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    Homeसाहित्‍यपुस्तक समीक्षा“गंदगी के महारथी” बदल सकती है आपकी कई बुरी आदतें

    “गंदगी के महारथी” बदल सकती है आपकी कई बुरी आदतें

    समीक्षक – हरीश चन्द्र बर्णवाल

    बहुत दिनों के बाद एक अच्छी पुस्तक पढ़ने का मौका मिला है। इस पुस्तक का नाम है “गंदगी के महारथी” और इसे लिखा है एबीपी न्यूज के पत्रकार साथी मनीष शर्मा जी ने।ऐसा बहुत कम होता है कि कोई टीवी पत्रकार बहुत अच्छी पुस्तक भी लिखे। टीवी पत्रकारों की विशेषज्ञता ये होती है कि छोटी खबरों को किस प्रकार बड़ा बनाकर तान दें यानि तिल का ताड़ बना दें।

    जब मनीष जी ने ये पुस्तक भेंट की तो कुछ इसी प्रकार की गलतफहमी में थे, शुरुआती मौके पर ही मैंने पहली कहानी पढ़ ली थी औऱ मुझे एहसास हुआ कि ये पुस्तक एकदम हटकर है।पुस्तक स्वच्छता को लेकर है। प्रधानमंत्री मोदी जिस अभियान को लेकर समाज को बदलने का प्रयत्न कर रहे हैं, उसे इस किताब से बहुत बड़ा बल मिला है। आप ये समझ लीजिए कि ये पुस्तक आपके सामने गंदगी का बिंब खड़ा करता है और आप उसमें एक विलेन के तौर पर नजर आते हैं।

    सामान्य तौर पर कुछ आदर्शपरक बातों को कहने के लिए जो भी विधा अपनाई जाए, वो बोरिंग हो जाती है… लेकिन मनीष भाई ने जिस अंदाज में आदर्शपरक बातें समाज के सामने रखी हैं… वो न सिर्फ दिलचस्प है, बल्कि समाज को आइना दिखाने वाला है। इस कहानी को पढ़ने के बाद आपको खुद पर शर्म आ सकती है, हो सकता है आप अपनी कई आदतों को बदलने का जतन करें।मैं चाहता था कि पूरी पुस्तक पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दूं, लेकिन तीन कहानियां पढ़ने के बाद ही अगर आज कोई मुझसे कहे तो इस पर बीसियों पन्ने लिख सकता हूं।

    पहली कहानी पिंटुआ की हस्तऱेखा है जो हाथ न धोने की गंदी आदतों पर आधारित है। इसमें आंचलिक भाषा का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है। इस कहानी में हमारी कुछ अंधविश्वास जैसी हरकतों पर भी चोट करने की कोशिश की गई है।

    दूसरी कहानी पकौड़ा पार्टी है, इस कहानी में जिस प्रकार सिमरन के ऑफिस से घर पहुंचने और किचन में कॉकरोच के साथ बातचीत का बिंब तैयार किया गया है, वो बिना क्रिएटिविटी के आप कर ही नहीं सकते। सिर्फ कॉकरोच पर आधारित इससे बेहतरीन कहानी नहीं हो सकती।

    तीसरी कहानी अजय तिवारी फॉरेन रिटर्न है। इस कहानी में अजय तिवारी जिस प्रकार अमेरिका से वापस लौटने के बाद वहां की संस्कृति और सभ्यता न थूकने देने की वजह से गाली देते हैं और भारत को सिर्फ थूकने की वजह से महान बता देते हैं, वो अपने आप में अदभुत है।

    इन कहानियों की सबसे बड़ी विशिष्टता ये है कि कहानी खत्म होने के बाद हर कहानी में तथ्यों के साथ मैसेज भी दिया गया है। मसलन अजय तिवारी वाली कहानी में ही मनीष जी ने ये सब बताया है कि दुनिया के बाकी देशों में थूकने पर कितने का जुर्माना देना पड़ता है। जाहिर तौर पर ये कहानी आपको बीच में नहीं छोड़ती है। बल्कि आपको आपकी गलतियों का एहसास कराने के बाद सुधरने का आग्रह करती है और फिर ये भी हिदायत देती है कि ऐसा करके आप कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

    बस ये समझ लीजिए कि मनीष शर्मा जी की इन कहानियों ने मोदी जी के स्वच्छता अभियान को परवान चढ़ाया है। एक लेखक के तौर पर मनीष भाई स्वच्छता अभियान के ब्रांड एंबेसडर जैसे बन गए हैं।

    हरीश चन्द्र बर्णवाल
    हरीश चन्द्र बर्णवाल
    पश्चिम बंगाल में आसनसोल के पास नियामतपुर में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक (टॉपर) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया से टेलीविजन पत्रकारिता में स्नातकोत्तर। गुरु जामवेश्वर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री। मानव अधिकार में पीजी डिप्लोमा। हरीश चंद्र बर्णवाल पिछले 15 सालों से टेलीविजन पत्रकारिता से जुड़े हैं। IBN7 से पहले स्टार न्यूज, जी न्यूज, DD न्यूज में काम करने का अनुभव। इस समय ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन में वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं। साथ ही मीडिया एनालिस्ट के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आप कई किताबों के लेखक भी हैं ।

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