लेख समाज पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है June 12, 2025 / June 12, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस- 15 जून, 2025– ललित गर्ग- भारतीय संस्कृति में पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा माना गया है, पिता की धर्म है, पिता ही संबल है, पिता ही ताकत है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता […] Read more » अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस
लेख समाज मुद्दा: वैवाहिक रिश्तों की डोर, क्यों हो रही कमजोर? June 12, 2025 / June 12, 2025 by प्रदीप कुमार वर्मा | Leave a Comment महिलाओं ने अपने पतियों को उतारा मौत के घाट, बदले हुए सामाजिक परिवेश में अब पुरुष हो रहे प्रताड़ित प्रदीप कुमार वर्मा नीला ड्रम और सीमेंट। फ्रिज में डेड बॉडी। कांटेक्ट किलिंग। जानलेवा जहर का कहर। और शादी के नाम पर साजिश और धोखा। बीते दिनों में प्यार, दोस्ती और शादी का यही स्याह सच समाज में सामने आया है। सात वचनों के जरिए सात जन्म तक साथ निभाने के वादे अब टूट रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बीते जमाने में जहां महिला को सामाजिक तिरस्कार का शिकार होना पड़ता था। वहीं, इसके उलट अब महिलाओं के हाथों पुरुष प्रताड़ित हो रहे हैं और उनकी जान तक जा रही है। मुस्कान से लेकर सोनम की बेवफाई अब शादी के सपने देखने वाले लोगों को डरा रही है। यही वजह है कि अब समाज में इंसानी और सामाजिक रिश्तों को लेकर एक नई बहस छिढ़ गई है और यह बहस इस तौर पर भी प्रासंगिक है कि आखिर हम किस तरफ जा रहे हैं? मनोविज्ञान के जानकारों का कहना है कि सामाजिक ताने-बाने को बचाने की खातिर हमें इस समस्या का कारण और समाधान निकालना ही होगा। साल 2025 में अपराध की दुनिया में एक अजीब सा बदलाव देखने को मिला है। अब तक की कहानी में यही बात सामने आई थी कि किसी पति ने पत्नी को मौत के घाट उतार दिया या प्रेम संबंधों के चलते पति ने अपनी पत्नी को घर से निकाल दिया लेकिन इस बार कातिल का किरदार महिलाएं निभा रही हैं, वो भी अपने पतियों के खिलाफ। प्रेम, लालच, धोखा और साजिश की जाल में फंसकर पत्नियां वो हदें पार कर रही हैं जिनके बारे में सोचकर भी रूह कांप जाती है। ऐसे मामलों में ताजा उदाहरण राजा रघुवंशी हत्याकांड का है। मप्र के इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी की लाश 2 जून को मेघालय के मशहूर वेईसावडॉन्ग झरने के पास एक गहरी खाई में मिली थी। वह अपनी नई नवेली पत्नी सोनम के साथ हनीमून पर गए थे लेकिन इस सफर का अंत बेहद खौफनाक रहा। अब मेघालय पुलिस ने खुलासा किया है कि राजा की हत्या उसी की पत्नी सोनम ने अपने प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर करवाई थी। फिलहाल सोनम सहित चार कांटेक्ट किलर सलाखों के पीछे हैं। इसी साल ऐसे ही एक अन्य मामले में 3 मार्च को मेरठ की मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत की हत्या कर दी। सौरभ राजपूत अपनी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और 5 साल की बेटी के साथ मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना के इंदिरा नगर में रहता था। अपनी नौकरी के सिलसिले में लंदन में पोस्टिंग पर सौरभ कुछ दिन पहले ही सौरभ लंदन से मेरठ अपने घर आया था। इस दौरान मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सौरभ की हत्या कर उसके शव को कई टुकड़ों में काटा और अपना गुनाह छिपाने के लिए सौरभ के शव के टुकड़ों को नीले ड्रम में सीमेंट के साथ बंद कर दिया। मुस्कान की साजिश और सनकीपन यहीं समाप्त नहीं हुआ और इस गुनाह के बाद मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल छुट्टियों पर घूमने चले गए। पति के हत्या करने वाली मुस्कान जब अपने प्रेमी साहिल के साथ वापस लौटी, तब यह मामला खुला। यह अलग बात है कि आज दोनों आरोपी जेल में बंद हैं। उप्र के मेरठ में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया जिसमे रविता ने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर अपने पति अमित कुमार की गला घोंटकर हत्या कर दी और शव के पास सांप रख दिया ताकि यह हादसा लगे लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सच्चाई सामने ला दी। ऐसे ही एक मामले में रेलवे में काम करने वाले दीपक कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। उसकी पत्नी शिवानी ने दावा किया कि उसे हार्ट अटैक आया था लेकिन दीपक के परिवार ने पोस्टमार्टम की मांग की। जब जांच हुई तो पता चला कि दीपक की हत्या की गई थी और उसकी पत्नी ही आरोपी निकली। महिलाओं के अपराध की दुनिया में कदम रखने तथा अपने ही पति को अपने रास्ते का कांटा समझ उनकी हत्या करने का यह कोई अकेला मामला नहीं है। ऐसे कई और भी मामले हैं जिनमें महिलाओं ने अपने मर्यादा की सारी हद पर कर अपने पति को मौत की नींद सुला दिया। बदलते परिवेश में अपराध के इस बदले हुए चलन से समाज में वह व्याप्त है और अब लोग शादी के नाम पर डरने लगे हैं। एक जमाना था जब शादी को एक सुखद एवं समर्पित सामाजिक संस्कार माना जाता था। शादी के दौरान पति-पत्नी द्वारा सात वचनों की कसमें खाई जाती थी और यह संबंध मात्र एक जन्म का न होकर सात जन्म तक निभाए जाने का एक वादा होता था लेकिन बीते दिनों में यह वचन कहीं पीछे छूट रहे हैं और संबंध कहीं टूट रहे हैं। इस संबंध में मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि भौतिक संसाधनों की दौड़ तथा अपनी “ईगो” के चलते महिलाओं ने अपने जीवन साथी को ही मौत के घाट उतारने को इस सामाजिक बंधन से मुक्ति का जरिया बना लिया है। यही नहीं, कई बार ऐसा भी देखने में आया है कि अपने घर परिवार की “मान मर्यादा”, दहेज नहीं दे पाने के हालात तथा अन्य मामलों के चलते महिलाओं ने जबरन शादी तो कर ली और इसके बाद जब उन्हें जीवन की कड़वी सच्चाई का पता चला, तब उन्होंने ऐसे कदम उठाना ही ठीक समझा। इसके अलावा धन, संपदा और वैभव, सोशल स्टेटस तथा शिक्षा समेत अन्य मामलों में असमानता होने के चलते भी महिलाओं को अपना वैवाहिक जीवन रास नहीं आ रहा और वह इससे छुटकारा पाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है। महिलाओं के इस अपराधिक कृत्य में जादू टोना और तंत्र-मंत्र के भी कुछ संकेत सामने आए हैं। नतीजतन हिंदू धर्म में परमेश्वर कहे जाने वाले पति को ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान और समझ कर महिलाएं इन वारदातों को बेहिचक अंजाम दे रही है और इन्हें अपने इस कृत्य का कोई पछतावा भी नहीं है। उनके इस गुनाह में समाज के ही कुछ अन्य पुरुष जैसे प्रेमी, देवर, पिता तथा अन्य लोग भी उनकी मदद कर रहे हैं। इस नए चलन में सामाजिक तानेबाने को चूर-चूर करने के पीछे कहीं ना कहीं फिल्म टीवी सीरियल और सोशल मीडिया का भी हाथ माना जा रहा है। वर्तमान में समाज के इस नए चलन से समाजशास्त्री भी हैरान और परेशान है कि आखिर हम कहां जा रहे हैं? समाजशास्त्रियों और घर परिवार के लोगों को इस बात की चिंता है कि यह क्रम कब तक जारी रहेगा और इसका उपाय क्या है? इस साल के शुरुआत से सामने आई इस सामाजिक एवं अपराधिक समस्या के समाधान पर गौर करें तो पता चलता है कि दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा पर प्रभावी रोक और कानून की कड़ाई से पालना, विवाह से पूर्व वर एवं वधू का मनोवैज्ञानिक परीक्षण, दोनों की काउंसलिंग और आपसी रजामंदी तथा समाज में बराबरी का दर्जा और बेपनाह प्यार से इस प्रकार के कृत्य पर कुछ रोक लगाई जा सकती है। इसके साथ ही महिलाओं को घर-परिवार और समाज में अपेक्षित आजादी तथा सामाजिक कार्यों में बराबर की सहभागिता दी जानी चाहिए जिससे वे खुद को घर-परिवार का एक अनिवार्य हिस्सा मानें। इसके अलावा जादू-टोना तथा तंत्र-मंत्र के कथित प्रचलन पर भी जागरूकता के जरिए प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता है। कुल मिलाकर महिलाओं द्वारा अपने पति को रास्ते से हटाने के इस दौर में सबसे ज्यादा परेशानी इस बात को लेकर है कि परिवार और घर का आधार स्तंभ कहे जाने वाला पुरुष साथी ही जब मौत के साये के चलते भय से जब पीड़ित है तो मजबूत परिवार के साथ-साथ एक बेहतर समाज की कल्पना कैसे की जा सकती है? प्रदीप कुमार वर्मा Read more » Issue: Why is the bond of marital relationship becoming weak? Why is the bond of marital relationship becoming weak? महिलाओं ने अपने पतियों को उतारा मौत के घाट
शख्सियत समाज संत कबीर : विश्व शांति का मूल है कबीर का “एकेश्वरवाद” June 10, 2025 / June 10, 2025 by प्रदीप कुमार वर्मा | Leave a Comment संत कबीर दास जी की जयंती 11 जून पर विशेष… दुनिया में धार्मिक कट्टरता के लिए नहीं है कोई स्थान, देश के सभी धर्म और संप्रदाय हैं एक समान प्रदीप कुमार वर्मा संत कबीर दास15 वीं सदी के मध्यकालीन भारत के एक रहस्यवादी कवि और भक्ति आंदोलन की निर्गुण शाखा के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे, जो ईश्वर के प्रति भक्ति और प्रेम पर जोर देते थे। संत कबीर दास को एक ऐसे समाज सुधारक के तौर पर भी जाना जाता है, जो अपनी रचनाओं के जरिए जीवन भर आडंबर और अंधविश्वास का विरोध करते रहा।वह कर्म प्रधान समाज के पैरोकार थे और इसकी झलक उनकी रचनाओं में साफ़ झलकती है। यही वजह है कि समाज में संत कबीर को जागरण युग का अग्रदूत कहा जाता है। उनकी रचनाएँ हिन्दी साहित्य के भक्ति काल की निर्गुण शाखा की ज्ञानमार्गी उपशाखा की महानतम कविताओं के रूप में आज भी प्रसिद्ध हैं। इन कविता और साखियों के माध्यम से पता चलता है कि संत कबीर दास जी का एकेश्वरवाद का सिद्धांत दुनिया में आज भी प्रासंगिक है। माना जाता है कि संत कबीर का जन्म सन 1398 ईस्वी में काशी में हुआ था। कबीर दास निरक्षर थे तथा ऐसी मान्यता है कि उन्हें शास्त्रों का ज्ञान अपने गुरु स्वामी रामानंद द्वारा प्राप्त हुआ था। तत्कालीन भारतीय समाज में कबीर दास ने कर्मकांड और गलत धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों में भक्ति भाव का बीज बोया। इन्होंने सामाजिक व्यवस्था में व्याप्त भेद भाव को दूर करने का भी प्रयास किया। वे सच्चे अर्थों में धर्मनिरपेक्ष थे। उन्होंने हिंदू मुसलमानों के बाह्याडंबरों पर समान रूप से प्रहार किया | यदि उन्होंने हिंदुओं से कहा कि-पत्थर पूजै हरि मिलै, तो मैं पूजूँ पहाड़,,तासे तो चक्की भली, पीस खाए संसार ||” तो मुसलमानों से भी यह कहने में संकोच नहीं किया कि ” कंकड़ पत्थर जोड़ि के, मस्जिद लियो बनाय,,ता पर मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय”? संत कबीर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सच्ची पूजा दिल से होती है, बाहरी कर्मकांडों की तुलना में ईश्वर के साथ सच्चे संबंध को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने यह भी सिखाया कि हृदय की पवित्रता और ईश्वर के प्रति प्रेम ही सर्वोपरि है। यजी नहीं संत कबीर ने खुलेआम खोखले कर्मकांडों और अंधविश्वासों की निंदा की और लोगों से सच्ची भक्ति की तलाश करने का आग्रह किया। उनका मानना था कि सच्ची आस्था से रहित कर्मकांडों का कोई मतलब नहीं होता है। उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था और सामाजिक असमानताओं को खारिज किया। संत कबीर ने जाति, पंथ या लिंग की परवाह किए बिना सभी मनुष्यों के बीच समानता की वकालत की। उनके छंदों ने लोगों के बीच सद्भाव की वकालत करते हुए एकता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा दिया कबीरदास निर्गुण भक्ति के उपासक थे। उन्होंने न तो हिंदू धर्म की मूर्तिपूजा को स्वीकार किया, न ही इस्लाम की कट्टरता को। वे एकेश्वरवाद में विश्वास रखते थे और मानते थे कि ईश्वर एक है तथा सर्वत्र व्याप्त है। उनके अनुसार, आत्मा और परमात्मा के बीच का संबंध प्रेम और भक्ति पर आधारित होना चाहिए। कबीर दास पहले भारतीय कवि और संत हैं जिन्होंने हिंदू धर्म और इस्लाम धर्म के बीच समन्वय स्थापित किया और दोनों धर्मों के लिए एक सार्वभौमिक मार्ग दिया। उसके बाद हिंदू और मुसलमान दोनों ने मिलकर उनके दर्शन का अनुसरण किया,जो कालांतर में “कबीर पंथ” के नाम से चर्चित हुआ। कहा तो यह भी जाता है की कबीरदास द्वारा काव्यों को कभी भी लिखा नहीं गया, सिर्फ बोला गया है। उनके काव्यों को बाद में उनके शिष्यों द्वारा लिखा गया। कबीर की रचनाओं में मुख्यत: अवधी एवं साधुक्कड़ी भाषा का समावेश मिलता है। संत कबीर दास ने दोहा और गीत पर आधारित 72 किताबें लिखीं। उनके कुछ महत्वपूर्ण संग्रहों में कबीर बीजक, पवित्र आगम, वसंत, मंगल, सुखनिधान, शब्द, साखियाँ और रेख्ता शामिल हैं। कबीर दास की रचनाओं का भक्ति आंदोलन पर बहुत प्रभाव पड़ा और इसमें कबीर ग्रंथावली, अनुराग सागर, बीजक और साखी ग्रंथ जैसे ग्रंथ शामिल हैं। उनकी पंक्तियाँ सिख धर्म के धर्मग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में पाई जाती हैं। उनकी प्रमुख रचनात्मक कृतियाँ पाँचवें सिख गुरु अर्जन देव द्वारा संकलित की गईं। कबीर दास अंधविश्वास के खिलाफ थे। कहा जाता है कबीर दास के समय में समाज में एक अंधविश्वास था कि जिसकी मृत्यु काशी में होगी वो स्वर्ग जाएगा और मगहर में होगी वो नर्क। इस भ्रम को तोड़ने के लिए कबीर ने अपना जीवन काशी में गुजारा, जबकि प्राण मगहर में त्यागे थे। कबीर संपूर्ण जीवन काशी में रहने के बाद, मगहर चले गए। उनके अंतिम समय को लेकर मतांतर रहा है, लेकिन कहा जाता है कि 1518 के आसपास, मगहर में उन्होनें अपनी अंतिम सांस ली और एक विश्वप्रेमी और समाज को अपना सम्पूर्ण जीवन देने वाला दुनिया को अलविदा कह गया…। संत कबीरदास का प्रभाव न केवल उनके समकालीन समाज पर पड़ा, बल्कि आज भी उनके विचार प्रासंगिक हैं। उनकी शिक्षाओं ने नानक, दादू, रैदास और तुलसीदास जैसे संतों को प्रभावित किया। आधुनिक युग में भी उनके विचार धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समरसता और आत्मज्ञान के लिए प्रेरणा देते हैं। आज के दौर पर जब धर्म और मजहब के नाम पर देश और दुनिया में अशांति और हिंसा का माहौल है। तब संत कबीर दास जी का धार्मिक चिंतन तथा एकेश्वरवाद अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है कि हम धार्मिक कट्टरता और मजहबी उन्माद के नाम पर आपस में ना तो,नफरत करें और ना ही जंग। प्रदीप कुमार वर्मा Read more » कबीर का एकेश्वरवाद
लेख समाज रिश्तों के लाश पर खड़ा आधुनिक प्रेम June 10, 2025 / June 10, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment इंदौर के राजा और सोनम के मेघालय हनीमून पर हुई हत्या की घटना न केवल व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि सामाजिक, नैतिक और मानसिक स्तर पर गहरी चिंता पैदा करती है। यह अपराध आधुनिक प्रेम और विवाह संबंधों में फैलते अविश्वास और स्वार्थ की भयावह तस्वीर पेश करता है। साथ ही, मेघालय जैसे पर्यटन स्थलों की […] Read more » राजा और सोनम
शख्सियत समाज साक्षात्कार डॉ. रामअवतार किला : जिनकी हर पात में सेवा एवं संवेदना की झंकार हैं June 8, 2025 / June 9, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ः ललित गर्ग :-आप एक सेतु बन सकते हैं, जीवन-मुस्कान का, जिन्दगी बचाने वाला एवं सेवा करने वाला पुल। हम एक साथ मिलकर जीवन को बचा सकते हैं, जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकते हैं, अंधेरों के बीच रोशनी बन सकते हैं। इसी सोच के साथ ‘अक्षय सेवा’ के संयोजक डॉ. रामअवतार […] Read more » Dr. Ram Avatar Kila डॉ. रामअवतार किला
लेख समाज दुल्हन फर्जी, रिश्ता असली बेवकूफी का! June 3, 2025 / June 3, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment फर्जी रिश्तों का व्यापार: शादी नहीं, ठगी का धंधाभारत में शादियों को लेकर एक सांस्कृतिक उत्सव, पारिवारिक प्रतिष्ठा और भावनात्मक जुड़ाव की भावना जुड़ी होती है। लेकिन जब इस पवित्र रिश्ते को ठगों का व्यवसाय बना दिया जाए, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज के विश्वास की हत्या होती है। हरियाणा के […] Read more » दुल्हन फर्जी
लेख समाज माता-पिता और संतान के संबंधों की संस्कृति को जीवंतता दें June 1, 2025 / June 2, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment विश्व माता-पिता दिवसः 1 जून 2025– ललित गर्ग – विश्व के अधिकतर देशों की संस्कृति में माता-पिता का रिश्ता सबसे बड़ा एवं प्रगाढ़ माना गया है। भारत में तो इन्हें ईश्वर का रूप माना गया है। माता-पिता को उनके बच्चों के लिए किए गए उनके काम, बच्चों के प्रति उनकी निस्वार्थ प्रतिबद्धता और इस रिश्ते को पोषित […] Read more » Revive the culture of parent-child relationships माता-पिता और संतान के संबंधों की संस्कृति
लेख शख्सियत समाज शौर्य, स्वाभिमान और पराक्रम के प्रतीक: महाराणा प्रताप May 28, 2025 / May 28, 2025 by संदीप सृजन | Leave a Comment महाराणा प्रताप जयंती (29 मई) विशेष- संदीप सृजन महाराणा प्रताप का जीवन एक ऐसी प्रेरक गाथा है जो हर भारतीय को गर्व से भर देती है। उन्होंने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष किया। उनकी जयंती हमें न केवल उनके बलिदान को याद करने का अवसर […] Read more » self-respect and valor: Maharana Pratap Symbol of valor महाराणा प्रताप
लेख शख्सियत समाज महाराणा प्रतापः शौर्य, बलिदान एवं साहस का अमिट आलेख May 28, 2025 / May 28, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment महाराणा प्रताप जन्म जयन्ती- 29 मई, 2025– ललित गर्ग – हमारा देश भारत जिसे आस्था और विश्वास, शौर्य एवं शक्ति, बहादुरी और साहस, राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान की वीरभूमि कहा जाता है, जहां की सभ्यता और संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृति में शुमार है, जिसका अनुसरण संपूर्ण विश्व करता है। भारत की भूमि महान योद्धाओं की […] Read more » महाराणा प्रताप जन्म जयन्ती
लेख समाज सात शव और एक सवाल: हम सब कब जागेंगे? May 28, 2025 / May 28, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment “मरते एक हैं, दोषी हम सब हैं” “मौन अपराध है: पंचकूला की त्रासदी से सीख” “हर आत्महत्या एक पुकार है, क्या हम सुन रहे हैं?” “जब रिश्ते रह गए सिर्फ़ त्योहारों तक” “आर्थिक तंगी से नहीं, सामाजिक बेरुख़ी से मरे वो लोग” सिर्फ़ खबर नहीं थी वो, एक सामूहिक अपराध का दस्तावेज़ थी > “आखिरकार […] Read more » Seven members of a family committed mass suicide in Panchkula
धर्म-अध्यात्म लेख शख्सियत समाज अहिल्यादेवी होलकर: दूरदर्शी एवं साहसी महिला शासक May 27, 2025 / May 27, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment अहिल्याबाई होलकर: 31 मई 2025 तीन सौवीं जन्म जयन्ती– ललित गर्ग –भारतीय संस्कृति के उज्ज्वल इतिहास के सुवर्ण पृष्ठों पर अनेक शील, शौर्य, शक्ति एवं पराक्रम संपन्न नारियों के नाम अंकित हुए हैं। शील, भक्ति, आस्था, शौर्य, शक्ति एवं धर्मनिष्ठा के अद्वितीय प्रभाव के कारण ही वे प्रणम्य हैं। ऐसी ही श्रृंखला में एक नाम है राजमाता […] Read more » Ahilyadevi Holkar: A visionary and courageous female ruler अहिल्यादेवी होलकर: दूरदर्शी एवं साहसी महिला शासक
लेख समाज फेसबुक या फूहड़बुक?: डिजिटल अश्लीलता का बढ़ता आतंक और समाज की गिरती संवेदनशीलता May 27, 2025 / May 27, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment लेखिका: प्रियंका सौरभ जब सोशल मीडिया हमारे जीवन में आया, तो उम्मीद थी कि यह विचारों को जोड़ने, संवाद को मज़बूत करने और जन-जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। लेकिन आज, 2025 में, विशेषकर फेसबुक जैसे मंच पर जिस तरह से अश्लीलता और फूहड़ता का आतंक फैलता जा रहा है, वह न केवल चिंताजनक […] Read more » Facebook or Fuchbook? The growing terror of digital pornography and the falling sensitivity of society फेसबुक या फूहड़बुक