टॉप स्टोरी

कनिष्क कश्यप:आईए देखें पहले अंडा या पहले मुर्गी ?

यहीं गांठ हैं, यहीं उलझन हैं जो आपको
सुलझानी हैं। देखो उस सवाल को……जिसने अपना होना कैसे बनाये रखा। एक ऐसा सवाल जो बार बार
आपको एक अद्रिश्य सता को मानने को विवश करता है। एक ऐसा सवाल जो बड़े बड़े विद्वानों ने,
मनुस्य की सोच और बुद्धि को सीमित करने का रूपक बनाया और आज भी बनाया जाता है।

पहले अंडा आया या पहले मुर्गी?
पहले पेड़ या पहले बीज़? जैसे हज़ारों सवाल आप बना सकतें हैं!

छात्रसंघ की छाती पर लिंगदोह का रोलर

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव संपन्न हुआ । इतिहास में पहली बार चार में से तीन पदों पर छात्रा प्रतिनिधि ने जीत हासिल की । लिंगदोह की आग में झुलसने के बाद भी दो प्रमुख छात्र संगठनों ने मीडिया और वामपंथी संगठनों के खोखले दावों को झुठलाते हुए अपना दबदबा बरकरार रखा । इस बार का डूसू चुनाव कई मायनों में गौर करने लायक है ।

भूख का नया चेहरा

जो भी यह सोच रहे थे कि 2008 के गुजरने के साथ ही खाद्यान्न संकट और भुखमरी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल जाएगी, वे गलत साबित हुए हैं। उन्हें गलत साबित किया है एफएओ की एक रपट ने। बीते दिनों इस संस्था ने अनाज संकट और इससे उपजी भुखमरी पर अपनी रपट जारी की।

आज़ादी के दिन शाहरुख़ अमेरिकी हिरासत में

जश्न -ए -आज़ादी का मुबारक मौका है । हम भारतीय फूले नहीं समा रहे । तेजी से विकसित हो रहे इंडिया के सुखद सपनों में खोये हुए लालकिले की प्राचीर से माननीय प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम भाषण सुनकर छाती चौडी हो रही है ।

मानवता के साथ समझौता करने से कहीं बेहतर है राष्ट्रीयता के साथ समझौता !

आदरणीय डा० मनमोहन सिंह जी ,
चरण कमलों में सादर प्रणाम !

मनमोहन सिंह जी आप के सम्बन्ध में कहते हुए होंठ हिलने लगते हैं , जीभ थरथराने लगती है । डर से नहीं बल्कि आप का व्यक्तित्व हीं इतना प्रभावशाली है !

“करगिल युद्ध “का बिगुल

2 मई १९९९ का मनहूस दिन धरती के स्वर्ग ‘कश्मीर’ की किस्मत में चौथी बार युद्ध की सुगबुगाहट लेकर आया । करगिलके एक छोटे से गाँव गरकौन के कुछ चरवाहे अपनी याकों कि खोज में घूम रहे थे । इसी दौरान इनमें से एक ताषी नामग्याल ने बर्फ में मानव पदचिन्हों के निशान देखे ।

पुलिस सुधार है बेहद जरूरी- हिमांशु शेखर

बीते दिनों गाजियाबाद निवासी रणवीर सिंह की हत्या देहरादून पुलिस ने कर दी। यह मामला अभी भी गरमाया हुआ है। रणवीर के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उसके शरीर पर चोट के 28 निशान थे।

बिगड़ी हालत सेहत की-हिमांशु शेखर

देश में जन स्वास्थ्य की हालत सुधारने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। हर साल इन योजनाओं पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। पर जन स्वास्थ्य के मौजूदा हाल को देखते हुए यह अंदाजा लगा पाना मुश्किल है कि आखिर यह पैसा जा कहां रहा है।