समाज साक्षात्कार सार्थक पहल मीडिया, स्त्री और सनसनी: क्या हम न्याय कर पा रहे हैं? April 9, 2025 / April 9, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment “धोखे की खबरें बिकती हैं, लेकिन विश्वास की कहानियाँ दबा दी जाती हैं — क्या हम संतुलन भूल गए हैं?” मीडिया में स्त्रियों की छवि और उससे जुड़ी सनसनीखेज रिपोर्टिंग ने आज गंभीर सवाल पैदा कर दिये है। कुछ घटनाओं में स्त्रियों द्वारा किए गए अपराधों को मीडिया बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है, जिससे पूरे स्त्री वर्ग […] Read more » media women and sensationalism women and sensationalism: Are we doing justice? मीडिया स्त्री और सनसनी स्त्री और सनसनी: क्या हम न्याय कर पा रहे हैं
समाज सार्थक पहल बोहरा ..प्रगतिशील मुस्लिम समाज April 2, 2025 / April 2, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment विवेक रंजन श्रीवास्तव बोहरा मुस्लिम संस्कृति एक समृद्ध और अनूठी परंपरा है, जो इस्लाम के शिया समुदाय की एक उपशाखा, दाउदी बोहरा समुदाय से जुड़ी हुई है। यह समुदाय मुख्य रूप से भारत, पाकिस्तान, यमन और पूर्वी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है, और इसकी उत्पत्ति 11वीं शताब्दी में मिस्र के फातिमिद खलीफा शासन से मानी जाती है। बोहरा समुदाय अपनी विशिष्ट धार्मिक प्रथाओं, सामाजिक संगठन, व्यापारिक कुशलता और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। बोहरा मुस्लिम इस्लाम के इस्माइली शिया संप्रदाय का हिस्सा हैं जो इमामत अर्थात आध्यात्मिक उन्नयन की अवधारणा पर आधारित है। दाउदी बोहरा समुदाय अपने वर्तमान आध्यात्मिक नेता, दाई-अल-मुतलक जिन्हें सैयदना कहते हैं, को इमाम का प्रतिनिधि मानता है, जो समुदाय को धार्मिक और सामाजिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। उनकी धार्मिक प्रथाओं में नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात जैसे इस्लामी सिद्धांतों का पालन शामिल है लेकिन इनका तरीका और व्याख्या इस्माइली परंपरा से प्रभावित है।मोहर्रम का महीना बोहरा समुदाय के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसमें इमाम हुसैन की शहादत को याद करने के लिए मातम और मजलिस मतलब सभाएँ आयोजित की जाती हैं। उनकी मस्जिदें, जिन्हें “जमातखाना” भी कहा जाता है, पूजा और सामुदायिक एकत्रीकरण के केंद्र हैं। बोहरा समुदाय की सामाजिक संरचना अत्यधिक संगठित और केंद्रीकृत है। दाई-अल-मुतलक के नेतृत्व में समुदाय के सभी धार्मिक और सामाजिक कार्य संचालित होते हैं। यह समुदाय अपनी एकता और अनुशासन के लिए प्रसिद्ध है। बोहरा लोग अपने समुदाय के नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं, जैसे कि विवाह, तलाक और अन्य सामाजिक रीति-रिवाजों में दाई की अनुमति लेना।शिक्षा और परोपकार पर भी विशेष जोर दिया जाता है। समुदाय के भीतर स्कूल, अस्पताल और कल्याणकारी योजनाएँ चलाई जाती हैं, जो सभी सदस्यों के लिए सुलभ होती हैं। बोहरा संस्कृति में भारतीय और इस्लामी प्रभावों का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। उनके पारंपरिक परिधान इसकी एक प्रमुख पहचान हैं। पुरुष “सदरी” और “टोपी” पहनते हैं, जबकि महिलाएँ “रिदा” नामक एक रंगीन दो-टुकड़े वाला परिधान पहनती हैं, जो हिजाब के साथ स्टाइलिश और व्यावहारिक दोनों होता है।भोजन में भी बोहरा समुदाय की अपनी विशिष्टता है। “थाल” उनकी खानपान की परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें लोग एक साथ बड़े थाल में बैठकर खाना खाते हैं, जो समुदाय की एकता और भाईचारे को दर्शाता है। बोहरा व्यंजनों में गुजराती, मुगलई और अरबी स्वादों का सम्मिलित स्वाद होता है, जैसे कि दाल-चावल बिरयानी और मिठाइयाँ जैसे मालपुआ। बोहरा समुदाय ऐतिहासिक रूप से व्यापार और उद्यमशीलता के लिए प्रसिद्ध रहा है। गुजरात में उनकी जड़ों के कारण, वे मध्यकाल से ही व्यापारिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। आज भी बोहरा लोग कपड़ा, हार्डवेयर, गहने और अन्य व्यवसायों में प्रमुखता से कार्यरत हैं। उनकी ईमानदारी और मेहनत ने उन्हें वैश्विक व्यापारिक समुदाय में सम्मान दिलाया है। बोहरा समुदाय की अपनी एक मिश्रित भाषा है, जिसे “लिसान-उद-दावत” कहा जाता है। यह गुजराती, उर्दू और अरबी का संयोजन है, और इसमें धार्मिक ग्रंथों और प्रथाओं से जुड़े शब्द शामिल हैं। उनकी लिखित परंपरा में इस्माइली दर्शन और फातिमिद इतिहास से संबंधित कई ग्रंथ शामिल हैं, जो अरबी और लिसान-उद-दावत में लिखे गए हैं। आधुनिक युग में बोहरा समुदाय ने तकनीक और शिक्षा को अपनाया है, लेकिन अपनी परंपराओं को भी संरक्षित रखा है। दाई के मार्गदर्शन में समुदाय ने वैश्वीकरण के साथ कदम मिलाया है, और बोहरा लोग अब दुनिया भर में फैले हुए हैं, विशेष रूप से अमेरिका, कनाडा, यूके और मध्य पूर्व में। फिर भी, उनकी पहचान और धार्मिक निष्ठा में कोई कमी नहीं आई है। बोहरा मुस्लिम संस्कृति एक जीवंत और गतिशील परंपरा है, जो धार्मिक आस्था, सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। यह समुदाय न केवल अपनी धार्मिक प्रथाओं के लिए, बल्कि अपनी व्यापारिक कुशलता, सामाजिक संगठन और जीवनशैली के लिए भी अद्वितीय है। यह एक ऐसा समुदाय है जो अतीत को संजोते हुए भविष्य की ओर अग्रसर है। दुनियां में लगभग मात्र दस लाख की संख्या में बोहरा समाज के मुस्लिम हैं पर वे सम्पन्न, प्रगतिशील तथा मिलनसार हैं। विवेक रंजन श्रीवास्तव Read more » Bohra..progressive Muslim society
लेख समाज स्वास्थ्य-योग ‘ऑटिज्म’ से बच्चों को बचाने की गंभीर चुनौती? April 2, 2025 / April 2, 2025 by रमेश ठाकुर | Leave a Comment डा0 रमेश ठाकुर ‘ऑटिज्म बीमारी’ को हल्के में लेने की भूल कतई न की जाए, ये नवजात बच्चों के संग जन्म से ही उत्पन्न होती है। ऑटिज्म से बचा कैसे जाए, जिसके संबंध में प्रत्येक वर्ष 2 अप्रैल को पूरे संसार में ‘विश्व ऑटिज्म दिवस’ जागरूकता के मकसद से मनाया जाता है। मौजूदा वक्त में […] Read more » A serious challenge to save children from 'autism'?
राजनीति समाज छात्रों में आत्महत्याएं 4 फीसदी की खतरनाक वार्षिक दर से बढ़ीं April 2, 2025 / April 2, 2025 by पुनीत उपाध्याय | Leave a Comment सर्वोच्च न्यायालय ने जताई चिंता, राष्ट्रीय टास्क फोर्स के गठन का निर्देशपुनीत उपाध्याय पिछले दो दशकों में छात्र आत्महत्याएं 4 फीसदी की खतरनाक वार्षिक दर से बढ़ी हैं जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चिंता जताई है। अमित कुमार एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय […] Read more » Student suicides rise at an alarming annual rate of 4%
लेख समाज नैतिक पतन के चलते खतरे में इंसानी रिश्ते March 31, 2025 / March 31, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment समाज में कितना पतन बाकी है? यह सुनकर दिल दहल जाता है कि कोई बेटा अपने ही माता-पिता की इतनी निर्ममता से हत्या कर सकता है? महिला ने जेठ के साथ मिलकर अपने दो वर्ष के बेटे को मरवा दिया। पत्नी ने प्रेमी सँग मिलकर मर्चेंट नेवी मे अफसर पति के टुकड़े-टुकड़े किये। पिता ने […] Read more » खतरे में इंसानी रिश्ते नैतिक पतन के चलते खतरे में इंसानी रिश्ते
लेख समाज वृद्धों के लिये उजाला बना सुप्रीम कोर्ट का फैसला March 29, 2025 / March 31, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- देश ही नहीं, दुनिया में वृद्धों के साथ उपेक्षा, दुर्व्यवहार, प्रताड़ना, हिंसा तो बढ़ती ही जा रही है, लेकिन अब बुजुर्ग माता-पिता से प्रॉपर्टी अपने नाम कराने या फिर उनसे गिफ्ट हासिल करने के बाद उन्हें यूं ही छोड़ देने, वृद्धाश्रम के हवाले कर देने, उनके जीवनयापन में सहयोगी न बनने की बढ़ती […] Read more » The Supreme Court's decision brought light for the elderly वृद्धों के लिये उजाला बना सुप्रीम कोर्ट
लेख समाज डिजिटल भारत में विचारों की बेड़ियां March 26, 2025 / March 26, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment सरकार द्वारा ओटीटी प्लेटफार्मों की निगरानी, सोशल मीडिया पर टेकडाउन आदेश और आईटी नियम 2021 ने डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित किया है। सेंसरशिप और आत्म-नियमन से प्लेटफार्म अधिक सामग्री हटाने लगे हैं, जिससे विचारों की विविधता प्रभावित होती है। झूठी सूचनाओं और साइबर अपराधों को रोकने के लिए कुछ हद तक नियमन आवश्यक […] Read more »
लेख शख्सियत समाज साक्षात्कार समाज की उन्नति और विकास की आधारशिला रखता है साहित्य March 26, 2025 / March 26, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment कहते हैं कि साहित्य ही समाज का असली दर्पण होता है। समाज में जो भी घटित होता है, मतलब कि समाज में जो भी गतिविधियां होतीं हैं, लेखक उनसे कहीं न कहीं प्रभावित होता है और वह अक्सर उन्हीं चीजों, घटनाओं, गतिविधियों को अपने साहित्य में अपनी कलम के माध्यम से काग़ज़ के कैनवास पर […] Read more » प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल विनोद कुमार शुक्ल
लेख समाज शादी के बाद करियर: उड़ान या उलझन?” March 24, 2025 / March 24, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment परिवारों को यह समझना होगा कि शादी का मतलब महिलाओं के करियर का अंत नहीं होता। पुरुषों को घर और बच्चों की जिम्मेदारी में बराबर भागीदारी निभानी चाहिए। कंपनियों को महिलाओं के लिए अधिक फ्लेक्सिबल जॉब ऑप्शंस देने चाहिए। करियर और शादी को विरोधी ध्रुवों की तरह देखने की बजाय उन्हें साथ ले चलने की […] Read more » Career after marriage शादी के बाद करियर
समाज साक्षात्कार बिहार : जहाँ गंदगी व दुर्गन्ध कोई मुद्दा ही नहीं March 24, 2025 / March 24, 2025 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री अशोक, बुद्ध व गाँधी जैसे महापुरुषों की कर्मस्थली बिहार सौभाग्यवश मेरी भी पैतृक स्थान है। इस नाते जन्म से ही अपने गांव में लगभग प्रत्येक वर्ष मेरा एक बार जाना ज़रूर होता है। आज भी यह राज्य देश को सबसे अधिक प्रशासनिक अधिकारी देने वाला राज्य है। परन्तु मुझे आश्चर्य है कि इतनी […] Read more » Bihar: Where dirt and stench are not an issue
लेख समाज दाम्पत्य जीवन को बिगाड़ रहा सोशल मीडिया से प्यार March 24, 2025 / March 24, 2025 by राजेश खण्डेलवाल | Leave a Comment -राजेश खण्डेलवाल- त्याग, समर्पण और अटूट विश्वास ही दाम्पत्य का मूल आधार है और यही मानव जीवन को खुशहाल भी बनाता है, लेकिन तकनीकी दौर में सोशल मीडिया से बढ़ते प्यार के बीच पति-पत्नी के बीच तकरार आम हो चली है और उनके बीच का प्यार इसी में कहीं खोता जा रहा है, जो दाम्पत्य […] Read more » Love from social media is ruining married life दाम्पत्य जीवन को बिगाड़ रहा सोशल मीडिया से प्यार
महिला-जगत लेख समाज भारतीय समाज में मासिक धर्म अभी तक कलंकित क्यों? March 11, 2025 / March 11, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment भारत के पास मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति अधिक समावेशी और दूरदर्शी दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए सांस्कृतिक विचारों का सम्मान करने का अवसर है। आपके क्या विचार हैं-क्या सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, या जमीनी स्तर के संगठनों को बदलाव लाने में आगे आना चाहिए? मासिक धर्म से जुड़ा कलंक कई संस्कृतियों में […] Read more » Why is menstruation still stigmatized in Indian society? मासिक धर्म अभी तक कलंकित