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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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कई टिप्‍पणीकारों के आग्रह के पश्‍चात् हम प्रवक्‍ता पर ‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक 2011’ का पूरा पाठ प्रकाशित कर रहे हैं। यह पाठ अंग्रेजी में है क्‍योंकि राष्‍ट्रीय सलाकार परिषद् की वेबसाइट पर अभी इसका हिंदी पाठ प्रस्‍तुत नहीं किया गया है। 

कृपया  ‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक 2011’ का पूरा पाठ पढ़ने के लिए निम्‍नलिखित लिंक पर क्लिक करें। 

7 Responses to “‎’सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक-२०११ का पूरा पाठ”

  1. Ajeet Singh

    सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक २०११ का हिन्दी अनुवाद उपलब्ध करावे

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  2. -डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

    मेरी पिछली टिप्पणी में भूलवश अशुद्धि रह गयी, इससे श्री गुप्ता जी या अन्य किसी भी पाठक को हुए दुःख का मुझे खेद है! सही टिप्पणी इस प्रकार है :-
    श्री अनिल गुप्ता जी ने लिखा है जिन प्रावधानों का उल्लेख किया है वे मूल निम्न प्रकार हैं :-
    “2. नौसेना, सेना और वायुसेना; संघ के अन्य सशस्त्र बल।
    (2क. संघ के किसी सशस्त्र बल या संघ के नियंत्रण के अधीन किसी अन्य बल का या उसकी किसी टुकड़ी या यूनिट का किसी राज्य में सिविल शक्ति की सहायता में अभिनियोजन; ऐसे अभिनियोजन के समय ऐसे बलों के सदस्यों की शक्तियाँ, अधिकारिता, विशेषाधिकार और दायित्व।)”
    “97. कोई अन्य विषय जो सूची 2 या सूची 3 में प्रगणित नहीं है और जिसके अंतर्गत कोई ऐसा कर है जो उन सूचियों में से किसी सूची में उल्लिखित नहीं है।”

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  3. -डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

    श्री अनिल गुप्ता जी ने लिखा है कि “इस विधेयक के साथ जारी नोट में ये बताया गया है की केंद्र सरकार को स कानून को बनाने का अधिकार संविधान की अनुसूची सात की प्रथम सूची के क्रमांक २-ए एवं ९७ के अधीन प्राप्त है. ”
    सम्भव है कि लिखते समय श्री गुप्ता जी से थोड़ी चूक हुई है| संविधान में देखने पर ज्ञात होता है कि “अनुसूची सात की प्रथम सूची के क्रमांक २-ए” का कोई अस्तित्व ही नहीं है!
    जो है वो संविधान की अनुसूची सात की प्रथम सूची के क्रमांक 2 (1) (2-क) एवं 97 हैं! जो मूल निम्न प्रकार हैं :-

    “2. नौसेना, सेना और वायुसेना; संघ के अन्य सशस्त्र बल।
    (1) (2क. संघ के किसी सशस्त्र बल या संघ के नियंत्रण के अधीन किसी अन्य बल का या उसकी किसी टुकड़ी या यूनिट का किसी राज्य में सिविल शक्ति की सहायता में अभिनियोजन; ऐसे अभिनियोजन के समय ऐसे बलों के सदस्यों की शक्तियाँ, अधिकारिता, विशेषाधिकार और दायित्व।)”
    “97. कोई अन्य विषय जो सूची 2 या सूची 3 में प्रगणित नहीं है और जिसके अंतर्गत कोई ऐसा कर है जो उन सूचियों में से किसी सूची में उल्लिखित नहीं है।”

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  4. Anil Gupta

    इस विधेयक के साथ जारी नोट में ये बताया गया है की केंद्र सरकार को स कानून को बनाने का अधिकार संविधान की अनुसूची सात की प्रथम सूची के क्रमांक २-ए एवं ९७ के अधीन प्राप्त है. मेरे विचार में ये बिलकुल झूठ है. क्योंकि क्रमांक २-ए में केवल राज्यों में केंद्रीय सुरक्षा बालों की तैनाती का विषय है और ९७ में वो विषय हैं जो किसी अन्य सूची में ( अर्थात सूची दो व तीन) नहीं दिए गए हैं. अब राज्यों में पब्लिक ऑर्डर को बनाये रखने का विषय सूची दी(राज्य विषय) में दिया गया है. कोई भी ये शायद ही कह पायेगा की सांप्रदायिक दंगे और ‘कथित’ लक्षित हिंसा पब्लिक आर्डर में नहीं आते हैं. तो जब ये विषय राज्यों की सूची में शामिल है तो प्रथम सूची के क्रमांक ९७ पर अवशिष्ट मामलों में कैसे आ सकता है?इसी प्रकार केंद्रीय बलों की तैनाती से सम्बंधित कानून बनाने के अधिकार में राज्यों के विषय को हड़पने का अधिकार कहाँ से आ गया? दरअसल, सोनिया की ‘भजन मंडली’ को संविधान से कुछ लेना देना नहीं है. वो अभी भी एमरजेंसी वाली मानसिकता में हैं. हालाँकि कुछ लोगों का मत है की दो/तीन अगस्त को विकिलीक्स द्वारा राजीव गाँधी और उनसे जुड़े और नामों के काले धन का खुलासा होने के अगले दिन ही मैडम सोनिया गाँधी फुर्र हो गयी और अब अमेरिका में बैठकर अपने काले धन को पनामा तथा अन्य टैक्स हेवेन्स में ठिकाने लगाने में लगी हैं. एक समाचार के अनुसार जबसे रामदेव जी ने काले धन के खिलाफ अभियान छेड़ा है तबसे लगभग १५ ट्रिलियन डालर स्विस बैंकों से शिफ्ट हो चूका है और भारत से ज्यादा चर्चा रामदेव जी के अभियान की यूरोप में है.सोनिया जी की मंडली किसी भी प्रकार संघ व उससे जुड़े संगठनों को इस सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा कानून में उलझाये रखना चाहती है ताकि संघ भ्रष्टाचार व अन्य राष्ट्रीय महत्व के मसलों पर ध्यान न दे पाए. लेकिन कितने मूर्ख हैं ये लोग. संघ अपना अजेंडा तात्कालिकता के आधार पर तय नहीं करता बल्कि सारी परिस्थितियों का सांगोपांग विचार करके ही अपना कार्यक्रम तय करते हैं.शायद अब ये विधेयक संसद की दहलीज तक न पहुँच पाए. क्योंकि कांग्रेस की केंद्र सरकार अपनी मुसीबतों को और बढ़ाना नहीं चाहेगी. और अगर यू पी ए ने आत्महत्या तय की है तो तथास्तु.

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  5. Anil Gupta

    आदरणीय महोदय, मैंने अभी आपकी इ-मेल में ड्राफ्ट बिल व उसके उद्देश्य अदि का हिंदी भाष्य भेजा है कृपया सुधि पाठकों के लाभार्थ उसे भी प्रकाशित करने का कष्ट करें. धन्यवाद.

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  6. -डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

    मधु सूदन जी की बात तो सही है, लेकिन मुझे मेरे किसी मित्र ने, मेरे आग्रह पर सर्च करके हिन्दी में उक्त प्रस्तावित विधेयक की पीडीएफ प्रति भेजी है, जिसे मैं अभी तक पढ़ तो नहीं पाया हूँ लेकिन उसे प्रवक्ता के पाठकों की जानकारी हेतु पेश कर रहा हूँ| कृपया निम्न लिंक पर पढ़ें :
    ‎’सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक-2011′ का पूरा पाठ हिन्दी एवं अंगरेजी में पढ़ें!
    http://baasvoice.blogspot.com/2011/08/11.html

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  7. डॉ. मधुसूदन

    मधुसूदन उवाच

    ६४ वर्ष बीतने पर शासन को लाज आनी चाहिए, कि यह विधेयक अंग्रेज़ी में वितरित हो रहा है। कानूनी भाषा और वह भी अंग्रेज़ी?
    भारत को क्या और एक आंदोलन करना चाहिए?
    हिन्दी को बढावा अगर शासन नहीं देगा, तो कौन दे सकता है? यही बात लोक पाल विधेयक की भी है।

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