लेखक परिचय

जयराम 'विप्लव'

जयराम 'विप्लव'

स्वतंत्र उड़ने की चाह, परिवर्तन जीवन का सार, आत्मविश्वास से जीत.... पत्रकारिता पेशा नहीं धर्म है जिनका. यहाँ आने का मकसद केवल सच को कहना, सच चाहे कितना कड़वा क्यूँ न हो ? फिलवक्त, अध्ययन, लेखन और आन्दोलन का कार्य कर रहे हैं ......... http://www.janokti.com/

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अमेरिका में होने वाले आगामी  जी-20 देशों की शिखर बैठक के दौरान भारतीय और चीनी प्रधानमंत्री के बीच औपचारिक भेंट की संभावना ख़त्म हो गयी है .भारत की तरफ से यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत सरकार चीनी सेना द्वारा सीमा के अतिक्रमण के बढ़ते मामलों  को लेकर भारत में कमोबेश तनाव का माहौल बनता दिख रहा है .india-china-border

“पिट्सबर्ग में जी-20 देशों की शिखर बैठक के दौरान डॉ. सिंह और चीन के प्रधानमंत्री की बीच औपचारिक बैठक आयोजित किये जाने की कोई योजना नहीं है.” विदेश मंत्रालय की ओर से अधिकारिक तौर पर जारी इस बयान से साफ़ -साफ़ पता चलता है कि सरकार भारत-चीन मसले को लेकर कितनी गंभीर है !

चीनी सेना द्वारा नियंत्रण रेखा के उल्लंघन का मामला पिछले दिनों से भारतीय मीडिया में छाया हुआ है . लेकिन सर कार ने कहा है कि मीडिया इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल दे रहा है ,चीन के साथ लगती हमारी सीमा सबसे शांतिपूर्ण है. इसलिये ये कोई मुद्दा नहीं हैं. वहां पर कोई समस्या नहीं है.”  चीन को लेकर अपनी नाकामी छिपाने के लिए दूसरो को दोष देने का इससे अच्छा उदाहरण और क्या होगा ? अब तक के सारी सरकारें चीन से सीमा विवादों को हल करने में नाकाम रही है . चीन अभी तक अरुणाचल प्रदेश को अपने नक्से में दिखाता है. बात यहीं नहीं रुकती है . बार -बार विभिन्न इलाकों में सीमा उलंघन तो आम बात हो चली है . इस वर्ष अप्रैल माह तक भारत के दक्षिणी इलाके में ४१३ कब्जे होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह चीन का बार-बार भारतीय सीमा को छेड़ना एक सुनियोजित साजिश है। सरकार को कड़ी प्रतिक्रिया जताना चाहिए। लेकिन सरकार तो इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाले हुए है .

2 Responses to “चीन को लेकर मनमोहन सरकार लापरवाह”

  1. बी एन गोयल

    B N Goyal

    lagtaa hai china bharat ke netao ki kamzori ko samajh gayaa hai aur voh phir se 1962 ki sthiti paida karna chahtaa hai. Pradhan Mantri hi nahi un ki poori cabinet aur congress chief Sonia Gandhi bhi is taraf se aankh band kar ke baithi hai. Arunachal, Uttarakhand, Jammu Kashmir – jahan bhi chin ki seema bharat se lagti hai,vahin par voh apna dava thok detaa hai aur apne neta chup rahate hain. Pakistan par us poora bharosa hai kyonki Pak ne pahle hi bharat kaa kuchch hissa chin ko de diya hai.Ab chin ne ek naya khel khelaa hai, voh ab bharatiya kashmir ke logo ko chin kaa visa unke passport par na dekar ek saade kaagaz par deta hai – is mein us ki kyaa chaal hai, bharat sarkar ki is ki khoj karni chaahiya. Varna 1962 ho jayega aur bharat sarkaar sirf bayaan baazi karti rahegi.

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