महिला-जगत लेख स्त्री : बहुत कुछ पाना शेष अभी March 7, 2025 / March 7, 2025 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment लड़ी, आगे बढ़ी, पर क्षितिज बहुत दूर डॉ० घनश्याम बादल पहले अंतरराष्ट्रीय महिला वर्ष 1975 के बाद से 8 मार्च स्त्री के ‘पौरुष’ की पहचान का दिन बन गया है. इस दिन सारी दुनिया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाती है । घर की चारदीवारी से निकलकर विस्तृत कर्म क्षेत्र में उतरने के बाद अब वह अपना धरातल […] Read more » Woman: There is still much left to achieve
महिला-जगत लेख कन्या को देवी, महिला को लक्ष्मी की तरह पूजते, फिर क्यों महिला अपराध में असफल ? March 7, 2025 / March 7, 2025 by पारसमणि अग्रवाल | Leave a Comment पारसमणि अग्रवाल कोंच आज महिला दिवस है. हमेशा की तरह बड़ी बड़ी बातें की जाएगी और खुद को महिलाओं का रक्षक बताने की होड़ सी लग जाएगी । नवरात्रि में कन्याओं को देवी के रूप में पूजते है, विवाह के बाद उन्हें घर की लक्ष्मी का दर्जा दे दिया जाता है और उन्ही के साथ […] Read more » Girls are worshipped as goddesses and women as Lakshmi then why are women unsuccessful in committing crimes? क्यों महिला अपराध में असफल
महिला-जगत लेख समाज नारी है स्नेह का स्रोत और मांगल्य का महामंदिर March 7, 2025 / March 7, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस – 8 मार्च, 2025-ललित गर्ग- महिलाओं की भागीदारी को हर क्षेत्र में बढ़ावा देने और महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष और उनके हक की लड़ाई की कहानी बयां करता […] Read more » अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
महिला-जगत लेख समाज सोशल मीडिया और महिलाओं की प्रतिष्ठा : डीपफेक और मॉर्फिंग के ख़िलाफ़ जंग March 6, 2025 / March 6, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment उमेश कुमार साहू हर वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है जो महिलाओं के अधिकारों, उनकी उपलब्धियों और उनके समक्ष मौजूद चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। वर्तमान डिजिटल युग में, सोशल मीडिया महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का मंच तो बना है, लेकिन इसके साथ ही […] Read more » Social media and women's dignity The fight against deepfakes and morphing डीपफेक और मॉर्फिंग के ख़िलाफ़ जंग सोशल मीडिया और महिलाओं की प्रतिष्ठा
महिला-जगत लेख समानता से परे: सार्वजनिक मूत्रालयों के लिए महिलाओं का संघर्ष March 6, 2025 / March 6, 2025 by अमरपाल सिंह वर्मा | Leave a Comment -अमरपाल सिंह वर्मा- हमारे देश में अक्सर महिलाओं के अधिकारों की बात की जाती है। समानता के नारे गूंजते हैं लेकिन क्या कभी हमने यह सोचा है कि समानता तो दूर, महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालय तक पहुंच पाना भी एक बड़ा संघर्ष है? हाल में यह जान कर हैरानी की सीमा नहीं रही कि […] Read more » Beyond equality: Women's struggle for public urinals सार्वजनिक मूत्रालयों के लिए महिलाओं का संघर्ष
महिला-जगत लेख समाज साक्षात्कार महिलाओं के लिए सुख की परिभाषा बदलने वाली महिला March 6, 2025 / March 6, 2025 by कल्पना पांडे | Leave a Comment – कल्पना पांडे 1929 में अमेरिका के विचिटा में जन्मी बेट्टी डॉडसन (पीएच.डी.) ऐसे दौर में बड़ी हुईं जब खुले रूप से यौन विषयों पर चर्चा करना लगभग वर्जित था। एक रूढ़िवादी परिवार में पली-बढ़ी बेट्टी ने जल्द ही समझ लिया कि इच्छा और आत्म-संतोष से जुड़े प्रश्नों का उत्तर या तो चुप्पी से दिया जाता है […] Read more » बेट्टी डॉडसन (पीएच.डी.)
महिला-जगत लेख नारी सम्मान से ही समाज की शान March 5, 2025 / March 5, 2025 by डा. विनोद बब्बर | Leave a Comment 8 मार्चः महिला दिवस पर विशेष विनोद बब्बर यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता, अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। इसी प्रकार कहा गया- ‘न गृहं गृह मित्याहु गृहिणी गृह मुच्यते’. सच ही है परिवार संस्था की संकल्पना नारी के बिना व्यर्थ है। महल हो या टूटी झोंपड़ी, गृहलक्ष्मी के प्रवेश से ही घर […] Read more » 8 मार्चः महिला दिवस
महिला-जगत लेख यौन अत्याचारों के बढ़ने की त्रासदी पर लगाम लगे March 3, 2025 / March 3, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment यौन शोषण के विरुद्ध संघर्ष का विश्व दिवस -4 मार्च, 2025-ललित गर्ग- यौन शोषण दुनिया के लिए बड़ी समस्या है, जो दुनिया भर में है। हालांकि कुछ देशों में महिलाएं अधिक असुरक्षित एवं यौन उत्पीड़न, शोषण एवं हिंसा की शिकार हैं, इनमें दक्षिण पूर्व एशिया, पूर्वी यूरोप और कुछ लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों शामिल […] Read more » The tragedy of increasing sexual atrocities must be curbed यौन अत्याचारों के बढ़ने की त्रासदी
महिला-जगत लेख महिला सशक्तिकरण की दौड़ जीतती भारतीय रेलवे January 15, 2025 / January 15, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment पुरुषों के गढ़ तोड़ने वाली “प्रथम महिलाओं” को पहचानने की आवश्यकता कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियुक्तियों के नवीनतम दौर के साथ पहली बार रेलवे बोर्ड में महिलाएँ ड्राइवर की सीट पर हैं। कांच की छत को तोड़ते हुए, रेलवे बोर्ड का नेतृत्व पहले से ही एक महिला द्वारा किया जा रहा है, अब संचालन और व्यवसाय […] Read more » Indian Railways wins the race of women empowerment महिला सशक्तिकरण
महिला-जगत राजनीति गायब होती बेटियाँ: आख़िर किसकी बन रहीं शिकार January 10, 2025 / January 10, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment हरियाणा के हिसार में लापता बेटी की खोज में परेशान एक पिता ने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मिलने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस ने सीएम के पास जाने से रोका तो दंपती ने आत्मदाह करने का प्रयास किया। घटना उस समय हुई जब मुख्यमंत्री का काफ़िला हिसार दौरे पर था। पिता ने ख़ुद पर […] Read more » Disappearing daughters गायब होती बेटियाँ
महिला-जगत राजनीति महिला सुरक्षा कानूनों का बढ़ा दुरुपयोग January 2, 2025 / January 2, 2025 by डॉ.नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी | Leave a Comment डॉ.नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी पुराने जमाने में हमारा देश बहुत पिछड़ा हुआ था। समाज में अशिक्षा व्याप्त थी। स्त्रियां तो क्या पुरुष भी अशिक्षित थे। उस समय महिलाओं की दशा व दिशा समाज में बहुत ही खराब थी। वे सिर्फ भोग की वस्तु समझी जाती थी । उन्हें कोई अधिकार न था। उनकी स्थिति एक मजदूर […] Read more »
महिला-जगत लेख आत्मनिर्भर और सशक्त बन रहीं हैं देश की महिलाएं। December 12, 2024 / December 12, 2024 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला प्राचीन काल से ही महिलाओं का स्थान भारत में बहुत ही महत्वपूर्ण व अहम रहा है। महिला को ही सृष्टि रचना का मूल आधार कहा गया है। महिलाएं, हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक अंग है क्योंकि विश्व की आधी जनसंख्या तकरीबन महिलाओं की ही है। डॉ. अंबेडकर ने एक बार यह बात कही थी कि यदि किसी समाज की प्रगति के बारे में सही-सही जानना है तो उस समाज की स्त्रियों की स्थिति के बारे में जानो। कोई समाज कितना मजबूत हो सकता है, इसका अंदाजा इस बात से इसलिए लगाया जा सकता है क्योंकि स्त्रियाँ किसी भी समाज की आधी आबादी हैं। बिना इन्हें साथ लिए कोई भी समाज अपनी संपूर्णता में बेहतर नहीं कर सकता है। बहरहाल, कहना ग़लत नहीं होगा कि भारतीय समाज में आज महिलाओं को लगातार सशक्त बनाने की दिशा में अनेक कदम उठाए जा रहे हैं क्योंकि यह बात हम सभी जानते हैं कि जब भारत की नारी सशक्त होगी तभी परिवार सशक्त होगा, परिवार के बाद समाज और समाज के बाद देश सशक्त होगा। इस संबंध में हाल ही में(11 दिसंबर को) हरियाणा के पानीपत के कम्युनिटी सेंट्रल हाल में महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीमा सखी योजना का आगाज किया है। उल्लेखनीय है कि एलआईसी बीमा सखी योजना 18 से 70 साल की महिलाओं(दसवीं पास) के लिए है। इसमें महिलाओं को पहले तीन साल की ट्रेनिंग दी जाएगी और इस ट्रेनिंग पीरियड के दौरान महिलाओं को कुछ पैसे( दो लाख रुपए से अधिक) भी मिलेंगे। उल्लेखनीय है कि इसमें पहले साल 7 हजार, दूसरे साल 6 हजार और तीसरे साल 5 हजार रुपये महीना मिलेंगे। इसमें बोनस कमीशन शामिल नहीं है। इसके लिए शर्त रहेगी कि महिलाएं जो भी पॉलिसी बेचेंगी, उनमें से 65 फीसदी अगले साल के आखिर तक सक्रिय (इन-फोर्स) रहनी चाहिए। इस योजना के तहत दसवीं पास महिलाएं पहले साल हर महीने कम से कम दो और साल में 24 पालिसी बेचेंगी। उन्हें बोनस के अलावा कमिशन के तौर पर 48 हजार रुपये वार्षिक मिलेंगे यानी एक पालिसी के लिए 4 हजार रुपये। सबसे अच्छी बात यह है कि ट्रेनिंग के बाद महिलाएं एलआईसी बीमा एजेंट के रूप में काम कर सकेंगी। इतना ही नहीं इस योजना के तहत, बीए पास बीमा सखियों को विकास अधिकारी यानी डेवलेपमेंट ऑफिसर बनने का मौका भी मिल सकता है। वास्तव में, इस योजना के तहत महिलाएं अपने इलाके की महिलाओं को बीमा कराने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। इस योजना का मुख्य और अहम् मकसद देश की महिलाओं को आत्मनिर्भर व आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है। यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि महाराष्ट्र में ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ 1 जुलाई 2024 से चल रही है। इसके तहत पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे है। इधर मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना के बारे में कौन नहीं जानता। कहना ग़लत नहीं होगा कि इस योजना के वृहद स्वरूप ने प्रदेश की महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण में महती भूमिका निभाई है। इस योजना से न केवल महिलाओं ने अपनी छोटी-छोटी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा किया है बल्कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिये महिलाएं बैंकिंग प्रणाली से सीधे परिचित हुई हैं। इससे परिवार के निर्णयों में भी उनकी भूमिका बड़ी है और सामाजिक रूप से महिलाओं के सम्मान में वृद्धि हुई है। बहरहाल, पाठकों को बताता चलूं कि देश में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत भी वर्ष 22 जनवरी 2015 में हरियाणा के पानीपत से ही हुई थी। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत के चार स्तम्भ(गरीब , युवा, किसान और महिला) मानते हैं, और महिला सशक्तिकरण उनमें से एक है। आज देश में नारी समानता पर लगातार काम हो रहा है और देश की महिलाएं लगातार सशक्त हो रहीं हैं। आज राजनीति में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के मकसद से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लाया गया है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हरियाणा में पांच लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया है। एक अन्य अभियान नमो ड्रोन दीदी का है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन पायलटों का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आज महिला शिक्षा, महिला रोजगार पर लगातार जोर दिया जा रहा है। महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री उज्जवला योजना है।इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर गृहणियों को रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। इतना ही नहीं ,महिला सशक्तिकरण की दिशा में ही देश में 10 अक्टूबर 2019 से सुरक्षित मातृत्व आश्वासन सुमन योजना भी चलाई जा रही है जिसके तहत 100 फीसदी तक अस्पतालों या प्रशिक्षित नर्सों की निगरानी में महिलाओं के प्रसव को किया जाता है. ताकि प्रसव के दौरान मां और उसके बच्चे के स्वास्थ्य की उचित देखभाल की जा सके। सुकन्या समृद्धि योजना, फ्री सिलाई मशीन योजना और महिला शक्ति केंद्र योजना अन्य योजनाएं हैं जो लगातार महिलाओं को आर्थिक रूप आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। सुनील कुमार महला Read more » The women of the country are becoming self-reliant and empowered. आत्मनिर्भर और सशक्त महिलाएं