चल वहां चल ……………

चल वहां चल ,

किसी एक लम्हे में वक़्त की उँगली को थाम कर !!!!

जहाँ नीली नदी खामोश बहती हो

जहाँ पर्वत सर झुकाए थमे हुए हो

जहाँ चीड़ के ऊंचे पेड़ चुपचाप खड़े हो

जहाँ शाम धुन्धलाती न हो

जहाँ कुल जहान का मौन हो

जहाँ खुदा मौजूद हो , उसका करम हो

जहाँ बस तू हो

चल वहाँ चल

किसी एक लम्हे में वक़्त की उँगली को थाम कर !!!!

उसी एक लम्हे में मैं तुझसे मोहब्बत कर लूँगा

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