लेखक परिचय

संजीव कुमार सिन्‍हा

संजीव कुमार सिन्‍हा

2 जनवरी, 1978 को पुपरी, बिहार में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कला और गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोत्तर की डिग्रियां हासिल कीं। दर्जन भर पुस्तकों का संपादन। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर नियमित लेखन। पेंटिंग का शौक। छात्र आंदोलन में एक दशक तक सक्रिय। जनांदोलनों में बराबर भागीदारी। मोबाइल न. 9868964804 संप्रति: संपादक, प्रवक्‍ता डॉट कॉम

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logoआप जानते होंगे कि मध्‍य प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभागाध्‍यक्ष प्रा. संजय द्विवेदी का प्रधानमंत्री की साख को ठेस पहुंचाने वाला आलेख भाजपा से जुड़े व्यक्ति की वेबसाइट प्रवक्‍ता डॉट कॉम पर प्रकाशित हो रहा है और पूरे देश में एक योजना के तहत भाजपा मुख्यालय से ऐसा किया जा रहा है। सो, कांग्रेस पार्टी इस संबंध में संजय द्विवेदी की शिकायत मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, म.प्र. को दस्तावेजों के साथ कर रही है। इसके साथ कांग्रेस ने चुनाव आयोग के जरिए मध्‍य प्रदेश शासन से यह मांग की है कि प्राध्‍यापक द्विवेदी के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई की जाए।

Press Release

हम कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से नकारते हैं और इसे अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता पर सीधे हमला मानते हैं। हमारे देश में लोकतंत्र है। असहमति और विरोध के लिए स्‍पेस; यह लोकतंत्र की ताकत है। कांग्रेस देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। उसमें आलोचना बर्दाश्‍त करने का माद्दा होना चाहिए। आपातकाल के दौरान कांग्रेस ने इसी तरह क़लम पर प्रहार किया था लेकिन बाद में उसे मुंहतोड़ जवाब भी मिला था। लेकिन लगता है कांग्रेस ने अतीत से कोई सबक नहीं लिया है।

प्रवक्‍ता डॉट कॉम अभिव्‍यक्ति का खुला मंच है, जहां सभी प्रकार के विचारों का स्‍वागत है। हमारे देश में प्रेस की स्वतंत्रता संविधान के अंतर्गत दी गई वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में अंतर्निहित है। सोशल मीडिया और वेबसाइट्स लोगों की आवाज बनकर उभर रहा है, आम आदमी से लेकर बुद्धिजीवी तक अपने विचार व्‍यक्‍त कर रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस द्वारा नया मीडिया पर हमला बोलना चिंताजनक है।

प्रा. संजय द्विवेदी गत दो दशकों से स्‍वदेश, हरिभूमि, दैनिक भास्‍कर, दैनिक जागरण जैसे अनेक प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में निर्भीकतापूर्ण और सचाई के साथ अग्रलेख लिखते रहे हैं। ‘प्रवक्‍ता’ पर ही उनके डेढ़ सौ से अधिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं और आप पाएंगे कि बड़ी बेबाकी से उन्‍होंने सभी दलों के नेताओं की अच्‍छी पहल की प्रशंसा की है तो गलत प्रवृत्तियों की सख्‍त आलोचना भी की है।

प्रा. संजय द्विवेदी जी के निम्‍न लेख को कांग्रेस ने अनर्गल, बेबुनियाद, असत्य और प्रधानमंत्री की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी करार दिया है। सम्‍मानित लेखकों और सुधी पाठकों से आग्रह है कि वे स्‍वयं इस पूरे प्रकरण पर विचार करें और प्रवक्‍ता पर प्रकाशनार्थ अपने लेख/टिप्‍पणी हमें भेजें।

prawakta@gmail.com

11 Responses to “परिचर्चा : कांग्रेस का ‘प्रवक्‍ता’ और ‘लेखक’ पर हमला”

  1. Baldeo Pandey

    ” पंडित दीनदयाल उपाध्याय का ‘ एकात्म मानववाद ‘ बैकडोर से घुसते हिंदुत्ववादी एजेंडा में कैसे फिट बैठेगा ? अंतोदय का क्या होगा ? जहाँ कदम-कदम पर जादूगरी ‘मैं-मैं’ की रट है, वहाँ संगठन का क्या चलेगा? शायद लोहा, लोहा को काट रहा है, सांगठनिक अनुशासन के नाम पर शोषण को ठेंगा ‘ मैं ‘ दिखा रहा है. इसे संघ का उत्तरकाल कहा जा सकता है. अब कौन प्रश्न करेगा, संगठन पहले या जादूगर (व्यक्ति), क्या ऐतिहासिक समझौता है ! संघ के विविध क्षेत्र में काम करने वालों को भी अब ऑक्सीजन मिलेगा, प्रचारक भले ही अब झोला की जगह लैपटॉप और स्मार्टफोन से लैस हों, उनका भोजन-जलपान और शयन की व्यवस्था साधारण परिवारों और मलिन बस्तियों की जगह, तामझाम वाले माहौल में होगा और हो भी क्यों नहीं जो ‘गुरुभाई’ की जो प्रधानी हो रही है. चिंता एक ही है, पूजे गए शिलाओं का क्या होगा ? इसे किसके समाधि में लगाया जाएगा, जहाँ जिते-जी बुजुर्गों को समाधिस्थ कर दिया गया है, भूतपूर्व सोवियत नेता ख्रुश्चेव की तरह. क्या इसे संगठन का डंडा समझा जाये या जादूगर की जादूगरी ? “

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  2. डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

    श्री संजय द्विवेदी जी ने अपने राजनैतिक आलेख “आडवाणी तो मैदान में पर मनमोहन सिंह कहां हैं?” में जो कुछ लिखा है, उसके तथ्यों के बारे में समर्थन करते हुए या आलोचना, समालोचना और निंदा जो भी कोई समुचित समझे, हर एक व्यक्ति का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है, लिख सकता है, लेकिन ये कहना कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभागाध्‍यक्ष होने के कारण श्री संजय द्विवेदी जी को राजनैतिक विषयों पर लिखने या भाजपा के पक्ष या कांग्रेस के विपक्ष में लिखने का कानूनी हक़ नहीं है। ऐसा विचार ही संविधान विरोधी और तालिबानी सोच का परिचायक है।

    श्री संजय जी से मैंने मोबाइल पर बात की और उनका कहना है कि “वे लोक सेवक की श्रेणी में शामिल नहीं हैं”, ऐसे में मेरा स्पष्ट मानना है कि उन पर लोक सेवक आचरण संहिता लागू नहीं होती है और इसलिए वे आजादी पूर्वक किसी भी विषय पर लिखने के लिए स्वतंत्र हैं।

    यहाँ पर मैं पाठकों की जानकारी के लिए बतलाना चाहता हूँ कि राजस्थान के एक विश्व विद्यालय में प्रोफ़ेसर पद पर सेवारत रहते हुए डॉ. सी पी जोशी, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री तक रहे हैं, क्योंकि वे लोक सेवक नहीं थे।

    इसलिए इस प्रकार का गैर जरूरी प्रलाप तुरंत रोका जाना चाहिए।

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

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  3. लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार

    लक्ष्मी नारायण लहरे

    पत्रकारिता पर ऊँगली उठाने वाले कभी अपने चेहे रे को आईना में जरुर देखे लोग कई बार उत्कृष्ट लेख को समझ नही पाते और उलटा सीधा लेखक को लिखा है कहकर आरोप लागा देते है ! संजय जी की लेख और पत्रकारिता धारदार है जो अपनी बात को बेबाकी से रखते है जिसका कोई तोड़ नही

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  4. कन्हैया झा

    Kanhaiya Jha

    प्रा. संजय द्विवेदी कांग्रेस द्वारा की जा रही चर्चा, निंदा और साजिश से और मजबूत होंगे! राजनैतिक क्षेत्र में सामान्यतः जब कोई व्यक्ति आगे बढ़ रहा हो तो उसे रोकने उसके बारे में आधारहीन, मनगढ़ंत तथा झूठी चर्चा होती है. जब चर्चा से उसका रास्ता नहीं रुकता तो विरोधी उसे सार्वजनिक निंदा करते हैं. इससे भी जब उसका मनोबल नहीं गिरता तो उसके प्रति साजिश रची जाती है. व्यक्ति जब साजिश को भी पार कर जाता है तो एक प्रखर व्यक्तित्व बनकर उभरता है.

    कांग्रेस एक विशुद्ध राजनैतिक दल है. सत्य को दबाने के लिए आज ही नहीं वर्षों से अनेकों राष्ट्रभक्तों को उसने धोखा दिया है. जब भी देश तथा समाज के लिए रचनात्मक कार्य की शुरुआत होती है तो सबसे पहले मार्ग में बाधा का कार्य उसी के द्वारा किया जाता है. निश्चय ही कांग्रेस ने राजनैतिक ओछेपन का प्रमाण दिया है.

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  5. डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

    श्री संजीव जी,
    आपसे आग्रह है कि श्री द्विवेदी जी के बारे में बताएं कि “क्या वे लोक सेवक की श्रेणी में शामिल हैं?” इसके बाद ही इस विषय पर समुचित टिप्पणी करना संभव होगा।

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

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    • संजीव कुमार सिन्‍हा

      संजीव कुमार सिन्‍हा

      मीणा जी को नमस्‍कार।

      ये रहा संजय द्विवेदी जी का नम्‍बर – 9893598888. आप सीधे उनसे बात कर लीजिए।

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      • डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

        डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

        डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

        भाई संजीव जी धन्यवाद!

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  6. डॉ. मधुसूदन

    डॉ.मधुसूदन

    प्रिय संजीव, भारत भूषण जी, और अन्य प्रंबधकों का अभिनन्दन।
    यह तो प्रवक्ता की सफलता, मानता हूँ।

    वास्तव में प्रजातंत्र सफल करने में प्रवक्ता का अत्यौचित योगदान सरलता से प्रमाणित किया जा सकता है।
    इस प्रवक्ता में, श्री. राम तिवारी, डॉ. मीणा, आर. सिंह साहब, प्रा.चतुरवेदी, दीपा शर्मा, ऐसे लेखक/लेखिकाएं, और अन्य अनेक विचारधाराओं की प्रस्तुति भी देखी जा सकती है। कुछ आलेख तो शासन के पक्ष में भी देखे हुए स्मरण हैं।
    बधाई।

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  7. गिरीश पंकज

    girish pankaj

    इस लेख मे ऐसा कुछ नहीं की कांग्रेसी बौखला जाएं, जो लिख है, सच लिखा है, हिम्मत के साथ लिखा है, संजय द्विवेदी को बधाई . और जो लोग संजय के पीछे पड़ रहे हैं उनकी घोर निंदा की जानी चाहिये , अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन न किया जाये

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  8. इंसान

    प्रवक्ता.कॉम पर मैं प्राय: संजय द्विवेदी जी द्वारा लिखे लेख पढता हूँ| उनके सुशिक्षित विचारों में संतुलन और उनकी रचनाओं में विषय व व्यक्ति की ओर निष्पक्षता उन्हें हिंदी के उच्च कोटि के पत्रकारों में ला खड़ा करते हैं| इन्हीं गुणों के कारण मेरे संशयी मन को उनके किसी विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में होने का आभास तक नहीं हुआ| संजय द्विवेदी जी जिस प्रकार एक आदर्श पत्रकार हैं, भारतीय लोकतंत्र में पत्रकारिता के अंतरराष्ट्रीय नैतिक मानकों पर आधारित प्रवक्ता.कॉम हिंदी जगत में आधुनिक सोच का व्यवहार्य वाहन है| संजय द्विवेदी जी व प्रवक्ता.कॉम के विरुद्ध भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा आरोप न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि अनर्थक व अनैतिक है| मेरा पूरा विश्वास है कि चुनाव आयोग मीडिया की स्वतंत्रता को बराबर बनाए रखेगा|

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  9. आर. सिंह

    आर. सिंह

    अगर प्रवक्ता .काम के पटल पर प्रोफ़ेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी के आलेख दीख जाते हैं,जो आर.एस.एस और भाजपा के विरोध में होते हैंया मेरी ‘खतना ‘ जैसी विवास्पद कहानी घोर विरोध के बावजूद वहां से नहीं हटाई जाती ,तो मुझे सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि क्या वास्तव में प्रवक्ता.काम में ऐसा कुछ पक्षपात है ,जिसके लिए उसे इस आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है?

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