ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ रही मांग से रोजगार के अवसरों में वृद्धि दृष्टिगोचर

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कैंटार वर्ल्ड पैनल द्वारा जारी एक प्रतिवेदन के अनुसार भारतीय ग्रामीण बाजारों में बहाली के संकेत दिखाई दे रहे है। विशेष रूप से किराना वस्तुओं की मांग में सुधार दिख रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 की तृतीय तिमाही, अक्टोबर-दिसम्बर 2022 के दौरान उत्पादों की मांग में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। शहरी इलाकों में 3.6 प्रतिशत एवं ग्रामीण इलाकों में 1.3 प्रतिशत से उत्पादों की मांग बढ़ी है। व्यक्तिगत वस्तुओं में वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत की तथा खाद्य एवं पेय पदार्थों में वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत की रही है। हालांकि उत्पादों की यह मांग अब भी कोरोना महामारी के पूर्व के खंडकाल अर्थात अक्टोबर-दिसम्बर 2020 की तिमाही में शहरी क्षेत्रों में 4.4 प्रतिशत एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 6.6 प्रतिशत से कम है। परंतु, पिछले 5 तिमाहियों से वृद्धि दर लगातार ऋणात्मक बनी हुई थी वह अब जाकर इस तिमाही में सकारात्मक हो गई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दरअसल आय की उतनी समस्या नहीं है। इन इलाकों में नागरिकों की आय तो बढ़ रही है परंतु अभी खर्च नहीं हो पा रहा है क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान सबसे अधिक विपरीत असर इस वर्ग पर ही पड़ा था और उन्होंने इस खंडकाल में सरकारी सहायता के बावजूद अपना जीवन यापन अपनी पूर्व की बचतों अथवा सम्पत्तियों को बेचकर किया है। अब जब उनकी आय बढ़ रही है तो यह वर्ग पहिले अपनी बचतों को वापिस उसी स्तर पर लाने में लगा हुआ है। इसके बाद ही वह अपनी बढ़ी हुई आय का उपयोग खाद्य पदार्थों के अलावा अन्य वस्तुओं को खरीदने में करेगा। फिर भी, कुल मिलकर अब यह कहा जा सकता है कि भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी कोरोना महामारी के बाद अब पटरी पर आ गई है। कम आमदनी वाले वर्ग की आय में भी सुधार हुआ है। इसी के चलते वित्तीय वर्ष 2023-24 की तृतीय तिमाही में रोजमर्रा की वस्तुओं की मांग में सुधार दृष्टिगोचर है।

एक अनुमान के अनुसार भारत में कोरोना खंडकाल के पूर्व, निचले स्तर की 20 प्रतिशत जनसंख्या की आय देश की कुल आय का 7 प्रतिशत थी एवं ऊपरी स्तर के 20 प्रतिशत जनसंख्या की आय देश की कुल आय का 45 प्रतिशत थी जो कोरोना खंडकाल में क्रमशः घटकर 3 प्रतिशत एवं बढ़कर 54 प्रतिशत हो गई थी। परंतु, अब वर्ष 2023 में निचले स्तर की 20 प्रतिशत जनसख्या की आय 5 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है इस प्रकार अब गरीब वर्ग की आय में भी वृद्धि हो रही है। चूंकि कोरोना खंडकाल के दौरान कई नागरिकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन किया था, अब शहरी क्षेत्रों में निर्माण एवं अन्य उद्योगों में प्रारम्भ हुई गतिविधियों के चलते ये लगभग समस्त ग्रामीण नागरिक शहरों में वापिस आ गए हैं एवं उन्हें अपना रोजगार भी वापिस मिल गया है।

इसी प्रकार, जनवरी 2023 माह में हवाई यात्रियों की संख्या में 95 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है। जनवरी 2022 में 64.08 लाख यात्रियों ने हवाई यात्रा की थी जबकि जनवरी 2023 में यह संख्या बढ़कर 125 लाख यात्रियों के स्तर पर पहुंच गई है। अब हवाईजहाजों में उपलब्ध क्षमता का 80 प्रतिशत तक उपयोग हो रहा है। इसके चलते एयरलाइन कम्पनियां अपने बेड़े में हवाईजहाजों की कमी महसूस करने लगी है एवं नए हवाईजहाजों की खरीद करने में व्यस्त हो गई हैं। भारत में अब औसतन 4.20 लाख यात्री प्रतिदिन हवाई यात्रा कर रहे हैं।

समस्त होटलों के किराए लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। होटलों में कमरों की मांग 4.8 गुना बढ़ गई है एवं कई बड़े बड़े होटल तो फरवरी एवं मार्च 2023 माह के दिनों के लिए अभी से ही बुक हो चुके हैं। भारत में एक तो अपर एवं मिडल क्लास की संख्या में वृद्धि हो रही है एवं विभिन्न कम्पनियों के कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली यात्रा में भी वृद्धि हो रही है। दूसरे, विभिन्न राज्यों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के निवेश सम्मेलन आयोजित किये जा रहे हैं। भारत को अभी हाल में जी-20 देशों की अध्यक्षता हासिल हुई है अतः जी-20 देशों के विभिन्न सम्मेलनों का आयोजन भी अब भारत में हो रहा है जिससे विभिन्न देशों के प्रतिनिधि इन सम्मेलनों में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं। साथ ही, भारत ने भी कई विशेष सम्मेलनों का आयोजन हाल ही में किया है जैसे एयरो इंडिया, ऑटो एक्स्पो, इंडिया इनर्जी वीक, अप्रवासी भारतीय सम्मेलन, आदि। इन सम्मेलनों में भी विदेशी मेहमानों का आगमन भारत में हुआ है। जिसके चलते विभिन्न होटल पूर्णतः बुक रहे हैं एवं हवाई यात्रियों की संख्या भी बढ़ रही है।    

जनवरी 2023 माह में चारपहिया वाहनों की बिक्री में भी अतुलनीय सुधार हुआ है। जनवरी 2022 में 2.79 लाख चारपहिया वाहनों की बिक्री हुई थी, जो जनवरी 2023 में 22 प्रतिशत की आकर्षक वृद्धि दर्ज करते हुए बढ़कर 3.40 लाख हो गई। जबकि व्यावसायिक वाहनों की बिक्री जनवरी 2022 में 70,853 की रही थी जो जनवरी 2023 में बढ़कर 8,2428 हो गई है। इस प्रकार, 16 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर दर्ज की गई है। दुपहिया वाहनों की बिक्री में भी अब तेजी दिखाई दे रही है।

महानगरों एवं शहरी इलाकों में विकास, ग्रामीण इलाकों की तुलना में तेज गति से हो रहा है। सम्पन्न वर्ग एवं मिडल आय वर्ग के नागरिक जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग 35 प्रतिशत भाग हैं की आय में वृद्धि दर तुलनात्मक रूप से अधिक है। परंतु, अब शेष 65 प्रतिशत नागरिकों की आय में भी वृद्धि देखी जा रही है। इस सबका अच्छा असर अब रोजगार के अवसरों पर भी पड़ रहा है। शहरी इलाकों में तो रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं परंतु अब छोटे छोटे शहरों एवं ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार के नए अवसर निर्मित होने लगे हैं।

हाल ही के समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईटी क्षेत्र की कुछ कम्पनियों द्वारा की गई अपने कर्मचारियों की छंटनी के बाद भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हल्के काम, “गिग अर्थव्यवस्था”, करने वाले इंजिनीयरों की मांग में हाल ही के समय में 5 गुना वृद्धि दर्ज हुई है। भारत में भी कोरोना महामारी के तुरंत बाद कई भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनियों एवं स्टार्ट अप कम्पनियों ने जरूरत से अधिक कर्मचारियों की भर्ती कर ली थी। आवश्यकता से अधिक की गई भर्ती को अब इन कम्पनियों द्वारा तर्कसंगत बनाया जा रहा है। अतः कुछ कम्पनियों द्वारा कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। कोरोना महामारी के बाद से अभी तक इन क्षेत्रों में कई कर्मचारी अपने घरों से ही कार्य कर रहे थे परंतु अब चूंकि अर्थव्यवस्था पूरे तौर पर खुल चुकी है अतः अब कर्मचारियों को वापिस अपने कार्यालयों में लौटने को कहा गया है। इसके चलते अर्थव्यवस्था के कई अन्य क्षेत्र भी वापिस पटरी पर आ गए हैं एवं कम्पनियों के कुछ ख़र्चे बढ़ गए हैं तथा इन कम्पनियों की लाभप्रदता पर विपरीत प्रभाव पड़ता दिखाई दे रहा है। इन बढ़े हुए खर्चों के कारण भी कुछ कम्पनियां कर्मचारियों की छंटनी करने लगी हैं।

केंद्र सरकार द्वारा भारत के युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष भर्ती अभियान रोजगार मेलों से भी लाखों युवाओं को रोजगार मिल रहा है। इस योजना के अंतर्गत 10 लाख युवाओं को रोजगार प्रदान किया जाना है। देश में बेरोजगारी घट रही है, यह विभिन्न संस्थानों द्वारा जारी किए जा रहे प्रतिवेदनों में भी कहा जा रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार, भारत में जनवरी 2023 में बेरोजगारी की दर 7.14 प्रतिशत हो गई जो दिसंबर 2022 में 8.30 प्रतिशत थी। जनवरी 2023 में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 8.55 प्रतिशत थी जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 6.43 प्रतिशत थी। इसी प्रकार, राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा अक्टूबर-दिसंबर 2022 की तिमाही के लिए जारी आंकड़ों के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में बेरोजगारी दर पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 8.7 प्रतिशत से घटकर 7.2 प्रतिशत हो गई। इससे पहले अप्रैल-जून 2022 में यह दर 7.6 प्रतिशत और जनवरी-मार्च 2022 में 8.2 प्रतिशत थी।

दिसम्बर 2022 माह में 14.93 लाख कर्मचारियों ने कर्मचारी प्रॉविडेंट फण्ड संगठन (ईपीएफओ) की सदस्यता ग्रहण की है एवं 18 लाख कर्मचारियों ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई योजना) की सदस्यता ली है। इससे यह सिद्ध होता है कि भारत में अब औपचारिक क्षेत्र में रोजगार के अधिक अवसर निर्मित हो रहे हैं जिससे कर्मचारियों को बीमा एवं प्रॉविडेंट फण्ड जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं।

विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त भारतीय इंजिनीयरों की मांग अब विकसित देशों के अतिरिक्त अन्य देशों से भी बहुत बड़ी मात्रा में होने लगी है। रोजगार की दृष्टि से यह एक नया रास्ता भारतीय युवाओं के लिए हाल ही में खुला है क्योंकि अन्य देशों में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त इंजीजियरों की भारी कमी है।

प्रहलाद सबनानी

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