Home साहित्‍य लेख बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री – सनातन धर्म के ध्वजा रक्षक

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री – सनातन धर्म के ध्वजा रक्षक

पिछले कुछ दिनों से बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी चर्चा में हैं, दो-तीन दिन से तो लगभग हर टी।वी। चैनेल पर यही चर्चा है। स्वामी रामदेव, कई साधु-संत, हिंदूवादी संगठन भी इनके समर्थन में खुल कर आ गए हैं। आखिर कौन हैं ? बागेश्वर धाम सरकार जी, वास्तविकता क्या है? क्या वाकई कोई सिद्धि है, या आंखों का धोखा हैं? यह समझने से पूर्व हम सर्वप्रथम धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के जीवन और उनके बागेश्वर धाम को जानने, समझने का प्राय करते हैं।

बागेश्वर धाम, गड़ा, छतरपुर, मध्य प्रदेश में है, जहाँ हर मंगलवार और शनिवार को धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भक्तों का विशाल मेला लगता है। इसमें हजारों लोग उमड़ते हैं। छोटे से गांव गड़ा में जब सैंकड़ों से हजारों और हजारों से लाखों लोग आने लगे तो धीरेंद्र शास्त्री जी ने दूसरे शहरों में जाकर ‘दिव्य दरबार’ लगाना प्रारंभ कर दिया। उनका कहना है कि लाखों लोगों का पर्चा बनाना संभव नहीं, इसीलिए खुद ही लोगों के पास जाकर उनके शहर में दरबार लगा लेते हैं, ताकि लोगों को सुविधा हो, यह दरबार नि:शुल्क है, जो भी पैसा आता है, उसे गरीब बेटियों की शिक्षा और शादी में खर्च कर दिया जाता है। महाराष्ट्र के नागपुर में श्रीराम चरित्र-चर्चा का आयोजन हुआ था, जहां अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर जादू-टोने और अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। वहीं से ही विवाद शुरू हुआ। और आज जो विवाद अंधविश्वास को खत्म करने के चैलेंज के नाम से शुरू हुआ था, आज वो एक बहुत बड़ा रूप ले चुका है। धीरेंद्र जी हिंदू राष्ट्र का आव्हान कर चुके हैं। सनातन धर्म ध्वजा शास्त्री एक भी हाथों में हैं और उनके पीछे समस्त संत समाज, और लाखों सनातनी भक्त हैं। जनवरी 2023 के आगमन के साथ ही धीरेंद्र शास्त्री जी चर्चा में आए, और आज वो सनातन धर्म के पोस्ट बॉय बन चुके हैं।

आईए एक नजर शास्त्री जी के जीवन परिचय पर डालते हैं –

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जीवन परिचय

धीरेंद्र 4 जुलाई 1996 को जन्मे थे। इनके दादा भगवान दास जी ने चित्रकूट के निर्मोही अखाड़े से दीक्षा लेकर सन्यास ले लिया था। इसके बाद वे गड़ा गांव पहुंचे, वहां उन्होंने बागेश्वर धाम मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और यहीं पर दरबार लगाया करते थे। यहीं पर इनके दादा जी के गुरु सन्यासी बाबा, जो इनके ही वंश से संबंधित की भी समाधि है, जिन्होंने 320 वर्ष पहले समाधि ले ली थी। 11 वर्ष की अवस्था में, धीरेंद्र ने भी अपने दादाजी के दरबार में अर्जी लगाई। तब इनके दादा जी ने, धीरेंद्र को अपना शिष्य बना लिया। इस मंदिर के पुजारी व प्रमुख श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को हनुमान जी की विशेष कृपा और सिद्धियां प्राप्त है। इस दरबार में आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ और निराश होकर नहीं जाता।

यहां पर अपने देश ही नहीं, अपितु विदेशों से भी श्रद्धालु समस्याओं को लेकर आते हैं। बागेश्वर धाम की खासियत यह है कि यहां पर श्रद्धालुओं को अर्जी लगानी होती है उनकी अर्जी स्वीकार होने पर बागेश्वर सरकार अर्थात धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी बिना उनसे बात किए उनकी समस्याओं को धाम के पर्चे पर उल्लेखित कर देते हैं इसके पश्चात उस व्यक्ति से, उसकी समस्याओं की जानकारी ली जाती है। अर्जी लगाने के लिए लोग लाल कपड़े में नारियल बांधकर अपनी मनोकामना बोलकर उस नारियल को यहां एक स्थान पर बांध देते हैं और मंदिर की राम नाम जाप करते हुए 21 परिक्रमा लगाते हैं। यहां पर लाखों की संख्या में नारियल बंधे हुए मिल जाएंगे। मंदिर के पास ही गुरुजी का दरबार लगता है जहां पर लाखों की संख्या में लोग आते हैं।

किसी व्यक्ति द्वारा बताई गई सभी समस्याएं पहले से ही पर्चे पर अंकित होती है। इस बात की पड़ताल बड़े-बड़े मीडिया चैनल व धर्म को न मानने वालों ने की। लेकिन अंत में उन्हें भी बागेश्वर धाम में होने वाले, चमत्कारों के आगे नतमस्तक होना पड़ा। यहां पर कैंसर जैसी बीमारियों के साथ, भूत प्रेत व ऊपरी बाधाओं के मरीजों के ठीक होने का दावा किया जाता है। दो दिनों से उन्होंने भरी सभाओं में, लगभग सभी चैनेल्स के प्रतिनिधियों के सामने भी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन कैमरे के आगे कर के दिखाया।

कई भोले भाले लोगों को मिशनरी वाले लोग, अन्धविश्वास और लालच के सहारे धर्मांतरण करा रहे हैं। धीरेंद्र कृष्ण ने बहुत से लोगों को हिंदू धर्म में वापसी करवाई गई है। इसलिए भी, कई कई मिशनरी, तथाकथित ‘धर्म निरपेक्ष’ लोग उनके पीछे पड़े हैं।

आईए अब इनकी कुंडली का विश्लेषण करते हैं, क्या कहती हैं इनकी कुंडली, आईए जानें-

बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी का जन्म 4 जुलाई 1996 को मध्यप्रदेश के गढ़ा नामक गांव में हुआ है। जन्म समय के अभाव में हम आज इनकी चंद्र कुंडली का अध्ययन करेंगे। शास्त्री जी की कुंडली कुंभ राशि की हैं। 17 जनवरी 2023 से शनि ने कुंभ राशि पर एक बार फिर से वापसी की है। इस समय कुम्भ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का द्वितीय चरण प्रभावी हैं। कुंभ राशि शनि की स्वयं की राशि हैं। चंद्र कुंडली में शनि-केतु मीन राशि द्वितीय भाव में स्थित है, शुक्र-मंगल चतुर्थ भाव में, सूर्य-बुध पंचम भाव में, राहु अष्टम भाव में, गुरु वक्री अवस्था में एकादश भाव में स्थित है। पंचम भाव में सूर्य-बुध की युति  बुधादित्य योग इन्हें बुद्धिमान बना रहा है।  द्वितीय भाव में शनि-केतु की युति ने इन्हें अपने धर्म-संस्कृति और परम्पराओं का रक्षक बनाया। इसी के कारण इनके जीवन का उद्देश्य धन अर्जन करना नहीं है। इस योग के कारण इनकी वाणी में कठोरता, व्यंग्य होता है। जो इनके विरोधियों को चुभता है। इस योग का जातक अपने में कुछ नहीं रखता है, जो मन में होता है, वही इनकी वाणी में होता है। जिस भी जातक की कुंडली में शनि-केतु साथ होते है, ऐसा व्यक्ति दुनियादारी रिश्तों से अलग हटकर, अपना जीवन समाज , धर्म और राष्ट के लिए समर्पित करता है।

धनेश और आयेश गुरु एकादश भाव में हैं। जिन पर लग्नेश शनि की दशम दृष्टि हैं, इसी योग ने इन्हें अपने पुश्तैनी कार्य से जोड़ा। दशम भाव पर दशमेश मंगल, चतुर्थेश शुक्र और केतु की दृष्टि है। कर्म भाव पर मंगल के प्रभाव ने इन्हें नेतृत्व शक्ति, केतु ने धर्म, आध्यात्म और तंत्र मंत्र का गूढ़ ज्ञान दिया। दशम भाव में वृश्चिक राशि भी है, यह भी गूढ़ ज्ञान, पराविद्याओं और तंत्र संबंधित राशि हैं। कर्मेश मंगल कर्म भाव को सक्रिय कर रहा हैं। इनकी कुंडली में शत्रु भाव अर्थात छठे भाव पर केतु की पंचम दृष्टि हैं, इससे इनके शत्रु बार बार कष्ट तो देंगे परंतु केतु का अंकुश शत्रुओं को शांत रखने में सफल रहेगा। बागेश्वर धाम की सनातन धर्म ध्वजा के तले, भारत वर्ष एक बार फिर से विश्व गुरु बनने की राह पर अग्रसर होगा। धीरेन्द्र जी की कुंडली में यह विशेषता है कि इनकी कुंड्ली में चतुर्थ भाव और दशम भाव दोनों भाव अपने भावेश से दॄष्ट होने के कारण बली अवस्था में हैं। चतुर्थ भाव पर शनि और चतुर्थेश दोनों का प्रभाव है, इसी प्रभाव के फलस्वरुप धीरेंद्र जी आज नहीं अपितु पिछ्ले दस वर्षों से आम जन में लोकप्रिय हैं। चतुर्थेश शुक्र चतुर्थ भाव में स्थित होकर इन्हें आमजन के ह्र्दय में स्थापित कर रहे हैं। दशमेश मंगल भी अपने भाव को देख रहा है, इससे भी इन्हें सनातन धर्म का नेतॄत्व करने का सुवसर मिल रहा है।

धीरेंद्र जी अपने विरोधियों से सतर्क रहें

शनि और राहु दोनों एक दूसरे से सम सप्तक योग में है, शनि तीसरी दृष्टि से मंगल को भी देश रहे हैं। यह योग आयु कष्ट दे रहा है। लगेंश शनि का अष्टमस्थ राहु से पीड़ित होना, शत्रुओं द्वारा छुपकर वार करना, और जातक के लिए आयु हानि के अशुभ योग बना रहा हैं। वैसे भी शात्री जी ने अपने कार्यों और अपने वक्ताओं से सनातन विधर्मियों की नींद उड़ा रखी हैं। गुप्त शत्रु इनकी अकाल मृत्यु का कारण बन सकते हैं।

कुछ सनातनी राजनेताओं को भी अपनी कुर्सी खिसकती नजर आ रहो हैं, बहुत संभावनाएं हैं की अपनी कुर्सी बचाने के लिए सत्ता पक्ष की और से ही गुप्त शत्रु इनकी हत्या करा दें, क्योंकि कुंडली में सूर्य राहु के शतभिषा नक्षत्र में है, और मारकेश वक्री गुरु के द्वारा पीड़ित है। यहां सूर्य को अष्टमेश बुध का भी युति साथ मिल रहा हैं अर्थात बुध और सूर्य दोनों पंचम भाव में युति सम्बन्ध में हैं और दोनों ही राहु के नक्षत्र में हैं। और राहु आयु भाव में हैं। इस प्रकार राहु द्वारा आयु का हरण, सूर्य और बुध द्वारा किया जा रहा गई। यह योग सनातनी भाई बहनों के लिए बहुत ही अशुभ संकेत हैं।

बागेश्वर धाम की बढ़ती लोकप्रियता से भयभीत होकर, उन्हें असमय मृत्यु के घाट उतारा जा सकता हैं। ईश्वर उन्हें हमारी आयु दें। शनि जब मेष राशि में गोचर करेंगे तब तक शास्त्री जी सनातन विरोधियों की नींदे उड़ाए रखेंगे।

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