लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

प्रवक्‍ता ब्यूरो

Posted On by &filed under राजनीति.


पाकिस्तान बनने के पश्चात भी भारत में हिन्दुओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है-

1. हिन्दुओं की जनसंख्या का प्रतिशत कम करने के लिए मुसलमानों को चार-चार शादीयां और अधिक बच्चे, जबकि माननीय उच्चतम न्यायालय कई बार देश के सभी नागरिकों के लिये Common Civil Code (समान नागरिक संहिता) बनाने का आदेश दे चुका है।

2. शिक्षा संस्थाओं में हिन्दुओं को धार्मिक शिक्षा देने पर पाबंदी किन्तु गैर हिन्दुओं को स्वतंत्रता, जिसकी व्यवस्था भारत के संविधान की धारा 28, 29 और 30 में ही कर दी गई और इतना ही नहीं सोनिया गांधी की यूपीए सरकार तो इस्लामी शिक्षा को अत्याधिक प्रसारित करने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसे कट्टर इस्लामी शिक्षा संस्थान के भारत के अनेक भागों में चालू कर रही है जैसे केरल में मल्लापुरम, पश्चिम बंगाल में मुर्शीदाबाद, बिहार में किशनगंज, मध्य प्रदेश में भोपाल आदि जिसके परिणामस्वरूप इस्लामी आतंकवाद की ही बढ़ोतरी होगी। ये सब हिन्दू करदाताओं की गाढ़ी कमाई के पैसे से हो रहा है। गैर हिन्दू अर्थात् ईसाई, मुसलमानों आदि की शिक्षा संस्थाओं में अध्यापकों की नियुक्ति एवं विद्यार्थी के प्रवेश आदि विषयों में उनके विशेष अधिकार और स्वायत्तता दिये जाने पर भी इसके अतिरिक्त इस्लामी कट्टरवाद के कारखाने इस्लामी मदरसों को अत्याधिक धन का आवंटन भारत सरकार द्वारा किया जाता है।

3. गैर हिन्दुओं के लिए अल्पसंख्यक आयोग (Minority Commission), जो अनेक संवेदनशील मामलों पर हिन्दू विरोधी और अल्पसंख्यकों के प्रति पक्षपात करता हुआ अनेक प्रकार से काम करता है।

4. भारत में हिन्दुओं को नकारते हुए गैरहिन्दुओं (मुसलमान, ईसाई आदि) की आर्थिक शक्ति को अधिक बढ़ाने के लिए सरकारी खजाने से मुफ्त सब्सीडी और बहुत कम ब्याज दर 3 प्रतिशत पर ऋण दिया जाता है। इस प्रकार गैरहिन्दुओं के मुकाबले में हिन्दू उद्यमी उद्योग और व्यवसाय में पिछड़ जाते है। गैरहिन्दुओं की आर्थिक सहायता और उन्नति के लिए National Minorities Development & Finance Corporation (NMDFC) का निमार्ण किया गया।

5. संप्रग सरकार द्वारा केवल गैरहिन्दुओं के हित साधने के लिए एक अलग अल्पसंख्यक मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) भी बना दिया गया है, जिसने अनेक प्रकार से मात्र गैर हिन्दुओं को आर्थिक सहायता देने की योजना बनाई है। परन्तु पता नहीं हिन्दुओं ने क्या पाप किया है जो उन्हें इन सभी योजनाओं से वंचित रखा जाता है।

6. दक्षिण भारत के सभी विशाल हिन्दू मंदिरों का प्रबन्धन सरकार द्वारा अपने हाथों में लिया जा चुका है और इन मंदिरों की आय का लगभग आधा धन ईसाई और मुस्लिम संस्थाओं में बांटा जा रहा है, जोकि हिन्दू धर्म के प्रसार में लगाये जाने की बजाय हिन्दू धर्म के विरूध्द ही काम आ रहा है।

7. भारत सरकार द्वारा मुसलमानों को हज यात्रा के लिये करोड़ों रूपये सरकारी कोष से दिये जाते है जबकि संसार का अन्य कोई भी देश यहां तक की सऊदी अरब या पाकिस्तान भी हज यात्रा के लिये धन नहीं देता भारत में यह हिन्दू करदाता पर एक प्रकार से दंड ही है।

8. अल्पसंख्यक मंत्रालय एवं प्रधानमंत्री की 15 सूत्री योजनाओं द्वारा गैर हिन्दू अर्थात् ईसाई, मुसलमान आदि के बच्चों को लाखों छात्रवृत्तियां दी जाती हैं, किन्तु हिन्दू बच्चों द्वारा उनसे अधिक अंक लाने पर भी उन्हें इनसे वंचित रखा जाता है, इस प्रकार के भेदभाव से बच्चों की मनोदशा पर कितना घातक प्रभाव पड़ता होगा इसकी तो मात्र कल्पना ही की जा सकती है।

9. यह सब इसीलिए हो रहा है कि हिन्दू अपने ऊपर हो रहे अन्याय और अत्याचार के विरूध्द आवाज नहीं उठाते। जबकि भारत सरकार को जो टैक्स प्राप्त होता है उसमें से 95 प्रतिशत टैक्स तो हिन्दुओं द्वारा ही दिया जाता है। फिर भी श्रीमती सोनिया गांधी की अध्यक्षता में चलने वाली संप्रग सरकार (UPA) हिन्दुओं को ही कमजोर करने पर तुली हुई है।

यदि हिन्दुओं के प्रति हो रहा अन्याय बंद नहीं किया गया तो हिन्दू ऐसे नेताओं को वोट देना बंद कर देगें।

प्रो. जयदेव आर्य

डॉ. कैलाश चन्द्र

26 Responses to “केन्द्र सरकार का हिन्दुओं के प्रति घोर अन्याय”

  1. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    कई दिन बाद भाई मीना जी की पुरानी टिप्पणी पढ़ कर कहना चाहता हूँ की डा. मीना जी से अधिक अभद्र भाषा का प्रयोग तो शायद ही किसी ने किया हो. फिरभी इन्हें लगता है कि प्रवक्ता पर गली-गलौच होती है तो इसका एक ही कारण हो सकता है कि इन्हें अपनी मान्यताओं के विरुद्ध कही हर बात गोली की तरह लगाती होगी जिसे ये गाली समझ लेते हैं. इनकी संकीर्ण दृष्टी और हिन्दू विद्वेष ही इसका कारण हैं. इन्हें तो हिन्दू समाज व संस्कृति की प्रशंसा किसी गाली से कम लगती नहीं होगी. मेरे प्यारे मित्र आपसे अधिक कटु और अपमान जनक शब्दों का प्रयोग किसी और ने कहाँ किया है ? हिदू विद्वेष के कारण आप सच को देखने- समझाने कि सामर्थ्य गवांते जा रहे हैं. मेरी हार्दिक इच्छा है की आपकी प्रतिभा घृणा और विद्वेष में नष्ट न हो. अस्तु ईश्वर से प्रार्थना है की वह आपको सद्बुधी प्रदान करे और आप अपने देश की जड़ें खोदने के पाप से बच जाएँ.

    Reply
  2. Raj

    डॉ. मीना नए खोज के मुताबिक आर्य बहार से नहीं आये है और दूसरी बात हिन्दू ही हिन्दू सर्कार नहीं चाहता का क्या मतलब, ज्यातर लोगो को धर्मनिरपेक्षता का कीड़ा काटा है मतलब गाँधी की अहिन्षा वाला नशा उसमे हिन्दू धर्म नहीं दीखता हिन्दुओको , और दूसरी बात मनुस्मृति लागु करना जातिवाद बडाना, सायद आप ने डॉ. आंबेडकर की किताबें नहीं पड़ी उन्होंने जातिवाद कब और कैसे लागु किया ये सब लिखा है और आर्यों के नाम पर जो जातिवाद आप लोग फैला रहे हो उसका क्या एक समाज को दुसरे समाज से दूर क्यों लेकर जा रहे हो सर क्यों मुसलमानों को और ईसाईयों को clean chit दे रहे हो क्या आप की आखों मैं भी seculisrisim का कला चस्मा चढ़ा हुआ है ?

    Reply
  3. Raj

    अब्दुल रशीद भाई नहीं कहूँगा, मुस्लमाने की आस्था आज भी पाकिस्थान मैं है भाररत मैं नहीं बदनाम क्या करना तुम लोग पहेले से ही बदनाम हो रही बात बाहरी अक्रान्ताओ की वो लोग तुम लोगों के हीरोस है इस बात मैं कोइ सक नहीं

    Reply
    • Abdul Rashid

      आप यदि व्यक्तिगत मेरे लिए लिखा है तो आप हमें अपनी कुंठित व्यथा जरुर लिख कर भेजें मै अपने अखबार में प्रकाशित कर आपकी अवाज को लोगो तक पहुँचाने का कष्ट करूँगा.
      singrauli.patrika@जीमेल.कॉम
      Singrauli M.P.

      Reply
  4. Raj

    सर आप ने सही बोला कांग्रेस मुसलमानों को सर पद बिताना चाहती है जैसे मोहनदास गाँधी ने किया और हिन्दुओको मिटाना चाहती है और सायद किसी हद तक कामयाब भी हो गयी है बहुत से हिन्दू सिर्फ नाम के रहा गए है उन पर धर्मनिरपेक्षता का भूत सवार हो गया है इसीलिए कांग्रेस हमेशा सत्ता मैं रहती ई है

    Reply
  5. AJAY

    yai सब sonia ki sajish hai hindu dharam ko khatam karne ki, congress nai cross ke sikke to chalva diye aur shahid bhagat singh ke name ke rukva diye- jo aj भी reserve bank mai pade hai , is sonia nai अमरनाथ yatra पर भी garhen lagva diya, vahi कर rahi hai, jo iske purvaj कर गई– bharat का bedagark ! koi ban gaya mahatma, koi ban gaya chacha aur देश का कर गई satyanash, baki kasar sardar जी कर रहे hai, jo bachegi usko yuvraj puri कर dengai

    Reply
  6. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    भाई अब्दुल रशीद,
    जो लोग भारत के वफादार हैं उनपर न कभी कोई उंगली उठी और न उठ सकती है. डा. अबदुलकलाम जैसे देशभक्तों के प्रति सारा श्रधा रखता है. पर इस पर तो पर्दा नहीं डाल सकते की ऐसे भी हैं जो वंदेमातरम पर ऐतराज़ करते हैं, पाकिस्तान पईन्दाबाद कहते हैं, भारत से अधिक पाक के वफादार हैं, जिहादियों का साथ देते हैं, गोहत्या को ज़रूरी समझते हैं, आज भी भारत के वफादारों का रक्त इस्लाम के नाम पर बहा रहे हैं. भारत के वफादार और भारत के गद्दारों की अलग-अलग पहचान रख कर ही व्यवहार करने की ज़रूरत है. निसंदेह अनेक मुस्लिम भाई देश के प्रति उतने ही वफादार हैं जितने की अधिकाँश हिन्दू हैं. आखिर हिन्दू व भारतीय मुस्लिमों के पूर्वज व अतीत एक ही तो हैं. जिनके लिए चंगेज़ खान, हुमायूं और बाबर विदेशी आक्रान्ता हैं, उनकी मातृभूमि, राष्ट्रीयता और संस्कृति भारतीय ही है फिर उनका मज़हब कोई भी हो.

    Reply
  7. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    डा. पुरुषोत्तम मीना जी की असभ्यता पूर्ण, विद्वेष व घृणा फैलाने वाली टिपण्णी प्रवक्ता पर छप जाने के बाद भी इन्हें प्रवक्ता की नीयत पर संदेह है तो क्यों ?
    मतलब साफ़ है , ये चाहते हैं की केवल इन्ही की विद्वेष फैलाने वाली सामग्री छपे, इनकी पोल खोलने वाली कोई सामग्री न छपे. राष्ट्रीय मीडिया में इनकी यह दादागिरी खूब चल रही है. नेट पर सच भी छपता है, इसी बात की इन्हें तकलीफ है. मेरी बात को जांचने के लिए स्वयं देख लें कि राष्ट्रीय मीडिया इन ईसाई देशों के हाथों की कठपुतली बना हुआ है कि नहीं ? देश द्रोहियों के पक्ष में सबकुछ उनकी पसंद का छपता है और देश भक्तों के समाचार गायब कर दिए जाते हैं.
    नेट पर भी ये लोग यही दादागिरी चलाना चाहते हैं

    Reply
  8. Abdul Rashid

    क्या अभद्र भाषा का प्रयोग करना भारतीयता है?
    क्या मुस्लिम समाज भारत के विकास में अवरोधक है?
    जब पाकिस्तान बना तब जिन्हें जाना था वे चले गए जो रह गए उन्हें मादरेवतन हिन्दुस्तान कि मुहब्बत ने रोक लिया। यहीं पैदा हुए हैं यहीं सुपुर्देखाक हो जाएंगे।
    वे लोग जो भारत में रहकर पाकिस्तान से नाता जोड़ते हैं मैं ऐसे लोग को भारत का मानता हि नहीं क्योंकि इसलाम में मादरेवतन कि मुहब्बत के बाद मजहब आता है। जो अपने वतन से मुहब्बत नही रखता वह इसलाम से हि खारिज माना जाता है।
    क्या हम इतिहास को बदल सकते हैं शायद नहीं लेकिन इतिहास बना सकते हैं।
    क्या ए पी जे अब्दुल कलाम को देख कर आपको गुमान नहीं होता है?
    क्या वीर अब्दुल हमीद की शहादत पर आपको गर्व नहीं होता है?
    एक बाग में केवल गुलाब के फूल हैं और एक बाग में हर तरह के फूल खिलखिला कर मुस्कुरा रहें है कौन सा बाग सा बाग खूबसूरत लगेगा। यकीनन जिस बाग में हर तरह के फुल खिले हैं,
    भारत की यही खूबसूरती है, इस खूबसूरती को चन्द अपाहिज मानसिकता के रोगी लोगों के लिए धूमिल मत कीजिए।

    Reply
  9. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    मोहम्मद अत्तर भाई आप केवल अपनी आस्था प्रकट करने वाली बातें कह रहे हैं. काश सच वह होता जो आप कह रहे हैं. सच पर परदे दाल देने से किसी का भी भला नहीं होने वाला. यदि हिन्दुओं में कोई कमी है तो उसे समझ्लर दूर करने से समाधान होगा. और अगर मुस्लिमों में कोई कमी है तो उसे भी सामने लाकर दूर करना होगा. क्या अप बतलायेगे कि (१) गाजी किसे कहते हैं ? इतिहास में हुए गाज़ों में से कुछ के नाम और कारनामें तो ज़रा गिनाये, अगर आप जानते हों. वरना में गिना दूंगा.
    (२) काफिर किसे कहा गया है ? कृपया अपना मत नहीं, मुस्लिम विद्वानों द्वारा कुरआन शरीफ के तर्जुमे के अनुसार बतलाएं. (३) मुन्किर और मुशरिक किसे कहा गया ? (४) दुनिया में जिहाद के नाम पर क्या हो रहा है ? ये लोग कौन हैं ? क्यूँ कत्लो-गारत फैला रहे है ? इस्लाम से जुड़े लोग इस तबाही में भागीदार क्यूँ है ? (५) काश्मीर, पाकिस्तान और बंगलादेश में हिन्दुओं की दुर्दशा का कारण क्या है ? वहाँ इनकी जनसंख्या घटने के कारण क्या हैं ?
    – मेरे दोस्त में आपको अनेक प्रमाण दे सकता हूँ कि विदेशी इस्लामी आक्रामकों ने इस्लाम के नाम पर करोड़ों हिन्दुओं को मारा, लुटा, सताया, अपमानित किया. सच को अधिक देर तक छूपया नहीं जा सकता. पर आप लोग अपनी ताकत गलत जगह लगा रहे हो. इस्लाम की तबाही की तैयारी ईसाई यूरोपीय बिरादरी बड़े खतरनाक ढंग से कर चुकी है. आप लोग उसका शिकार बन कर भी समझ नहीं पा रहे कि हो क्या रहा है.
    *** सबसे ज़रूरी बात यह है कि आप सब मुस्लिम बिरादरी के लोग अमेरिका के बनाए बलि के बकरे बन रहे हो. अपनी करनियों पर परदे डालने के लिए आप लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है. जिहाद का डर फैला कर मुस्लिम देशों को तबाह किया जा रहा है. अगली बारी अब इरान की लगने वाली है. इस्लामी आतंक की ओट में अमेरिका का आर्थिक शोषण व दुनिया पर आर्थिक कब्जा करने का अभियान छुपा दिया गया है. हो सके तो इस असली खतरे को समझ कर इसका समाधान करने के बारे में सोचना चाहिए. * हिन्दू- मुस्लिम फसाद, हिन्दू को हिन्दू से लड़ाने की चालबाजियों के पीछे छुपी ताकतों को पहचानने का प्रयास हमें करना चाहिए.

    Reply
  10. यदि बोलोगे नहीं तो कोई सुनेगा कैसे?-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'/Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

    मैं लम्बे समय से प्रवक्ता को पढता रहा हूँ और प्रवक्ता पर मेरे अनेक आलेख भी प्रकाशित किये गए हैं, जो अनेक विषयों से सम्बंधित हैं, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस मंच पर केवल उन्हें आलेखों पर चर्चा, बहस या गाली-गलोंच होती है, जिनमें धर्म निरपेक्षता के समर्थन में लिखा जाये या हिन्दू नाजियों के जुल्मों के खिलाफ लिखा जाये या मुसलामनों और ईसाईयों को गद्दार घोषित करने के लिए लिखा जाये! टिप्पणी करने वाले विषय के बजाय लेखक या निष्पक्ष टिप्पणीकार के खिलाफ व्यक्तिगत और अभद्र टिप्पणी करना शुरू कर देते हैं! मैंने एक लेख लिखा था “हिन्दू क्यों नहीं चाहते हिन्दुवादी सरकार?” (http://www.pravakta.com/story/12527) बार-बार आग्रह करने के बाद भी इस लेख पर बिन्दुबार टिप्पणी करने से सभी कथित हिन्दू धर्म रक्षक, संघी, बजरंगी और भाजपाई कन्नी काट जाते हैं! मैंने ये देखा है की यहाँ पर कुछ लेखक (जो आर्य मूल के हैं या आर्यों के मोहपाश में फंसे हुए हैं) आर्यों के अत्याचारों को छुपाने के लिए ईसाई और मुसलमान कौमों को उल-जुलूल आरोप लगाकर बदनाम करते रहते हैं और हिन्दू धर्म की कमियों (जो आर्यों के कुकर्मों की परिणिति हैं) के लिए भी इन्हीं को जिम्मेदार ठहराकर हिन्दुओं को ईसाई- मुसलमान धर्म के अनुयाईयों के विरुद्ध लगातार भड़काते रहते हैं! जिससे देश में दंगे होते रहें और ये अपनी साम्प्रदायिकता की रोटी सकते रहें! जो कोई भी इनका विरोध करता है या सत्य का सम्मान करता है, उसे ये मिलकर राष्ट्रद्रोही, कांग्रेस का दलाल, ईसाई, मुसलमान धर्म का दलाल, हिन्दू विरोधी आदि घोषित करने में एक क्षण भी नहीं लगाते हैं! यहाँ तक की जन से मरने की धमकी तक देते हैं! यही नहीं इनकी अभद्र, भड़काऊ, धमकाने वाली और घटिया टिप्पणी प्रकाशित भी हो जाती हैं! इन सबका एक मात्र लक्ष है कि किसी तरह से इस देश में संघ नियंत्रित भाजपा की मोदी ब्रांड हत्यारी सरकार की स्थापना हो जाये तो ये मिलकर भारत भूमि से दलित, आदिवासी, पिछड़ों को फिर से पूरी तरह से गुलाम बना लें, आरक्षण समाप्त कर दें! महिलाओं को घरों में क़ैद कर दें और वर्तमान संविधान को निरस्त करके देश में मनुस्मृति को लागू कर दें! ईसाई, मुसलमानों की या तो सामूहिक हत्या कर दें या उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक घोषित करके भारत को हिन्दू राष्ट्र के नाम पर दो प्रतिशत आर्यों का राष्ट्र घोषित कर के फिर से पहले की भांति हजारों सालों तक शासन करें! जो आर्य गाय को काट-काट कर कहते हुए उत्सव मानते रहे हैं, आज वे ही गाय वध का विरोध कर रहे हैं, जिसके पीछे गाय वध करने वाले मुसलमानों के प्रति हिन्दुओं में गुस्सा पैदा करना मात्र लक्ष है! इसके अलावा कुछ भी नहीं है, लेकिन अनेक भोले भले लोग जिन्हें हिंदुत्व के नाम पर उसी तरह से तैयार किया जा रहा है, जैसे लिट्टे और अनेक इस्लामिक लोग आतंकियों को तैयार करते रहे हैं! जिसके चलते भगवा आतंकी सम्पूर्ण हिन्दुओं को संसार में बदनाम कर रहे हैं!

    Reply
  11. Neeles Sharma

    आज जब हमे भारत के विकास के लिए विज्ञानं और तकनीक पर बहस करनी चाहिए ,हम हिन्दू ,मुसलमान पर रोते रहते है. आप सभी को bachhan जी की मधुशाला पढनी चाहिए.
    गौ रक्षा की बात करने वाले पंडितो और अजान पढने वाले मोलवियों को मैंने खूब रात में चोरी छुपे फैशन टीवी देखते हुए देखा है. सभी धर्म सामान है .वो जीने की रह दिखाते है. ये कमजोरी तो उन निठल्लों की है जो किसी और हुनर से khud का पेट नहीं भर सकते. ओ धर्म के नाम पर लड़ने वाले दिवेदी जी और अख्तर जी ,कनाडा की क्रिकेट टीम को देखो कैसे हिन्दू और मुसलमान मिल कर खेलते है. कभी discovery और नेशनल चैनल भी देख लिया करो की स्टेफेन हव्किंग कौन है.एक छोटा सा उदहारण देता हु. अभी धरती से कोई पूछा तारा टकरा जाये तो अमेरिका ,रुस्सिया और चाइना जैसे देश जरूर अपने कुछ आदमियों को बचा लेंगे ,लेकिन भारत के पंडित और मौलवी बस आखिर तक या तो घंटे बजाते रहेंगे या अजान देते रहेंगे. दोस्तों आज भारत को धरम पर बहस करने के जरूरत नहीं है, आज हमे वज्ञानिक क्रांति की जरूरत है.

    Reply
  12. Dr Skanda S gupta

    ये जो आज का भारत है न ये आप सब जान ले की उस भारतीय पहचान की लाश है जिस भारतीय राज्य यानि आर्यावर्त ने समूचे वर्र्तमान विश्व को kabhi खड़ा किया tha.. saare मुग़ल यानि दुनिया के सबसे बर्बर, जंगली यानि मंगोलों की पैदाईश.मुस्लिम जो हिंदुस्तान aye थे उन्होंने भारतीय सभ्यता का नामोनिशान मिटा दिया.. एक एक आक्रान्ता बर्बरता और वहशीपन में दुसरे से बढ़ कर था.. खिलजी, चंगेज खान, नादिरशाह, शेर शाह सूरी, बाबर, अकबर ये सब इस देश को लूटने को आए हुए कबाइली थे.. इन्होने कोई बीस लाख मंदिर तोड़े हैं, कई करोड़ हिन्दुओ को क़त्ल किया है और जो जिन्दा बचे मुस्लिम हैं इस देश में वो सब धर्म परिवर्तित हैं… आपने क्यों नहीं पढ़ा ये सब क्योंकि अआप्को अभी तक ये सरकार गलत मुलम्मा चढ़ा, धोखा देने वाला दबा देने वाला इतिहास padhati rahi है.. shak huno से भी kahin अधिक इस देश को सबसे अधिक paigambar के अनुयायियों ने बर्बाद किया है.. उन्होंने शहर के शहर जला दिए.. मंदिरों के मूर्ति चिन्हों को नष्ट कर दिया.. पुरुषो के सर kaat दिए, महिलाओ, बच्चो को उठा कर ले गए… हरम में ले जाने के लिए.. तोड़े हुए शिवलिंगों और मूर्ति के सरो को वो ले गए.. मालूम है क्या करने के लिए? अपने मस्जिदों की चौखट में सजाने के लिए… जानते हैं आप काबा क्या है? ऐसे ही जीते, तोड़े हुए शिव लिंगो का जखीरा है जिसे वहां रखा गया है मूर्ति पूजा के विरोध प्रतिक रूप में… अभी भी मक्का में कई जगहों पे पत्थर मारे जाते हैं.. अपनी मूर्ति भंजक रवैये को महिमा मंडित करने के लिए.. इन अक्रान्ताओ ने हर दिखने वाली चीज मंदिर इत्यादि को तोड़कर उसपर अपना निह्शन बना दिया… जाकर फिर से खुद देखिये मालूम हो जायेगा.. ताज महल के निचले दरवाजो कोखुल्वाने की मांग करिए जो इंदिरा कुतिया गाँधी ने बंद करा दिए थे… सच जानिए…. दर्द ये है की हमारे उन्नत मस्तको को खड्ग से kaat कर उनकी दीवाre बना दी गयी.. हम उन लड़ने वाले और फिर हारे अपने पुरखो की मरी हुई पहचाने हैं… बहुत शर्म नाक है….. दर्द नाक भी… हम अपनी lasho पर पड़े दुनिया की दी हुई भीख पर जिन्दा हैं… मैं बाहरी संस्कृति की बात कर रहा हु.. यह कई राज्य तो थे, और स्वार्थी कुछ राजे भी पर बाहरियो से उन्होंने हमेशा लोहा लिया.. पर ऐसा भी हुआ की धोखे, गद्दारी या जंगलीपन से हार गए.. और हम आज उन्ही दुश्मनों की पूजा कर रहे हैं….. उन मुसलमानों ने सब ख़त्म कर दिया और अपना कपडा डाल दिया ..हम अभी भी उसकी पूजा कर रहे हैं… आज क्या हो रहा है? मुस्लमान अभी डराया जाता है और हथियारों के साथ तैयार किया जाता है… जामिया, जे एन यु, अलीगढ, मेरठ, इत्यादि में जो हो रहा है वो हमें मालूम है.. ये एक सच्चाई है.. पर मैं नहीं समझता की कोई ये कह रहा है की उनको मार कर बाहर भगा दो…. आज हम हिन्दू और मुस्लमान है पर हमेशा से हम आर्य dharmi रहे हैं.. हिन्दू” रहे हैं… पर अब इस भीड़ को राष्ट्र बनना होगा.. उन हजार साली के जख्मो को भरना होगा.. पर वो अपने आप नहीं हो जायेगा…

    Reply
  13. Ram narayan suthar

    मोहमद अत्तर खान आपने जो भी टिप्प्न्नी की है वो स्वाभाविक है क्योंकि स्वाभिमान सबको प्यारा होता है आपके प्रश्न राजेशजी और दिवेद्दीजी से है पर एक प्रश्न का उत्तर लिख रहा हु आपने जो कहा की इस्लाम में जोर जबरदस्ती नहीं होती सायद न हो परन्तु मुग़ल शासन के इतिहास के पन्नो को अगर पलटा जाये तो कुछ खून से संने पन्ने जरूर मिलेंगे इन में से एक पन्ना गुरु गोविन्दसिंह के पुत्र फतेहसिंह( ७-वर्ष ) और जोरावरसिंह( ५-वर्ष ) आनद्पुर के युद्ध में गुरूजी से बिछड़ गए थे और नवाब वजीर खान उन्हें पकड़कर इस्लाम ग्रहण करने को कहा था मना करने पर उन मासूम बचो को जिन्दा दीवार में चुनवा दिया गया था ये हुक्म एक काजी ने दिया था (काजी शायद इस्लाम का ही एक शब्द है )
    विश्व के किसी भी अन्य देश के इतिहास में इस प्रकार की घटना नहीं है जिसमे सात और पाँच वर्ष के दो नन्हे सिंहो की अमर वीरगाथा का वर्णन हो
    हकीकतराय की कहानी भी सुनकर दिल दहल उठता है वो भी शाहजंहाके शासन काल में इसी धर्मान्तरण का शिकार हुआ था परन्तु जिसके सामने श्री कृषण का ये सन्देश हो
    श्र्यांस्वध्र्मो विगुण; पर्धर्मात्स्व्नुष्ठितात
    स्वधर्मे निधन श्रेय परधर्मो भयावह ;
    वो मोत को गले लगाने से नहीं डरते
    ओरंगजेब के शासन काल में गुरु तेग बहादुरजी का सर कलम करने का कारण भी धर्मान्तरण ही था अकबर के शासन काल के कारनामो को लिखने में मुझे शर्म आती है मीना बाजार के आगे से निकालने वालो का आज भी सिर शर्म से झुक जाता है और लिखता गया तो पन्ना और स्याही ख़त्म हो जाएगी पर कुर्र कारनामो की कथा समाप्त नहीं होगी
    देश का राष्ट्रीय पशु पक्षी और चिन्ह ये सब कुछ विशेष गुणवता के कारण लिए गए न की गधे से तुलना करके गाय तो गुनाव्ताओ की खान है उससे तुलना आप कोनसे पशु से करना चाहोगे अगर तर्क संगत उत्तर आप देना चाहोगे तो आप कहेंगे की दूध तो भैस के भी होता है दूध की बात मै नहीं कर रहा हु दूध तो गधी के भी होता है पर पीते हो क्या गुणवता के मापदंड और भी है और वो सर्वश्रेष्ठ है विश्व में केवल भारतीय गाय में ही सूर्य नाड़ी होती है और विश्व के किसी भी पशु पक्षी में सूर्य नाड़ी नहीं पाई जाती ये एक विशेष अदालत में सर्वश्रेष्ठ होने में काफी है परन्तु अगर आस्था व् अध्यात्म की दर्ष्टि से देखा जाये तो उस पर टिप्पणी करना मेरे सामर्थ्य से बाहर है फिर भी अफ़सोस की इसे न तो सुरक्षा पर्दान की जा रही और न ही कोई दर्जा

    Reply
  14. vanita singh

    मैंने आप के लेख बहुत बार पढ़े हैं.बहुत सुन्दर लिखते है आप.लेकिन हिन्दू मुस्लिम के बारे मैं इस तरह लिखना उचित नहीं है.

    Reply
    • vishwa mohan tiwari

      सुश्री वन्दना जी
      क्या जो उन्ह्होमने लिखा है वहा झूठ है ?
      आप सच से कब तक छिपना चाहेंगी ?
      सच का सामना करना ही चाहिए.
      विश्व मोहन तिवारी

      Reply
  15. ramnarayansuthar

    श्री पी.एन. ओक की पुस्तक “ताजमहल: सत्य कथा” (tajmahal -the true story )में, ओक ने यह दावा किया है, कि ताजमहल, मूलतः एक शिव मंदिर था, या एक राजपूताना महल था, जिसे कि शाहजहाँ ने कब्ज़ा करके एक मकबरे में बदल दिया है।

    श्री ओक कहते हैं, कि कैसे सभी (अधिकांश) हिन्दू मूल की कश्मीर से कन्याकुमारी पर्यन्त इमारतों को किसी ना किसी मुस्लिम शासक या उसके दरबारियों के साथ, फेर-बदल करके या बिना, जोड़ दिया गया है।
    उन्होंने हुमायुं का मकबरा, अकबर का मकबरा एवं एतमादुद्दौला के मकबरे, तथा अधिकांश भारतीय हिन्दू ऐतिहासिक इमारतों , यहां तक की काबा, स्टोनहेन्ज व वैटिकन शहर । तक में हिन्दू मूल बताये हैं।
    ओक का भारत में मुस्लिम स्थापत्य को नकारना, मराठी जग-प्रसिद्ध संस्कृति का अत्यंत मुस्लिम विरोधी अंगों में से एक बताया गया है। श्री ओक ने दावा किया है, कि ताज से हिन्दू अलंकरण एवं चिह्न हटा दिये गये हैं, और जिन कक्षों में उन वस्तुओं एवं मूल मंदिर के शिव लिंग को छुपाया गया है, उन्हें सील कर दिया गया है।
    इन दावों के समर्थन में, श्री ओक ने ताज की यमुना नदी की ओर के दरवाजों की काष्ठ की कार्बन डेटिंग के परिणाम दिये हैं, यूरोपियाई यात्रियों के विवरणों में ताज के हिन्दू स्थापत्य/वास्तु लक्षण भी उद्धृत हैं। उन्होंने यहां तक कहा है, कि ताज के निर्माण के आंखों देखे निर्माण विवरण, वित्तीय आंकड़े, एवं शाहजहां के निर्माण आदेश, आदि सभी केवल एक जाल मात्र हैं, जिनका उद्देश्य इसका हिन्दू उद्गम मिटाना मात्र है। पुर्शोतम नागोश ओक की अन्य पुस्तके जो हिंदुस्तान के सही इतिहास की और इंगित करती है
    १.Islamic Havoc in India (A. Ghosh Publisher, 5740 W. Little York, Houston, Texas, 77091)
    २.ताजमहल तेजोमहल शिव मंदिर है
    कौन कहता है कि अकबर महान था? (Hindi Sahitya Sadan, New Delhi)
    ३.Agra Red Fort is a Hindu Building (Hindi Sahitya Sadan, New Delhi)
    ४.Some Blunders of Indian Historical Research (Hindi Sahitya Sadan, New Delhi)
    ५.Some Missing Chapters of World History (Hindi Sahitya Sadan, New Delhi)

    Reply
  16. Mohammad Athar Khan Faizabad Bharat

    डा. राजेश जी, आपके प्रश्नों के उत्तर हाज़िर हैं.
    १. महल भोग विलास का प्रतीक है. मुसलमान तो राजसी वस्त्र भी नहीं पहनते थे, चटाई पर सोने वालों को महल की क्या ज़रूरत.
    २. अरब में भी वही इमारतें बनवाई जिनकी सुरक्षा के लिए ज़रूरत थी.
    ३. आखिर ईसाई यूरोपियन, मुसलमानों के लिए इतनी हमदर्दी क्यों करेंगे?
    ४. आपकी बात सही है कि भारत के अधिकांश मुस्लिम, हिंदू से मुस्लिम बने हैं, लेकिन इनके साथ ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं हुई बल्कि इन लोगों ने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम क़ुबूल किया. क्योंकि इस्लाम धर्म के मामले में ज़ोर ज़बरदस्ती की अनुमति नहीं देता. और ये बात मैं इस लिए कह सकता हूँ, कि अपनी मर्ज़ी से इस्लाम क़ुबूल करने वालों में हमारे मोरिस-ए-आला भी थे.
    हमारे बहुत से रीति रिवाज हिंदुओं वाले थे क्योंकि रीति रिवाज और आदतें बदलने में समय लगता है. हम लोग हिंदुओं के त्यौहार मानते थे कुछ लोग अभी भी मानते हैं. गोरक्षा का समर्थन तो अब भी बहुत से मुसलमान करते हैं लेकिन बदले में उन्हें दिवेदी जी जैसे लोगों की बातें सुन्नी पड़ती है. मुसलमान चाहे गोरक्षा का समर्थन करें चाहे हिंदुओं के साथ त्यौहार मनाये लेकिन उन्हें पराया ही समझा जाता है. भारत को हम कितना प्यार करते हैं वो हमारा दिल या हमारा खुदा जनता है.
    आखिर वफ़ादारी का सबूत मुसलमान ही क्यों दे ? मुसलमानों ने कौनसा गद्दारी का कम किया है?
    देश के बड़े बड़े नेताओं के हत्या हिंदुओं ने ही की, बड़े बड़े घोटाले हिंदू ही कर रहे है.
    विदेशों में देश की इज्ज़त हिंदू ही नीलाम कर रहे हैं.
    जब अधिकांश मुसलमान यहीं के है तो उन्हें लात मार कर भगाने की बात पर आप चुप क्यों हैं?
    इस धर्म निरपेक्ष राष्ट्र में आखिर गाय को विशेष दर्जा क्यों दिया जाये. आखिर दूसरे पशुओं का वध क्यों हो?

    Reply
  17. Mohammad Athar Khan Faizabad Bharat

    दिवेदी जी, पहले आप सभ्यता सीख लेते तो अच्छा होता, मै आप के प्रश्नों का उत्तर तो दे सकता हूँ, लेकिन आपके जैसी असभ्य भाषा प्रयोग नहीं कर सकता, जिसके अंदर जो होता है वही दिखता है. आपने दिखा दिया.
    १. मुसलमान अल्पसंख्यक हैं और उन्हें अपनी संख्या बढाने का अधिकार है.
    २. आपको मालूम होना चाहिए कि अलीगढ में सभी धर्मों के लोग पढते हैं.
    ३. जब महिला और पुरुष दोनों बराबर हैं तो महिला आयोग की भी क्या जारूरत है? मुसलमान पिछड़े हैं इसलिए उनके लिए आयोग की ज़रूरत है.
    ४. कौन लूट रहा है, क्या ये भी छिपा है क्या? ऐ राजा, कलमाड़ी, सुखराम, चौटाला, मधु कोड़ा आखिर कितने नाम गिनोगे.
    जबकि मुसलमानों ने देश के लिए खून पसीना बहाया, भारत को एक राष्ट्र बनाया, पहले भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था. सरहदों पर लड़ाइयां ज़रूर हुईं लेकिन इस्लामी हुकूमत में हर धर्मं के लोग सुख चैन से रह रहे थे. कभी भी बग़ावत नहीं हुई. भारत सोने की चिड़िया कहलाया. देश का सबसे ज़्यादा विकास इसी समय हुआ.
    ५. देश का विकास होने से, दलित हिंदुओं का भी विकास हो जायेगा फिर उन्हें आरक्षण की क्या ज़रूरत.
    ६. ताज महल प्राचीन शिव मंदिर है ? झूठ ही बोलना है तो ज़रा ढंग से बोल्ये, इतनी बेशर्मी अच्छी नहीं.
    ७. आख़िरकार अपनी टिप्पड़ी से आपने अपनी औकात ज़ाहिर करदी.
    यह सही है कि भारत के अधिकांश मुस्लिम, हिंदू से मुस्लिम बने हैं, लेकिन इनके साथ ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं हुई बल्कि इन लोगों ने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम क़ुबूल किया. क्योंकि इस्लाम धर्म के मामले में ज़ोर ज़बरदस्ती की अनुमति नहीं देता. और ये बात मैं इस लिए कह सकता हूँ, कि अपनी मर्ज़ी से इस्लाम क़ुबूल करने वालों में हमारे मोरिस-ए-आला भी थे.
    भारत में आज मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति से भी बदतर है, ये मैं नहीं बल्कि तमाम कमेटियाँ और रिपोर्टें कह रही हैं. 20 % मुसलमानों की सरकारी नौकरी में हिस्सेदारी 3 %, सेना में 2.5 % और व्यापार में 2 % है. न मुसलमान सुरक्षित हैं और न उनके धर्म स्थल.भारत में हज़ार साल की इस्लामिक हुकूमत के बावजूद सारे ऐतिहासिक मंदिर सुरक्षित हैं.
    आज भारत में जो कुछ है वो हमारा ही दिया है. अगर बाहरी (आपके हिसाब से ) लोग लालकिला न बनवा देते तो तिरंगा फहराने के लिए भी कोई ढंग की ईमारत भी न मिलती.
    चिराग ही ने उजालों को रौशनी दी है, चिराग ही से उजाले सबूत मांगते हैं/
    हम अहले वतन से वतन परस्ती का, वतन को बेचने वाले सबूत मांगते हैं.

    तर्कों से उत्तर दीजये, सभ्य बनिए, कीचड में पत्थर फेंकना मुझे अच्छा नहीं लगता.

    Reply
  18. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    अगर आंकड़े उठा कर देखें तो सत्य का पता चलता है.
    – स्वामी विवेकानंद के अनुसार सन ११०० में भारत में हिन्दुओं की जनसंख्या ६० करोड़ थी जो मुस्लिम आक्रमणकारियों के हिंसक प्राहरों के बाद सन १६०० के अंत तक केवल २० करोड़ रह गयी थी.
    – मोहम्मद अत्तर खान का कहना है कि हम इन आक्रमणकारियों का दिया खा रहे हैं. लालकिला व ताजमहल भी उनका है. तो भाई ये तो बिलकुल बेबुनियाद बात है. मुस्लिम आर्चीटेक्चर नाम की कोई चीज़ तब तक दुनिया में नहीं थी. इन्हों ने जो भी सीखा, भारत में आकर सीखा. भाई अत्तर खान मेरे कुछ प्रश्नों का आप उत्तर दे सकें तो दें———–
    – अगर मुस्लिम आक्रमणकारी वास्तुकला के जानकार थे तो उन्होंने अधिकाँश मकबरे और मज़ार ही क्यूँ बनाए, महल क्यूँ नहीं ? स्पष्ट है कि हिन्दुओं के सुन्दर, भव्य भवनों पर कब्जा करने के लिए हर कहीं मज़ार बना दिए जाते थे. अन्यथा जिनके मजार बने उनके महल भी तो कहीं होते कि नहीं ?
    – अरब में अपनी वास्तुकला के कमाल क्यूँ नहीं दिखाए ? उत्तर यह है कि वे जानते होते तो कुछ बनाते.
    – कुटिल ईसाई यूरोपियन आक्रमणकारियों ने हिन्दुओं का गौरव समाप्त करने के लिए हमारे सारे भवनों को मुस्लिम निर्मिती बतलाने का षड्यंत्र किया.
    – कार्बन डेटिंग से पता चलता है कि भारत में मुस्लिम आक्रामकों के प्रवेश से पहले भी ताजमहल और लाल किले का अस्तित्व था.
    – ताजमहल के गुम्बद की छोटी पर आज भी ॐ चिन्ह इस बात का प्रमाण है कि यह हिन्दू भवन है.
    – इसके इलावा यह बात भी सच है कि सैंकड़ों साल के सहवास से मुलिमों में हिन्दू संस्कृति का गहरा प्रभाव पडा. वैसे भी अधिकाँश मुलिम तलवार के बल पर धमान्त्रित हिन्दू ही तो हैं. ऐतिहासिक प्रमाण बतलाते हैं कि अधिकाँश हिन्दू त्यौहार मुस्लिम भी उत्साह पूर्वक मनाते थे.
    – मसूरी के पास स्थित kimti ग्राम में सिद्ध इंस्टीच्युट के प्रमुख पवन गुप्ता जी के अनुसार अनेक ऐसे प्रमाण मिले हैं जिन से पता चलता है कि–
    * मुसलमान हिन्दू रीति से शादी करने के बाद निकाह की औपचारिकता कर लेते थे.
    * महत्वपूर्ण वास्तविकता यह है कि बहुसंख्यक मुस्लिम हिन्दू भावनाओं से प्रभावित होकर गोरक्षा का भी समर्थन करने लगे थे. नेहरू काल में संसद के लगभग सभी मुस्लिम सांसदों ने भी गो वध रोकने के समर्थन में हस्ताक्षर किये थे.
    – मोहम्मद बाई अगर भारतीय मुस्लिम की नज़र से अपने आप और भारत को देखोगे तो सही ढंग से सोच सकोगे और अगर स्वयं को भारत के शासक के रूप में सेखोगे तो कभी भारत के नहीं बन सकोगे. आपके आदर्श गौरी और बाबर बने रहे तो पाकिस्तान के हारने पर दुखी और जितने पर खुश होते रहोगे. ऐसा होता रहा तो हम कैसे ऐसों को अपना मान लें ? अतः पहले भारत के बनो फिर किसी हक़ की बात करना.

    Reply
  19. K. S. Dwivedi

    @अतहर
    १. दूसरी शादी का कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि का है मेरे पास:
    २००१: १३.४%
    १९९१: १०%

    २. अलीगढ ने पहला काम तो ये किया की स्वयं को अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित कर दिया. सुना है सिमी के साथ भी सम्बन्ध हैं इसके.

    ३. महिला आयोग का लाभ मुस्लिम महिलाओं के लिए भी है. अलग से मुस्लिम आयोग (एक सेक्युलर देश में)??

    ४. लूटने की शुरुवात मो० गजनी, गोरी, नादिरशाह से हुई थी… अभी तक हाजी मस्तान, दाउद, टाईगर मेमन तक जारी है…

    ५. अर्थात देश का विकास होने से मुस्लिम का विकास नहीं हो सकता.. उन्हें अलग से विकास की जरूरत है??

    ६. ताज महल प्राचीन शिव मंदिर है, लाल किला कोई धार्मिक संरचना नहीं है.. सरकारी भवन था… तब भी अब भी…

    ७. “आप लोग हमारा ही खा रहे हो और हम को ही आँख दिखा रहे हो” …
    तुम्हारे इस लाइन के लिए जितने जूते पड़ें कम हैं… काका बाहर से तुम आये थे लूटने, चोरी करने… हमें जाग जाने दो, लात मारकर भगाए जाओगे (अगर यही सोच रही)

    Reply
    • K. S. Dwivedi

      एक छोटा सा संशोधन…
      तुम में से ज्यादातर बाहर से नहीं आये बल्कि जो बाहर से आये थे, उनसे मिल गए… शायद गद्दार कहा जाता है ऐसों को…

      Reply
  20. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    आशा है की मोहम्मद अत्तर खान के उठाये सवालों का तर्क पूर्ण उत्तर लेखक महोदय देंगे.

    Reply
  21. Mohammad Athar Khan Faizabad Bharat

    लेखक महोदय, अन्याय आपके के साथ नहीं बल्कि मुसलमानों के साथ हो रहा है, आपके ये सारे आरोप बेबुनियाद हैं
    १. मुसलमानों को ४ शादियों की इजाज़त है, लेकिन दूसरी शादी करने के मामले में आप ही लोग आगे हैं, आप रिकार्ड देख सकते हैं.
    २. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने कौन सा कट्टर पंथ का काम किया है. देश की सेवा करने वालों पर आप इलज़ाम लगा रहे हैं.
    ३. इस देश में महिला आयोग, अनुसूचित जाति आयोग भी तो है, आप उसे क्यों भूल गए.
    ४. आखिर सरकारी खजाने को लूटने वाले घोटाले बाज़ कौन है. कोई अल्पसंख्यक देश को नहीं लूट रहा है. लुटेरों का नाम गिनाएंगे तो जगह कम पड़ जायेगी, ये सारे आप ही के धर्म के हैं.
    ५. अल्पसंख्यक क्या भारतीय नहीं हैं. उन्हें भी विकास में भागीदारी मिलनी चाहिए. उनके हितों के लिए ये मंत्रालय बना है.
    ६. हिन्दू मंदिरों का प्रबन्धन अधिकतर हिंदू ही कर रहे है. लेकिन सारी की सारी मुस्लिम इमारतों पर सरकार का कब्ज़ा है. लालकिला, ताजमहल, कुतुबमीनार और न जाने कितनी इमारतें हैं जो पर्यटन के ज़र्ये इस देश की अर्थ व्यवस्था चला रही हैं. और आपके धर्म वाले जिसकी कमाई लूट रहे हैं.
    ७. मुसलमानों ने ही इस देश को सोने की चिडया बनाया था. राज्यों को जोड़ कर देश बनया शांति कायम की. सड़कें किले और महेल बनवाये, मुसलमानों की चीज़ों से होने वाली आय सब्सिडी से बहुत ज्यादा है. ताज महल और लालकिला क्यों नहीं मुसलमानों को वापस किया जाता. आप लोग हमारा ही खा रहे हो और हम को ही आँख दिखा रहे हो.
    ८. एस सी, एस टी की सुविधा किसे मिल रही है, आरक्षित सीट का लाभ आपको को ही मिल रहा. छात्रवृत्ति आपको ही मिल रही है.
    ९. और ये सब इस लिए हो रहा है की मुसलमान आवाज़ नहीं उठा रहे है, और आपके धर्म वाले देश को लूटने में लगे हुए हैं. घोटालों की लिस्ट बहुत लंबी है. आप लोग देश को नोच रहे हो.
    (आपके धर्म के लोग का अर्थ आपकी विचारधारा के लोग हैं, न कि हिंदू, क्योंकि सारे हिंदू आप जैसी साम्प्रदायिक सोच नहीं रखते)

    Reply
  22. आर. सिंह

    आर.सिंह

    क्या मुझ जैसे हिन्दुओं को आप लोग बताने की कृपा करेंगे कि हिन्दू बहुल राष्ट्र में हिन्दुओं के प्रति जो केंद्र सरकार द्वारा अन्याय हो रहा है ,उसके पीछे किसका हाथ है ?और है तो क्यों है? हिन्दू लोग यदि सचमुच एक हैं ओ विकल्प क्यों नहीं ढूढ़ते? हिदू पहले जाति पांति , पिछड़ा ,अगड़ा,दलित इत्यादि से उपर ऊठ कर अपनी पहचान तो बनाएं.

    Reply
  23. nahid

    HINDUSTAN me sbko apna dhrm manne ki poori azaadi he . aap apna personal law bna lije phir chahe jitni shadi karo chahe jitne bacche paida kar lo.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *