फिल्मी पर्दे पर दिखते मध्यप्रदेश के शहर

विवेक कुमार पाठक

रुपहले पर्दे की चमक दमक अब मुंबई से लेकर देश के कई मध्यम आकार के शहरों में भी फैल रही है। मध्यप्रदेश के शहर भी सिनेमा के पर्दे पर नजर में आ रहे हैं। सिनेमा का मुंबई से मध्यप्रदेश के बीच का ये सफर इस हिन्दी भाषी राज्य की जनता और सिने दुनिया के प्रति आकर्षण रखने वालों युवाओं को भा रहा है। आम जनता को भी फिल्मी सितारे अपने शहर में देखने के पसंदीदा अवसर मिल रहे हैं। मध्यप्रदेश की धरती पर फिल्मी शूटिंग के ताजे दृश्य मणिकर्णिका फिल्म से आए हैं। जी स्टूडिया के निर्देशक कमल जैन द्वारा बनाई जा रही इस फिल्म में दर्शकों को महेश्वर का प्राकृतिक सौन्दर्य मणिकर्णिका में दिखेगा। फिल्म में महारानी लक्ष्मीबाई की केन्द्रीय भूमिका में कंगना रणौत महेश्वर घाट पर पूजा अर्चना करते दिखेंगी। महेश्वर में पुण्य सलिला नर्मदा के घाटों का फिल्मांकन अक्षय कुमार की संदेश परक फिल्म पैडमैन भी दर्शकों ने देखा था। इस फिल्म में अक्षय कुमार आज से मेरी सारी रतियां तेरी हो गईं गीत में महेश्वर घाट पर साइकिल से अपनी जीवनसाथी राधिका आप्टे को घुमाते नजर आते हैं। महेश्वर से पहले ग्वालियर में रिवाॅल्वर रानी फिल्म की शूटिंग भी चर्चा में रही थी। इस फिल्म में कंगना रनौत ग्वालियर के महाराज बाड़ा पर विहंगम दृश्य के बीच चुनावी सभा लेती नजर आती हैं तो पुराने विक्टोरिया काॅलेज और आज के महारानी लक्ष्मीबाई काॅलेज के मैदान पर भी फिल्म में एक जनसभा का दृश्य फिल्माया गया है। रिवाॅल्वर रानी की शूटिंग ने ग्वालियर के लुप्त हो चुकी स्वर्णरेखा नदी को भी पर्दे पर सबके सामने ला दिया। नाले में तब्दील नदी मार्ग के कुछ हिस्से को साफ करके जो फूलबाग में बोट क्लब बनाया गया है वहीं पर नायिका कंगना कंगना फिल्म में बोटिंग करते हुए फिल्म में दर्ज हुईं। इस फिल्म के ग्वालियर आने से स्थानीय प्रतिभावान कलाकारों को कंगना की इस फिल्म में काम का अवसर मिला था। ग्वालियर में महत्वपूर्ण एयरफोर्स स्टेशन होने के कारण इससे पहले इस शहर को मौसम फिल्म में जगह दी गई। शाहिद कपूर और सोनम कपूर अभिनीत इस फिल्म में शाहिद को एयरफोर्स पायलट के रुप में दिखाते हुए कई दृश्य ग्वालियर में फिल्माए गए थे। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान शहर में मौसम फिल्म की क्रू टीम कई दिनों तक शहर में डेरा डाले रही जो कलाकारों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। स्थानीय सिनेप्रेमियों को शाहिद कपूर और सोनम कपूर को अदाकारी करते देखने का अवसर मिला था। ग्वालियर में ही फिलमाई गई विपाशा बसु अभिनीत हाॅलीवुड फिल्म सिंगुलैरिटी भी कुछ साल पहले चर्चा व आकर्षण का केन्द्र रही। इस फिल्म की शूटिंग बहोड़ापुर के समीप जाधव कोठी एवं ग्वालियर दुर्ग पर सेट्स लगाकर की गई। फिल्म की शूटिंग में विपाशा और हाॅलीवुड कलाकारों को देखने ग्वालियर के उत्साही लोग तब किले पर घंटों जमा रहे थे। कुछ साल पहले नजदीकी मुरैना चंबल क्षेत्र के बीहड़ों के दीदार हमें तिंग्मांशु धूलिया की फिल्म पान सिंह तोमर फिल्म में बेहतरीन अंदाज में हुए।एथलीट से डकैत बने पान सिंह तोमर के गांव और पारिवारिक रंजिश का फिल्मांकन करते हुए निर्देशक ने चंबल अंचल की जीवनशैली, सहज संवाद, स्थानीय रहन सहन का बखूबी चित्रांकन पान सिंह तोमर फिल्म में परफेक्शन के साथ किया। फिल्म में नैरोगेज ट्रेन से लेकर देहाती बोलचाल और घर द्वार को पर्दे पर देखना मुरैना चंबल अंचल सहित आसपास के लाखों दर्शकों के लिए आनंददायक रहा। ग्वालियर चंबल के अलावा भोपाल झीलों की नगरी होने के कारण सिने निर्देशकों को खूब भाता है। निर्देशक प्रकाश झा ने अपनी फिल्म राजनीति के कई दृश्यों का फिल्मांकन भोपाल में किया। इस फिल्म में भोपाल के बड़े ताल की फ्रेम बनाकर कई दृश्यों की शूटिंग हुई। मणिरत्नम ने अपनी प्रेरक फिल्म युवा में भोपाल की पुरानी विधानसभा अर्थात मिंटो हाॅल में कई दृश्य फिल्माए थे। भोपाल में ही प्रियंका चोपड़ा कीं गंगाजल 2 एवं अजय देवगन की केन्द्रीय भूमिका वाली अपहरण की भी शूटिंग इससे पहले हो चुकी है। स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत अभियान पर आधारित फिल्म टाॅयलेट एक प्रेमकथा फिल्म की शूटिंग मध्यप्रदेश के होशंगाबाद और रीवा जैसे छोटे शहरों में भी हुई है। लाइट कैमरा और एक्शन का ये काफिला मुंबई से बाहर निकला है और अपेक्षाकृत कम शहरी मध्यप्रदेश जैसे प्रदेशों में तेजी से पहुंच रहा है। ये बदलाव बहुत ही सुखद बात है। दरअसल तमाम फिल्में अपने आप में किसी भी शहर की ब्रांडिंग करने के लिए पर्याप्त हैं। हममें से कितने लोग स्विटजरलैण्ड के प्राकृतिक नजारों को प्रत्यक्ष पहुंचकर देख पाए होंगे मगर यश चोपड़ा और करन जौहर ने अपनी फिल्मों के जरिए स्विट्जरलैंड की प्राकृतिक वादियों को भारतीय सिने प्रेिमयों के मन मस्तिष्क में पक्का बैठा दिया है। लोग जीवन में जब जैसे विदेश यात्रा का अवसर पाएंगे तो स्विट्जरलैंड उनके दिल दिमाग पर जरुर आएगा। यशराज बैनर ने जिस तरह दम लगा के हइशा फिल्म में हरिद्वार के सुविख्यात हरकी पौड़ी घाट और सामने की अविरल पावन गंगा मैया को पर्दे पर उतारा है वो प्रशंसनीय है। हरिद्वार की इस खूबसूरती से अनजान जनमानस तक पहुंचाने में ये फिल्म वाकई कमाल की है। दिल्ली 6 फिल्म में हमने उस पुरानी दिल्ली के दीदार किए जो पर्यटक और दर्शक आमतौर पर देख ही नहीं कर पाते। तो कुल मिलाकर फिल्में किसी प्रदेश, शहर और उसके सौन्दर्य और उसकी ख्याति को खूबसूरती के साथ लोगों तक पहुंचाने का कामयाब जरिया हैं। इनके माध्यम से पर्यटकों के बीच शहर को देखने और घूमने की ललक बनती है। फिल्मो की शूटिंग से स्थानीय कलाकारों सहित विभिन्न क्षेत्रों के कामगारों को काम का अवसर मिलता है। युवाओं में सिने जगत में कामयाब होने के सपने जगते हैं। इसके साथ ही मुंबई से दूर लाखों लोगों को प्रदेश में सिनेमा जगत के आने से फिल्मों की जीवंत शूटिंग देखने का अवसर मिलता है। इससे कई रुपों में उस शहर और वहां के फिल्मकला से जुड़े लोगों को बूस्टअप मिलता है। मध्यप्रदेश में फिल्मों की शूटिंग का ये सिलसिला चलते रहे तो यहां से कई प्रतिभावान कलाकार पर्दे के सितारे बनते हुए निश्चित ही दिखेंगे। खुश होने की बात है कि अब पर्दे पर हिन्दुस्तान का दिल भी धधक रहा है।

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