महिला-जगत

मातृशक्ति को अपने अधिकारों और शक्ति को पहचानने की जरुरत

आज जरूरत है कि समाज में महिलाओं को अज्ञानता, अशिक्षा, कूपमंण्डुकता, संकुचित विचारों और रूढिवादी भावनाओं के गर्त से निकालकर प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए उसे आधुनिक घटनाओं, ऐतहासिक गरिमामयी जानकारी और जातीय क्रियाकलापों से अवगत कराने के लिए उसमे आर्थिक ,सामजिक, शैक्षिक, राजनैतिक चेतना पैदा करने की। जिससे की नारी पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर समाज को आगे बढाने में सहयोग कर सके।

क्यों न स्त्री होने का उत्सव मनाया जाए

स्त्री ईश्वर की एक खूबसूरत कलाकृति !
यूँ तो समस्त संसार एवं प्रकृति ईश्वर की बेहतरीन
रचना है किन्तु स्त्री उसकी अनूठी रचना है , उसके दिल के बेहद करीब ।
इसीलिए तो उसने उसे उन शक्तियों से लैस करके इस धरती पर भेजा जो स्वयं उसके पास हैं मसलन प्रेम एवं ममता से भरा ह्दय , सहनशीलता एवं धैर्य से भरपूर व्यक्तित्व ,क्षमा करने वाला ह्रदय , बाहर से फूल सी कोमल किन्तु भीतर से चट्टान सी इच्छाशक्ति से परिपूर्ण और सबसे महत्वपूर्ण , वह शक्ति जो एक महिला को ईश्वर ने दी है , वह है उसकी सृजन शक्ति ।