समाज रिश्ते, शर्तें और डर से घिरी एक पीढ़ी February 2, 2026 / February 2, 2026 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment आज के समय में यदि कोई सबसे जोखिम भरा सामाजिक कार्य है, तो वह है—किसी को रिश्ते की बात कहना। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि हमारे बदलते सामाजिक मानस की सच्चाई है। Read more »
समाज ज्ञान, स्क्रीन और संवेदना का संकट February 2, 2026 / February 2, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment — डॉ. सत्यवान सौरभ “ज्ञान बढ़ा पर भाव क्या, अब भी मन लाचार”—यह पंक्ति केवल एक दोहा नहीं, बल्कि इक्कीसवीं सदी के मनुष्य की सामूहिक आत्मस्वीकृति है। हमने जितना ज्ञान अर्जित किया है, उतना शायद मानव इतिहास के किसी भी कालखंड में नहीं किया गया। सूचनाएँ उँगलियों पर नाच रही हैं, दुनिया एक छोटे से […] Read more » स्क्रीन और संवेदना का संकट
शख्सियत समाज गुरु रविदास जयंती: सामाजिक समता और मानवीय गरिमा के महान उद्घोषक February 2, 2026 / February 2, 2026 by बाबूलाल नागा | Leave a Comment गुरु रविदास जयंती हिंदू चंद्र पंचांग के माघ महीने की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। यह आमतौर पर हर साल जनवरी या फरवरी में पड़ती है। 2026 में गुरु रविदास जयंती रविवार, 1 फरवरी Read more » गुरु रविदास जयंती
समाज अवैध कब्जे और बेघर होता भारतः एक अंतहीन राष्ट्रीय संकट January 30, 2026 / January 30, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण की समस्या भारत में न तो नई है और न ही किसी एक क्षेत्र तक सीमित। यह एक ऐसी जटिल और बहुआयामी चुनौती है, जो शहरीकरण, पलायन, राजनीतिक स्वार्थ, प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक मजबूरियों के सम्मिलित परिणाम के रूप में सामने आती है। देश के लगभग हर राज्य, हर […] Read more » बेघर होता भारत
समाज सनातन संस्कृति : विश्व कल्याण का शाश्वत मार्ग January 30, 2026 / January 30, 2026 by डॉ. हरिश चन्द्रा | Leave a Comment हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव सनातन संस्कृति जी की आज हर कोई चर्चा कर रहा है. व्यक्ति, परिवार ,समाज जीवन ,राष्ट्र जीवन और विश्व मानवता के लिए इससे शुभ कल्याणकारी और कुछ हो नहीं सकता जब हम सनातनी हो जाए । वास्तविकता तो यह है कि विनाश के मुहाने पर खड़ी वैश्विक समस्याओं का समाधान और विश्व मानवता […] Read more » : विश्व कल्याण का शाश्वत मार्ग sanatan sanskriti सनातन संस्कृति
शख्सियत समाज माखनलाल चतुर्वेदी : राष्ट्रीय पत्रकारिता का तेजोमय प्रखर स्वर January 30, 2026 / January 30, 2026 by प्रमोद कुमार | Leave a Comment प्रमोद दीक्षित मलय प्राथमिक शिक्षा के दौरान एक कविता पढ़ने को मिली थी जिसका प्रेरक भाव मन-मस्तिष्क में आज भी अंकित है। न केवल वह कविता आज तक कंठस्थ है बल्कि वह महनीय रचनाकार का व्यक्तित्व और जीवन भी आंखों के सम्मुख चलचित्र की भांति वर्तमान है। वह कविता थी – ‘चाह नहीं मैं सुरबाला […] Read more » माखनलाल चतुर्वेदी
शख्सियत समाज हिंसा के दौर में गांधी के सिद्धांतों की प्रासंगिकता January 29, 2026 / January 29, 2026 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment 2 अक्तूबर 1869 को पोरबंदर में जन्मे महात्मा गांधी जीवन पर्यन्त देशवासियों के लिए आदर्श नायक बने रहे। देश के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अविस्मरणीय योगदान से पूरी दुनिया Read more » महात्मा गांधी के बलिदान दिवस
शख्सियत समाज सेवा की मिसाल बना पंजाब के एक गांव से निकला संन्यासी January 29, 2026 / January 29, 2026 by अमरपाल सिंह वर्मा | Leave a Comment अमरपाल सिंह वर्मा पंजाब के एक छोटे से गांव से निकले एक साधारण युवक ने संन्यास का मार्ग चुना और राजस्थान में पहुंच कर भक्ति के साथ जन सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। उसने अपने तप, त्याग व करुणा से हजारों-लाखों लोगों की जिंदगी में उजाला भर दिया। आज वही युवक संत […] Read more » संत स्वामी ब्रह्मदेव
समाज क्या टूटी सड़कें ही गाँव से गुजरेंगी? January 29, 2026 / January 30, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment टूटी सड़कें ही गाँव से गुजरेंगी Read more » टूटी सड़कें ही गाँव से गुजरेंगी
राजनीति समाज संगठन गढ़े चलो, सुपथ पर बढ़े चलो January 29, 2026 / January 29, 2026 by वीरेंदर परिहार | Leave a Comment नरेन्द्र मोदी ने यह कहा कि- मैं एक कार्यकर्ता और नितिन नवीन मेरे बास। Read more » नरेन्द्र मोदी ने यह कहा कि- मैं एक कार्यकर्ता और नितिन नवीन मेरे बास संगठन
समाज सहेजना ज़रूरी है, पर कितना? संचय प्रवृत्ति का द्वंद्व January 27, 2026 / January 27, 2026 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment -सुनील कुमार महला मनुष्य की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि वह इस जीवन को स्थायी मानकर चलने लगता है। वह सोचता है कि जितना अधिक वह संचय कर लेगा-धन, संपत्ति, पद, प्रतिष्ठा या संबंध-उतना ही उसका भविष्य सुरक्षित हो जाएगा। वास्तव में, इसी सोच के कारण वह निरंतर संग्रह में लगा रहता है। परंतु […] Read more » संचय प्रवृत्ति का द्वंद्व
समाज जीना हराम करती फोन कॉल मार्केटिंग January 27, 2026 / January 27, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment — डॉ. सत्यवान सौरभ मोबाइल फोन कभी सुविधा, सुरक्षा और संपर्क का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता था। इसने दूरी को कम किया, आपात स्थितियों में जीवन बचाया और संवाद को सहज बनाया। लेकिन समय के साथ यही मोबाइल फोन लाखों लोगों के लिए तनाव, झुंझलाहट और मानसिक अशांति का कारण बनता जा रहा है। […] Read more » फोन कॉल मार्केटिंग