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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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संजय कुमार

भारत को आर्थिक महाशक्ति के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भारत आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए आर्थिक विकास दर को बढ़ाने पर जोर देता रहता है। हमें यह भी देखना होगा कि यह आर्थिक विकास कितने लोगों को लाभान्वित करता है। भारत के आर्थिक विकास पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट ने सवाल खड़े कर दिये है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 215 करोड़ बाल मजदूर है। वहीं अमेरिकी सरकार की रिपोर्ट के अनुसार भारत बाल मजदूरी के मामलों में सबसे आगे है।

भारत में बाल मजदूर बीड़ी, ईंट, चूड़ी, ताले, माचिस जैसे 20 उत्पादों के निर्माण में लगे है। इसके साथ ही जबरन बाल मजदूरी करवाने में भी भारत शीर्ष पर है। अफ्रीका, एशिया, और लातिन अमेरिका के 71 देशों में बाल मजदूर ईंट, बॉल से लेकर पोर्नोग्राफी तथा दुर्लभ खनिजों के उत्पादन जैसे कार्यों से जुड़े है। विश्व में सबसे अधिक उत्पाद भारत, बांग्लादेश और फिलीपींस में बनते है।

हमारे देश में बाल मजदूरी को रोकने के लिए कई कानून बनाये गये है। इसके साथ ही पिछले वर्ष से राइट टु ऐजुकेशन के तहत 6 से 14 तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा भी दिये जाने की व्यवस्था की गई है। इसके वाबजूद भी बाल मजदूरी में कमी नहीं आ रही है। तो इसके पीछे मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या और बच्चों से कम पैसों में अधिक काम लेना भी है।

जिन बच्चों के हाथों में पेन, पैंसिल और किताबें जैसी चीजें होनी चाहिए, उन बच्चों के हाथों में माचिस, पटाखे जैसे उत्पादों को थमा दिया जाता है। भारत जैसे आर्थिक शक्ति वाले देश की हकीकत ऐसी होगी तो अन्य देशों की स्थिति के बारे में क्या कहा जा सकता है।

बाल मजदूरी से बच्चों का भविष्य ही नहीं देश का भविष्य भी बर्बाद हो रहा है। जब बच्चों को बाल मजदूरी में झोंका जायेगा तो वह कैसे पढ़ेगें और इनका भविष्य क्या होगा। इन बच्चों को क्यों बाल मजदूरी करनी पड़ रही है। यदि शिक्षा सुधार और बाल मजदूरी से संबंधित कानून के वाबजूद भी बच्चों का बचपन छीन रहा है। तो इसके लिए हमारी सरकार की नीतियां और बढ़ती जनसंख्या जिम्मेदार है।

 

3 Responses to “उभरते भारत में बढ़ती बाल मजदूरी”

  1. आर. सिंह

    R.Singh

    मेरी समझ में नहीं आया कि नेहा जी की इस लम्बी टिप्पणी का इस लेख से क्या सम्बन्ध है?

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  2. neha jha

    1990 में राम रथ यात्रा के बाद देश में कई शव यात्राएं निकली थीं।अब इस जनचेतना यात्रा के बाद जनता में कितनी चेतना आएगी यह कहना फिलहाल मुश्किल है क्योंकि 90 की उस यात्रा के बाद से आज तक राम मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हुआ है।
    आडवाणी ने कहा कि यह एक विशुद्ध राजनीतिक यात्रा है जिसमें वह भ्रष्टाचार की बात करेंगे लेकिन इसके पीछे उनकी क्या मंशा है यह अभी तक साफ नहीं हुआ है।84 की उम्र में आडवाणी की यह छठी यात्रा है।इस यात्रा को हम-आप इस तरह देखते हैं कि शायद आडवाणी अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं या फिर साफ-साफ कहें तो वह अपनी बरसों से मन में छुपी मुराद यानि कि प्रधानमंत्री बनने के लिए एक माहौल बना रहे हैं।लेकिन आडवाणी जी ने इस बात का भी पूरा ध्यान रखा कि उनके मुंह से गलती से भी यह मंशा जाहिर न हो जाए,यह साहस वह क्यों नहीं जुटा पा रहे यह अभी सवाल ही है जबकि एक समय में अपने दम पर पार्टी को सत्ता की कुर्सी पर विराजमान करा चुके हैं।
    आडवाणी जी की यह छठी रथ यात्रा है जो इस बार 38 दिन की है।यह यात्रा 23 प्रांतों से गुजरेगी जिसमें 7600 किलोमीटर का सफर तय किया जाएगा।यह यात्रा बिहार के सिताबदियारा से शुरु की गई लेकिन यह बात गले नहीं उतरती कि जब आडवाणी जी की यह यात्रा भ्रष्टाचार के विरुद्ध है तो यह यात्रा बिहार से क्यों शुरु हुई क्योंकि भ्रष्टाचार रोकने के लिए वह एनडीए द्वारा किए गए कार्य की प्रशंसा कर रहे हैं तो वहां तो सब ठीक है ही।यह यात्रा उन्होंने वहां से क्यों नहीं शुरु की जहां उनकी पार्टी के लोगों के दामन पर भ्रष्टाचार का दाग लगा था।
    ऐसा कहा जा रहा है कि आडवाणी देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध बने माहौल का फायदा उठा रहे हैं जो अन्ना हजारे ने बनाया है।यानि वह मौके को कैश करने की कोशिश कर रहे हैं।अब इसका फायदा उनको मिलेगा या नहीं,अभी कुछ कहा नहीं जा सकता क्योंकि उन्होंने कोई नई बात नहीं कही है जो लोग उन्हें सुनें या मानने को तैयार हो जाए।
    आडवाणी जी ने अपने भाषणों में सत्ता परिवर्तन तो कभी व्यवस्था परिवर्तन की बात करते हुए दिखे।उनकी यात्रा में शामिल नेता साफ-साफ कहते दिखे कि आडवाणी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार को बदलने की जरुरत है।पर यहां एक बात समझ नहीं आती कि सत्ता में उनकी भी सरकार आई थी और उन्हीं के बलबूते आई थी,आज भले ही वह संघ से अलग हो गए हों पर जब थे उस समय उन्होंने कौन सी व्यवस्था परिवर्तन की थी जिसने भारत में असीम संभावनाएं जगा दी हो।
    आडवाणी जी की रथ यात्रा से उन्हें कितना फायदा होगा या इसका हश्र भी बाकि यात्राओं की तरह होगा,यह देखना अभी बाकी है।

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  3. आर. सिंह

    R.Singh

    बढ़ती जन संख्या तो बाल मजदूरी का एक कारण है हीऔर जब तक लोग इस बात को पूरी तरह नहीं समझेंगे कि धर्म की आड़ में या एक धर्म की दूसरे धर्म की प्रतियोगिता में जन संख्या बढाना या बढ़ने में प्रोत्साहन देना घोर अपराध है तब तक इस पर काबू पाया भी नहीं जा सकता.सच पूछिए तो इस सम्बन्ध में भारत की नीतियों या क़ानून में कोई कमी नही है.कमी है तो उन नीतियों के पालन करने या करवाने में. इसमे अधिकतर वे दोषी हैं जिन पर इसकी जिम्मेवारी है और प्रश्न फिर मुड कर भ्रष्टाचार पर ही आ जाता है.

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