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    चीनी छात्र फाहियान ह्वेनसांग इत्सिंग आदि ने भारत में निशुल्क शिक्षा पाई थी

    —विनय कुमार विनायक
    मान न मान तीन चीनी छात्र धर्मयात्री फाहियान (337-422ई)
    ह्वेनसांग (602-664ई)और इत्सिंग थे बड़े महान
    जिन्होंने भारत में पाए संस्कृत व बौद्धधर्म ज्ञान!

    तीनों ने चीन में फैलाए बौद्ध धर्म और दर्शन
    लिखकर अपनी आत्मकथा और यात्रा विवरण
    जो बौद्ध कालीन इतिहास लेखन का प्रमाण!

    चौथी शताब्दी में रेशममार्ग से मध्य एशियाई देशों से होकर
    भारतीय उपमहाद्वीप के पाटलिपुत्र आए चीनीयात्री फाहियान
    तब मगध के सिंहासन पर गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त।।(380-415ई)
    विक्रमादित्य और चीन देश में जिन राजवंश थे विराजमान!

    फाहियान थे बौद्ध भिक्षु, ज्ञान पिपासु लेखक अनुवादक
    जिन्होंने तीन सौ निन्यानबे से चार सौ बारह ईस्वी तक
    भारत में फिर श्रीलंका नेपाल जावा (इंडोनेशिया) यात्रा की
    भगवान बुद्ध सम्बन्धी विनयपिटक के धर्मज्ञान खोज में
    बौद्ध देशों का वृत्तांत “फौ-कुओ थी” आत्मकथा लिखी थी!

    फाहियान ने पाटलिपुत्र में किया संस्कृत का अध्ययन
    फिर चार सौ दस ईस्वी में किया था नालंदा का भ्रमण
    जो तबतक नहीं बना था मठ विहार और विद्या केन्द्र
    श्रीलंका की यात्रा की और लंकावासी को कहा दैत्य ड्रैगन!

    द्वितीय ख्याति प्राप्त चीनी छात्र धर्मयात्री ह्वेनसांग
    हर्षवर्धन के शासन काल (606-647ई) में भारत आए
    संस्कृत भाषा व बौद्ध धर्म दर्शन की शिक्षा प्राप्ति को
    नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य शीलभद्र से!

    नालंदा में ह्वेनसांग ने पांच वर्षों (635-640 ईस्वी) तक
    किया विद्याध्यायन और मोक्षाचार्य की उपाधि ग्रहण
    ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृत्तांत ‘सियुकी’ में बौद्ध धर्म
    और नालंदा विश्वविद्यालय का किया था विशद वर्णन!

    फिर सातवीं शताब्दी में चीनी छात्र यात्री इत्सिंग (635-713)ई.ने
    670 से 680 ई तक नालंदा विश्वविद्यालय में किया ज्ञानार्जन
    विनयसूत्र अभिधम्मपिटक वसुबंधुकृत अभिधर्मकोश धर्मपालकृत
    विद्यामात्र सिद्धिका का अध्ययन, चीनी संस्कृत कोश निर्माण,
    400 संस्कृत ग्रंथों की पांडुलिपि नकल व 56 ग्रंथों का अनुवाद!

    इत्सिंग सुमात्रा होते हुए दक्षिण समुद्री मार्ग से भारत आए थे
    बोधगया नालंदा राजगृह वैशाली कुशीनगर मृगदाव (सारनाथ)
    कुक्कुटगिरी की यात्रा की व आचार्यों के प्रति आभार दिखाए थे!

    आज चीन कृतघ्न हो गया मगर सबसे अधिक चीनी छात्रों ने
    नालंदा विश्वविद्यालय से निशुल्क भोजन वस्त्र शिक्षा पाए थे
    ह्वेनसांग इत्सिंग के बाद थान-मि,हुवैन-च्यू,ताऊ-हि,हि्व-निह,
    ताऊसिड.,हुइ-लू ,आर्यवर्मन, बुद्धधर्म ने ज्ञानार्जन किए थे!

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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