विविधा जानने का अधिकार तो दे दिया पर जानने न दिया February 5, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on जानने का अधिकार तो दे दिया पर जानने न दिया पूजा श्रीवास्तव जी हां, मैं बात कर रही हूं भारत की तीसरी क्रांति के रूप में पहचाने जाने वाले सूचना के अधिकार कानून की स्थिति की……सन् 2005 में सूचना के अधिकार कानून का बनना सुशासन के इतिहास में भले ही एक अहम पन्ना जोडता है पर अगर ये कहा जाए कि ये कानून सफल रहा […] Read more » RTI सूचना का अधिकार
विविधा राजपथ से रामपथ पर: आचार्य गिरिराज किशोर February 4, 2011 / December 15, 2011 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक आचार्य गिरिराज किशोर का जीवन बहुआयामी है। उनका जन्म 4 फरवरी, 1920 को एटा, उ.प्र. के मिसौली गांव में श्री श्यामलाल एवं श्रीमती अयोध्यादेवी के घर में मंझले पुत्र के रूप में हुआ। हाथरस और अलीगढ़ के बाद उन्होंने आगरा से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगरा में […] Read more » Rajpath rampath आचार्य गिरिराज किशोर
विविधा जनता के पैसों की होली खेलने वालों को सिखाना होगा सबक February 4, 2011 / December 15, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे अस्सी के दशक के उपरांत भारत गणराज्य में भ्रष्टाचार की जड़ें तेजी से पनपना आरंभ हुईं थीं। तीस सालों में भ्रष्टाचार का यह बट वृक्ष इतना घना हो चुका है कि इसकी छांव में नौकरशाह, जनसेवक और मीडिया के सरपरस्त सुकून की सांसे ले रहे हैं, किन्तु आम जनता की सांसे इस पेड़ […] Read more » money of public जनता के पैसों की होली भ्रष्टाचार
विविधा विकराल चुनौती बन गई है आंतरिक सुरक्षा February 4, 2011 / December 15, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे केंद्र और राज्यों की सरकारों के बीच समन्वय के अभाव का परिणाम आज साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। अस्सी के दशक से आंतरिक सुरक्षा में गड़बड़ियां प्रकाश में आने लगी थीं। जम्मू काश्मीर के साथ ही साथ पंजाब, असम बुरी तरह सुलगा। कंेद्र सरकार ने इसके शमन के लिए प्रयास […] Read more » internal security a challenge आंतरिक सुरक्षा विकराल चुनौती बन गई है आंतरिक सुरक्षा
विविधा धनकुबेरों के सामने घुटने टेकती सरकार February 4, 2011 / December 15, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे भारत गणराज्य की सरकारों के लिए इससे अधिक शर्म की बात और क्या होगी कि देश के हर एक आदमी के गाढ़े पसीने की कमाई पर सरेआम डाका डालकर धनपति बने लोगांे ने अपनी अकूत दौलत को देश से बाहर के बैंकों में जमा कर रखा है, और सरकार उनके सामने बौनी ही […] Read more » government falling in front of richest persons धनकुबेरों के सामने घुटने टेकती सरकार
विविधा अंध-आस्था से लेस सांप्रदायिकता ही कट्टरवाद की जननी है….. February 3, 2011 / December 15, 2011 by श्रीराम तिवारी | 2 Comments on अंध-आस्था से लेस सांप्रदायिकता ही कट्टरवाद की जननी है….. श्रीराम तिवारी ईश्वर का नाम लेने में न तो कोई बुराई है और न ही किसी का अनिष्ट होने कि कोई संभावना है.मानव सभ्यता के विभिन्न दौर में प्राकृतिक आपदाओं और वैयक्तिक कष्टों से निज़ात पाने या संघर्ष क्षमता हासिल करने कि चेष्टा में प्रबुद्ध मानवों ने वैज्ञानिक आविष्कारों कि तरह ही मानसिक ,चारित्रिक ,सामाजिक […] Read more » communalism fundamentalism सांप्रदायिकता ही कट्टरवाद की जननी है
विविधा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का अंतिम दिवस… February 3, 2011 / December 15, 2011 by श्रीराम तिवारी | 2 Comments on राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का अंतिम दिवस… श्रीराम तिवारी “आज नई दिल्ली में शाम के पांच बजकर सत्रह मिनिट पर , राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या हो गई ” उनका हत्यारा एक हिन्दू है ‘ वह एक ब्राम्हण है ‘ उसका नाम नाथूराम गोडसे है ‘ स्थान बिरला हॉउस ……….ये आल इंडिया रेडिओ है ……..{पार्श्व में शोक धुन }…… उस वैश्विक शोक […] Read more » last day of Mahatma Gandhi महात्मा गाँधी
विविधा भोपाल में अटकी इंदौर की मेट्रो February 3, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment विनोद उपाध्याय देवी अहिल्या की नगरी इंदौर का नाम देश के चुनिंदा 18 पर्यटन स्थलों में शुमार हो गया है। शहरवासियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों के लिए भी यह खुश-खबर अवश्य है, जिससे नगर को सँवारने वाली संस्थाओं पर जवाबदारी और बढ़ गई है। इंदौर को प्रारंभिक विकास के दौर में जिन कपड़ा उद्योगों व हस्तशिल्प […] Read more » Bhopal indore metro भोपाल में अटकी इंदौर की मेट्रो
विविधा कैसे पड़ा भारत का नाम? February 1, 2011 / December 15, 2011 by सूर्यकांत बाली | 3 Comments on कैसे पड़ा भारत का नाम? सूर्यकांत बाली इस लेख में हम सिर्फ भारत का गुणगान करेंगे। भारत का गुणगान करना तो एक तरह से अपना ही गुणगान करना हुआ। तो भी क्या हर्ज है? गुणगान इसलिए करना है क्योंकि उनको, उन पश्चिमी विद्वानों को जो हमें सिखाने का गरूर लेकर इस देश में आए थे, उनको बताना है कि हमारे […] Read more » naming of India भारत
विविधा बहिर् ने खींचा, अंतर ने सींचा February 1, 2011 / December 15, 2011 by चैतन्य प्रकाश | 1 Comment on बहिर् ने खींचा, अंतर ने सींचा चैतन्य प्रकाश सर्दी में त्वचा के खिचाव का अनुभव किसे नहीं होता? यही अनुभव शायद खिंचाव के संबंध में मनुष्य का प्राथमिक अनुभव है। कहावत ही बन गई है- ‘जाके पैर न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई।’ खिंचाव पीड़ा की उपस्थिति का प्रमाण है। जीवन में भी खिंचाव, तनाव के अर्थ में व्यक्त […] Read more » अंतर ने सींचा बहिर् ने खींचा
विविधा पी. के. रथ को सजा के बदले संरक्षण January 30, 2011 / December 15, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 2 Comments on पी. के. रथ को सजा के बदले संरक्षण डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ पिछले दिनों प्रिण्ट एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने एक खबर खूब बढाचढाकर प्रकाशित एवं प्रसारित किया गया कि सुकना भूमि घोटाले में सैन्य कोर्ट मार्शल ने थल सेना के पूर्व उप प्रमुख मनोनीत लेफ्टिनेंट जनरल पी. के. रथ को दोषी करार देकर कठोर दण्ड से दण्डित किया है। जबकि सच्चाई यह है […] Read more » punishment to P.K.RATH पी. के. रथ को सजा के बदले संरक्षण
विविधा डरपोक थे पंडित नेहरू : प्रो. टेंग January 29, 2011 / December 15, 2011 by पवन कुमार अरविन्द | 7 Comments on डरपोक थे पंडित नेहरू : प्रो. टेंग डॉ. मोहन कृष्ण टेंग कश्मीर विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे दिसम्बर 1991 में विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर समस्या का गहनतम अध्ययन किया है। उनकी कश्मीर मामले पर कई पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं; जिनमें- कश्मीर अनुच्छेद-370, मिथ ऑफ ऑटोनामी, कश्मीर स्पेशल स्टेटस, कश्मीर : कांस्टीट्यूशनल हिस्ट्री एंड […] Read more » Pandit Nehru was timid डरपोक थे पंडित नेहरू पंडित नेहरू