लेखक परिचय

अनिल अनूप

अनिल अनूप

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

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अनिल अनूप
भारतीय सिने जगत की सबसे रहस्यमई अदाकारा रेखा के जीवन के कई पन्नों को लोग पढ़ना चाहते थे। उनसे कई सवाल पूछना चाहते थे, लेकिन रेखा ने हर बार लोगों को अपनी वाकपटुता से चुप करवाया है। हर बार लोगों को अपने बारे में कुछ न बताने वाली रेखा अपने जीवन के उन बेहद दिलचस्प पन्नों पर से पर्दा उठाने वाली हैं। उनकी बहुचर्चित बॉयोग्राफी पूरी हो गई है। यासिर उस्मान द्वारा लिखी ‘रेखा : द अनटोल्ड स्टोरी’ में रेखा ने अपने सिंदूर से लेकर सेक्स और अपने पहले स्मूच के बारे में खुलकर बात की है।
बीसवीं सदी की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में से एक रेखा पर यासीर उस्मान ने एक किताब लिखी है, जिसका नाम है ‘रेखा : द अनटोल्ड स्टोरी’। इस किताब में न सिर्फ रेखा के फिल्मी करियर, बल्कि उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जिससे लोग अब तक अनजान थे। रेखा ने इस किताब में अपने पहले स्मूच से लेकर विनोद मेहरा के संग हुई शादी का वाकया तक बताया है।
इस किताब में रेखा ने अपने पहले ‘स्मूच’ का जिक्र किया है। स्मूच की इस घटना के बाद रेखा सकते में आ गई थीं। मज़ेदार बात तो यह है कि यह सब डायरेक्टर और एक्टर ने रेखा को तंग करने के लिए किया था। दरअसल, फिल्म ‘अनजाना सफर’ के डायरेक्टर राजा नवाठे और एक्टर बिस्वजीत ने मिलकर एक प्लान बनाया कि आज रेखा को परेशान किया जाएगा।
इस फिल्म की शूटिंग मुंबई के महबूब स्टूडियो में चल रही थी। शूटिंग से ठीक पहले सीन में क्या-क्या होना है, इस बारे में डिटेल में बातचीत होती है। डायरेक्टर और एक्टर की प्लानिंग से अनजान रेखा रोमांटिक गाने के शूट के लिए सेट पर पहुंची। फिर जैसे ही जैसे ही डायरेक्टर ने ‘एक्शन’ बोला बिस्वजीत ने रेखा को बाहों में भरकर ‘स्मूच’ करने लगे। रेखा शॉक्ड थीं। उन्हें इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया गया था।
कैमरा अभी भी रोल कर रहा था और डायरेक्टर ‘कट’ नहीं बोल रहा था। बिस्वजीत 5 मिनट तक रेखा को किस करते रहे। यूनिट के सभी सदस्य सीटियां बजा रहे थे और चीयर कर रहे थे। रेखा की आंखों में आंसू थे और उन्होंने कस कर उन्हें बंद कर रखा था। बाद में बिस्वजीत ने बताया कि यह राजा नवाठे का आइडिया था। राजा ने ही उन्हें रेखा को ‘स्मूच’ करने को कहा था।
इस सीन के बारे में रेखा को कोई जानकारी नहीं थी और बाद में जब रेखा ने इस चीज के लिए आवाज उठाने की सोची, तो किसी बुरे अंजाम के डर से उन्होंने चुप रहने का फैसला किया हालांकि, यह फिल्म दस सालों तक सेंसर में फंसी रही और आखिर में ‘दो शिकारी’ के नाम से रिलीज़ हुई।
किताब में रेखा ने ‘सेक्स’ के बारे में अपनी बेबाक राय रखी है। उनका कहना है कि आप किसी पुरुष के नज़दीक तब तक नहीं आ सकते, जब तक आप उससे अंतरंग नहीं होते। मेरी किस्मत अच्छी थी कि मैं कभी प्रेग्नेंट नहीं हुई।
किताब में लिखा है कि रेखा सेक्स को लेकर काफी खुले विचार की थीं। सेक्स को लेकर जो विचार उस वक्त रेखा रखती थीं, वे अब के युवाओं की सोच है। रेखा शादी से पहले सेक्स करना प्राकृतिक मानती थीं और कहती थीं कि जो लोग कहते हैं कि महिला को केवल सुहागरात पर ही सेक्स करना चाहिए वो बकवास है। रेखा सेक्स और अपने बॉयफ्रेंड के बारे में भी खुलकर बाते करती थीं।
रेखा और अभिनेता विनोद मेहरा की केमिस्ट्री और इनके रिश्ते को लेकर हमेशा बाते होती रही हैं, लेकिन रेखा ने हमेशा विनोद मेहरा को अपना सबसे अच्छा दोस्त ही कहा है। लेकिन इस किताब में जो रेखा ने बताया है, उससे साफ जाहिर होता है कि रेखा और विनोद न सिर्फ एक-दूसरे को चाहते थे, बल्कि उन्होंने शादी भी कर ली थी। इस शादी को विनोद की मां की रज़ामंदी न मिलने की सूरत में रेखा ने इस रिश्ते को वहीं छोड़ दिया।
रेखा की इस शादी का भी बड़ा दिलचस्प वाकया है। दरअसल, रेखा ने विनोद मेहरा से कोलकाता में शादी कर ली थी. शादी के बाद दोनों मुंबई लौटे, तो नई दुल्हन का स्वागत चप्पल से किया गया। रेखा की सास यानी विनोद मेहरा की मां कमला इस शादी को लेकर बेहद नाराज़ थीं और जैसे ही रेखा आशीर्वाद लेने के लिए झुकीं, तुरंत उनकी सास ने उन्हें थक्का दे दिया। उन्होंने अपना पारा खो दिया और रेखा को गालियां देना शुरू कर दिया।
विनोद ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन कमला बेहद गुस्से में थीं। उन्होंने अपनी चप्पल उतारी और लगभग रेखा को पीटने के लिए आमादा हो गईं। बेचारी रेखा इस सब के बाद स्तब्ध और हैरान थीं। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। घर के आस-पास भीड़ लग गई थी। रेखा की आंखों में आंसू थे और वह खुद को बचाने के लिए लिफ्ट की ओर भागीं। हालांकि विनोद वहीं रुके रहे और अपनी मां को शांत कराने की कोशिश करते रहे।
आज भी रेखा के माथे पर लाल चटख सिंदूर देखा जाता है, जबकि हिंदू मान्याता के अनुसार सिर्फ सुहागन स्त्रियां ही अपनी मांग पर सिंदूर लगा सकती हैं। ग़ौरतलब है कि रेखा के पति मुकेश अग्रवाल की मृत्यु तो साल 1991 में ही हो गई थी, लेकिन आज भी वो सिंदूर लगाती हैं और यह भी उनके जीवन से जुड़ा एक रहस्य है। लेकिन कम लोग ही जानते होंगे कि रेखा ने सिंदूर लगाना काफी पहले से ही शुरू कर दिया था। इस बात का खुलासा भी उन्होने अपनी किताब में किया है।
22 जनवरी 1980 को जब ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी का मौका था। नीतू, रेखा की अच्छी दोस्त थीं। आरके स्टूडियो को दुल्हन की तरह सजाया गया था। अमिताभ बच्चन उनकी पत्नी जया बच्चन और उनके माता पिता समेत बॉलीवुड की कई दिग्गज हस्तियां शादी में शरीक हुई थीं। अमिताभ मनमोहन देसाई से बात कर रहे थे और जया अपनी सास तेजी बच्चन के साथ बैठी हुई थीं। उसी वक्त रेखा ने सफेद साड़ी में एंट्री की, उन्होंने माथे पर बड़ी लाल बिंदी लगा रखी थी। लेकिन जिस चीज ने उन सभी का ध्यान खींचा वह था उनकी मांग में लगा लाल चटख सिंदूर।
सभी कैमरे ऋषि और नीतू से हटकर रेखा की ओर मुड़ गए। सभी यह जानना चाहते थे कि क्या रेखा ने शादी कर ली है। सिने ब्लिट्स की रिपोर्ट के मुताबिक रेखा ऋषि और नीतू को मुबारकबाद देने के बाद आर.के. स्टूडियो के बगीचे में जाकर खड़ी हो गईं, लेकिन उनकी आंखे लगातार अमिताभ को ताक रही थीं। थोड़ी हिम्मत जुटाने के बाद रेखा अपनी क्लोज फ्रेंड स्नेहलता पांडे के पास गईं, जो एक डॉक्टर थीं।
इसके कुछ देर बाद वह अमिताभ के पास जाकर खड़ी हो गईं। सभी नजरें अब इन दोनों पर थीं। वे दोनों कुछ देर तक सामान्य बातचीत करते रहे। स्टारडस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक वह कुछ देर तक तो धैर्यपूर्वक खड़ी रहीं और फिर उनकी आंखों से आंसू छलकने लगे।
हालांकि बाद में रेखा ने यह साफ किया कि उस दिन रेखा सीधे एक शूट से लौट रही थीं और उनके माथे पर लगा सिंदूर और गले में पड़ा मंगलसूत्र उनके मेकअप का हिस्सा था, जिसे वह हटाना भूल गई थीं। हालांकि, साल 1982 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक जब रेखा को ‘उमराव जान’ फिल्म के लिए नेशनल अवार्ड दिया जा रहा था, तब राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने उनसे ‘सिंदूर’ पर सवाल पूछ ही लिया। इस बात का जवाब देते हुए रेखा ने कहा कि जिस शहर से मैं आती हूं, वहां सिंदूर लगाना एक फैशन है।
फिल्मकार यश चोपड़ा की याद में हर साल एक हस्ती को ‘यश चोपड़ा मेमोरियल अवॉर्ड’ से नवाजा जाता है। इस बार यह अवॉर्ड अदाकारा रेखा को दिया गया। इस मौक़े पर रेखा ने सबका धन्यवाद दिया। सदाबहार अभिनेत्री रेखा ने यश चोपड़ा को याद करते हुए कहा, “यश जी के बारे में कहना” छोटी मुंह बड़ी बात ‘होगी। लेकिन एक बात जो उनके लिए मैं कहना चाहूंगी कि मुझे प्यार करना उन्होंने ही सिखाया।
“रेखा आगे कहती हैं कि उनकी फिल्मों को देख कर मुझे प्रेम का अहसास हुआ। यह सिर्फ एक अहसास है, जो सभी के भीतर अदृश्य रूप से रहती है। सभी इस भावना को महसूस करते हैं। वे बताती हैं कि उनके भीतर छिपे ‘शायरी’ के हुनर ​​को भी तराशने वाले यश चोपड़ा ही थे। रेखा कहती हैं कि शायरी करने के लिए यश जी ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया।
खुद को यश चोपड़ा की कुछ खास फिल्मों का हिस्सा होने पर खुशी जताते हुए कहती हैं, “मैं सौभाग्यशाली रही कि उनकी कुछ चुनिंदा फिल्मों का हिस्सा बनीं।” इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा, “इस अवॉर्ड को पाने का मतलब यह है कि पर्दा अभी गिरा नहीं है। यह मेरी ज़िंदगी का सबसे बढ़िया दौर है और तो काफी कुछ करना बाक़ी है। “वो आगे कहती हैं कि मेरा बेहतरीन परफॉर्मेंस अभी आने को है। यह तो सिर्फ शुरुआत भर ही है।
आपको बता दें कि अब यह अवॉर्ड ये अवार्ड यश चोपड़ा की याद में दिया जाता है। यश चोपड़ा का निधन 2012 में हो गया था। इस अवॉर्ड को हर साल हिन्दी सिनेमा जगत में विशेष योगदान के लिए एक हस्ती को दिया जाता है।
इस बार साल 2015 का यह अवॉर्ड रेखा को दिखा गया। इससे पहले अब तक इस अवॉर्ड से लता मंगेशकर और अमिताभ बच्चन सम्मानित हो चुके हैं। अवॉर्ड में गोल्ड मेडेल के साथ दस लाख का नकद ईनाम दिया जाता है।
अवॉर्ड किस हस्ती को दिया जाए, इसका निर्णय एक जूरी द्वारा तय किया जाता है। इस बार जूरी सदस्यों में पामेला चोपड़ा, सिमी ग्रेवाल, बोनी कपूर, श्रीदेवी, जया प्रदा, पिंकी रेड्डी आदि शामिल थे।
इस अवॉर्ड समारोह में रणवीर सिंह, डेविड धवन, पूनम डिल्लन, जया पर्दा, अदनान सामी, मोहन बाबू, गुलशन ग्रोवर मौजूद थे।

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