कांग्रेस संस्कृति के मायने

वीरेंद्र सिंह परिहार

     देश मे कई दशको से “कांग्रेस संस्कृति” की बाखूबी चर्चा होती रही है ! खास तौर पर 1965 के बाद श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद और उससे भी ज्यादा सन 1971 मे लोकसभा मे विशाल बहुमत पाने के पश्चात कांग्रेस पार्टी मे जो एकाधिकारवादी और मूल्यहीनता की प्रवृत्तियां पनपीं, उसके पश्चात “कांग्रेस संस्कृति” शब्द का सम्बोधन एक विशिष्ट अर्थों मे किया जाने लगा ! कहा जाने लगा कि जैसे गंगा सभी गंदगियों को उदरस्थ कर लेती है, वैसे ही कांग्रेस पार्टी भी सारी बुराइयों को अपने मे समाहित कर लेती है ! कुल मिला कर क्रमश: क्रमश: कांग्रेस पार्टी को देश मे मूल्यहीनता के साथ एक ऐसे प्रतीक के रुप मे माना जाने लगा जिसे भ्रष्टाचार, अवसरवादिता, वंशवाद का पर्याय कहा जा सकता है ! इसी के चलते यह कहा जाने लगा कि जनसंघ (बाद मे भाजपा) और कम्युनिष्टों को छोडकर सभी राजनीतिक दल कांग्रेस संस्कृति मे समाहित हो चुके हैं ! यद्यपि यह भी बडा सच है कि भाजपा एवं वामपंथियों के बारे मे भी पूरी तरह से ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उसके संक्रमण से पूरी तरह मुक्त रहे हैं ! इसी कांग्रेस संस्कृति के चलते कांग्रेस समेत दूसरी कई क्षेत्रीय पार्टियों यथा सपा, राजद, डीएमके, शिवसेना, लोकदल इत्यादि मे वंशवाद सैद्धांतिक अधिष्ठान बन गया ! भ्रष्टाचार को विश्वव्यापी प्रक्रिया बताया जाने लगा, जिसकी परिणित खास तौर पर 2004 से 2014 के मध्य कई घोटालों के रुप मे सामने आयी ! अवसरवादिता की पराकाष्ठा यह कि सत्ता प्राप्त करना ही इनकी एक मात्र विचारधारा रह गई और वोट बैंक की राजनीति के चलते राष्ट्रीय हितों के साथ खिलवाड किया जाने लगा ! यह बात अलग है कि देश मे हिंदू चेतना जागृत होने के बाद बाह्य तौर पर ये हिंदू-हितैषी होने का दिखावा करने लगे ! 
       सन 2014 मे नरेंद्र मोदी की अगुवाई मे केंद्र मे सरकार बनने के बाद कांग्रेस पार्टी सत्ता के लिये मरु मे पडी मछली की तरह छटपटाने लगी ! उसको लगने लगा कि यदि भाजपा को कमजोर करना है तो प्रधानमंत्री मोदी की साख एवं छवि को गिराना होगा ! इसी के तहत राफेल लडाकू विमानों के सौदों को लेकर “चौकीदार चोर है” का नारा राहुल गांधी द्वारा उछाला गया ! मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया और अंतत: राहुल गांधी को इस मामले मे माफी मांगनी पडी ! इसी तरह से सरकारी बैंकों से अंधाधुंध कर्ज लेकर ब्रिटेन भागे विजय माल्या एवं नीरव मोदी जैसे लोगों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने यह जुमला उछाला कि उन्हे मोदी सरकार द्वारा जान-बूझकर देश से भगाया गया है ! बाद मे जैसे-जैसे सच्चाई सामने आती गई तो लोगों को यह पता चलने लगा कि इन सभी को नियम विरुद्ध ढंग से अनाप-सनाप कर्जे यूपीए शासन के दौर मे दिये गये थे ! मोदी सरकार के आने पर कार्यवाही के डर से ये लोग देश छोडकर भाग गये हैं, जिन्हे मोदी सरकार जी-जान से देश मे प्रत्यार्पण कराने के लिये प्रयासरत है और इस दिशा मे उसे बहुत कुछ सफलता भी मिल रही है ! इसी का नतीजा है सन 2019 के लोकसभा चुनाव मे राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी समेत दूसरे दलों का कोई भी आरोप मोदी पर चस्पा नही हो सका और एनडीए की और ज्यादा बहुमत के साथ सत्ता पर वापसी हुई !‍ इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी ने एक जवाबदेह और सकारात्मक विपक्ष की भूमिका का निर्वहन करने के बजाय सतत इसी दिशा मे काम जारी रखा कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी की साख को संदिग्ध किया जाये एवं उनकी छवि को धूल-धूसरित किया जा सके ! जैसा कि भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पराशर कहते हैं – “सत्ता मे रहते हुए लूटकिट तो विपक्ष मे रहते हुए टूलकिट का काम कांग्रेस पार्टी का है” इस संदर्भ मे सोनिया भारद्वाज के आत्महत्या का प्रकरण भी इसलिये उल्लेखनीय है कि इससे कांग्रेस संस्कृति को बखूबी समझा जा सकता है ! जैसा कि सर्वविदित है कि सोनिया भारद्वाज प्रदेश के पूर्व वन मंत्री उमंग सिंघार के भोपाल स्थित आवास मे रह रही थी ! दो पत्नियों के बावजूद श्री सिंघार ने स्वत: उससे जिस्मानी रिश्ते को स्वीकार किया है ! ऐसी स्थिति मे जब श्री सिंघार वायदे के अनुसार सोनिया से शादी करने मे बहानेबाजी करने लगे और उसे एक हद तक प्रताडित करने के चलते सोनिया ने आत्महत्या कर लिया ! इसके चलते जब पुलिस ने प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर श्री सिंघार के विरुद्ध आत्महत्या के दुष्प्रेरण का भारतीय दण्ड संहिता की धारा 306 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया – तो पूरी कांग्रेस पार्टी विरोध मे खडी हो गई कि श्री सिंघार के विरुद्ध बदले की भावना से कार्यवाही की जा रही है जिसे समाप्त किया जाना चाहिये ! पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ तो इस मुद्दे को लेकर हनीट्रैप की सी.डी. वायरल करने की धमकी देने लगे ! जहां तक कमलनाथ के वीडियो वायरल करने की धमकी का सवाल है यह तो सीधे-सीधे दोषी लोगों को बचाने, साक्ष्य छुपाने और ब्लैकमेल जैसा अपराध करने का मामला है ! कांग्रेस पार्टी को इससे भी कुछ लेना देना नहीं रहता कि उसके कृत्यों से आम लोगों के बीच उसकी छवि कैसी बनेगी ? कभी तो वह किसी भ्रष्टाचारी, घोटालेबाज, व्यभिचारी यहां तक की बलात्कारी का भी समर्थन आंख मूंदकर करने को तैयार रहती है, बशर्ते वह या तो कांग्रेसी हो, और यदि कांग्रेसी न हो तो कम से कम संघ भाजपा और मोदी विरोधी हो ! गौर करने की बात यह है कि जब भाजपा के किसी नेता या कार्यकर्ता का कोई ऐसा प्रकरण सामने आता है तो भाजपा उसके साथ कतई खडी नही होती और कानून को अपना काम करने देती है ! यहीं कांग्रेस और भाजपा के मूल चरित्र का अंतर है ! 
     कांग्रेस पार्टी का सदैव कुछ ऐसा रवैया रहता है कि “चिट्ट भी मेरी और पट्ट भी मेरा” ! इसीलिये जब गत वर्ष कोरोना संक्रमण का दौर सामने आया और मोदी सरकार ने लाकडाउन लगा दिया तो राहुल गांधी कहने लगे कि लाकडाउन के चलते लोगों की रोजी रोटी मारी जा रही है ! यह तो गरीबों पर हमला है ! पर इस साल जब कोरोना अप्रैल माह से तेजी से आगे बढने लगा तो राहुल गांधी कहने लगे कि शीघ्र और सख्त लाकडाउन क्यों नही लगाया गया ? कांग्रेस पार्टी का वास्तविक चरित्र समझने के लिये कुछ दिनो पूर्व आया टूलकिट उल्लेखनीय है ! इस टूलकिट मे हरिद्वार के कुम्भ मेले को कोरोना फैलाव करने वाला, जबकि ईद के दौरान इकट्ठी भीड को सोशल गेदरिंग बताया गया ! कोरोना से भारी मात्रा मे हुई मौतों के चलते लाशों और जलती चिताओं की तस्वीरें दिखा कर भारत को बदनाम करने की कोशिश की गई ! इसी के तहत कोरोना को भारतीय वैरियण्ट या मोदी स्ट्रेन बोलने को कहा गया, जबकि डब्लू.एच.ओ. स्वत: इसका खण्डन कर चुका है ! इसी के साथ अपने प्रभाव वाली अस्पतालों मे कोरोना मरीजों के लिये बेड तभी दिया जाय जब कांग्रेस पार्टी के किसी नेता की सिफारिश आये ! विडम्बना यह है कि कांग्रेस पार्टी ऐसे घृणित कृत्य को स्वीकार भी नही कर रही है कि यह उसका करा-धरा है ! कांग्रेस पार्टी की इस प्रवृत्ति को बाबा रामदेव और जूना अखाडा के स्वामी अवधेशानंद जी ने भी भारतीय संस्कृति पर हमला बताया है  हकीकत यह है कि वह आमने-सामने की लडाई लडने लायक बची नही, फलत: हमला करो और भाग जाओ की नीति पर चल रही है ! बडी समस्या यह है कि चीन के वुहान से फैले कोरोना वायरस को कभी चीनी वायरस कहने की हिम्मत कभी कांग्रेस पार्टी ने नहीं की, पर भारतीय वैरियण्ट कह कर देश की छवि बिगाडने की कोशिश की जा रही है ! बडी सच्चाई यह भी है कि कांग्रेस पार्टी ने पूरे देश मे नवनिर्मित कोरोना वैक्सीनों को लेकर भ्रम एवं अफवाहें फैलाई, जिसके चलते आज भी बहुत से लोगों मे आशंका एवं अविश्वास की स्थिति बनी हुई है !
        कांग्रेस पार्टी को न तो देश के हितों से कुछ लेना-देना है , न ही वह समाज के परिपेक्ष्य मे कोई जवाबदेही महसूस करती है ! उसका तो एकमेव सिद्धांत एवं विचारधारा यही है – “अपना मतलब साधो, भाड मे जाये माधो” ! कुल मिलाकर यही “कांग्रेस संस्कृति” है !

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