दिल्ली चुनाव और भाजपा (2020)

पिच पर अपनी खींच रहे थे,

कट्टरता से सींच रहे थे।

हिन्दू मुस्लिम और गद्दारी,

पर तलवारें खींच रहे थे॥

किन्तु केजरी भी सातिर है,

वो जन्मा सत्ता की खातिर है॥

राजनीति का एड्स जिसे,

अपने कुमार जी कहते हैं॥

पर मोदी के महारथी,

खांसी बस उसे समझते हैं॥

धोका जिसकी फितरत ही हो,

उससे पार न पाओगे।

रणनीती बदलोगे भी या,

यूं हार मानते जाओगे?

जो भक्ती मे लीन तुम्हारी,

उसपर सारा ज़ोर चलाया।

अपनों का हित दिखा न तुमको,

गैरों का विश्वास लुभाया॥

सीख सको तो सीखो उससे,

कैसे अपनों का साथ दिया।

हर विभाग हर संस्था को,

झाड़ूवालों से पाट दिया॥

पर तुम होते ब्लेकमेल,

कुछ मौसम के विज्ञानी से।

छोड़ रहे हो अपनों को,

आखिर कितनी आसानी से॥

जयचंदों पर दोष डालना,

हे पृथ्वी अब बंद करो।

उनकी पीड़ा भी समझो,

हरने का उसे प्रबंध करो॥

गोरी सफल हुआ तो,

उसमे जयचंदों का दोष नहीं।

पृथ्वी भी दोषी उसका,

जिसको भविष्य का होश नहीं॥

मुकेश चन्द्र मिश्र

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