2020 में सबसे ज़्यादा भाव ज़ुकाम के बढ़े हैं जिसका शुमार कभी बीमारियों में भी नहीं था। कहा जाता था दवा खाए तो भी और दवा न खाए तो भी ज़ुकाम पाँच दिन में ठीक हो ही जाता है।ऐसा नहीं है कि ज़ुकाम कष्टदायक नहीं होता… बहुत कष्ट देता है नाक से पानी के झरने फूटना, लेटते ही उसी नाक का बंद हो जाना यहाँ तक कि कान भी सुन्न हो जाते है और आँखे डबडबाई रहती है फिरभी ज़ुकाम से पीड़ित व्यक्ति अपनी दिनचर्या निभाता है दफ्तर जाता है गृहणियाँ घर के काम निपटाती हैं। ज़ुकाम में कौन बच्चों की स्कूल से छुट्टी करता है। ये बात अलग है कि जुकाम के डर से  2020 मे स्कूल ही बंद हो गये हैं।पहले कभी काम वाली दो चार बार छींकी उसे गोली पकड़ा दी जाती थी काम तो उसे करना ही होगा।2020 में ज़ुकाम को ऐसा क्रोध आया कि उसने दुनियाँ को हिला दिया। ये कोरोना वोरोना कुछ नहीं हैं जुकाम का क्रोध ही है जो कहर बन कर बरस रहा है। यदि ज़ुकाम की क़द्र की होती तोे ये दिन न देखने पड़ते।ज़ुकाम में तीन दिन छुट्टी की होती  बिना किसी अपराधबेध के तो उसे कोरोना का रूप धारण करने की ज़रूरत ही न पड़ती।इतनी सर्दी में दो एक बार ज़ुकाम होना बड़ी मामूली सी बात थी पर 2020  की अदा निराली है , आप सार्वजनिक स्थान पर छींके तो लोग दो नहीं छ: गज़ दूर भागेगें कामवाली को आप हफ्ते भर की छुट्टी दे देंगे। दफ्तर वाले कहेंगे घर से ही काम करते रहो।अगर आपके घर के किसी प्राणी को ज़ुकाम हुआ तो उसको एक कमरे में कैद कर दिया जायेगा बस समय पर खाने को मिलता रहेगा।कहाँ जुकाम में आराम हराम था और अब 2020 में इतना आराम कि आराम से ही नफ़रत हो जाये।

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