment जब कई भविष्यवक्ता 2025 को लेकर यह भविष्यवाणी कर रहे हैं कि इस वर्ष में तीसरा विश्व युद्ध आरंभ हो सकता है, तब अमेरिका में ट्रंप एक बार पुनः अपने देश के राष्ट्रपति बनने में सफल हुए हैं। हम सभी जानते हैं कि ट्रंप भारत के प्रति जो बाईडेन की अपेक्षा कहीं अधिक मित्रतापूर्ण दृष्टिकोण […] Read more » India and world peace Trump's return ट्रंप की वापसी भारत और विश्व शांति
राजनीति दुलहन की आड़ में रोहिंग्याओं का मकड़जाल कितना खतरनाक? January 27, 2025 / January 27, 2025 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे जम्मू कश्मीर में जिस योजनाबद्ध तरीके से रोहिंग्याओं को बसाया जा रहा है, जल्दी से कोई एतराज भी नहीं कर सकता। जानकारी के अनुसार जम्मू में 52 साल के अफजल की शादी के लिए उसका परिवार लंबे समय से लड़की ढूंढने में लगा था लेकिन दुल्हन नहीं मिल रही थी। कारण अफजल का मानसिक तौर […] Read more » How dangerous is the web of Rohingyas in the guise of brides? दुलहन की आड़ में रोहिंग्याओं का मकड़जाल कितना खतरनाक
राजनीति आपदा की चपेट में राजधानी January 27, 2025 / January 27, 2025 by डॉ.वेदप्रकाश | Leave a Comment डॉ.वेदप्रकाश बाढ़,भूकंप,आंधी,तूफान आदि के रूप में प्रकृति द्वारा अथवा किसी बिमारी- महामारी की स्थिति में किसी आपदा को झेलना तो मजबूरी होती है लेकिन जब राजनीतिक नेतृत्व ही पूरे वातावरण को आपदा जैसा बना दे तो वहां के लोगों का जीवन बदहाली का शिकार हो जाता है। राजनीतिक नेतृत्व होता ही इसलिए है कि […] Read more » आपदा की चपेट में राजधानी
राजनीति पर्यटन की अनंत संभावनाओं का देश है भारत January 27, 2025 / January 27, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment राष्ट्रीय पर्यटन दिवस- 25 जनवरी, 2024 पर विशेष– ललित गर्ग –जीवन में पर्यटन के सर्वाधिक महत्व के कारण ही हर साल 25 जनवरी को भारतीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है। भारत की विविधता और बहुसंस्कृतिवाद के कारण, यह दिन देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव, जीवन में खुशियां एवं मुस्कान देने वाले पर्यटन के महत्व […] Read more » पर्यटन
राजनीति यूनिफाइड पेंशन स्कीम में सरकार कर्मचारियों को कितना देना चाहती है! January 27, 2025 / January 27, 2025 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment बजट से पहले केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के तहत यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) का विकल्प पेश किया है। सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। यूपीएस सरकार की नई स्कीम है और यह 1 अप्रैल 2025 से लागू हो जाएगी। सरकार ने अगस्त 2024 में यूपीएस को पेश किया था जो सरकारी कर्मचारियों को […] Read more » Unified Pension Scheme यूनिफाइड पेंशन स्कीम
राजनीति भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है गौवंश ! January 27, 2025 / January 27, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment भारत एक ऐसा देश है जहां गाय को माता का दर्जा दिया गया है। भारत विश्व का ऐसा देश है जहां पर दुनिया में सबसे अच्छी नस्ल वाला गौवंश पाया जाता है, लेकिन आज देश में गौवंश की जितनी दुर्दशा है, शायद किसी और की नहीं है। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि पिछले साल […] Read more » गौवंश
राजनीति लोकतंत्र को मजबूती देने के लिये मतदाता को जागना होगा January 27, 2025 / January 27, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment राष्ट्रीय मतदाता दिवस – 25 जनवरी, 2025– ललित गर्ग – भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। विश्व में भारत जैसे सबसे बड़े लोकतंत्र में मतदान को लेकर कम होते रुझान को देखते हुए इस दिवस को मनाने की आवश्यकता महसूस हुई और पहली बार इसे वर्ष 2011 में […] Read more » राष्ट्रीय मतदाता दिवस
राजनीति प्रगतिशील भारत के निर्माण में समर्पित होने का संकल्प लेने का दिन है गणतंत्र दिवस January 26, 2025 / January 27, 2025 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (76 वें गणतंत्र दिवस पर विशेष आलेख) गणतंत्र शब्द का साधारण अर्थ है ’’लोगों का तंत्र’’ यानी कि जिस संविधान द्वारा हमारे देश में कानून का राज स्थापित है, उस संविधान से ही हमारे देश के तंत्र को मजबूती मिलती है और उसी तंत्र को भारतवासी मानते हैं। इसलिए हमारे देश को गणतांत्रिक देश बोला […] Read more » Republic Day is the day to take a pledge to be dedicated to building a progressive India. प्रगतिशील भारत के निर्माण में समर्पित होने का संकल्प
राजनीति नये संकल्पों एवं नये प्रयोगों से समृद्ध होता गणतंत्र January 24, 2025 / January 24, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन 26 जनवरी, 1950 को हमारी संसद ने भारतीय संविधान को पास किया। इस दिन भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इसने ब्रिटिश शासन के भारत सरकार अधिनियम 1935 को पूरी तरह खत्म कर दिया और अपना स्वतंत्र संविधान इसी दिन लागू किया। […] Read more » गणतंत्र
राजनीति विधि-कानून दोषी बचे नहीं और निर्दोष को सज़ा मिले नहीं ! January 24, 2025 / January 27, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment हाल ही में पश्चिमी बंगाल और केरल में कोर्ट के दो फैसले पूरे देश में चर्चा का विषय रहे। उल्लेखनीय है कि कोलकाता के बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज में लेडी डॉक्टर के साथ हुए दिल दहला देने वाले रेप और मर्डर केस में सियालदह कोर्ट ने हाल ही में दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई है।इस फैसले ने एक ओर न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत किया है, वहीं पर दूसरी ओर पीड़ित परिवार और समाज के एक बड़े वर्ग को निराश भी किया। माननीय कोर्ट ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ नहीं माना और दोषी को मौत की सजा देने से इनकार कर दिया। इधर, केरल के तिरुवनंतपुरम में एक ऐतिहासिक फैसले के तहत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 24 वर्षीय ग्रीष्मा को अपने बायफ्रेंड की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई है। गौरतलब है कि अक्टूबर 2022 में ग्रीष्मा ने अपने प्रेमी शेरोन राज की आयुर्वेदिक टॉनिक में जहर मिलाकर हत्या कर दी थी।माननीय कोर्ट ने अपने 586 पत्रों के फैसले में इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला करार दिया और कहा कि ग्रीष्मा ने जानबूझकर और योजनाबद्ध तरीके से शेरोन की हत्या की। अपने फैसले के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि ‘ग्रीष्मा का यह अपराध न केवल क्रूर था, बल्कि यह समाज को गलत संदेश देने वाला है।’ बहरहाल, यहां यह जानना जरूरी है कि आखिर ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर'(दुर्लभतम से दुर्लभ) केस आखिर है क्या ? इस संबंध में पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि वर्ष 1980 में पंजाब में बच्चन सिंह बनाम पंजाब राज्य का एक ऐसा मामला आया था जब देश में फांसी की सजा पर बहस छिड़ी थी।बच्चन सिंह नाम के एक शख्स को अपनी पत्नी की हत्या के जुर्म में 14 साल की सजा सुनाई गई। जेल से छूटने के बाद वह अपने भाई के साथ उसी के घर पर रहने लगा, लेकिन भाई हुकुम सिंह और उसके बीवी-बच्चों को यह पसंद नहीं था, इसलिए विवाद लगातार बढ़ता चला गया और 4 जुलाई, 1977 को गुस्से में आकर बच्चन सिंह ने कुल्हाड़ी से अपनी दो भतीजी और भतीजे को मार डाला। हुकुम सिंह की एक और बेटी पर वार किए गए, लेकिन वो बच गई। इसके बाद सेशन कोर्ट की मौत की सजा को माननीय हाइकोर्ट ने भी बरकरार रखा।बच्चन सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 136 के आधार पर स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) दायर की। संविधान के अनुच्छेद 14,19 और 21 का हवाला देकर उसने फांसी की सजा के खिलाफ अपील की। भारतीय संविधान में अनुच्छेद-21 ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’ देता है। इसका तात्पर्य है कि किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता जब तक कि विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन न किया जाए। इसके बाद धारा 302 में सजा को लेकर पूरे देश में बहस शुरू हो गई। इस संदर्भ में बाद में माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी एक बहुत ही ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बच्चन सिंह की फांसी को बरकरार रखा लेकिन साथ ही फांसी की सजा की परिभाषा को विस्तार देते हुए माना कि ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस में भारतीय संविधान में दिए गए जीने के अधिकार को वापस लिया जा सकता है। भारत के इतिहास में यह पहला मामला था, जब ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की बात कही गई थी। कहना ग़लत नहीं होगा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 1980 में फैसला सुनाते हुए फांसी को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ में डाला। साथ ही यह भी कहा कि फांसी की सजा तभी दी जानी चाहिए, जब उम्रकैद काफी न हो।अगर हत्या या अपराध करने का तरीका बहुत ही बर्बर है तो फांसी की सजा सुनाई जा सकती है। संक्षेप में कहें तो, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ‘दुर्लभतम’ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस) सिद्धांत की स्थापना की, जिसमें कहा गया है कि मृत्युदंड केवल सबसे असाधारण मामलों में ही किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालतों को इतनी कड़ी सजा देने के लिए विशेष कारण बताने चाहिए। वास्तव में, कानून की नजरों में एक भी दोषी बचना नहीं चाहिए और किसी भी निर्दोष को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो सारे दोषी भले ही छूट जाएं लेकिन एक निर्दोष को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए। सुनील कुमार महला Read more »