लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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इंदौर, 03 जनवरी। आंइस्टीन ने पत्र में लिखा कि भारत मे ट्रेक्टर का उपयोग न करें। केमिकल फर्टीलाईजर के उपयोग से धरती की धारणा शक्ति कम होती है, इसलिए केमिकल उपयोग न करने की सलाह दी। लेकिन हमने उनकी सलाह नहीं मानी और आज उसका परिणाम भुगत रहे है।

उन्होंने कहा कि ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की तो पृथ्वी की रक्षा के लिए गाय को बनाया। गाय पृथ्वी का रक्षा कवच है। यह विचार विश्‍व मंगल गोग्राम यात्रा के इंदौर पहुंचने पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए राष्‍ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख श्री मधुभाई कुलकर्णी ने रखे।

उन्होंने कहा कि बिगड़ते पर्यावरण से चिंतित होकर विश्‍व के प्रमुख वैज्ञानिकों ने कोपेनहेगन में एक परिषद् का आयोजन किया लेकिन जी-सात के विकसित राष्‍ट्र पर्यावरण विनाश के अपने पाप के प्रायश्चित के लिए तैयार नहीं हुए और यह परिषद् बिना निर्णय के समाप्त हो गयी।

श्री कुलकर्णी ने कहा कि विकास के नाम पर गांव का शहरीकरण किया जा रहा है। और खेतों में कंक्रीट के जंगल उगाये जा रहे है। उन्होंने कहा कि हमें विकास की कल्पना को बदलना होगा। विकास का आंकलन कृषि भूमि और जंगल बढने या घटने से किया जाना चाहिए। सेज की जगह पर ‘कॉउजोन’ बनना चाहिए।

विश्‍व मंगल गोग्राम यात्रा रविवार को रतलाम से निकलकर धार और बेटमा होते हुए अहिल्यानगरी इंदौर पहुंची जहां भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। मार्ग में सैकड़ों सामाजिक संगठनों ने पुष्‍पवर्षा करते हुए और गोमाता और भारतमाता की जय के नारे लगाते हुए इस अभियान के प्रति समर्थन व्यक्त किया।

चिमन बाग मैदान में आयोजित सभा शंखवादन और कामधेनु ध्वजारोहण से प्रारंभ हुई। इंदौर विभाग के यात्रा प्रमुख श्री दीपक शेरालकर ने बताया कि इंदौर महानगर में 6 उपयात्राऐं निकलीं और 78 सभाऐं हुर्इं। विषेश बात यह रही कि एक ही दिन में पूरे महानगर से 11 लाख हस्ताक्षरों का संग्रह किया गया। संग्रहीत हस्ताक्षर श्री राघवेश्‍वर भारती महास्वामी को सौंपे गये।

सभा की अध्यक्षता कर्नाटक राज्य के मंडया जिले के षंकरय्या मंदिर के स्वामी श्री बसवप्पा नंदी स्वामी ने की तथा गोकर्ण पीठ के जगदगुरू शंकराचार्य श्री राघवेश्‍वर भारती महास्वामी, गोराकुण्ड के स्वामी प्रवर अमृतानंद महाराज, पंचकुईया आश्रम के महामंडलेश्‍वर लक्ष्मणदास महाराज, प्रचंड हनुमान मंदिर कागदीपुरा के मंहत श्री मनमोहनदास महाराज और महाकौषल प्रांत के गौरवाध्यक्ष व समन्वय आश्रम के संस्थापक स्वामी अखिलेश्‍वरानंद गिरि ने संबोधित किया। यात्रा के राश्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री हुकुमचंद सांवला ने श्री नंदी स्वामी का परिचय कराया।

कार्यक्रम में श्री विरेन्द्र कुमार जैन, श्री ओम नारायण जोशी, श्री ऋशि तिवारी, श्रीमती पुश्पा गुप्ता आदि को गोरक्षा और गोसेवा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।

इससे पहले धार और बेटमा में सार्वजनिक सभाओं का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों गोभक्तों ने भाग लिया और संतों के सामने गोरक्षा का संकल्प लिया। वाहन रैली में सैकड़ों युवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

2 Responses to “पृथ्वी का रक्षा कवच है गाय – मधुभाई कुलकर्णी”

  1. VIKAS

    गाय अगर रक्षा कवच है तो भारतमे हजारो सालोसे लाखो -करोडो की संख्यामे गाये है फिर भी हमारे देशपर आर्य ,शुन ,शक , मोघल
    अंग्रेज लोगोने आक्रमण किया ,यहाँ तक की जंगली टोलियाँ भी हमें लूटकर गयी ! फिर हमारी रक्षा क्यों नहीं हुयी ??
    हम हमेशा सिर्फ पूजा -पाठ में और आपसमे लड़ते -झगड़ते रहे है ! धर्मका नशा इतना छाया रहता था की घरसे बहार निकालने लिए
    कोई काम करने के लिए शुभ मुहूर्त ,हर बात के लिए हम पोंगा पंडित लोगोंपर विश्वास करते आये है ! उनकी धर्म की दुकान बहुत
    धडेल्लेसे चल रही थी ,मंदिर ,इमारते , महल सभी शुभ मुहूर्त पर बंधी गई थी जो आज ढह गयी है ,लेकिन कोई शुभ मुहूर्त या कोई
    पूजा पाठ के बिना अंग्रेजो ने बांधी गई इमारते आज भी बुलंद है ! सोर्टी सोमनाथ का मंदिर लूटने के लिए गझनी का मोहम्मद आया था
    मंदिर के पुजारी और पंडितो को विश्वास था की मंदिर में आते ही वो भस्म हो जायेगा ! ग़जनी के सिपाई का मुकाबला करने के लिए और
    उन्हें मंदिर की पवित्र रक्षा से भस्म करनेके लिए पंडित लोगोने उनपर रक्षा फेकीं लेकिन हुवा ये की शिपाई लोगोने सभी पंडितो को कांट
    डाला ! हम पर धर्मकी पाखंडता की ऐसी घुट्टी पिलाई जाती थी की हम धर्म के बाहर कुछ सोचतेही नहीं ! इसके वजहसे हम बाहर से
    आनेवाले हमलावरों से २००० साल तक गुलाम रहे है ! दूसरी बात अगर हम केमिकल दवा का इस्तेमाल नहीं करते तो हमारी फसल
    बर्बाद हो जाती है ! पहले हम अनाज आयात करते थे और नए आधुनिक तंत्र से खेती करनेकी वजहसे अनाज निर्यात भी कर रहे है !

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  2. MANAV

    हमारा देश सालोसे अंध श्रद्ध रहा है है ! स्वातंत्रवीर वीर सावरकर जैसे नव मतवादी ने कहाँ था की गाय एक उपयुक्त पशु है , उसके
    अन्दर ३३ करोड़ भगवान है , गाय पूजनीय है ये बातें बेकार है ! गाय से हर सूरत में इन्सान सुपेरियर[बेहतर] है !इसलिए इन्सान ने गाय की पूजा करना दूर उल्टा गाय ने इन्सान की पूजा करनी चाहिए !! उस वक्त भी सावरकर की धर्म के ठेकेदारों द्वारा बहुत खिचाई हुयी थी !
    लेखक कहता है की ट्रक्टर से और केमिकल के वजहसे धरती की धारण शक्ति कम होती है ! लेकिन अगर केमिकल का उपयोग न करें
    तो सारी फसल किड़ोंकी वजह से बर्बाद होती थी जो अब नहीं हो रही और हम आज अनाज का निर्यात करते है ! पुराने जमानेमे अनाज का
    आयात करना पड़ता था ! दुसरे देशोंमे ट्रक्टर का उपयोग करके और केमिकल का उपयोग करके लाखो -करोडो टन अनाज उगा रहे है !
    और अनाज के मामलेमे भी हम निचे के पदान पर है चीन , ब्राज़ील ,पाकिस्तान भी हमारेसे आगे है ! अमेरिका और यूरोप देशोमे सारी खेती मशीन द्वारा होती है हमारेसे कई गुना वहां अजान पैदा होता है ,खेतभी मिलो लम्बे होते है ! हम तो अब भी खेती के मामले में उनसे पिछड़े हुए है ! हमें अनाज को बढ़ाना है तो बंजर जमीन को खेती लायक बनाना चाहिए !

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